10 hours ago
मैंने खुद को कंट्रोल किया और उन्हें हल्का सा धक्का दिया।
नशे में उन्हें वो धक्का ज्यादा लगा। वो लगभग गिरने वाले थे कि मैंने उनका हाथ पकड़ लिया।
मैंने गहरी साँस ली।
थोड़ा सिचुएशन पर सोचने लगा — गुप्ता जी ने कई बार हमारी मदद की थी। हालाँकि दोनों घर पास थे, फिर भी ऊपर-नीचे लोग हो सकते थे।
अगर अभी झगड़ा हुआ तो इस नशे में गुप्ता जी एक मिनट भी नहीं लगाएँगे। राहुल वाली बात, ये उस शाम वाली बात को करने में।
सम: (ठंडे लेकिन सख्त स्वर में)
“अंकल, आपने सच में बहुत पी रखी है।
आपको घर जाकर सोना चाहिए।”
गुप्ता जी: (नशे में चीखते हुए)
“अच्छा... साले बाप को मत सिखा क्या करना चाहिए...
और तू क्या करेगा?”
उन्होंने कमर आगे-पीछे करके चुदाई का बेहद घटिया एक्शन किया और बोले
गुप्ता जी: “तेरी बीवी को चोदेगा ना?
मेरा गुस्सा अब शांत हो चुका था।
एक तो मुझे लग रहा था कि तमाशा नहीं करना चाहिए।
दूसरा — गुप्ता जी के गुस्से की वजह मुझे जायज भी लग रही थी।
वो पूरा पैसा पका रहे हैं अपने बेटे की पढ़ाई में, और बेटा girlfriend के साथ ऐश कर रहा है।
ऊपर से नेहा ने आज राहुल को इतना बढ़ावा दे दिया — डांस फ्लोर पर चिपककर नाचना, हँसना, छेड़खानी...
किसी का भी गुस्सा फूट ही पड़ता।
सम: “हाँ... मैं वो सब करूँगा... मेरी बीवी है वो।
आप घर जाइए।”
लेकिन फिर मेरे मुँह से वो निकल गया जो मुझे बिल्कुल नहीं बोलना चाहिए था। आधी बोतल मैंने भी पी रखी थी,
सम: “और आपको अकेले में टाइम मिले तो हिला कर सो जाइए।”
जैसे ही ये शब्द निकले, मुझे तुरंत एहसास हुआ कि मैंने गलती कर दी।
मैंने गुप्ता जी को गंदी बात करने का मौका दे दिया।
गुप्ता जी मुस्कुराए। उनकी मुस्कान में नशा, घिन और एक अजीब सी विजय थी।
गुप्ता जी: “मुझे पता था...
तुझे अच्छा लगता है ना जब कोई तेरी बीवी को देखे...
उसे सोचकर हिलाए... है ना मादरचोद?”
मैं चुप हो गया।
समझ गया था कि इस बूढ़े के पास बहुत टाइम है।
और बात नेहा की है तो ये साला रात भर मुझे रोककर बात कर सकता है।
मगर बहुत हो चुका था।
मैं थक चुका था।
नेहा अंदर इंतज़ार कर रही थी।
उसका और नीना का डांस अभी भी मेरी आँखों के सामने घूम रहा था।
उसने कुछ पक्का नया सोचा होगा।
और मैं इस बूढ़े से उलझा हुआ था।
उनका पूरा बदन झूल रहा था।
मैंने आगे बढ़कर उनके कुर्ते का कॉलर पकड़ लिया।
कान के पास मुँह ले जाकर, आँखों में आँखें डालकर गर्व के साथ बोला,
सम: “हाँ... मुझे पसंद है।
क्योंकि वो मेरी है।
जो लोग इस सोसाइटी में अपनी महँगी कार, महँगी घड़ी दिखाते हैं ना...
वो भी आज बस नेहा को देख रहे थे।
वो बस नेहा को देख सकते हैं...
उसे सोचकर आज रात हिला सकते हैं...
सोच सकते हैं कि उसकी बॉडी नंगी कैसे दिखती होगी...
मगर मैं अकेला हूँ जो देखेगा... उसके साथ खेलेगा... उसे जैसे चाहूँ, वैसा करूँगा।”
मैंने पहली बार अपने आप को गुप्ता जी से हावी महसूस किया।
नेहा मेरी ताकत थी।
गुप्ता जी थोड़ी देर तक सोचते रहे। फिर बोले,
गुप्ता जी: “कैसे इस्तेमाल करेगा?”
मैंने कहा, “जाओ ना अंकल...”
लेकिन गुप्ता जी ने मेरी बात बीच में ही काट दी।
। उन्होंने मेरे कान के पास मुँह लाकर धीमी, गंदी आवाज़ में कहा,
गुप्ता जी: “मैं बताऊँ... मैं कैसे इस्तेमाल करता नेहा को आज रात?”
मैं कुछ नहीं बोला। बस उनकी आँखों में देखता रहा।
गुप्ता जी मुस्कुराए और बोले,“पहले तो मैं उसे घुटनों पर बैठाता...
तेरे सामने ही।
तेरी बीवी को... जो आज इतना नाच रही थी।
उसके बाल पकड़कर उसके मुँह को खोलता...
और अपना मोटा, काला लंड उसके होंठों पर रगड़ता...”
“वो हिचकिचाती... लेकिन मैं बाल खींचकर उसका सिर पीछे करता...
और एक झटके में पूरा लंड उसके गले तक धकेल देता।
उसकी आँखों में आँसू आ जाते... गला फूल जाता...
मगर मैं रुकता नहीं।
दोनों हाथों से उसके सिर को पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदता...
गले तक... गले तक... बार-बार...”
“उसका मुँह लार से भर जाता...
थूक, आँसू, मेरे लंड का पानी... सब मिल जाता।
मैं उसे रंडी की तरह गाली देते हुए चोदता...
‘ले साली... ले मेरी बीवी... आज तुझे सिखाता हूँ असली मर्द क्या होता है...’
तेरा देखता रहता हूँ... तू बस बैठा देख रहा है... लंड हिला रहा है...”
उन्होंने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुराते हुए आगे बोले,
गुप्ता जी: “जब मैं झड़ने वाला होता... तो उसके गले के अंदर ही झड़ता...
पूरी तरह... एक बूँद भी बाहर नहीं आने देता।
फिर उसके बाल पकड़कर उठाता... और बोलता —
‘अब जा... अपने बेकार पति के पास जा... और उसे बता कि असली मर्द का स्वाद कैसा होता है।’”
गुप्ता जी: (हँसते हुए)
“कैसा लगा बेटा?
ये है असली इस्तेमाल...
तेरी नेहा जैसी रंडी का।”शुरू में तो मैं गुप्ता जी को रोकना चाहता था, लेकिन जैसे ही उन्होंने ये सब बकवास शुरू किया, मैं रोक नहीं पाया।
वो मुझे बताते हुए अपने हाथों के इशारों से भी दिखा रहे थे — कैसे नेहा के सिर को पकड़ेंगे, बाल खींचेंगे, मुँह में ठूँसेंगे।
मेरा लंड अब पूरा तंबू बना चुका था।
एक तरफ़ दिमाग घिन कर रहा था, दूसरी तरफ़ उत्तेजना भी बढ़ रही थी।
आखिरकार मेरा अच्छा दिमाग takeover कर गया।
मैंने उन्हें हल्का सा धक्का दिया और बोला,
सम: “छी छी... कितनी गंदी सोच है आपकी...
उसे सामने बेटी कहते हो और यहाँ... बहुत घटिया इंसान हो आप।”
गुप्ता जी ने मेरी बात सुनी तो मुस्कुराए।
गुप्ता जी: “अच्छा... मेरी सोच घटिया?
और बेटी यहाँ मेरे बेटे का फ्यूचर दाँव पर लगा रही है... वो कुछ नहीं?”
मैं चुप रह गया।
मैंने फिर से सिगरेट जलाई, दो उँगलियों से इशारा किया और बोला,
सम: “जा... अपनी घटिया लाइफ और पुरानी बीवी के पास।”
गुप्ता जी लड़खड़ाते हुए अपने फ्लैट की तरफ़ जाने लगे।
मैं धीरे-धीरे उन्हें जाते हुए देख रहा था।
वो हमारे दरवाज़े के सामने से गुजर रहे थे।
अचानक वो रुक गए।
मेरे दरवाज़े की तरफ़ मुड़े।
मुझे लगा वो बस मुझे डरा रहे हैं। इतनी हिम्मत नहीं कि अंदर जाएँ।
मगर उन्होंने दरवाज़े का नॉब पकड़ा...
और एक “क्लिक” की आवाज़ के साथ उसे खोल दिया।
मैंने गुप्ता जी का चेहरा देखा —
एकदम से उस पर ताज़गी आ गई थी। नशा अभी भी था, लेकिन आँखों में एक नई चमक थी।
गुप्ता जी की आँखें एकदम बड़ी हो गई थीं।
मैं वो नज़ारा नहीं देख पा रहा था जो गुप्ता जी देख रहे थे।
जब मैं नेहा को कमरे में छोड़कर बाहर गया था, तब वो सिर्फ़ क्रीम कलर की पैंटी में थी। अब भी वही हालत थी — नंगी छातियाँ, पसीने से चमकता शरीर, पैंटी का पतला कपड़ा उसकी चूत पर चिपका हुआ।
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
गुप्ता जी ने मेरी तरफ़ देखा, फिर एक शैतानी आँखें मारी और नेहा की तरफ़ देखकर बोले,
गुप्ता जी: “बेटी... क्या एक पेग मिलेगा?
मेरी व्हिस्की तो खत्म हो गई है।”
नशे में उन्हें वो धक्का ज्यादा लगा। वो लगभग गिरने वाले थे कि मैंने उनका हाथ पकड़ लिया।
मैंने गहरी साँस ली।
थोड़ा सिचुएशन पर सोचने लगा — गुप्ता जी ने कई बार हमारी मदद की थी। हालाँकि दोनों घर पास थे, फिर भी ऊपर-नीचे लोग हो सकते थे।
अगर अभी झगड़ा हुआ तो इस नशे में गुप्ता जी एक मिनट भी नहीं लगाएँगे। राहुल वाली बात, ये उस शाम वाली बात को करने में।
सम: (ठंडे लेकिन सख्त स्वर में)
“अंकल, आपने सच में बहुत पी रखी है।
आपको घर जाकर सोना चाहिए।”
गुप्ता जी: (नशे में चीखते हुए)
“अच्छा... साले बाप को मत सिखा क्या करना चाहिए...
और तू क्या करेगा?”
उन्होंने कमर आगे-पीछे करके चुदाई का बेहद घटिया एक्शन किया और बोले
गुप्ता जी: “तेरी बीवी को चोदेगा ना?
मेरा गुस्सा अब शांत हो चुका था।
एक तो मुझे लग रहा था कि तमाशा नहीं करना चाहिए।
दूसरा — गुप्ता जी के गुस्से की वजह मुझे जायज भी लग रही थी।
वो पूरा पैसा पका रहे हैं अपने बेटे की पढ़ाई में, और बेटा girlfriend के साथ ऐश कर रहा है।
ऊपर से नेहा ने आज राहुल को इतना बढ़ावा दे दिया — डांस फ्लोर पर चिपककर नाचना, हँसना, छेड़खानी...
किसी का भी गुस्सा फूट ही पड़ता।
सम: “हाँ... मैं वो सब करूँगा... मेरी बीवी है वो।
आप घर जाइए।”
लेकिन फिर मेरे मुँह से वो निकल गया जो मुझे बिल्कुल नहीं बोलना चाहिए था। आधी बोतल मैंने भी पी रखी थी,
सम: “और आपको अकेले में टाइम मिले तो हिला कर सो जाइए।”
जैसे ही ये शब्द निकले, मुझे तुरंत एहसास हुआ कि मैंने गलती कर दी।
मैंने गुप्ता जी को गंदी बात करने का मौका दे दिया।
गुप्ता जी मुस्कुराए। उनकी मुस्कान में नशा, घिन और एक अजीब सी विजय थी।
गुप्ता जी: “मुझे पता था...
तुझे अच्छा लगता है ना जब कोई तेरी बीवी को देखे...
उसे सोचकर हिलाए... है ना मादरचोद?”
मैं चुप हो गया।
समझ गया था कि इस बूढ़े के पास बहुत टाइम है।
और बात नेहा की है तो ये साला रात भर मुझे रोककर बात कर सकता है।
मगर बहुत हो चुका था।
मैं थक चुका था।
नेहा अंदर इंतज़ार कर रही थी।
उसका और नीना का डांस अभी भी मेरी आँखों के सामने घूम रहा था।
उसने कुछ पक्का नया सोचा होगा।
और मैं इस बूढ़े से उलझा हुआ था।
उनका पूरा बदन झूल रहा था।
मैंने आगे बढ़कर उनके कुर्ते का कॉलर पकड़ लिया।
कान के पास मुँह ले जाकर, आँखों में आँखें डालकर गर्व के साथ बोला,
सम: “हाँ... मुझे पसंद है।
क्योंकि वो मेरी है।
जो लोग इस सोसाइटी में अपनी महँगी कार, महँगी घड़ी दिखाते हैं ना...
वो भी आज बस नेहा को देख रहे थे।
वो बस नेहा को देख सकते हैं...
उसे सोचकर आज रात हिला सकते हैं...
सोच सकते हैं कि उसकी बॉडी नंगी कैसे दिखती होगी...
मगर मैं अकेला हूँ जो देखेगा... उसके साथ खेलेगा... उसे जैसे चाहूँ, वैसा करूँगा।”
मैंने पहली बार अपने आप को गुप्ता जी से हावी महसूस किया।
नेहा मेरी ताकत थी।
गुप्ता जी थोड़ी देर तक सोचते रहे। फिर बोले,
गुप्ता जी: “कैसे इस्तेमाल करेगा?”
मैंने कहा, “जाओ ना अंकल...”
लेकिन गुप्ता जी ने मेरी बात बीच में ही काट दी।
। उन्होंने मेरे कान के पास मुँह लाकर धीमी, गंदी आवाज़ में कहा,
गुप्ता जी: “मैं बताऊँ... मैं कैसे इस्तेमाल करता नेहा को आज रात?”
मैं कुछ नहीं बोला। बस उनकी आँखों में देखता रहा।
गुप्ता जी मुस्कुराए और बोले,“पहले तो मैं उसे घुटनों पर बैठाता...
तेरे सामने ही।
तेरी बीवी को... जो आज इतना नाच रही थी।
उसके बाल पकड़कर उसके मुँह को खोलता...
और अपना मोटा, काला लंड उसके होंठों पर रगड़ता...”
“वो हिचकिचाती... लेकिन मैं बाल खींचकर उसका सिर पीछे करता...
और एक झटके में पूरा लंड उसके गले तक धकेल देता।
उसकी आँखों में आँसू आ जाते... गला फूल जाता...
मगर मैं रुकता नहीं।
दोनों हाथों से उसके सिर को पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदता...
गले तक... गले तक... बार-बार...”
“उसका मुँह लार से भर जाता...
थूक, आँसू, मेरे लंड का पानी... सब मिल जाता।
मैं उसे रंडी की तरह गाली देते हुए चोदता...
‘ले साली... ले मेरी बीवी... आज तुझे सिखाता हूँ असली मर्द क्या होता है...’
तेरा देखता रहता हूँ... तू बस बैठा देख रहा है... लंड हिला रहा है...”
उन्होंने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुराते हुए आगे बोले,
गुप्ता जी: “जब मैं झड़ने वाला होता... तो उसके गले के अंदर ही झड़ता...
पूरी तरह... एक बूँद भी बाहर नहीं आने देता।
फिर उसके बाल पकड़कर उठाता... और बोलता —
‘अब जा... अपने बेकार पति के पास जा... और उसे बता कि असली मर्द का स्वाद कैसा होता है।’”
गुप्ता जी: (हँसते हुए)
“कैसा लगा बेटा?
ये है असली इस्तेमाल...
तेरी नेहा जैसी रंडी का।”शुरू में तो मैं गुप्ता जी को रोकना चाहता था, लेकिन जैसे ही उन्होंने ये सब बकवास शुरू किया, मैं रोक नहीं पाया।
वो मुझे बताते हुए अपने हाथों के इशारों से भी दिखा रहे थे — कैसे नेहा के सिर को पकड़ेंगे, बाल खींचेंगे, मुँह में ठूँसेंगे।
मेरा लंड अब पूरा तंबू बना चुका था।
एक तरफ़ दिमाग घिन कर रहा था, दूसरी तरफ़ उत्तेजना भी बढ़ रही थी।
आखिरकार मेरा अच्छा दिमाग takeover कर गया।
मैंने उन्हें हल्का सा धक्का दिया और बोला,
सम: “छी छी... कितनी गंदी सोच है आपकी...
उसे सामने बेटी कहते हो और यहाँ... बहुत घटिया इंसान हो आप।”
गुप्ता जी ने मेरी बात सुनी तो मुस्कुराए।
गुप्ता जी: “अच्छा... मेरी सोच घटिया?
और बेटी यहाँ मेरे बेटे का फ्यूचर दाँव पर लगा रही है... वो कुछ नहीं?”
मैं चुप रह गया।
मैंने फिर से सिगरेट जलाई, दो उँगलियों से इशारा किया और बोला,
सम: “जा... अपनी घटिया लाइफ और पुरानी बीवी के पास।”
गुप्ता जी लड़खड़ाते हुए अपने फ्लैट की तरफ़ जाने लगे।
मैं धीरे-धीरे उन्हें जाते हुए देख रहा था।
वो हमारे दरवाज़े के सामने से गुजर रहे थे।
अचानक वो रुक गए।
मेरे दरवाज़े की तरफ़ मुड़े।
मुझे लगा वो बस मुझे डरा रहे हैं। इतनी हिम्मत नहीं कि अंदर जाएँ।
मगर उन्होंने दरवाज़े का नॉब पकड़ा...
और एक “क्लिक” की आवाज़ के साथ उसे खोल दिया।
मैंने गुप्ता जी का चेहरा देखा —
एकदम से उस पर ताज़गी आ गई थी। नशा अभी भी था, लेकिन आँखों में एक नई चमक थी।
गुप्ता जी की आँखें एकदम बड़ी हो गई थीं।
मैं वो नज़ारा नहीं देख पा रहा था जो गुप्ता जी देख रहे थे।
जब मैं नेहा को कमरे में छोड़कर बाहर गया था, तब वो सिर्फ़ क्रीम कलर की पैंटी में थी। अब भी वही हालत थी — नंगी छातियाँ, पसीने से चमकता शरीर, पैंटी का पतला कपड़ा उसकी चूत पर चिपका हुआ।
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
गुप्ता जी ने मेरी तरफ़ देखा, फिर एक शैतानी आँखें मारी और नेहा की तरफ़ देखकर बोले,
गुप्ता जी: “बेटी... क्या एक पेग मिलेगा?
मेरी व्हिस्की तो खत्म हो गई है।”


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