3 hours ago
"आओ," राज ने कहा उसकी आवाज़ में एक गहराई थी एक ऐसी गहराई जो शाहिद की रूह तक पहुँच गई "आओ और मेरे सामने घुटनों पर बैठो जैसे सुमन अपने बॉस के सामने बैठती थी वैसे ही और मुझे दिखाओ कि तुम क्या कर सकती हो।"
नीशा खड़ी हुई धीरे-धीरे अपने नाइट गाउन को सहलाती हुई वह राज के सामने आई और उसके सामने घुटनों पर बैठ गई उसकी आँखें राज के लंड पर थीं उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे और उसकी जीभ उसने उसे बाहर निकाला और उसके लंड के सिरे को छुआ हल्का सा बिना दबाव के और फिर वह रुक गई बस एक पल के लिए जैसे वह उस पल का स्वाद लेना चाहती थी और फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया पूरा एक बार में और उसके होंठ उसके लंड के चारों तरफ लिपट गए और वह चूसना शुरू कर दिया धीरे-धीरे जैसे कोई अमृत पी रहा हो।
शाहिद की साँसें तेज़ हो गईं उसकी पैंट में उसका लंड इतना सख्त हो गया था कि उसे दर्द हो रहा था उसने अपनी पैंट का बटन खोला धीरे-धीरे और अपना लंड बाहर निकाला और उसे पकड़ लिया और वह देखता रहा कीहोल के उस पार उस दृश्य को जो उसे पागल कर रहा था।
नीशा का मुँह राज के लंड पर था उसके होंठ उसके चारों तरफ लिपटे हुए थे उसकी जीभ उसके सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी उसके हाथ उसके लंड के निचले हिस्से को पकड़े हुए थे और वह उसे अंदर-बाहर कर रही थी धीरे-धीरे जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो।
"ग्लप... ग्लप... ग्लप..." उसके मुँह से गीली आवाज़ें आ रही थीं जो कमरे में गूँज रही थीं उसका सिर आगे-पीछे हो रहा था और उसके स्तन वे उसके नाइट गाउन के अंदर झूल रहे थे उसके निप्पल कड़े हो गए थे और उसके बाल वे उसके चेहरे पर बिखर गए थे और वह पसीने से चमक रही थी उसका मुँह राज के लंड पर और उसकी आँखें बंद थीं जैसे वह उस एहसास में पूरी तरह खो रही हो और राज वह उसके बाल पकड़े हुए था और उसे अपने लंड पर दबा रहा था जोर से और उसके मुँह से एक लंबी कराह निकल रही थी "अह्ह्ह्ह...
"और," राज ने कहा उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शक्ति थी "और रुक मत और गहरा और और "
नीशा ने और तेज़ किया उसके होंठ और तेज़ी से उसके लंड को चूस रहे थे उसकी जीभ उसके सिरे पर और तेज़ी से घूम रही थी उसके हाथ उसके अंडकोषों को दबा रहे थे और उसकी आँखें उसने उन्हें खोला और राज को देखा उसकी आँखों में भूख थी और राज ने अपना सिर पीछे झुका लिया और उसकी साँसें तेज़ हो गईं और वह कराह रहा था "मैं आ रहा हूँ मैं आ रहा हूँ " और उसने नीशा का सिर और गहरा दबा दिया और उसका बीज उसके मुँह में आ गया गरम गाढ़ा चिपचिपा और नीशा ने उसे निगल लिया पूरा बिना रुके बिना रुके और फिर उसने अपने होठों को चाटा और राज को देखा और कहा "और चाहिए?
शाहिद वह दरवाज़े के बाहर उसे देख रहा था और उसका लंड उसके हाथ में और सख्त हो गया था और वह उसे और तेज़ी से मसल रहा था उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं उसके मुँह से "आह आह आह" निकल रहा था और उसके दिमाग में बस एक ही ख्याल था 'यह यह कमाल है यह नीशा वह सुमन से भी बेहतर है या शायद वह सुमन की तरह ही है पर राज वह उसे सुमन बना कर चोद रहा है और वह वह उसकी बात मान रही है और मैं मैं यह सब देख रहा हूँ और मेरा लंड उसकी पैंट में फटने को है और मैं मैं क्या करूँ?
राज ने नीशा को उठाया धीरे से उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके नाइट गाउन को ऊपर उठाया और उसकी चूत को देखा वहाँ कोई और नहीं था सिर्फ उसकी चूत फूली हुई गीली चमकती हुई उसके लेबिया खुले हुए थे और अंदर एक गुलाबी रंग जो पसीने से चमक रहा था और उसके बाल उसके आसपास अस्त-व्यस्त थे और वहाँ से एक गंध चूत और पसीने और औरत की जो शाहिद तक पहुँच रही थी और वह उसे सूँघ रहा था अपने दिमाग में जैसे कोई भूखा शेर अपने शिकार को सूँघ रहा हो।
राज ने अपना लंड उसकी चूत के ऊपरी होंठों पर रखा और धीरे-धीरे उसे अंदर धकेल दिया पूरा एक बार में और नीशा उसकी आँखें बंद हो गईं उसका मुँह खुल गया और उससे एक लंबी कराह निकली "अह्ह्ह्ह..." एक ऐसी कराह जो शाहिद की रूह तक पहुँच गई और राज उसने अपना लंड और गहरा अंदर धकेला और फिर धीरे-धीरे उसे बाहर निकाला और फिर अंदर बाहर अंदर बाहर जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो और नीशा उसके हाथ राज की पीठ पर और उसके पैर राज की कमर पर और वह कराह रही थी "और और रुक मत रुक मत मैं आ रही हूँ
नीशा खड़ी हुई धीरे-धीरे अपने नाइट गाउन को सहलाती हुई वह राज के सामने आई और उसके सामने घुटनों पर बैठ गई उसकी आँखें राज के लंड पर थीं उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे और उसकी जीभ उसने उसे बाहर निकाला और उसके लंड के सिरे को छुआ हल्का सा बिना दबाव के और फिर वह रुक गई बस एक पल के लिए जैसे वह उस पल का स्वाद लेना चाहती थी और फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया पूरा एक बार में और उसके होंठ उसके लंड के चारों तरफ लिपट गए और वह चूसना शुरू कर दिया धीरे-धीरे जैसे कोई अमृत पी रहा हो।
शाहिद की साँसें तेज़ हो गईं उसकी पैंट में उसका लंड इतना सख्त हो गया था कि उसे दर्द हो रहा था उसने अपनी पैंट का बटन खोला धीरे-धीरे और अपना लंड बाहर निकाला और उसे पकड़ लिया और वह देखता रहा कीहोल के उस पार उस दृश्य को जो उसे पागल कर रहा था।
नीशा का मुँह राज के लंड पर था उसके होंठ उसके चारों तरफ लिपटे हुए थे उसकी जीभ उसके सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी उसके हाथ उसके लंड के निचले हिस्से को पकड़े हुए थे और वह उसे अंदर-बाहर कर रही थी धीरे-धीरे जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो।
"ग्लप... ग्लप... ग्लप..." उसके मुँह से गीली आवाज़ें आ रही थीं जो कमरे में गूँज रही थीं उसका सिर आगे-पीछे हो रहा था और उसके स्तन वे उसके नाइट गाउन के अंदर झूल रहे थे उसके निप्पल कड़े हो गए थे और उसके बाल वे उसके चेहरे पर बिखर गए थे और वह पसीने से चमक रही थी उसका मुँह राज के लंड पर और उसकी आँखें बंद थीं जैसे वह उस एहसास में पूरी तरह खो रही हो और राज वह उसके बाल पकड़े हुए था और उसे अपने लंड पर दबा रहा था जोर से और उसके मुँह से एक लंबी कराह निकल रही थी "अह्ह्ह्ह...
"और," राज ने कहा उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शक्ति थी "और रुक मत और गहरा और और "
नीशा ने और तेज़ किया उसके होंठ और तेज़ी से उसके लंड को चूस रहे थे उसकी जीभ उसके सिरे पर और तेज़ी से घूम रही थी उसके हाथ उसके अंडकोषों को दबा रहे थे और उसकी आँखें उसने उन्हें खोला और राज को देखा उसकी आँखों में भूख थी और राज ने अपना सिर पीछे झुका लिया और उसकी साँसें तेज़ हो गईं और वह कराह रहा था "मैं आ रहा हूँ मैं आ रहा हूँ " और उसने नीशा का सिर और गहरा दबा दिया और उसका बीज उसके मुँह में आ गया गरम गाढ़ा चिपचिपा और नीशा ने उसे निगल लिया पूरा बिना रुके बिना रुके और फिर उसने अपने होठों को चाटा और राज को देखा और कहा "और चाहिए?
शाहिद वह दरवाज़े के बाहर उसे देख रहा था और उसका लंड उसके हाथ में और सख्त हो गया था और वह उसे और तेज़ी से मसल रहा था उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं उसके मुँह से "आह आह आह" निकल रहा था और उसके दिमाग में बस एक ही ख्याल था 'यह यह कमाल है यह नीशा वह सुमन से भी बेहतर है या शायद वह सुमन की तरह ही है पर राज वह उसे सुमन बना कर चोद रहा है और वह वह उसकी बात मान रही है और मैं मैं यह सब देख रहा हूँ और मेरा लंड उसकी पैंट में फटने को है और मैं मैं क्या करूँ?
राज ने नीशा को उठाया धीरे से उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके नाइट गाउन को ऊपर उठाया और उसकी चूत को देखा वहाँ कोई और नहीं था सिर्फ उसकी चूत फूली हुई गीली चमकती हुई उसके लेबिया खुले हुए थे और अंदर एक गुलाबी रंग जो पसीने से चमक रहा था और उसके बाल उसके आसपास अस्त-व्यस्त थे और वहाँ से एक गंध चूत और पसीने और औरत की जो शाहिद तक पहुँच रही थी और वह उसे सूँघ रहा था अपने दिमाग में जैसे कोई भूखा शेर अपने शिकार को सूँघ रहा हो।
राज ने अपना लंड उसकी चूत के ऊपरी होंठों पर रखा और धीरे-धीरे उसे अंदर धकेल दिया पूरा एक बार में और नीशा उसकी आँखें बंद हो गईं उसका मुँह खुल गया और उससे एक लंबी कराह निकली "अह्ह्ह्ह..." एक ऐसी कराह जो शाहिद की रूह तक पहुँच गई और राज उसने अपना लंड और गहरा अंदर धकेला और फिर धीरे-धीरे उसे बाहर निकाला और फिर अंदर बाहर अंदर बाहर जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो और नीशा उसके हाथ राज की पीठ पर और उसके पैर राज की कमर पर और वह कराह रही थी "और और रुक मत रुक मत मैं आ रही हूँ



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