2 hours ago
बाबा मुस्कुराए और आईलाइनर लगाते हुए आगे बोले, “तुम्हारी पलकें इतनी घनी और लंबी हैं कि लगता है जैसे अप्सरा रम्भा की आँखें हों। जब तुम इन आँखों से देखती हो, तो कोई भी पुरुष अपना होश खो बैठे।”
पूजा की साँसें अब और भारी हो चुकी थीं। बाबा का हाथ अब उसके दूसरे नेत्र पर था। उन्होंने धीरे से पूजा के गाल पर उँगली फेर दी। मैत्री की रचना।
“शर्माना मत पूजा… आज तुम्हें देवी जैसा रूप देना है। और देवी को शर्म नहीं आती… वह तो सब कुछ समर्पित करती है।”
पूजा ने धीरे से आँखें खोलीं। उसकी आँखें अब और भी आकर्षक, गहरी और कामुक लग रही थीं।
बाबा ने उसकी आँखों में देखते हुए मुस्कुराकर कहा, “बहुत सुंदर लग रही हो… अब होठों की बारी है।”
बाबा ने लिपस्टिक उठाई। उन्होंने पूजा के निचले होंठ को अपनी अँगुली से हल्का सा दबाया और बोले, “होंठ खोलो पूजा…”
पूजा ने धीरे से होंठ खोल दिए। बाबा लिपस्टिक को उसके भरे हुए, गुलाबी होंठों पर धीरे-धीरे घुमा रहे थे। लिपस्टिक लगते समय बाबा की अँगुली बार-बार उसके निचले होंठ को छू रही थी, उसे हल्का दबा रही थी।
“तुम्हारे होंठ जैसे रस भरे आम हैं… कोमल, गीले और मीठे। इन्हें देखकर किसी का भी मन ललचा सकता है।”
पूजा की साँसें अब पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी थीं। बाबा का चेहरा उसके चेहरे से सिर्फ कुछ इंच की दूरी पर था। उनकी गर्म साँस पूजा के होंठों पर पड़ रही थी। मैत्री द्वारा रचित कहानी।
बाबा ने लिपस्टिक रखी और अपनी अँगुली से उसके निचले होंठ को हल्का सा दबाकर नीचे खींचा।
“बहुत सुंदर… अब ब्लश की बारी है।”
बाबा ने रूज लिया और पूजा के गालों पर लगाने लगे। उनका हाथ धीरे-धीरे गालों से होते हुए गर्दन की तरफ सरक गया। उन्होंने पूजा की गर्दन पर हल्की मालिश करते हुए कहा, “तुम्हारी गर्दन कितनी नाजुक और चिकनी है… जैसे कोई मोती की माला।”
पूजा अब पूरी तरह शर्म और उत्तेजना से काँप रही थी।
बाबा ने बॉडी ऑयल की बोतल उठाई। उन्होंने थोड़ा ऑयल अपनी हथेलियों पर लिया और पूजा की दोनों बाहों पर धीरे-धीरे फैलाना शुरू किया। उनकी उँगलियाँ पूजा की नर्म, दूधिया त्वचा पर फिसल रही थीं।
“अब तुम्हारा ब्लाउज थोड़ा खोलना पड़ेगा… ताकि गले और छाती पर भी ऑयल लगाया जा सके।”
पूजा ने बिना कुछ कहे अपने ब्लाउज के ऊपरी हुक खोल दिए। उसके भरे हुए, गोरे स्तनों की गहरी खाई साफ दिखने लगी।
बाबा ने ऑयल लगाते हुए अपनी उँगलियों को पूजा की छाती की शुरुआत पर फेरा। उनकी उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे घूम रही थीं, स्तनों के नीचे के नरम हिस्से को छू रही थीं। पूजा की साँसें अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं।
बाबा ने उसके कान के पास मुँह ले जाकर धीरे से फुसफुसाया, “पूजा… तुम्हारा शरीर आज देवी का रूप ले रहा है… लेकिन अभी तो शृंगार का सिर्फ शुरुआती हिस्सा हुआ है।” संपादिका फनलवर है।
उन्होंने पूजा की आँखों में गहरी नजर डाली और बोले, “अब बताओ… आगे क्या शृंगार करूँ? तुम्हारे स्तनों पर… कमर पर… या और नीचे?”
पूजा की साँसें तेज हो गईं। वह कुछ बोल नहीं पाई, सिर्फ शर्म और उत्तेजना से काँपती रही।
कहानी जारी रहेगी...
********************************.
जुड़े रहिये दोस्तों।
मैत्री. (Maitri)
पूजा की साँसें अब और भारी हो चुकी थीं। बाबा का हाथ अब उसके दूसरे नेत्र पर था। उन्होंने धीरे से पूजा के गाल पर उँगली फेर दी। मैत्री की रचना।
“शर्माना मत पूजा… आज तुम्हें देवी जैसा रूप देना है। और देवी को शर्म नहीं आती… वह तो सब कुछ समर्पित करती है।”
पूजा ने धीरे से आँखें खोलीं। उसकी आँखें अब और भी आकर्षक, गहरी और कामुक लग रही थीं।
बाबा ने उसकी आँखों में देखते हुए मुस्कुराकर कहा, “बहुत सुंदर लग रही हो… अब होठों की बारी है।”
बाबा ने लिपस्टिक उठाई। उन्होंने पूजा के निचले होंठ को अपनी अँगुली से हल्का सा दबाया और बोले, “होंठ खोलो पूजा…”
पूजा ने धीरे से होंठ खोल दिए। बाबा लिपस्टिक को उसके भरे हुए, गुलाबी होंठों पर धीरे-धीरे घुमा रहे थे। लिपस्टिक लगते समय बाबा की अँगुली बार-बार उसके निचले होंठ को छू रही थी, उसे हल्का दबा रही थी।
“तुम्हारे होंठ जैसे रस भरे आम हैं… कोमल, गीले और मीठे। इन्हें देखकर किसी का भी मन ललचा सकता है।”
पूजा की साँसें अब पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी थीं। बाबा का चेहरा उसके चेहरे से सिर्फ कुछ इंच की दूरी पर था। उनकी गर्म साँस पूजा के होंठों पर पड़ रही थी। मैत्री द्वारा रचित कहानी।
बाबा ने लिपस्टिक रखी और अपनी अँगुली से उसके निचले होंठ को हल्का सा दबाकर नीचे खींचा।
“बहुत सुंदर… अब ब्लश की बारी है।”
बाबा ने रूज लिया और पूजा के गालों पर लगाने लगे। उनका हाथ धीरे-धीरे गालों से होते हुए गर्दन की तरफ सरक गया। उन्होंने पूजा की गर्दन पर हल्की मालिश करते हुए कहा, “तुम्हारी गर्दन कितनी नाजुक और चिकनी है… जैसे कोई मोती की माला।”
पूजा अब पूरी तरह शर्म और उत्तेजना से काँप रही थी।
बाबा ने बॉडी ऑयल की बोतल उठाई। उन्होंने थोड़ा ऑयल अपनी हथेलियों पर लिया और पूजा की दोनों बाहों पर धीरे-धीरे फैलाना शुरू किया। उनकी उँगलियाँ पूजा की नर्म, दूधिया त्वचा पर फिसल रही थीं।
“अब तुम्हारा ब्लाउज थोड़ा खोलना पड़ेगा… ताकि गले और छाती पर भी ऑयल लगाया जा सके।”
पूजा ने बिना कुछ कहे अपने ब्लाउज के ऊपरी हुक खोल दिए। उसके भरे हुए, गोरे स्तनों की गहरी खाई साफ दिखने लगी।
बाबा ने ऑयल लगाते हुए अपनी उँगलियों को पूजा की छाती की शुरुआत पर फेरा। उनकी उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे घूम रही थीं, स्तनों के नीचे के नरम हिस्से को छू रही थीं। पूजा की साँसें अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं।
बाबा ने उसके कान के पास मुँह ले जाकर धीरे से फुसफुसाया, “पूजा… तुम्हारा शरीर आज देवी का रूप ले रहा है… लेकिन अभी तो शृंगार का सिर्फ शुरुआती हिस्सा हुआ है।” संपादिका फनलवर है।
उन्होंने पूजा की आँखों में गहरी नजर डाली और बोले, “अब बताओ… आगे क्या शृंगार करूँ? तुम्हारे स्तनों पर… कमर पर… या और नीचे?”
पूजा की साँसें तेज हो गईं। वह कुछ बोल नहीं पाई, सिर्फ शर्म और उत्तेजना से काँपती रही।
कहानी जारी रहेगी...
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मैत्री. (Maitri)



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