24-06-2026, 12:32 PM
Ek aur devar bhabhi ki kahani
देवर-भाभी की धीरे-धीरे बढ़ती हुई सेक्स स्टोरी (हिंदी में पूरी डिटेल के साथ)
घर में छोटा सा परिवार था। बड़े भाई अक्सर ऑफिस के काम से बाहर रहते थे। मम्मी-पापा ऊपर वाले कमरे में सोते थे। नीचे रहते थे राहुल (देवर -- २४ साल) और प्रिया (भाभी -- २८ साल)। प्रिया बहुत सुंदर थी -- गोरी, पतली कमर, बड़ी-बड़ी आँखें, और साड़ी में उसकी काया देखते ही मन अजीब हो जाता था। राहुल जवान था, थोड़ा शरारती, लेकिन शुरू में सिर्फ भाई-भाभी का रिश्ता था।
धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लगा…
**पहला टच -- किचन में, सुबह का समय**
सुबह के ७ बजे थे। प्रिया किचन में चाय बना रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, कमर का गोरा हिस्सा दिख रहा था। राहुल नीचे आया, आँखें अभी नींद भरी हुई थीं। उसने भाभी को देखा तो उसके मन में एक हल्की सी करंट दौड़ गई।
राहुल (धीरे से): "भाभी, चाय दे दो ना…"
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कप बढ़ाया। जैसे ही राहुल ने कप लिया, उसकी उँगलियाँ प्रिया की उँगलियों से हल्के से छू गईं। बस एक सेकंड का स्पर्श।
राहुल के मन में: "कितनी नरम हैं भाभी की उँगलियाँ… गर्मी जैसी लग रही है।"
प्रिया के मन में: "अरे, ये क्या हुआ? बस उँगलियाँ छू गईं… लेकिन क्यों दिल धड़क रहा है? नहीं, ये तो बस भाई है।"
प्रिया ने तुरंत हाथ खींच लिया और कहा, "जल्दी से पी लो, ठंडी हो जाएगी।"
लेकिन राहुल ने जानबूझकर कप को थोड़ा और पकड़ रखा, ताकि स्पर्श थोड़ा और लंबा रहे। प्रिया ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप चूल्हे की तरफ मुड़ गई। उसका चेहरा हल्का लाल हो गया था।
**दूसरा मौका -- रात में, सब सोए हुए थे, लेकिन राहुल जाग रहा था**
रात के ११ बजे। पूरे घर में सन्नाटा था। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया अपने कमरे में लेटी हुई थी। राहुल भी अपने कमरे में था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वह उठा और पानी पीने के बहाने प्रिया के कमरे के पास गया। दरवाजा आधा खुला था।
प्रिया साड़ी बदलकर नाइट सूट में थी -- हल्का सा ढीला टॉप और पजामा। वह करवट लेकर लेटी थी, जिससे उसकी कमर और कूल्हों का घुमाव साफ दिख रहा था।
राहुल धीरे से अंदर गया। "भाभी, नींद नहीं आ रही क्या?"
प्रिया (आँखें बंद किए, धीमी आवाज में): "हाँ… तुम भी जाग रहे हो? जाओ सो जाओ।"
राहुल बिस्तर के किनारे बैठ गया। उसने हल्के से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा। "ठंड लग रही है क्या भाभी? कम्बल ठीक से ओढ़ लो।"
प्रिया के मन में: "ये क्या कर रहा है? हाथ कंधे पर… लेकिन भाई है, शायद मासूमियत से कर रहा होगा। मना कर दूँ?"
लेकिन प्रिया ने कुछ नहीं कहा। राहुल का हाथ धीरे-धीरे कंधे से बाँह की तरफ सरकने लगा। स्पर्श बहुत हल्का था, जैसे कोई पर छू रहा हो।
राहुल के मन में: "भाभी का शरीर कितना मुलायम है… बस हल्का सा स्पर्श और पूरा शरीर गर्म हो रहा है। आगे बढ़ूँ या नहीं?"
प्रिया ने धीरे से हाथ हटाने की कोशिश की और बोली, "राहुल, अब सो जाओ। बहुत रात हो गई है।"
राहुल ने मुस्कुराते हुए हाथ हटाया, लेकिन जाते-जाते उसकी उँगलियाँ प्रिया की कमर पर हल्के से फिसल गईं। प्रिया सिहर गई, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।
**तीसरा मौका -- किचन में फिर, लेकिन इस बार थोड़ा और आगे**
दोपहर का समय। घर में सिर्फ दोनों ही थे। प्रिया रसोई में खाना बना रही थी। राहुल पीछे से आया और बोला, "भाभी, मुझे भूख लग रही है।"
प्रिया: "अभी खाना बन रहा है, थोड़ा इंतजार करो।"
राहुल ने पीछे से प्रिया के बहुत करीब खड़े होकर देखा। उसकी साँस प्रिया की गर्दन पर पड़ रही थी। फिर उसने हल्के से प्रिया की कमर पर हाथ रख दिया -- बहाने से कि कुछ सामान निकालना है।
प्रिया (घबराकर): "राहुल! ये क्या कर रहे हो? हाथ हटाओ।"
राहुल (धीमी आवाज में): "भाभी, बस एक सेकंड… कुछ गिर रहा था।"
लेकिन हाथ हटाने की बजाय उसने हल्का सा दबाव बढ़ाया। प्रिया की कमर नरम और गर्म थी। राहुल के मन में: "काश ये पल रुक जाए… भाभी का शरीर छूने मात्र से ही मेरा लंड खड़ा हो रहा है।"
प्रिया के मन में: "ये गलत है… बहुत गलत। मना करना चाहिए, लेकिन क्यों शरीर में सिहरन हो रही है? नहीं, बस यहीं तक। आगे कुछ नहीं होने दूँगी।"
प्रिया ने राहुल का हाथ जोर से हटाया और कहा, "अब बस करो राहुल। ये ठीक नहीं है। तुम मेरे देवर हो।"
राहुल पीछे हट गया, लेकिन उसकी आँखों में एक नई चमक थी।
**चौथा मौका -- रात में, एक ही बिस्तर पर, मम्मी-पापा पास वाले कमरे में सोए हुए (ये हिस्सा अब और ज्यादा डिटेल में)**
एक रात अचानक बिजली चली गई। घर में गर्मी बहुत थी। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया और राहुल नीचे एक ही बड़े कमरे में अलग-अलग बिस्तर पर लेटे थे, लेकिन पंखा भी नहीं चल रहा था।
राहुल धीरे से उठा और प्रिया के बिस्तर के पास आ गया। "भाभी, बहुत गर्मी है ना?"
प्रिया (फुसफुसाकर): "हाँ… लेकिन तुम अपने बिस्तर पर सो जाओ।"
राहुल ने प्रिया के बिस्तर पर ही लेटने की कोशिश की। "बस थोड़ी देर… पास में थोड़ी हवा लगेगी।"
प्रिया ने मना किया, "नहीं राहुल, ये गलत है।"
लेकिन राहुल मानने वाला नहीं था। वह धीरे से प्रिया के बगल में लेट गया। अंधेरे में उसका हाथ प्रिया की जाँघ पर पड़ गया। प्रिया सिहर गई।
राहुल के मन में: "भाभी की जाँघ… कितनी मुलायम। बस हल्का स्पर्श कर रहा हूँ, लेकिन मन कर रहा है कि और ऊपर चढ़ जाऊँ।"
प्रिया के मन में: "ये क्या हो रहा है? हाथ जाँघ पर है… मना करूँ, लेकिन अगर आवाज हुई तो मम्मी-पापा जाग जाएँगे। चुप रहूँ तो ये और आगे बढ़ जाएगा।"
राहुल का हाथ धीरे-धीरे जाँघ से ऊपर सरकने लगा। प्रिया ने हल्के से हाथ पकड़कर रोका, लेकिन पूरी ताकत से नहीं। बस फुसफुसाई, "राहुल… बस… बहुत हो गया।"
राहुल ने हाथ नहीं हटाया। उँगलियाँ हल्के-हल्के घुमाने लगा। फिर उसने धीरे से प्रिया की तरफ मुड़कर उसके गाल पर हल्का किस किया।
प्रिया (सिहरते हुए): "राहुल… क्या कर रहे हो? ये गलत है… छोड़ दो मुझे।"
लेकिन राहुल ने दूसरा किस प्रिया के दूसरे गाल पर किया, फिर धीरे-धीरे उसके होंठों के पास आ गया। उसने बहुत हल्के से प्रिया के निचले होंठ को चूमा। प्रिया की साँसें तेज हो गईं। राहुल के मन में: "भाभी के होंठ कितने मीठे हैं… जैसे कोई फूल। और आगे बढ़ना है।"
राहुल ने अब गहरा किस किया। उसकी जीभ प्रिया के होंठों को चाटने लगी। प्रिया पहले तो विरोध कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसके होंठ भी थोड़े खुल गए। किस लंबा और गहरा होता गया। राहुल का एक हाथ प्रिया की गर्दन के पीछे था, दूसरा हाथ धीरे से उसके टॉप के अंदर सरक गया और स्तनों को छूने लगा।
प्रिया के मन में: "नहीं… ये बहुत गलत है… लेकिन किस क्यों अच्छा लग रहा है? मेरे स्तन छू रहा है… शरीर में आग लग रही है।"
राहुल ने प्रिया का टॉप ऊपर किया और ब्रा के ऊपर से स्तनों को दबाने लगा। फिर ब्रा को ऊपर सरकाकर एक स्तन को बाहर निकाला और मुंह से चूसने लगा। वह धीरे-धीरे निप्पल को चूस रहा था, जीभ से घुमा रहा था। प्रिया की आहें निकलने लगीं -- "अ ahhh… राहुल… धीरे… मम्मी-पापा… उफ्फ…"
राहुल दूसरे स्तन पर भी यही किया। दोनों स्तनों को बारी-बारी चूसता रहा, कभी हल्के से काटता, कभी चूसता। प्रिया अब पूरी तरह सिहर रही थी। राहुल का हाथ नीचे सरककर प्रिया की जाँघों के बीच में जाने लगा, लेकिन प्रिया ने जोर से हाथ पकड़ लिया और फुसफुसाई, "बस राहुल… आज इतना ही… आगे मत बढ़ाओ… प्लीज।"
राहुल ने मजबूरन रुक गया, लेकिन प्रिया के स्तनों को एक आखिरी बार चूसकर बोला, "ठीक है भाभी… लेकिन तुम्हें बहुत अच्छा लग रहा था।"
दोनों अलग हो गए, लेकिन कमरे में उनकी तेज साँसें अभी भी गूँज रही थीं।
**आखिरी स्टेज -- अकेले में, पूरे घर में कोई नहीं (ये हिस्सा और लंबा और डिटेल में)**
एक दिन बड़े भाई, मम्मी-पापा सब शादी में बाहर गए। घर में सिर्फ राहुल और प्रिया थे।
प्रिया कमरे में कपड़े बदल रही थी। राहुल बिना दरवाजा खटखटाए अंदर चला गया। प्रिया सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।
प्रिया (घबराकर): "राहुल! बाहर जाओ! ये क्या कर रहे हो?"
राहुल ने दरवाजा बंद कर दिया और धीरे से प्रिया के पास आया। "भाभी… अब बहुत दिन हो गए। मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ।"
प्रिया पीछे हटी, लेकिन कमरा छोटा था। राहुल ने उसे दीवार से लगा दिया। उसकी साँसें प्रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं।
राहुल के मन में: "आज कोई नहीं है… आज भाभी को पूरी तरह अपना बना लूँगा।"
प्रिया के मन में: "ये गलत है… लेकिन शरीर नहीं मान रहा। इतने दिनों से ये स्पर्श… ये चाहत… अब रुक नहीं पा रही।"
राहुल ने पहले प्रिया के होंठों पर हल्का किस किया। प्रिया ने विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ राहुल की पीठ पर आ गए। फिर किस गहरा होता गया। राहुल की जीभ प्रिया की जीभ से खेलने लगी। किस इतना लंबा चला कि दोनों की साँसें उखड़ गईं।
राहुल ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तनों को बाहर निकाला। पहले तो दोनों हाथों से दबाए, मसलें, फिर मुंह लगाकर एक-एक करके चूसने लगा। वह बहुत देर तक स्तनों को चूसता रहा -- निप्पल को जीभ से घुमाता, हल्के से काटता, फिर पूरा मुंह भरकर चूसता। प्रिया की आहें भरने लगीं -- "आह… राहुल… इतना मत चूसो… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…"
राहुल नीचे उतरा। प्रिया की पैंटी उतार दी। उसने प्रिया की जाँघें फैलाईं और योनि को चूमने लगा। जीभ से अंदर-बाहर करता रहा। प्रिया अब जोर-जोर से कराह रही थी -- "राहुल… अ ahhh… क्या कर रहे हो… बस… मैं नहीं सह पा रही…"
राहुल ने खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड पूरी तरह खड़ा और सख्त था। वह प्रिया के ऊपर आ गया। पहले लंड को योनि पर रगड़ता रहा, फिर धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा।
प्रिया (आँखें बंद करके): "धीरे राहुल… उफ्फ… बड़ा है… आह… पूरा मत डालो अभी…"
राहुल ने धीरे से पूरा घुसा दिया। फिर धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर थ्रस्ट के साथ प्रिया की आहें बढ़ती गईं। राहुल कभी तेज करता, कभी धीमा। बीच-बीच में झुककर प्रिया के स्तनों को फिर चूसता, होंठों को किस करता।
प्रिया के मन में: "ये पाप है… लेकिन इतना मजा कभी नहीं आया… राहुल मुझे पूरी तरह भर रहा है…"
राहुल की गति धीरे-धीरे तेज होती गई। वह प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। कमरे में चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं -- "पच… पच… पच…" और प्रिया की कराह -- "आह… राहुल… और जोर से… हाँ… बस… मैं आने वाली हूँ…"
राहुल भी तेजी से धकेलता रहा। आखिरकार दोनों एक साथ झड़ गए। राहुल का गर्म वीर्य प्रिया के अंदर भर गया। दोनों पसीने से तर, साँसें उखड़ी हुई, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।
राहुल ने प्रिया के कान में फुसफुसाया, "भाभी… अब तुम पूरी तरह मेरी हो।"
प्रिया कुछ नहीं बोली, बस शर्म से आँखें बंद किए रही, लेकिन उसके चेहरे पर संतुष्टि साफ झलक रही थी।
इस तरह कई दिनों की धीमी-धीमी चाहत आखिरकार पूरी हो गई।
(अगर तुम्हें कोई खास हिस्सा और भी ज्यादा डिटेल में चाहिए या नई कहानी चाहिए तो बता दो।)
देवर-भाभी की धीरे-धीरे बढ़ती हुई सेक्स स्टोरी (हिंदी में पूरी डिटेल के साथ)
घर में छोटा सा परिवार था। बड़े भाई अक्सर ऑफिस के काम से बाहर रहते थे। मम्मी-पापा ऊपर वाले कमरे में सोते थे। नीचे रहते थे राहुल (देवर -- २४ साल) और प्रिया (भाभी -- २८ साल)। प्रिया बहुत सुंदर थी -- गोरी, पतली कमर, बड़ी-बड़ी आँखें, और साड़ी में उसकी काया देखते ही मन अजीब हो जाता था। राहुल जवान था, थोड़ा शरारती, लेकिन शुरू में सिर्फ भाई-भाभी का रिश्ता था।
धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लगा…
**पहला टच -- किचन में, सुबह का समय**
सुबह के ७ बजे थे। प्रिया किचन में चाय बना रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, कमर का गोरा हिस्सा दिख रहा था। राहुल नीचे आया, आँखें अभी नींद भरी हुई थीं। उसने भाभी को देखा तो उसके मन में एक हल्की सी करंट दौड़ गई।
राहुल (धीरे से): "भाभी, चाय दे दो ना…"
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कप बढ़ाया। जैसे ही राहुल ने कप लिया, उसकी उँगलियाँ प्रिया की उँगलियों से हल्के से छू गईं। बस एक सेकंड का स्पर्श।
राहुल के मन में: "कितनी नरम हैं भाभी की उँगलियाँ… गर्मी जैसी लग रही है।"
प्रिया के मन में: "अरे, ये क्या हुआ? बस उँगलियाँ छू गईं… लेकिन क्यों दिल धड़क रहा है? नहीं, ये तो बस भाई है।"
प्रिया ने तुरंत हाथ खींच लिया और कहा, "जल्दी से पी लो, ठंडी हो जाएगी।"
लेकिन राहुल ने जानबूझकर कप को थोड़ा और पकड़ रखा, ताकि स्पर्श थोड़ा और लंबा रहे। प्रिया ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप चूल्हे की तरफ मुड़ गई। उसका चेहरा हल्का लाल हो गया था।
**दूसरा मौका -- रात में, सब सोए हुए थे, लेकिन राहुल जाग रहा था**
रात के ११ बजे। पूरे घर में सन्नाटा था। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया अपने कमरे में लेटी हुई थी। राहुल भी अपने कमरे में था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वह उठा और पानी पीने के बहाने प्रिया के कमरे के पास गया। दरवाजा आधा खुला था।
प्रिया साड़ी बदलकर नाइट सूट में थी -- हल्का सा ढीला टॉप और पजामा। वह करवट लेकर लेटी थी, जिससे उसकी कमर और कूल्हों का घुमाव साफ दिख रहा था।
राहुल धीरे से अंदर गया। "भाभी, नींद नहीं आ रही क्या?"
प्रिया (आँखें बंद किए, धीमी आवाज में): "हाँ… तुम भी जाग रहे हो? जाओ सो जाओ।"
राहुल बिस्तर के किनारे बैठ गया। उसने हल्के से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा। "ठंड लग रही है क्या भाभी? कम्बल ठीक से ओढ़ लो।"
प्रिया के मन में: "ये क्या कर रहा है? हाथ कंधे पर… लेकिन भाई है, शायद मासूमियत से कर रहा होगा। मना कर दूँ?"
लेकिन प्रिया ने कुछ नहीं कहा। राहुल का हाथ धीरे-धीरे कंधे से बाँह की तरफ सरकने लगा। स्पर्श बहुत हल्का था, जैसे कोई पर छू रहा हो।
राहुल के मन में: "भाभी का शरीर कितना मुलायम है… बस हल्का सा स्पर्श और पूरा शरीर गर्म हो रहा है। आगे बढ़ूँ या नहीं?"
प्रिया ने धीरे से हाथ हटाने की कोशिश की और बोली, "राहुल, अब सो जाओ। बहुत रात हो गई है।"
राहुल ने मुस्कुराते हुए हाथ हटाया, लेकिन जाते-जाते उसकी उँगलियाँ प्रिया की कमर पर हल्के से फिसल गईं। प्रिया सिहर गई, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।
**तीसरा मौका -- किचन में फिर, लेकिन इस बार थोड़ा और आगे**
दोपहर का समय। घर में सिर्फ दोनों ही थे। प्रिया रसोई में खाना बना रही थी। राहुल पीछे से आया और बोला, "भाभी, मुझे भूख लग रही है।"
प्रिया: "अभी खाना बन रहा है, थोड़ा इंतजार करो।"
राहुल ने पीछे से प्रिया के बहुत करीब खड़े होकर देखा। उसकी साँस प्रिया की गर्दन पर पड़ रही थी। फिर उसने हल्के से प्रिया की कमर पर हाथ रख दिया -- बहाने से कि कुछ सामान निकालना है।
प्रिया (घबराकर): "राहुल! ये क्या कर रहे हो? हाथ हटाओ।"
राहुल (धीमी आवाज में): "भाभी, बस एक सेकंड… कुछ गिर रहा था।"
लेकिन हाथ हटाने की बजाय उसने हल्का सा दबाव बढ़ाया। प्रिया की कमर नरम और गर्म थी। राहुल के मन में: "काश ये पल रुक जाए… भाभी का शरीर छूने मात्र से ही मेरा लंड खड़ा हो रहा है।"
प्रिया के मन में: "ये गलत है… बहुत गलत। मना करना चाहिए, लेकिन क्यों शरीर में सिहरन हो रही है? नहीं, बस यहीं तक। आगे कुछ नहीं होने दूँगी।"
प्रिया ने राहुल का हाथ जोर से हटाया और कहा, "अब बस करो राहुल। ये ठीक नहीं है। तुम मेरे देवर हो।"
राहुल पीछे हट गया, लेकिन उसकी आँखों में एक नई चमक थी।
**नया चौथा मौका -- रात में, एक ही कमरे में कई लोग सोए हुए, पति बराबर में सोया हुआ**
एक गर्मी की रात थी। पूरे परिवार को नीचे एक बड़े हॉल में सोना पड़ा क्योंकि ऊपर का कमरा बहुत गर्म था। मम्मी-पापा एक तरफ सोए थे, प्रिया के पति (बड़े भाई) प्रिया के ठीक बगल में सोए थे, और राहुल प्रिया के दूसरी तरफ थोड़ी दूरी पर लेटा था। अंधेरा था, सिर्फ एक छोटी नाइट लैंप जल रही थी। पंखा चल रहा था लेकिन हवा कम थी।
सबके सो जाने के बाद भी राहुल की नींद नहीं आ रही थी। प्रिया भी करवटें बदल रही थी। राहुल धीरे-धीरे प्रिया की तरफ सरका। अब उसकी जाँघ प्रिया की जाँघ से छू रही थी।
राहुल के मन में: "सामने पति सो रहा है… मम्मी-पापा भी यहीं हैं… अगर कोई जाग गया तो सब खत्म… लेकिन भाभी का शरीर इतना पास है कि रुक नहीं पा रहा। डर भी लग रहा है, लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा है।"
राहुल ने बहुत धीरे से अपना हाथ प्रिया की कमर पर रख दिया। प्रिया चौंक गई लेकिन कुछ नहीं बोली। राहुल का हाथ धीरे-धीरे ऊपर सरका और प्रिया के नाइट टॉप के अंदर घुस गया। उसने ब्रा के ऊपर से स्तन को छुआ।
प्रिया के मन में: "ये पागल हो गया है… मेरे पति बिल्कुल बगल में सो रहे हैं… अगर उन्होंने आँख खोल दी तो? लेकिन राहुल का हाथ… स्तन छू रहा है… शरीर में सिहरन हो रही है… डर के साथ मज़ा भी हो रहा है।"
राहुल ने ब्रा को थोड़ा ऊपर सरकाया और एक स्तन को पूरा हाथ में ले लिया। वह धीरे-धीरे मसलने लगा। फिर वह करवट लेकर प्रिया की तरफ मुड़ा और बहुत धीरे से मुंह को स्तन के पास ले गया। उसने निप्पल को होंठों में लिया और हल्के-हल्के चूसने लगा। जीभ से घुमाता, कभी हल्का सा काटता।
प्रिया की साँसें तेज हो गईं। वह अपने होंठ काट रही थी ताकि कोई आवाज न निकले। प्रिया के मन में: "उफ्फ… राहुल मेरे स्तन चूस रहा है… पति बगल में हैं… कितना डरावना है… लेकिन चूसने का तरीका… मेरे निप्पल सख्त हो गए हैं… और मज़ा आ रहा है… नहीं रुकना चाहिए लेकिन रुक भी नहीं पा रही।"
राहुल दूसरे स्तन पर भी यही कर रहा था। वह एक हाथ से एक स्तन चूस रहा था, दूसरे हाथ से दूसरा स्तन दबा रहा था। बीच-बीच में वह अपना लंड निकालकर हिलाने लगा। उसका लंड पूरी तरह खड़ा था। वह धीरे-धीरे लंड को हिला रहा था जबकि मुंह से भाभी के स्तन चूस रहा था।
फिर राहुल का हाथ नीचे सरका। उसने प्रिया की पजामी की नाड़ी ढीली की और हाथ अंदर डाल दिया। उँगलियाँ सीधे योनि पर गईं। प्रिया पहले से ही गीली हो चुकी थी। राहुल ने एक उँगली धीरे से अंदर डाली और अंदर-बाहर करने लगा।
प्रिया के मन में: "अब उँगली अंदर कर रहा है… पति बगल में सो रहे हैं… अगर उन्होंने हल्की सी भी आवाज सुनी तो… लेकिन मज़ा इतना है कि शरीर काँप रहा है… डर और उत्तेजना दोनों एक साथ… आह… राहुल धीरे करो…"
राहुल की उँगली तेजी से नहीं, बल्कि बहुत धीमी और गहरी गति से चल रही थी। वह कभी-कभी क्लिटोरिस पर भी उँगली घुमा देता। साथ ही वह अपना लंड भी हिला रहा था। प्रिया की साँसें बहुत तेज हो गई थीं लेकिन वह चुप रहने की कोशिश कर रही थी।
राहुल के मन में: "भाभी पूरी गीली है… पति बगल में हैं… ये डर मुझे और उत्तेजित कर रहा है… मैं भाभी को चोदना चाहता हूँ लेकिन आज इतना ही… बस चूसना और उँगली करना काफी मज़ेदार है।"
लगभग १०-१५ मिनट तक यह सब चलता रहा। आखिरकार प्रिया का शरीर काँप उठा। वह चुपचाप झड़ गई। राहुल भी अपने लंड से वीर्य निकालकर बिस्तर पर ही पोछ लिया।
प्रिया ने राहुल की तरफ देखा, उसकी आँखों में डर और शर्म दोनों थे। राहुल ने बस मुस्कुराकर प्रिया के स्तन पर एक आखिरी किस किया और वापस अपनी जगह लेट गया।
**पाँचवाँ मौका -- अकेले में, पूरे घर में कोई नहीं (ये हिस्सा और लंबा और डिटेल में)**
एक दिन बड़े भाई, मम्मी-पापा सब शादी में बाहर गए। घर में सिर्फ राहुल और प्रिया थे।
प्रिया कमरे में कपड़े बदल रही थी। राहुल बिना दरवाजा खटखटाए अंदर चला गया। प्रिया सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।
प्रिया (घबराकर): "राहुल! बाहर जाओ! ये क्या कर रहे हो?"
राहुल ने दरवाजा बंद कर दिया और धीरे से प्रिया के पास आया। "भाभी… अब बहुत दिन हो गए। मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ।"
प्रिया पीछे हटी, लेकिन कमरा छोटा था। राहुल ने उसे दीवार से लगा दिया। उसकी साँसें प्रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं।
राहुल के मन में: "आज कोई नहीं है… आज भाभी को पूरी तरह अपना बना लूँगा।"
प्रिया के मन में: "ये गलत है… लेकिन शरीर नहीं मान रहा। इतने दिनों से ये स्पर्श… ये चाहत… अब रुक नहीं पा रही।"
राहुल ने पहले प्रिया के होंठों पर हल्का किस किया। प्रिया ने विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ राहुल की पीठ पर आ गए। फिर किस गहरा होता गया। राहुल की जीभ प्रिया की जीभ से खेलने लगी। किस इतना लंबा चला कि दोनों की साँसें उखड़ गईं।
राहुल ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तनों को बाहर निकाला। पहले तो दोनों हाथों से दबाए, मसलें, फिर मुंह लगाकर एक-एक करके चूसने लगा। वह बहुत देर तक स्तनों को चूसता रहा -- निप्पल को जीभ से घुमाता, हल्के से काटता, फिर पूरा मुंह भरकर चूसता। प्रिया की आहें भरने लगीं -- "आह… राहुल… इतना मत चूसो… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…"
राहुल नीचे उतरा। प्रिया की पैंटी उतार दी। उसने प्रिया की जाँघें फैलाईं और योनि को चूमने लगा। जीभ से अंदर-बाहर करता रहा। प्रिया अब जोर-जोर से कराह रही थी -- "राहुल… अ ahhh… क्या कर रहे हो… बस… मैं नहीं सह पा रही…"
राहुल ने खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड पूरी तरह खड़ा और सख्त था। वह प्रिया के ऊपर आ गया। पहले लंड को योनि पर रगड़ता रहा, फिर धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा।
प्रिया (आँखें बंद करके): "धीरे राहुल… उफ्फ… बड़ा है… आह… पूरा मत डालो अभी…"
राहुल ने धीरे से पूरा घुसा दिया। फिर धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर थ्रस्ट के साथ प्रिया की आहें बढ़ती गईं। राहुल कभी तेज करता, कभी धीमा। बीच-बीच में झुककर प्रिया के स्तनों को फिर चूसता, होंठों को किस करता।
प्रिया के मन में: "ये पाप है… लेकिन इतना मजा कभी नहीं आया… राहुल मुझे पूरी तरह भर रहा है…"
राहुल की गति धीरे-धीरे तेज होती गई। वह प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। कमरे में चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं -- "पच… पच… पच…" और प्रिया की कराह -- "आह… राहुल… और जोर से… हाँ… बस… मैं आने वाली हूँ…"
राहुल भी तेजी से धकेलता रहा। आखिरकार दोनों एक साथ झड़ गए। राहुल का गर्म वीर्य प्रिया के अंदर भर गया। दोनों पसीने से तर, साँसें उखड़ी हुई, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।
राहुल ने प्रिया के कान में फुसफुसाया, "भाभी… अब तुम पूरी तरह मेरी हो।"
प्रिया कुछ नहीं बोली, बस शर्म से आँखें बंद किए रही, लेकिन उसके चेहरे पर संतुष्टि साफ झलक रही थी।
इस तरह कई दिनों की धीमी-धीमी चाहत आखिरकार पूरी हो गई।
देवर-भाभी की धीरे-धीरे बढ़ती हुई सेक्स स्टोरी (हिंदी में पूरी डिटेल के साथ)
घर में छोटा सा परिवार था। बड़े भाई अक्सर ऑफिस के काम से बाहर रहते थे। मम्मी-पापा ऊपर वाले कमरे में सोते थे। नीचे रहते थे राहुल (देवर -- २४ साल) और प्रिया (भाभी -- २८ साल)। प्रिया बहुत सुंदर थी -- गोरी, पतली कमर, बड़ी-बड़ी आँखें, और साड़ी में उसकी काया देखते ही मन अजीब हो जाता था। राहुल जवान था, थोड़ा शरारती, लेकिन शुरू में सिर्फ भाई-भाभी का रिश्ता था।
धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लगा…
**पहला टच -- किचन में, सुबह का समय**
सुबह के ७ बजे थे। प्रिया किचन में चाय बना रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, कमर का गोरा हिस्सा दिख रहा था। राहुल नीचे आया, आँखें अभी नींद भरी हुई थीं। उसने भाभी को देखा तो उसके मन में एक हल्की सी करंट दौड़ गई।
राहुल (धीरे से): "भाभी, चाय दे दो ना…"
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कप बढ़ाया। जैसे ही राहुल ने कप लिया, उसकी उँगलियाँ प्रिया की उँगलियों से हल्के से छू गईं। बस एक सेकंड का स्पर्श।
राहुल के मन में: "कितनी नरम हैं भाभी की उँगलियाँ… गर्मी जैसी लग रही है।"
प्रिया के मन में: "अरे, ये क्या हुआ? बस उँगलियाँ छू गईं… लेकिन क्यों दिल धड़क रहा है? नहीं, ये तो बस भाई है।"
प्रिया ने तुरंत हाथ खींच लिया और कहा, "जल्दी से पी लो, ठंडी हो जाएगी।"
लेकिन राहुल ने जानबूझकर कप को थोड़ा और पकड़ रखा, ताकि स्पर्श थोड़ा और लंबा रहे। प्रिया ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप चूल्हे की तरफ मुड़ गई। उसका चेहरा हल्का लाल हो गया था।
**दूसरा मौका -- रात में, सब सोए हुए थे, लेकिन राहुल जाग रहा था**
रात के ११ बजे। पूरे घर में सन्नाटा था। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया अपने कमरे में लेटी हुई थी। राहुल भी अपने कमरे में था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वह उठा और पानी पीने के बहाने प्रिया के कमरे के पास गया। दरवाजा आधा खुला था।
प्रिया साड़ी बदलकर नाइट सूट में थी -- हल्का सा ढीला टॉप और पजामा। वह करवट लेकर लेटी थी, जिससे उसकी कमर और कूल्हों का घुमाव साफ दिख रहा था।
राहुल धीरे से अंदर गया। "भाभी, नींद नहीं आ रही क्या?"
प्रिया (आँखें बंद किए, धीमी आवाज में): "हाँ… तुम भी जाग रहे हो? जाओ सो जाओ।"
राहुल बिस्तर के किनारे बैठ गया। उसने हल्के से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा। "ठंड लग रही है क्या भाभी? कम्बल ठीक से ओढ़ लो।"
प्रिया के मन में: "ये क्या कर रहा है? हाथ कंधे पर… लेकिन भाई है, शायद मासूमियत से कर रहा होगा। मना कर दूँ?"
लेकिन प्रिया ने कुछ नहीं कहा। राहुल का हाथ धीरे-धीरे कंधे से बाँह की तरफ सरकने लगा। स्पर्श बहुत हल्का था, जैसे कोई पर छू रहा हो।
राहुल के मन में: "भाभी का शरीर कितना मुलायम है… बस हल्का सा स्पर्श और पूरा शरीर गर्म हो रहा है। आगे बढ़ूँ या नहीं?"
प्रिया ने धीरे से हाथ हटाने की कोशिश की और बोली, "राहुल, अब सो जाओ। बहुत रात हो गई है।"
राहुल ने मुस्कुराते हुए हाथ हटाया, लेकिन जाते-जाते उसकी उँगलियाँ प्रिया की कमर पर हल्के से फिसल गईं। प्रिया सिहर गई, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।
**तीसरा मौका -- किचन में फिर, लेकिन इस बार थोड़ा और आगे**
दोपहर का समय। घर में सिर्फ दोनों ही थे। प्रिया रसोई में खाना बना रही थी। राहुल पीछे से आया और बोला, "भाभी, मुझे भूख लग रही है।"
प्रिया: "अभी खाना बन रहा है, थोड़ा इंतजार करो।"
राहुल ने पीछे से प्रिया के बहुत करीब खड़े होकर देखा। उसकी साँस प्रिया की गर्दन पर पड़ रही थी। फिर उसने हल्के से प्रिया की कमर पर हाथ रख दिया -- बहाने से कि कुछ सामान निकालना है।
प्रिया (घबराकर): "राहुल! ये क्या कर रहे हो? हाथ हटाओ।"
राहुल (धीमी आवाज में): "भाभी, बस एक सेकंड… कुछ गिर रहा था।"
लेकिन हाथ हटाने की बजाय उसने हल्का सा दबाव बढ़ाया। प्रिया की कमर नरम और गर्म थी। राहुल के मन में: "काश ये पल रुक जाए… भाभी का शरीर छूने मात्र से ही मेरा लंड खड़ा हो रहा है।"
प्रिया के मन में: "ये गलत है… बहुत गलत। मना करना चाहिए, लेकिन क्यों शरीर में सिहरन हो रही है? नहीं, बस यहीं तक। आगे कुछ नहीं होने दूँगी।"
प्रिया ने राहुल का हाथ जोर से हटाया और कहा, "अब बस करो राहुल। ये ठीक नहीं है। तुम मेरे देवर हो।"
राहुल पीछे हट गया, लेकिन उसकी आँखों में एक नई चमक थी।
**चौथा मौका -- रात में, एक ही बिस्तर पर, मम्मी-पापा पास वाले कमरे में सोए हुए (ये हिस्सा अब और ज्यादा डिटेल में)**
एक रात अचानक बिजली चली गई। घर में गर्मी बहुत थी। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया और राहुल नीचे एक ही बड़े कमरे में अलग-अलग बिस्तर पर लेटे थे, लेकिन पंखा भी नहीं चल रहा था।
राहुल धीरे से उठा और प्रिया के बिस्तर के पास आ गया। "भाभी, बहुत गर्मी है ना?"
प्रिया (फुसफुसाकर): "हाँ… लेकिन तुम अपने बिस्तर पर सो जाओ।"
राहुल ने प्रिया के बिस्तर पर ही लेटने की कोशिश की। "बस थोड़ी देर… पास में थोड़ी हवा लगेगी।"
प्रिया ने मना किया, "नहीं राहुल, ये गलत है।"
लेकिन राहुल मानने वाला नहीं था। वह धीरे से प्रिया के बगल में लेट गया। अंधेरे में उसका हाथ प्रिया की जाँघ पर पड़ गया। प्रिया सिहर गई।
राहुल के मन में: "भाभी की जाँघ… कितनी मुलायम। बस हल्का स्पर्श कर रहा हूँ, लेकिन मन कर रहा है कि और ऊपर चढ़ जाऊँ।"
प्रिया के मन में: "ये क्या हो रहा है? हाथ जाँघ पर है… मना करूँ, लेकिन अगर आवाज हुई तो मम्मी-पापा जाग जाएँगे। चुप रहूँ तो ये और आगे बढ़ जाएगा।"
राहुल का हाथ धीरे-धीरे जाँघ से ऊपर सरकने लगा। प्रिया ने हल्के से हाथ पकड़कर रोका, लेकिन पूरी ताकत से नहीं। बस फुसफुसाई, "राहुल… बस… बहुत हो गया।"
राहुल ने हाथ नहीं हटाया। उँगलियाँ हल्के-हल्के घुमाने लगा। फिर उसने धीरे से प्रिया की तरफ मुड़कर उसके गाल पर हल्का किस किया।
प्रिया (सिहरते हुए): "राहुल… क्या कर रहे हो? ये गलत है… छोड़ दो मुझे।"
लेकिन राहुल ने दूसरा किस प्रिया के दूसरे गाल पर किया, फिर धीरे-धीरे उसके होंठों के पास आ गया। उसने बहुत हल्के से प्रिया के निचले होंठ को चूमा। प्रिया की साँसें तेज हो गईं। राहुल के मन में: "भाभी के होंठ कितने मीठे हैं… जैसे कोई फूल। और आगे बढ़ना है।"
राहुल ने अब गहरा किस किया। उसकी जीभ प्रिया के होंठों को चाटने लगी। प्रिया पहले तो विरोध कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसके होंठ भी थोड़े खुल गए। किस लंबा और गहरा होता गया। राहुल का एक हाथ प्रिया की गर्दन के पीछे था, दूसरा हाथ धीरे से उसके टॉप के अंदर सरक गया और स्तनों को छूने लगा।
प्रिया के मन में: "नहीं… ये बहुत गलत है… लेकिन किस क्यों अच्छा लग रहा है? मेरे स्तन छू रहा है… शरीर में आग लग रही है।"
राहुल ने प्रिया का टॉप ऊपर किया और ब्रा के ऊपर से स्तनों को दबाने लगा। फिर ब्रा को ऊपर सरकाकर एक स्तन को बाहर निकाला और मुंह से चूसने लगा। वह धीरे-धीरे निप्पल को चूस रहा था, जीभ से घुमा रहा था। प्रिया की आहें निकलने लगीं -- "अ ahhh… राहुल… धीरे… मम्मी-पापा… उफ्फ…"
राहुल दूसरे स्तन पर भी यही किया। दोनों स्तनों को बारी-बारी चूसता रहा, कभी हल्के से काटता, कभी चूसता। प्रिया अब पूरी तरह सिहर रही थी। राहुल का हाथ नीचे सरककर प्रिया की जाँघों के बीच में जाने लगा, लेकिन प्रिया ने जोर से हाथ पकड़ लिया और फुसफुसाई, "बस राहुल… आज इतना ही… आगे मत बढ़ाओ… प्लीज।"
राहुल ने मजबूरन रुक गया, लेकिन प्रिया के स्तनों को एक आखिरी बार चूसकर बोला, "ठीक है भाभी… लेकिन तुम्हें बहुत अच्छा लग रहा था।"
दोनों अलग हो गए, लेकिन कमरे में उनकी तेज साँसें अभी भी गूँज रही थीं।
**आखिरी स्टेज -- अकेले में, पूरे घर में कोई नहीं (ये हिस्सा और लंबा और डिटेल में)**
एक दिन बड़े भाई, मम्मी-पापा सब शादी में बाहर गए। घर में सिर्फ राहुल और प्रिया थे।
प्रिया कमरे में कपड़े बदल रही थी। राहुल बिना दरवाजा खटखटाए अंदर चला गया। प्रिया सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।
प्रिया (घबराकर): "राहुल! बाहर जाओ! ये क्या कर रहे हो?"
राहुल ने दरवाजा बंद कर दिया और धीरे से प्रिया के पास आया। "भाभी… अब बहुत दिन हो गए। मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ।"
प्रिया पीछे हटी, लेकिन कमरा छोटा था। राहुल ने उसे दीवार से लगा दिया। उसकी साँसें प्रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं।
राहुल के मन में: "आज कोई नहीं है… आज भाभी को पूरी तरह अपना बना लूँगा।"
प्रिया के मन में: "ये गलत है… लेकिन शरीर नहीं मान रहा। इतने दिनों से ये स्पर्श… ये चाहत… अब रुक नहीं पा रही।"
राहुल ने पहले प्रिया के होंठों पर हल्का किस किया। प्रिया ने विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ राहुल की पीठ पर आ गए। फिर किस गहरा होता गया। राहुल की जीभ प्रिया की जीभ से खेलने लगी। किस इतना लंबा चला कि दोनों की साँसें उखड़ गईं।
राहुल ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तनों को बाहर निकाला। पहले तो दोनों हाथों से दबाए, मसलें, फिर मुंह लगाकर एक-एक करके चूसने लगा। वह बहुत देर तक स्तनों को चूसता रहा -- निप्पल को जीभ से घुमाता, हल्के से काटता, फिर पूरा मुंह भरकर चूसता। प्रिया की आहें भरने लगीं -- "आह… राहुल… इतना मत चूसो… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…"
राहुल नीचे उतरा। प्रिया की पैंटी उतार दी। उसने प्रिया की जाँघें फैलाईं और योनि को चूमने लगा। जीभ से अंदर-बाहर करता रहा। प्रिया अब जोर-जोर से कराह रही थी -- "राहुल… अ ahhh… क्या कर रहे हो… बस… मैं नहीं सह पा रही…"
राहुल ने खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड पूरी तरह खड़ा और सख्त था। वह प्रिया के ऊपर आ गया। पहले लंड को योनि पर रगड़ता रहा, फिर धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा।
प्रिया (आँखें बंद करके): "धीरे राहुल… उफ्फ… बड़ा है… आह… पूरा मत डालो अभी…"
राहुल ने धीरे से पूरा घुसा दिया। फिर धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर थ्रस्ट के साथ प्रिया की आहें बढ़ती गईं। राहुल कभी तेज करता, कभी धीमा। बीच-बीच में झुककर प्रिया के स्तनों को फिर चूसता, होंठों को किस करता।
प्रिया के मन में: "ये पाप है… लेकिन इतना मजा कभी नहीं आया… राहुल मुझे पूरी तरह भर रहा है…"
राहुल की गति धीरे-धीरे तेज होती गई। वह प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। कमरे में चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं -- "पच… पच… पच…" और प्रिया की कराह -- "आह… राहुल… और जोर से… हाँ… बस… मैं आने वाली हूँ…"
राहुल भी तेजी से धकेलता रहा। आखिरकार दोनों एक साथ झड़ गए। राहुल का गर्म वीर्य प्रिया के अंदर भर गया। दोनों पसीने से तर, साँसें उखड़ी हुई, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।
राहुल ने प्रिया के कान में फुसफुसाया, "भाभी… अब तुम पूरी तरह मेरी हो।"
प्रिया कुछ नहीं बोली, बस शर्म से आँखें बंद किए रही, लेकिन उसके चेहरे पर संतुष्टि साफ झलक रही थी।
इस तरह कई दिनों की धीमी-धीमी चाहत आखिरकार पूरी हो गई।
(अगर तुम्हें कोई खास हिस्सा और भी ज्यादा डिटेल में चाहिए या नई कहानी चाहिए तो बता दो।)
देवर-भाभी की धीरे-धीरे बढ़ती हुई सेक्स स्टोरी (हिंदी में पूरी डिटेल के साथ)
घर में छोटा सा परिवार था। बड़े भाई अक्सर ऑफिस के काम से बाहर रहते थे। मम्मी-पापा ऊपर वाले कमरे में सोते थे। नीचे रहते थे राहुल (देवर -- २४ साल) और प्रिया (भाभी -- २८ साल)। प्रिया बहुत सुंदर थी -- गोरी, पतली कमर, बड़ी-बड़ी आँखें, और साड़ी में उसकी काया देखते ही मन अजीब हो जाता था। राहुल जवान था, थोड़ा शरारती, लेकिन शुरू में सिर्फ भाई-भाभी का रिश्ता था।
धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लगा…
**पहला टच -- किचन में, सुबह का समय**
सुबह के ७ बजे थे। प्रिया किचन में चाय बना रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, कमर का गोरा हिस्सा दिख रहा था। राहुल नीचे आया, आँखें अभी नींद भरी हुई थीं। उसने भाभी को देखा तो उसके मन में एक हल्की सी करंट दौड़ गई।
राहुल (धीरे से): "भाभी, चाय दे दो ना…"
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कप बढ़ाया। जैसे ही राहुल ने कप लिया, उसकी उँगलियाँ प्रिया की उँगलियों से हल्के से छू गईं। बस एक सेकंड का स्पर्श।
राहुल के मन में: "कितनी नरम हैं भाभी की उँगलियाँ… गर्मी जैसी लग रही है।"
प्रिया के मन में: "अरे, ये क्या हुआ? बस उँगलियाँ छू गईं… लेकिन क्यों दिल धड़क रहा है? नहीं, ये तो बस भाई है।"
प्रिया ने तुरंत हाथ खींच लिया और कहा, "जल्दी से पी लो, ठंडी हो जाएगी।"
लेकिन राहुल ने जानबूझकर कप को थोड़ा और पकड़ रखा, ताकि स्पर्श थोड़ा और लंबा रहे। प्रिया ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप चूल्हे की तरफ मुड़ गई। उसका चेहरा हल्का लाल हो गया था।
**दूसरा मौका -- रात में, सब सोए हुए थे, लेकिन राहुल जाग रहा था**
रात के ११ बजे। पूरे घर में सन्नाटा था। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया अपने कमरे में लेटी हुई थी। राहुल भी अपने कमरे में था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वह उठा और पानी पीने के बहाने प्रिया के कमरे के पास गया। दरवाजा आधा खुला था।
प्रिया साड़ी बदलकर नाइट सूट में थी -- हल्का सा ढीला टॉप और पजामा। वह करवट लेकर लेटी थी, जिससे उसकी कमर और कूल्हों का घुमाव साफ दिख रहा था।
राहुल धीरे से अंदर गया। "भाभी, नींद नहीं आ रही क्या?"
प्रिया (आँखें बंद किए, धीमी आवाज में): "हाँ… तुम भी जाग रहे हो? जाओ सो जाओ।"
राहुल बिस्तर के किनारे बैठ गया। उसने हल्के से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा। "ठंड लग रही है क्या भाभी? कम्बल ठीक से ओढ़ लो।"
प्रिया के मन में: "ये क्या कर रहा है? हाथ कंधे पर… लेकिन भाई है, शायद मासूमियत से कर रहा होगा। मना कर दूँ?"
लेकिन प्रिया ने कुछ नहीं कहा। राहुल का हाथ धीरे-धीरे कंधे से बाँह की तरफ सरकने लगा। स्पर्श बहुत हल्का था, जैसे कोई पर छू रहा हो।
राहुल के मन में: "भाभी का शरीर कितना मुलायम है… बस हल्का सा स्पर्श और पूरा शरीर गर्म हो रहा है। आगे बढ़ूँ या नहीं?"
प्रिया ने धीरे से हाथ हटाने की कोशिश की और बोली, "राहुल, अब सो जाओ। बहुत रात हो गई है।"
राहुल ने मुस्कुराते हुए हाथ हटाया, लेकिन जाते-जाते उसकी उँगलियाँ प्रिया की कमर पर हल्के से फिसल गईं। प्रिया सिहर गई, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।
**तीसरा मौका -- किचन में फिर, लेकिन इस बार थोड़ा और आगे**
दोपहर का समय। घर में सिर्फ दोनों ही थे। प्रिया रसोई में खाना बना रही थी। राहुल पीछे से आया और बोला, "भाभी, मुझे भूख लग रही है।"
प्रिया: "अभी खाना बन रहा है, थोड़ा इंतजार करो।"
राहुल ने पीछे से प्रिया के बहुत करीब खड़े होकर देखा। उसकी साँस प्रिया की गर्दन पर पड़ रही थी। फिर उसने हल्के से प्रिया की कमर पर हाथ रख दिया -- बहाने से कि कुछ सामान निकालना है।
प्रिया (घबराकर): "राहुल! ये क्या कर रहे हो? हाथ हटाओ।"
राहुल (धीमी आवाज में): "भाभी, बस एक सेकंड… कुछ गिर रहा था।"
लेकिन हाथ हटाने की बजाय उसने हल्का सा दबाव बढ़ाया। प्रिया की कमर नरम और गर्म थी। राहुल के मन में: "काश ये पल रुक जाए… भाभी का शरीर छूने मात्र से ही मेरा लंड खड़ा हो रहा है।"
प्रिया के मन में: "ये गलत है… बहुत गलत। मना करना चाहिए, लेकिन क्यों शरीर में सिहरन हो रही है? नहीं, बस यहीं तक। आगे कुछ नहीं होने दूँगी।"
प्रिया ने राहुल का हाथ जोर से हटाया और कहा, "अब बस करो राहुल। ये ठीक नहीं है। तुम मेरे देवर हो।"
राहुल पीछे हट गया, लेकिन उसकी आँखों में एक नई चमक थी।
**नया चौथा मौका -- रात में, एक ही कमरे में कई लोग सोए हुए, पति बराबर में सोया हुआ**
एक गर्मी की रात थी। पूरे परिवार को नीचे एक बड़े हॉल में सोना पड़ा क्योंकि ऊपर का कमरा बहुत गर्म था। मम्मी-पापा एक तरफ सोए थे, प्रिया के पति (बड़े भाई) प्रिया के ठीक बगल में सोए थे, और राहुल प्रिया के दूसरी तरफ थोड़ी दूरी पर लेटा था। अंधेरा था, सिर्फ एक छोटी नाइट लैंप जल रही थी। पंखा चल रहा था लेकिन हवा कम थी।
सबके सो जाने के बाद भी राहुल की नींद नहीं आ रही थी। प्रिया भी करवटें बदल रही थी। राहुल धीरे-धीरे प्रिया की तरफ सरका। अब उसकी जाँघ प्रिया की जाँघ से छू रही थी।
राहुल के मन में: "सामने पति सो रहा है… मम्मी-पापा भी यहीं हैं… अगर कोई जाग गया तो सब खत्म… लेकिन भाभी का शरीर इतना पास है कि रुक नहीं पा रहा। डर भी लग रहा है, लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा है।"
राहुल ने बहुत धीरे से अपना हाथ प्रिया की कमर पर रख दिया। प्रिया चौंक गई लेकिन कुछ नहीं बोली। राहुल का हाथ धीरे-धीरे ऊपर सरका और प्रिया के नाइट टॉप के अंदर घुस गया। उसने ब्रा के ऊपर से स्तन को छुआ।
प्रिया के मन में: "ये पागल हो गया है… मेरे पति बिल्कुल बगल में सो रहे हैं… अगर उन्होंने आँख खोल दी तो? लेकिन राहुल का हाथ… स्तन छू रहा है… शरीर में सिहरन हो रही है… डर के साथ मज़ा भी हो रहा है।"
राहुल ने ब्रा को थोड़ा ऊपर सरकाया और एक स्तन को पूरा हाथ में ले लिया। वह धीरे-धीरे मसलने लगा। फिर वह करवट लेकर प्रिया की तरफ मुड़ा और बहुत धीरे से मुंह को स्तन के पास ले गया। उसने निप्पल को होंठों में लिया और हल्के-हल्के चूसने लगा। जीभ से घुमाता, कभी हल्का सा काटता।
प्रिया की साँसें तेज हो गईं। वह अपने होंठ काट रही थी ताकि कोई आवाज न निकले। प्रिया के मन में: "उफ्फ… राहुल मेरे स्तन चूस रहा है… पति बगल में हैं… कितना डरावना है… लेकिन चूसने का तरीका… मेरे निप्पल सख्त हो गए हैं… और मज़ा आ रहा है… नहीं रुकना चाहिए लेकिन रुक भी नहीं पा रही।"
राहुल दूसरे स्तन पर भी यही कर रहा था। वह एक हाथ से एक स्तन चूस रहा था, दूसरे हाथ से दूसरा स्तन दबा रहा था। बीच-बीच में वह अपना लंड निकालकर हिलाने लगा। उसका लंड पूरी तरह खड़ा था। वह धीरे-धीरे लंड को हिला रहा था जबकि मुंह से भाभी के स्तन चूस रहा था।
फिर राहुल का हाथ नीचे सरका। उसने प्रिया की पजामी की नाड़ी ढीली की और हाथ अंदर डाल दिया। उँगलियाँ सीधे योनि पर गईं। प्रिया पहले से ही गीली हो चुकी थी। राहुल ने एक उँगली धीरे से अंदर डाली और अंदर-बाहर करने लगा।
प्रिया के मन में: "अब उँगली अंदर कर रहा है… पति बगल में सो रहे हैं… अगर उन्होंने हल्की सी भी आवाज सुनी तो… लेकिन मज़ा इतना है कि शरीर काँप रहा है… डर और उत्तेजना दोनों एक साथ… आह… राहुल धीरे करो…"
राहुल की उँगली तेजी से नहीं, बल्कि बहुत धीमी और गहरी गति से चल रही थी। वह कभी-कभी क्लिटोरिस पर भी उँगली घुमा देता। साथ ही वह अपना लंड भी हिला रहा था। प्रिया की साँसें बहुत तेज हो गई थीं लेकिन वह चुप रहने की कोशिश कर रही थी।
राहुल के मन में: "भाभी पूरी गीली है… पति बगल में हैं… ये डर मुझे और उत्तेजित कर रहा है… मैं भाभी को चोदना चाहता हूँ लेकिन आज इतना ही… बस चूसना और उँगली करना काफी मज़ेदार है।"
लगभग १०-१५ मिनट तक यह सब चलता रहा। आखिरकार प्रिया का शरीर काँप उठा। वह चुपचाप झड़ गई। राहुल भी अपने लंड से वीर्य निकालकर बिस्तर पर ही पोछ लिया।
प्रिया ने राहुल की तरफ देखा, उसकी आँखों में डर और शर्म दोनों थे। राहुल ने बस मुस्कुराकर प्रिया के स्तन पर एक आखिरी किस किया और वापस अपनी जगह लेट गया।
**पाँचवाँ मौका -- अकेले में, पूरे घर में कोई नहीं (ये हिस्सा और लंबा और डिटेल में)**
एक दिन बड़े भाई, मम्मी-पापा सब शादी में बाहर गए। घर में सिर्फ राहुल और प्रिया थे।
प्रिया कमरे में कपड़े बदल रही थी। राहुल बिना दरवाजा खटखटाए अंदर चला गया। प्रिया सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।
प्रिया (घबराकर): "राहुल! बाहर जाओ! ये क्या कर रहे हो?"
राहुल ने दरवाजा बंद कर दिया और धीरे से प्रिया के पास आया। "भाभी… अब बहुत दिन हो गए। मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ।"
प्रिया पीछे हटी, लेकिन कमरा छोटा था। राहुल ने उसे दीवार से लगा दिया। उसकी साँसें प्रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं।
राहुल के मन में: "आज कोई नहीं है… आज भाभी को पूरी तरह अपना बना लूँगा।"
प्रिया के मन में: "ये गलत है… लेकिन शरीर नहीं मान रहा। इतने दिनों से ये स्पर्श… ये चाहत… अब रुक नहीं पा रही।"
राहुल ने पहले प्रिया के होंठों पर हल्का किस किया। प्रिया ने विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ राहुल की पीठ पर आ गए। फिर किस गहरा होता गया। राहुल की जीभ प्रिया की जीभ से खेलने लगी। किस इतना लंबा चला कि दोनों की साँसें उखड़ गईं।
राहुल ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तनों को बाहर निकाला। पहले तो दोनों हाथों से दबाए, मसलें, फिर मुंह लगाकर एक-एक करके चूसने लगा। वह बहुत देर तक स्तनों को चूसता रहा -- निप्पल को जीभ से घुमाता, हल्के से काटता, फिर पूरा मुंह भरकर चूसता। प्रिया की आहें भरने लगीं -- "आह… राहुल… इतना मत चूसो… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…"
राहुल नीचे उतरा। प्रिया की पैंटी उतार दी। उसने प्रिया की जाँघें फैलाईं और योनि को चूमने लगा। जीभ से अंदर-बाहर करता रहा। प्रिया अब जोर-जोर से कराह रही थी -- "राहुल… अ ahhh… क्या कर रहे हो… बस… मैं नहीं सह पा रही…"
राहुल ने खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड पूरी तरह खड़ा और सख्त था। वह प्रिया के ऊपर आ गया। पहले लंड को योनि पर रगड़ता रहा, फिर धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा।
प्रिया (आँखें बंद करके): "धीरे राहुल… उफ्फ… बड़ा है… आह… पूरा मत डालो अभी…"
राहुल ने धीरे से पूरा घुसा दिया। फिर धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर थ्रस्ट के साथ प्रिया की आहें बढ़ती गईं। राहुल कभी तेज करता, कभी धीमा। बीच-बीच में झुककर प्रिया के स्तनों को फिर चूसता, होंठों को किस करता।
प्रिया के मन में: "ये पाप है… लेकिन इतना मजा कभी नहीं आया… राहुल मुझे पूरी तरह भर रहा है…"
राहुल की गति धीरे-धीरे तेज होती गई। वह प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। कमरे में चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं -- "पच… पच… पच…" और प्रिया की कराह -- "आह… राहुल… और जोर से… हाँ… बस… मैं आने वाली हूँ…"
राहुल भी तेजी से धकेलता रहा। आखिरकार दोनों एक साथ झड़ गए। राहुल का गर्म वीर्य प्रिया के अंदर भर गया। दोनों पसीने से तर, साँसें उखड़ी हुई, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।
राहुल ने प्रिया के कान में फुसफुसाया, "भाभी… अब तुम पूरी तरह मेरी हो।"
प्रिया कुछ नहीं बोली, बस शर्म से आँखें बंद किए रही, लेकिन उसके चेहरे पर संतुष्टि साफ झलक रही थी।
इस तरह कई दिनों की धीमी-धीमी चाहत आखिरकार पूरी हो गई।


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