01-07-2026, 03:36 PM
नमस्ते दोस्त ... म शवराम , एक नई कहानी के साथ वापस आ गया ँ ... यह कहानी तब क है जब म क्लास म था ... उस समय माँ बहुत सुंदर थ ... वह दुबलीपतली और प्यारी थ , उनके स्तन और कूल्हे बहुत आकषक थे जो कसी को भी दवाना बना सकते थे ... उनक तबीयत ठक नह थी और वह चता और डप्रेशन से गुज़र रही थ ... उन्हने अपनी माँ को फ़ोन
कया और बताया क उन्ह घबराहट , डर और कुछ अजीब सी भावनाएँ महसूस हो रही ह ... तो मेरी नानी ने माँ को सलाह द कवह शवरा क रात भगवान शव के मंदर जाएँ और उनके मं का जाप कर , इससे सब ठक हो जाएगा ... माँ ने Google पर पूरे कनाटक म एक अ े शव मंदर क खोज क , आखरकार उन्ह कनाटक के गुलबगा ज़ले म एक अ मंदर मल गया ... माँ ने शवरा शुरू होने से एक हफ़्ता पहले ही मंदर जाने का प्लान बना लया था ... शवरा शनवार को थी और हम सोमवार को गुलबगा पहुँच गए ... शवरा म 5 दन बाक थे ... वह मंदर एक गरीब गाँव म था जो एक पहाड़ी क चोट पर बसा था ... इसलए हमने उसी गाँव म रुकने का फ़ैसला कया जो उस मंदर के पास ही था ... उस गाँव म कोई अ ा लॉज नह था ... लेकन उस गाँव म एक लॉज था जो बहुत अ ा तो नह था , पर ठकठाक था ... मऔर माँ अपनी Swift कार से उतरे और लॉज क ओर चल दए ... बाहर से देखने पर वह कसी लॉज जैसा नह लग रहा था ... दवार पुरानी थ , उन पर पट भी नह हुआ था और वह कसी वीरान इमारत जैसा दख रहा था , लेकन वह 4 मंज़ला इमारत थी ... हम इमारत के अंदर दाखल हुए और रसेप्शन पर एक बूढ़ा और बदतमीज़ आदमी बैठा था ... वह सांवला और मोटा था , दखने म भी अ ा नह था और बहुत ही बदतमीज़ लग रहा था ... उसने पूछा , " क्या चाहए ?"... तो माँ ने जवाब दया , " हम शनवार तक के लए कमरे चाहए। " तो उस आदमी ने कहा , " सफ़ आधे घंटे के काम के लए तुम्ह शनवार तक कमरा चाहए ?
कया और बताया क उन्ह घबराहट , डर और कुछ अजीब सी भावनाएँ महसूस हो रही ह ... तो मेरी नानी ने माँ को सलाह द कवह शवरा क रात भगवान शव के मंदर जाएँ और उनके मं का जाप कर , इससे सब ठक हो जाएगा ... माँ ने Google पर पूरे कनाटक म एक अ े शव मंदर क खोज क , आखरकार उन्ह कनाटक के गुलबगा ज़ले म एक अ मंदर मल गया ... माँ ने शवरा शुरू होने से एक हफ़्ता पहले ही मंदर जाने का प्लान बना लया था ... शवरा शनवार को थी और हम सोमवार को गुलबगा पहुँच गए ... शवरा म 5 दन बाक थे ... वह मंदर एक गरीब गाँव म था जो एक पहाड़ी क चोट पर बसा था ... इसलए हमने उसी गाँव म रुकने का फ़ैसला कया जो उस मंदर के पास ही था ... उस गाँव म कोई अ ा लॉज नह था ... लेकन उस गाँव म एक लॉज था जो बहुत अ ा तो नह था , पर ठकठाक था ... मऔर माँ अपनी Swift कार से उतरे और लॉज क ओर चल दए ... बाहर से देखने पर वह कसी लॉज जैसा नह लग रहा था ... दवार पुरानी थ , उन पर पट भी नह हुआ था और वह कसी वीरान इमारत जैसा दख रहा था , लेकन वह 4 मंज़ला इमारत थी ... हम इमारत के अंदर दाखल हुए और रसेप्शन पर एक बूढ़ा और बदतमीज़ आदमी बैठा था ... वह सांवला और मोटा था , दखने म भी अ ा नह था और बहुत ही बदतमीज़ लग रहा था ... उसने पूछा , " क्या चाहए ?"... तो माँ ने जवाब दया , " हम शनवार तक के लए कमरे चाहए। " तो उस आदमी ने कहा , " सफ़ आधे घंटे के काम के लए तुम्ह शनवार तक कमरा चाहए ?


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