24-06-2026, 01:24 PM
थोड़ी दूर चलने के बाद, मैं रुका, पीछे मुड़ा और मन ही मन मुस्कुराया।
"मुझे तुम जैसे लोगों की ज़रूरत है गीता... अगर यहाँ नहीं, तो कहीं और। जब तक तुम जैसे लोग आस-पास हैं, मेरे लंड को कोई दिक्कत नहीं है।"
(इसी लिए तो मैत्री कहती है "अपनी विवेक बुद्धि का उपयोग करे। ऐसे बाबाओ से दूर ही रहे।)
लेकिन जैसे ही बाबा को वह पिटाई याद आई, उनके चेहरे पर कड़वाहट आ गई। शरीर में दर्द के साथ-साथ अतीत की यादें भी उभर आईं।
उन्होंने मन में तय किया, "मैं जो भी करूँगा, सोच-समझकर करूँगा। मैं मार खाने को तैयार नहीं हूँ।" प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
"चलो... एक गाँव में तो तुम्हारा काम तमाम कर दिया... अब दूसरा गाँव और चूत ढूँढ़ते हैं।"
लेकिन जैसे ही बाबा को वह पिटाई याद आई, वे अपने अतीत से बाहर उछल पड़े।
उन्होंने मन में तय किया कि उन्हें जो कुछ भी करना है, सोच-समझकर करना होगा। उन्हें पूजा इतनी आसानी से नहीं मिलेगी; उन्हें सब्र के साथ आगे बढ़ना होगा। संयम रखने से सब कुछ पूजाकी इच्छा से ही आगे बढना पड़ेगा।
******************** .
आज के लिए यही तक दोस्तों।
आगे का अपडेट आपकी कोमेंट्स आने के बाद।
मैत्री की तरफ से जय भारत।।
"मुझे तुम जैसे लोगों की ज़रूरत है गीता... अगर यहाँ नहीं, तो कहीं और। जब तक तुम जैसे लोग आस-पास हैं, मेरे लंड को कोई दिक्कत नहीं है।"
(इसी लिए तो मैत्री कहती है "अपनी विवेक बुद्धि का उपयोग करे। ऐसे बाबाओ से दूर ही रहे।)
लेकिन जैसे ही बाबा को वह पिटाई याद आई, उनके चेहरे पर कड़वाहट आ गई। शरीर में दर्द के साथ-साथ अतीत की यादें भी उभर आईं।
उन्होंने मन में तय किया, "मैं जो भी करूँगा, सोच-समझकर करूँगा। मैं मार खाने को तैयार नहीं हूँ।" प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
"चलो... एक गाँव में तो तुम्हारा काम तमाम कर दिया... अब दूसरा गाँव और चूत ढूँढ़ते हैं।"
लेकिन जैसे ही बाबा को वह पिटाई याद आई, वे अपने अतीत से बाहर उछल पड़े।
उन्होंने मन में तय किया कि उन्हें जो कुछ भी करना है, सोच-समझकर करना होगा। उन्हें पूजा इतनी आसानी से नहीं मिलेगी; उन्हें सब्र के साथ आगे बढ़ना होगा। संयम रखने से सब कुछ पूजाकी इच्छा से ही आगे बढना पड़ेगा।
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मैत्री की तरफ से जय भारत।।



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