24-06-2026, 01:16 PM
(This post was last modified: 24-06-2026, 01:18 PM by maitripatel. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
रजनी के पापा की आँखों में भी आँसू भर आए। उन्होंने मेरे हाथ पर हाथ रखकर कहा;
“बापजी, आपकी और गुरुजी की इच्छा को कौन टाल सकता है? लेकिन मेरी तरफ से आप निश्चिंत रहिए। और जब भी आपको लगे कि आपको हमारे घर को पवित्र करने की ज़रूरत है, तो बिना किसी झिझक के आइए। हम अपना फ़र्ज़ समझते हुए आपकी हर इच्छा पूरी करेंगे, बापजी। और अब रजनी ने भी अपनी तैयारी दिखा दी है कि वह आपके शरीर से प्रसादरूपी वीर्य का ध्यान रखेगी और बच्चे को जन्म देगी। और अगर गुरुजी नहीं भी चाहेंगे, तो भी बच्चे को निकाल देने की ज़िम्मेदारी भी मैं लूँगा। और गीता अब सिर्फ़ सिर्फ नाम की है और आपके लौटने तक ही मेरी पत्नी रहेगी। फिर, आपके आने पर, मैं सामने से गीताको आपके लिए भेंट कर दूँगा।” रचयिता मैत्री है।
लेकिन, उनका ऐसा विश्वास देखकर मेरी आँखों में भी आँसू आ गए। मैं सोचता रहा कि मैं कैसा इंसान हूँ और ये लोग मेरे लिए कितना कुछ त्यागने को तैयार थे। एक बार मेरे मन में ख्याल आया कि दूसरी जगह इधर-उधर देखने के बजाय, मुझे सामने से आए शिकार को स्वीकार कर लेना चाहिए और अपनी बाकी ज़िंदगी उनके साथ बितानी चाहिए। मैंने गीता की गांड की दरार पर हाथ रखा और कहा:
“गीता, तुम खुशकिस्मत हो और तुम्हारा पति तुमसे बेहतर है। मुझे अब जाने दो क्योंकि अगर मैं यहाँ और रुका तो तुम्हारे शरीर की खुशबू मुझे रोक देगी।”
रजनी यह सुनकर खुश हुई और बोली;
“बाबाजी, हम भी तो यही चाहते हैं, कि आप हमारे साथ घर चलो और हम सब मिलकर गुरुजी की सेवा करते रहेंगे। मैं और माँ दोनों घर में आपकी मर्ज़ी से नंगे रहेंगे, भले ही पापा मेरे ठीक सामने बैठे हों।” मैत्री की रचना।
रजनी के पापा ने भी आँखों से हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा;
“हाँ बापजी, मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि अब रजनी और गीता दोनों के शरीर आपके हैं और आप उन्हें अपनी मर्ज़ी से इस्तेमाल कर सकते हैं। बिना शर्मिंदा हुए, मुझे अब इस बात की कोई झिझक नहीं है कि रजनी मेरे सामने नंगी क्यों घूमती है। या गुरुजी गीता को कमरे में कितनी बार चोदते हैं। बस घर में सब कुछ गुरुजी की मर्ज़ी से होगा। जैसा आप कहोगे वैसा ही होगा।”
कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा, मैंने गीता के बोबले दबाए और रजनी की चोली में हाथ दाल कर उसकी चूत को सराहा-दबाई, गीता का पति दोनों हाथ बांधे यह सब देखता रहा। थोड़ी देर दोनों माँ-बेटी की चूत और गांड को प्यार करने के बाद मैं खड़ा हुआ और बोला;
“तुम्हारा प्यार बहुत खूबसूरत है। लेकिन मुझे आगे बहुत कुछ करना है। अगर मैं तुम्हारे घर पर रहा तो इन माँ-बेटी के छिद्रों में ही पड़ा रहूँगा तो और कई बदनसीब औरतें मेरे इस इलाज से वंचित रह जाएँगी। जो गुरुजी को कतई पसंद नहीं आएगा। लेकिन मैं कभी तो आऊँगा। लेकिन अभी के लिए, मुझे जाने दो, मेरे प्रेमिओ।” फनलवर द्वारा एडिटेड।
और तीनों की आँखों में आँसू भर आए और मैं वहाँ से चला गया।
*************************************************
जुड़े रहिये दोस्तों।
Maitri.
“बापजी, आपकी और गुरुजी की इच्छा को कौन टाल सकता है? लेकिन मेरी तरफ से आप निश्चिंत रहिए। और जब भी आपको लगे कि आपको हमारे घर को पवित्र करने की ज़रूरत है, तो बिना किसी झिझक के आइए। हम अपना फ़र्ज़ समझते हुए आपकी हर इच्छा पूरी करेंगे, बापजी। और अब रजनी ने भी अपनी तैयारी दिखा दी है कि वह आपके शरीर से प्रसादरूपी वीर्य का ध्यान रखेगी और बच्चे को जन्म देगी। और अगर गुरुजी नहीं भी चाहेंगे, तो भी बच्चे को निकाल देने की ज़िम्मेदारी भी मैं लूँगा। और गीता अब सिर्फ़ सिर्फ नाम की है और आपके लौटने तक ही मेरी पत्नी रहेगी। फिर, आपके आने पर, मैं सामने से गीताको आपके लिए भेंट कर दूँगा।” रचयिता मैत्री है।
लेकिन, उनका ऐसा विश्वास देखकर मेरी आँखों में भी आँसू आ गए। मैं सोचता रहा कि मैं कैसा इंसान हूँ और ये लोग मेरे लिए कितना कुछ त्यागने को तैयार थे। एक बार मेरे मन में ख्याल आया कि दूसरी जगह इधर-उधर देखने के बजाय, मुझे सामने से आए शिकार को स्वीकार कर लेना चाहिए और अपनी बाकी ज़िंदगी उनके साथ बितानी चाहिए। मैंने गीता की गांड की दरार पर हाथ रखा और कहा:
“गीता, तुम खुशकिस्मत हो और तुम्हारा पति तुमसे बेहतर है। मुझे अब जाने दो क्योंकि अगर मैं यहाँ और रुका तो तुम्हारे शरीर की खुशबू मुझे रोक देगी।”
रजनी यह सुनकर खुश हुई और बोली;
“बाबाजी, हम भी तो यही चाहते हैं, कि आप हमारे साथ घर चलो और हम सब मिलकर गुरुजी की सेवा करते रहेंगे। मैं और माँ दोनों घर में आपकी मर्ज़ी से नंगे रहेंगे, भले ही पापा मेरे ठीक सामने बैठे हों।” मैत्री की रचना।
रजनी के पापा ने भी आँखों से हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा;
“हाँ बापजी, मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि अब रजनी और गीता दोनों के शरीर आपके हैं और आप उन्हें अपनी मर्ज़ी से इस्तेमाल कर सकते हैं। बिना शर्मिंदा हुए, मुझे अब इस बात की कोई झिझक नहीं है कि रजनी मेरे सामने नंगी क्यों घूमती है। या गुरुजी गीता को कमरे में कितनी बार चोदते हैं। बस घर में सब कुछ गुरुजी की मर्ज़ी से होगा। जैसा आप कहोगे वैसा ही होगा।”
कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा, मैंने गीता के बोबले दबाए और रजनी की चोली में हाथ दाल कर उसकी चूत को सराहा-दबाई, गीता का पति दोनों हाथ बांधे यह सब देखता रहा। थोड़ी देर दोनों माँ-बेटी की चूत और गांड को प्यार करने के बाद मैं खड़ा हुआ और बोला;
“तुम्हारा प्यार बहुत खूबसूरत है। लेकिन मुझे आगे बहुत कुछ करना है। अगर मैं तुम्हारे घर पर रहा तो इन माँ-बेटी के छिद्रों में ही पड़ा रहूँगा तो और कई बदनसीब औरतें मेरे इस इलाज से वंचित रह जाएँगी। जो गुरुजी को कतई पसंद नहीं आएगा। लेकिन मैं कभी तो आऊँगा। लेकिन अभी के लिए, मुझे जाने दो, मेरे प्रेमिओ।” फनलवर द्वारा एडिटेड।
और तीनों की आँखों में आँसू भर आए और मैं वहाँ से चला गया।
*************************************************
जुड़े रहिये दोस्तों।
Maitri.



![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)