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Adultery Adventure of sam and neha
मैं नेहा को देख रहा था।

कभी-कभी गुप्ता जी को।

दोनों ऐसे नहीं लग रहे थे जैसे कोई मजाक चल रहा हो। सब कुछ बहुत रियल और गंभीर था।

तभी गुप्ता जी ने एक उँगली मेरी तरफ़ उठाई।

इशारा था — पास आने का।

मैं कुछ कदम दूर से ही सब देख रहा था।

इशारे पर मैं उनके पास चला गया।

लेकिन मेरा मकसद दूसरा था।

मैं नेहा के पास जाना चाहता था।

उससे कुछ पूछना चाहता था।

मेरे दिमाग में बार-बार यही घूम रहा था — ये सब क्या हो रहा है?

जब मैं पास पहुँचा, नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।

उसकी आँखों में नशा, शर्म और एक गहरी उलझन थी।

इतने समय से सब कुछ इतना तेज़ चल रहा था कि मेरा ध्यान नहीं गया था।

जब मैं पास पहुँचा, तब जाकर साफ़ दिखा —

गुप्ता जी का हाथ नेहा की पैंटी के अंदर चला गया था।

उनकी उँगलियों की हरकत से साफ़ लग रहा था कि वो नेहा की चूत का छेद ढूँढ रहे हैं, अंदर घुसने की कोशिश कर रहे हैं।

मैंने नेहा के कान में बहुत धीरे से, लेकिन गुप्ता जी के चेहरे के बिल्कुल पास फुसफुसाया,

सम: “तुम ये सच में देखना चाहती हो?”

नेहा ने मेरी आँखों में देखा और बहुत धीमी, लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,

नेहा: “मैं देखना चाहती हूँ...

मगर ये तुम्हारी चॉइस है सम...

तुम ये सब करने चाहते हो या नहीं?”

उसके जवाब ने मुझे हिला दिया।

वो सच कह रही थी।

मैं बंधा हुआ नहीं था... कुछ भी करने के लिए।

न गुप्ता जी की बात मानने के लिए, न ये जो हो रहा है उसे देखने के लिए।

मैं चाहता तो ये सब रोक सकता था।


अगर मैं ये भी चाहूँ कि नेहा अपनी मर्ज़ी से जो चाहे कर सके...

फिर भी मैं बंधा नहीं था वो सब देखने के लिए।

फिर मैं क्यों खड़ा हूँ यहाँ?

नेहा ने एक ही पल में सब बदल दिया था।

वो चाहती थी कि मैं निर्णय लूँ।

नेहा की आँखों में देख रहा था।

उसकी आँखें नशे, उत्तेजना और एक सवाल से भरी हुई थीं।

गुप्ता जी की उँगली अभी भी उसकी चूत के अंदर हल्की-हल्की हिल रही थी।

मैंने गहरी साँस ली।

मेरा गला सूख गया था।

सम: (बहुत धीमी आवाज़ में)

“...जो तुम चाहती हो... वो करो।”

इतनी देर से गुप्ता जी मुझे गालियाँ दे रहे थे — कutta, भेन का लौड़ा, मादरचोद...

लेकिन उन गालियों ने मुझे उतना नहीं चुभाया, जितना नेहा का वो एक वाक्य चुभ गया।

“ये तुम्हारी चॉइस है सम... तुम ये सब करना चाहते हो या नहीं?”

ये वाक्य मेरे सीने में चुभ गया।

शायद मुझे ये न पूछना चाहिए था।

मैं ये सोच सकता था कि मैं सिर्फ़ एक दर्शक हूँ, जो सब कुछ होते हुए देख रहा है।

लेकिन अब... आगे जो होने वाला है या नहीं होने वाला है, उसमें मेरी मर्ज़ी शामिल हो गई है।


शराब ने सोचने की शक्ति आधी कर दी थी।

अब ये मेरे ऊपर है —

कि मेरी बीवी की ऊपर-नीचे चलती साँसें, जो किसी दूसरे आदमी के हाथ उसकी चड्डी के अंदर चूत से खेलने की हर हरकत से हो रही हैं...

मैं वो साँसें थामना चाहता हूँ या और उत्तेजित होते देखना चाहता हूँ।

क्या मैं उसे रोकूँ?

क्या मैं देखूँ... एक आदमी को... मेरे घर की इज्जत के साथ... खेलते हुए... घर के हर कोने में?

क्या मैं यहाँ से चला जाऊँ अपने रूम में... फिर चाहे वो आदमी उसे रंडी-कुतिया की तरह चोदे या हाई क्लास माशूका समझकर?

सब मुझ पर था।


मैं ये सब सोच ही रहा था कि गुप्ता जी ने भारी आवाज़ में ऑर्डर देते हुए कहा,

गुप्ता जी: “कुत्ता... बैठ जा ज़मीन पर... घुटनों के बल...

हम दोनों के सामने। Now.”

ये वो पल था, जब मुझे तय करना था।

मुझे क्या करना है।


मेरा दिमाग कुछ सोच पाता, उससे पहले ही मेरे घुटने मुड़ने शुरू हो गए।

जैसे मेरा शरीर मेरे दिमाग को बायपास कर चुका हो।

नेहा ने मेरी आँखों में देखा।

उसकी नज़र में एक गहरी, तीखी जिज्ञासा थी — जैसे वो मेरे अंदर की हर लड़ाई को देख रही हो।

और मैं...

धीरे-धीरे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया।

अब मैं उनके ठीक सामने था।

गुप्ता जी और नेहा दोनों के सामने।

घुटनों पर।

सिर थोड़ा झुका हुआ।

गुप्ता जी ज़ोर से हँसे। उनकी हँसी कमरे में गूँज गई।

गुप्ता जी को भी अंदाज़ा नहीं था कि मैं ये कर जाऊँगा।

वे लड़खड़ाते पैरों से मुझे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठते हुए देख रहे थे।

धीरे-धीरे उनके चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई — घिनौनी, विजयी मुस्कान।

नेहा दर्शक की तरह मुझे देख रही थी।

उसकी आँखें मेरे चेहरे पर टिकी हुई थीं।

गुप्ता जी ने मुझे और ऑर्डर दिए,

गुप्ता जी: “कुत्ता... सिर और नीचे झुका...

देख... तेरी बीवी मेरे सामने खड़ी है...

अब बोल... ‘थैंक यू अंकल’...”

मैंने सिर और नीचे झुकाकर कहा,

सम: “थैंक यू अंकल...”

गुप्ता जी ने नेहा की तरफ़ देखा और पूछा,

गुप्ता जी नेहा से बार-बार कुछ कहलवा रहे थे।

गुप्ता जी: “बोल... बोल ना रंडी... अगला ऑर्डर मैं तेरे पति को क्या दूँ...

बोल... क्या करवाऊँ इस कुत्ते से.

नेहा चुपचाप देख रही थी।

उसका चेहरा साफ़ और सीधा था।

न कोई मुस्कान, न कोई गुस्सा।

बस आँखों में गहरी, भारी कामुकता थी।

गुप्ता जी का हाथ अभी भी उसकी पैंटी के अंदर था।

कभी-कभी ऐसा लगता था कि एक से ज़्यादा उँगलियाँ अंदर घुसी हुई हैं — मेरी बीवी की चूत का तापमान जाँच रही हैं, अंदर की गर्मी और नमी को महसूस कर रही हैं।

नेहा बस हल्की-हल्की “आह...” करती, कुछ ज़्यादा नहीं बोलती।

उसकी साँसें भारी थीं, शरीर हल्का-हल्का काँप रहा था।

वो बार-बार मेरी तरफ़ देख रही थी — बिना किसी भाव के, सिर्फ़ गहरी नज़र से।

नेहा की आँखें और साँसें धीरे-धीरे और गहरी होती जा रही थीं।

गुप्ता जी का हाथ अभी भी उसकी पैंटी के अंदर था।
पैंटी के बाहर से ही साफ़ दिख रहा था कि उनकी उँगलियाँ अंदर-बाहर हो रही हैं — तेज़ी से, लगातार।

मैं घुटनों के बल बैठा सब देख रहा था।

फिर एकदम से गुप्ता जी ने कहा,

गुप्ता जी: “चल कुत्ते... मेरे पैरों को चाट...”

उनके पैरों में एक पारंपरिक चप्पल थी, जो कुर्ते के नीचे पहनी हुई थी।

उन्होंने एक पैर को झटका दिया — चप्पल उड़कर थोड़ी दूर चली गई।

फिर उन्होंने पैर हिलाकर मुझे दिखाया, जैसे कह रहे हों — “ये वाला चाटना है।”

मुझे लगा कि ये थोड़ा ज़्यादा हो रहा है।

मैंने कोई हरकत नहीं की।

मैं कभी गुप्ता जी को देख रहा था, कभी नेहा को।

मुझे लगा नेहा कुछ कहेगी।

लेकिन नेहा के मुँह से बस “आह्ह... आह्ह...” की सिसकारियाँ निकल रही थीं।

मेरे कुछ न करने पर शायद उन्हें गुस्सा आ गया।

उन्होंने नेहा की चूत में अचानक कुछ ऐसा किया कि नेहा के मुँह से ज़ोर से “आह्ह्ह्ह!” निकल गई।

उनका हाथ अब तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगा।

नेहा के मुँह से लगातार “आह्ह... आह्ह्ह... आआह्ह्ह...” निकलने लगी।

उसका पूरा शरीर काँप रहा था।

फिर गुप्ता जी ने अपना दूसरा हाथ बढ़ाकर मेरे बालों को जोर से पकड़ लिया।

गुप्ता जी ने नेहा की चूत में उँगलियाँ हिलाते हुए मुझे घूरा और बोले,

गुप्ता जी: “क्यों... तुम्हें संकोच हो रहा है मादरचोद?

तुझे तो ये पसंद है ना?

यहीं से तो सब शुरू हुआ था...

भूल गया?

तुझे दरवाज़े पर देखा था...

इस रंडी के जूतों को चाटते हुए... (Chapter 3 at Start)

तब तो कोई शर्म नहीं थी...”

ये बोलते हुए उनकी उँगलियाँ नेहा की चूत में और तेज़ हो गईं।

नेहा शायद झड़ने की कगार पर थी।

उसका चेहरा लाल, आँखें आधी बंद, होंठ खुले हुए।

मैंने उसका चेहरा देखा।

उसने मेरी आँखों में देखा — जैसे पूछ रही हो, “क्या करोगे अब?”

नेहा के झड़ने की करीब की आवाज़ मेरे कानों में संगीत का काम कर रही थी।

एक motivation की तरह।

मैंने गुप्ता जी के पैरों को घुटनों के नीचे से दोनों हाथों से लपेट लिया।

और अपना सिर धीरे-धीरे नीचे ले जाने लगा।

मैं वो करने जा रहा था, जिसे करने का मेरा मन नहीं था।

फिर भी... अपनी हवस... या नेहा की खुशी...

पता नहीं।

अभी इतना दिमाग नहीं चल रहा था।

मैं उनके पैरों के पास पहुँच ही रहा था कि मुझे अपने कंधे पर एक पैर महसूस हुआ।

नेहा का पैर।

मैंने नेहा की तरफ़ गर्दन उठाकर देखा।

उसके पैर और खुल चुके थे।

गुप्ता जी की उँगलियाँ अब और अंदर जा सकती थीं।

फिर एक ज़ोरदार धक्का।

नेहा ने ज़ोर लगाकर मुझे वहाँ से अलग कर दिया।

उस धक्के से मैं गुप्ता जी के पैरों से काफी दूर चला गया और ज़मीन पर गिर गया।

मैं पीछे की तरफ़ गिरा।

ज़मीन पर गिरने के बाद 5 सेकंड तक मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि ये क्या हुआ।

सब कुछ धुंधला-सा था।

फिर मेरे कानों में पड़ी एक गंदी, घिनौनी हँसी — गुप्ता जी की।

वे हँस रहे थे, जैसे उन्हें बहुत मज़ा आया हो कि नेहा ने मुझे पैर से धक्का मारकर अलग कर दिया।

गुप्ता जी: (ज़ोर से हँसते हुए)

“बहुत सही... साली रंडी...

ऐसे ही करना चाहिए इस चूतिए के साथ...”

नेहा ने हल्की सी मुस्कान दी।

शायद वो मुस्कान मुझे अपमान से बचाने के लिए थी।

उसकी आँखों में अब एक अलग तरह की चमक थी — जैसे वो कह रही हो, “अभी नहीं...”

गुप्ता जी का हाथ तेज़ी से नेहा की चूत के अंदर-बाहर हो रहा था।

नेहा ने उनकी हँसी दबाने के लिए एक हाथ से उनके सिर को पकड़कर अपने सीने से चिपका लिया।

उसके भारी स्तन गुप्ता जी की छाती से पूरी तरह दब गए।

उसके होंठ गुप्ता जी के होंठों से चिपक गए।

गुप्ता जी का हाथ नहीं रुका।

वे नेहा की चूत में उँगलियाँ और तेज़ी से चला रहे थे।

नेहा की आँखें आधी बंद थीं, लेकिन उसके होंठ गुप्ता जी के मुँह में थे।

उसकी टाँगें और चौड़ी हो गईं।

पैंटी अब रोल होकर उसकी जाँघों तक चली गई थी।

गुप्ता जी भी उसे नीचे कर रहे थे।

एक ज़ोरदार किस के बीच नेहा की पैंटी पूरी तरह जाँघों तक उतर गई।

अब मेरे सामने नेहा लगभग नंगी खड़ी थी — बस पैंटी उसके जाँघों पर लटक रही थी, जिसका कोई मतलब नहीं रह गया था।

उसकी खुली टाँगें...

गुप्ता जी की खुरदुरी उँगलियाँ उसके अंदर-बाहर होती दिख रही थीं।

फिर हल्का-हल्का पानी रिसने लगा।

नेहा झड़ रही थी।

गुप्ता जी की उँगलियों पर उसका रस चमक रहा था।

उसकी जाँघों पर रस बह रहा था।

नेहा का पूरा शरीर झुरझुरी से भर गया था।

सब कुछ मेरे सामने था।

गुप्ता जी ने नेहा के होंठों को तब तक नहीं छोड़ा, जब तक वो पूरी तरह झड़ नहीं गई।

नेहा की आखिरी “आह्ह्ह...” को उन्होंने अपने मुँह में महसूस किया।

नेहा ने भी पूरी बहूबी से साथ दिया।

किस शुरू में बहुत तेज़ और गहरा था — जैसे दोनों एक-दूसरे को निगल जाना चाहते हों।

धीरे-धीरे वो हल्का होता गया... बहुत धीरे... और आखिरकार ख़त्म हो गया।

ऐसा लगा जैसे अब किसी को भी किसी के होंठ छूने का मन नहीं हो रहा था।

फिर उनके होंठ अलग हुए।

लेकिन शरीर अभी भी चिपके हुए थे।

गुप्ता जी का शरीर नेहा के थूक से भीगा हुआ था।

नेहा का शरीर गुप्ता जी के थूक से सना हुआ था।

दोनों के नंगे शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे।

मुझे लगा कि उनके नंगे निप्पल एक-दूसरे को महसूस कर रहे होंगे — गर्मी, नमी और सख्ती सब कुछ।

नेहा की साँसें अभी भी बहुत तेज़ थीं।

उसका पूरा शरीर हल्का-हल्का काँप रहा था।

गुप्ता जी की उँगलियाँ अभी भी उसकी चूत के अंदर थीं, धीरे-धीरे हिल रही थीं, जैसे झड़ने के बाद की नमी को महसूस कर रहे हों।

दोनों का चेहरा एक-दूसरे के सामने था।

गुप्ता जी नेहा के चेहरे को घूर रहे थे।

नेहा की आँखें अभी भी बंद थीं।

फिर धीरे-धीरे उसने अपनी नशीली आँखें खोलीं।

सामने गुप्ता जी की आँखें थीं।

उसने उन आँखों को घूरा।

वो शर्माई नहीं।

नेहा ने अपना एक भौं उठाकर हल्का सा इशारा किया — जैसे पूछ रही हो, “कैसा था?”

गुप्ता जी मुस्कुराए।

नेहा ने भी मुस्कुरा दी।

फिर उसने एक आँख मारकर अपना इज़हार किया।

फिर दोनों मुस्कुराए।

एक गहरी, समझदार, नशीली मुस्कान।

जैसे दोनों के बीच कोई गुप्त समझौता हो गया हो।

गुप्ता जी ने थोड़ा ज़ोर लगाकर खुद को नेहा से अलग किया।

वे २-३ कदम पीछे हट गए, जैसे पूरा नज़ारा बेहतर तरीके से देखना चाहते हों।

फिर उन्होंने नेहा को ऊपर से नीचे तक घूरा।

नेहा लगभग नंगी खड़ी थी — सिर्फ़ एक पैंटी, जो उसकी जाँघों तक रोल होकर लटक रही थी।

उसके स्तन, गोल नाभि, मोटी जाँघें और पूरी चूत सब साफ़ दिख रही थी।

गुप्ता जी की आँखें चौड़ी हो गई थीं।

मुझे नहीं लगता कि उन्होंने इस उम्र में इतनी खूबसूरत, जवां और नंगी लड़की कभी देखी होगी।

उनके चेहरे पर लालच, हैरानी और एक तरह की लॉटरी वाली खुशी थी।

मैं ज़मीन पर घुटनों के बल बैठा-बैठा ये सब देख रहा था।

एक हवस भरे बूढ़े को, जो मेरी जवां बीवी को इस तरह नंगा घूर रहा था।

नेहा और गुप्ता जी की नज़रें मिली हुई थीं।

नेहा के चेहरे पर कोई शर्म नहीं थी।

न झिझक, न घबराहट।

बस एक शांत, नशीली, आत्मविश्वास भरी मुस्कान।

जैसे वो जानती हो कि इस वक्त वो कितनी खूबसूरत और powerful दिख रही है।

गुप्ता जी ने एक उँगली उठाई और हवा में गोल घुमाया।

नेहा की तरफ़ देखते हुए एक साफ़ इशारा किया — घूमने का।

नेहा जैसे किसी सम्मोहन में थी।

उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आई।

बिना किसी हिचकिचाहट के, बहुत नशीली और आकर्षक अदा से उसने अपनी जगह पर घूमना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे...

एक पूरा चक्कर।

उसके स्तन हल्के-हल्के लहरा रहे थे।

हर घुमाव के साथ उसकी मोटी जाँघें और गोल गांड़ हिल रही थी।

गुप्ता जी उसे घूर रहे थे।

उनकी आँखें नेहा के नंगे शरीर पर ऊपर से नीचे तक घूम रही थीं।

नेहा का पूरा शरीर शराब, पसीने, गुप्ता जी के थूक और अपनी चूत के रस से भीगा हुआ था।

कमरे की डिम लाइट में भी उसकी त्वचा चमक रही थी — जैसे कोई चिकना, गीला, हॉट मूर्ति हो।

उसकी छातियाँ, पेट, नाभि, जाँघें — हर जगह चमकदार नमी थी।

नेहा गुप्ता जी के हर हुकुम को ऐसे मान रही थी, जैसे वो एक गुड़िया हो और किसी ने उसमें चाबी भर दी हो।

गुप्ता जी ने फिर उँगली घुमाई।

नेहा बिना किसी हिचक के घूमने लगी — धीरे-धीरे, अपनी जगह पर।

गुप्ता जी दूसरा हाथ अपनी पाजामा रखकर में अपना लंड मसल रहे थे।

उनके शरीर पर अब सिर्फ़ एक पाजामा बचा हुआ था।

नेहा लगातार घूम रही थी।

3-4 चक्कर लग चुके थे।

ऐसा लग रहा था जैसे गुप्ता जी हर तरफ़ से नेहा को चेक कर रहे हों — माल खरीदने से पहले माल की जाँच।

मैंने वीडियो में देखा था थाईलैंड के रेड लाइट एरिया में ऐसे ही होता है।

जब नेहा की पीठ गुप्ता जी की तरफ़ थी, तब उन्होंने अचानक कहा,

गुप्ता जी: “रुक जा... ऐसे ही...”

नेहा तुरंत रुक गई।

उसकी पीठ गुप्ता जी की तरफ़ थी।

गांड़ थोड़ी ऊपर उठी हुई, जाँघें थोड़ी फैली हुईं।

नेहा की पतली कमर और उसके ऊपर वो परफेक्ट, गोल, मोटी गांड़...

हर हल्के से हिलने पर वो लहरा रही थी।

गुप्ता जी ने पीछे से उसे देखा।

उनकी नज़रें नेहा की नंगी गांड़ पर जमी हुई थीं।

वे कुछ पल तक उसे घूरते रहे, फिर अपनी जीभ से होंठ चाटे।

गुप्ता जी: (भारी आवाज़ में)

“चल... थोड़ा झुक जा...

हाथ स्लैब पर...”

नेहा समझ रही थी कि वो क्या करना चाह रहे हैं।

उसने बिना कुछ कहे, हल्का सा झुक गई।

दोनों हाथ स्लैब पर टिका दिए।

उसकी गांड़ अब और बाहर निकल आई थी — पूरी तरह नंगी, चमकती हुई।

गुप्ता जी ने दो कदम आगे बढ़े।

और फिर...

चटाक!

एक ज़ोरदार थप्पड़ नेहा की गांड़ पर पड़ा।

नेहा के मुँह से “आह्ह्ह!” निकल गई।

उसकी पूरी गांड़ हिल गई।

गुप्ता जी का हाथ का निशान साफ़ दिख रहा था — लाल, ताज़ा, पाँच उँगलियों वाला।

गुप्ता जी ने नेहा की गांड़ को देखा और संतुष्ट मुस्कान दी।

नेहा का शरीर झनझना गया।

उसकी जाँघें काँप रही थीं।

लेकिन वो झुकी हुई ही रही, गांड़ और बाहर निकालकर।

ये वो थप्पड़ नहीं था जो मैं अपने छोटे, मुलायम हाथों से मारता था।

ये तेज़, भारी और कड़क था।

मैंने देखा — नेहा की मोटी गांड़ थोड़ी देर तक थरथराते हुए झूल रही थी।

लाल निशान साफ़ उभर आया था।

मेरा लंड पैंट के अंदर ज़ोर का झटका लेकर और सख्त हो गया।

दर्द होने लगा था।

फिर भी मुझे लगा नेहा को बहुत दर्द हुआ होगा।

मैं गुस्से में बोल पड़ा,

सम: “ओये... ये क्या कर रहा है भेंचोद?!”

गुप्ता जी मेरी तरफ़ मुड़े। उनकी आँखें नशे और गुस्से से लाल थीं।

गुप्ता जी: (सख्ती से, घूरते हुए)

“श्श्श्श... भेन के लोड़े...

तुझसे किसी ने बात की यहाँ?

चुपचाप बैठ...”

फिर उन्होंने नेहा की तरफ़ देखा और मीठी आवाज़ में बोले,

गुप्ता जी: “ये मेरी और मेरी बेटी की बीच की बात है... है ना बेटी?”

नेहा ने गर्दन घुमाकर मेरी तरफ़ देखा।

उसकी आँखें नम थीं, लेकिन उसमें उत्तेजना भी थी।

उसने मेरी तरफ़ देखते हुए हल्का सा सिर हिलाया।

हाँ।

मैं ज़मीन पर घुटनों के बल बैठा था।

मेरा गुस्सा, जलन, उत्तेजना — सब एक साथ उबाल खा रहे थे।

लेकिन नेहा का वो “हाँ”... वो मुझे और भी चुप कर गया।

गुप्ता जी ने नेहा की गांड़ पर हाथ फेरते हुए पूछा,

गुप्ता जी: “तुझे लगी क्या बेटी?”

नेहा ने हल्का सा सिर हिलाया। हाँ।

गुप्ता जी: (मुस्कुराते हुए)

“अच्छा... लगी तुझे?

तो बता... और चाहिए तुझे??

बता अपने पति को...”

नेहा ने कुछ पल सोचा।

फिर मेरी तरफ़ देखा।

उसकी नज़र में नशा, शर्म और एक गहरी इच्छा थी।

फिर उसने धीरे-धीरे हाँ में सिर हिला दिया।

उसे और चाहिए था।

ये कोई हैरानी की बात नहीं लगी मुझे।

आज जो भी हो रहा था रात भर से, ये तो नेहा की छोटी हरकत थी।

गुप्ता जी: “Good girl...”

उन्होंने नेहा की गांड़ पर जो लाल निशान पड़ा था, वहाँ हाथ फेरते हुए बोले,

गुप्ता जी: “कहाँ चाहिए?”

नेहा ने अपना एक हाथ पीछे किया और गांड़ के दूसरे हिस्से को थपकते हुए इशारा कर दिया।

गुप्ता जी हँसे।

इस बार उन्होंने हाथ और पीछे ले जाकर...

चटाक!!!
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Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-02-2026, 04:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 17-02-2026, 10:06 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 04:47 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 06:31 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 19-02-2026, 10:42 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 10:51 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 02:14 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 03:44 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 06:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 11:00 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 21-02-2026, 05:29 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 21-02-2026, 05:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 21-02-2026, 07:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 22-02-2026, 11:55 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 22-02-2026, 12:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 24-02-2026, 12:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 25-02-2026, 01:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by BHOG LO - 25-02-2026, 01:21 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 28-02-2026, 02:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 28-02-2026, 04:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:20 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:24 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 07-03-2026, 12:08 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 09-03-2026, 12:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 12-03-2026, 10:56 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 12-03-2026, 11:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 12-03-2026, 01:09 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 14-03-2026, 07:22 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 15-03-2026, 01:35 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Vkpawar - 15-03-2026, 12:53 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 16-03-2026, 02:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 16-03-2026, 05:28 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 17-03-2026, 09:39 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 17-03-2026, 09:49 AM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 17-03-2026, 05:53 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:13 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 03:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 19-03-2026, 05:57 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 25-03-2026, 08:11 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 02-04-2026, 12:57 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:30 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:34 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:58 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 09-04-2026, 03:45 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Glenlivet - 09-04-2026, 07:33 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 09-04-2026, 07:59 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 12-04-2026, 01:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:02 PM
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