4 hours ago
बाबा ने उसके कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया, “अब असली शृंगार बाकी है…”
“मैंने तुम्हारे लिए खास जड़ी-बूटियों का तेल बनाया है। इससे तुम्हारी त्वचा रेशम जैसी मुलायम और चमकदार हो जाएगी।” मैत्री रचित कहानी।
पूजा ‘बदन’ शब्द सुनकर और शरमा गई।
बाबा: “अब घुटनों के बल खड़ी हो जाओ पूजा।”
पूजा घुटनों के बल बैठ गई। बाबा भी उसके पीछे घुटनों के बल आ गए। अब बाबा का शरीर पूजा के बिल्कुल पीछे था।
बाबा ने तेल अपनी हथेलियों पर लिया और पहले पूजा के पेट पर लगाना शुरू किया। लंबे-लंबे हाथ फेरते हुए उन्होंने पूजा की कमर, पीठ और नाभि पर तेल मलना शुरू कर दिया।
“पूजा… तुम्हारा बदन तो रेशम है। इतना चिकना, इतना लचीला… हाथ फेरने में मजा आ रहा है।”
बाबा धीरे-धीरे और पीछे सरक आए। अब उनका खड़ा लंड पूजा की नितंबों को हल्का-हल्का छू रहा था।
उन्होंने अपनी उँगली पूजा की नाभि में घुमानी शुरू कर दी और कान में फुसफुसाया, “तुम्हारी यह धुन्नी कितनी गहरी और चिकनी है… अगर कामदेव ने इसे देख लिया तो सीधा अपनी जीभ डालकर चूसने लगेगा… चाटता रहेगा घंटों तक।”
पूजा के शरीर में करंट-सा दौड़ गया। वह अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी।
बाबा की उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर उठीं और तीन-चार बार उसके ब्लाउज के अंदर घुसकर स्तनों के नीचे के नरम हिस्से को छू गईं।
पूजा की साँसें पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। रचयिता मैत्री पटेल है।
बाबा ने उसके कान में धीरे से कहा, “पूजा… अब शृंगार का आखिरी और सबसे खास चरण बाकी है… कुछ विशेष आसन। लेकिन ये आसन तुम्हें मेरे साथ लेने होंगे। हो सकता है… तुम्हें इसमें बहुत लज्जा आए।”
कहानी जारी रहेगी।
जुड़े रहिये दोस्तों.
Maitri.
“मैंने तुम्हारे लिए खास जड़ी-बूटियों का तेल बनाया है। इससे तुम्हारी त्वचा रेशम जैसी मुलायम और चमकदार हो जाएगी।” मैत्री रचित कहानी।
पूजा ‘बदन’ शब्द सुनकर और शरमा गई।
बाबा: “अब घुटनों के बल खड़ी हो जाओ पूजा।”
पूजा घुटनों के बल बैठ गई। बाबा भी उसके पीछे घुटनों के बल आ गए। अब बाबा का शरीर पूजा के बिल्कुल पीछे था।
बाबा ने तेल अपनी हथेलियों पर लिया और पहले पूजा के पेट पर लगाना शुरू किया। लंबे-लंबे हाथ फेरते हुए उन्होंने पूजा की कमर, पीठ और नाभि पर तेल मलना शुरू कर दिया।
“पूजा… तुम्हारा बदन तो रेशम है। इतना चिकना, इतना लचीला… हाथ फेरने में मजा आ रहा है।”
बाबा धीरे-धीरे और पीछे सरक आए। अब उनका खड़ा लंड पूजा की नितंबों को हल्का-हल्का छू रहा था।
उन्होंने अपनी उँगली पूजा की नाभि में घुमानी शुरू कर दी और कान में फुसफुसाया, “तुम्हारी यह धुन्नी कितनी गहरी और चिकनी है… अगर कामदेव ने इसे देख लिया तो सीधा अपनी जीभ डालकर चूसने लगेगा… चाटता रहेगा घंटों तक।”
पूजा के शरीर में करंट-सा दौड़ गया। वह अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी।
बाबा की उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर उठीं और तीन-चार बार उसके ब्लाउज के अंदर घुसकर स्तनों के नीचे के नरम हिस्से को छू गईं।
पूजा की साँसें पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। रचयिता मैत्री पटेल है।
बाबा ने उसके कान में धीरे से कहा, “पूजा… अब शृंगार का आखिरी और सबसे खास चरण बाकी है… कुछ विशेष आसन। लेकिन ये आसन तुम्हें मेरे साथ लेने होंगे। हो सकता है… तुम्हें इसमें बहुत लज्जा आए।”
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