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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#71
शाहिद होटल के 412 नंबर कमरे के बाहर गया  वह वहाँ खड़ा हो गया अपना कान दरवाज़े पर रखा  और सुनने लगा 

पहले तो कुछ नहीं  फिर एक कराह  औरत की  नीशा की  "अह्ह्ह... राज... और... और..."  और फिर राज की आवाज़  "चुप रहो  और कराहो  जैसे सुमन कराहती है  वैसे ही  और सोचो  कि मैं सुमन को चोद रहा हूँ  और तुम सुमन हो  और तुम कराह रही हो  'मुझे चोदो  और और  रुक मतऔर मैं तुम्हें चोद रहा हूँ  और तुम्हारी चूत  मेरे लंड पर  और तुम फट रही हो  और मैं  मैं भी  और  और "
शाहिद की साँसें तेज़ हो गईं  उसका लंड सख्त हो गया  और उसने रिजवान को फोन किया
"रिजवान," उसने कहा  उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी  "वे... वे चोद रहे हैं  राज और वह औरत  नीशा  वे एक-दूसरे को चोद रहे हैं  और राज  वह उसे सुमन बना कर चोद रहा है  और वह कराह रही है  और वह चीख रहा है  और वे दोनों  एक साथ  चरम पर पहुँच रहे हैं  और मैं  मैं यह सब  सुन रहा हूँ  और मेरा  मेरा लंड  सख्त हो गया है  और मैं  मैं  क्या करूँ?"
"कुछ मत कर," रिजवान ने कहा  उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शांति थी  "बस सुन  और याद रख  हर एक आवाज़  हर एक कराह  हर एक चीख  और फिर मुझे बता  कि क्या सुनाई दिया  और फिर  हम इस बात का इस्तेमाल करेंगे  सुमन को राज से दूर करने के लिए  और उसे हमारा बनाने के लिए।"

रात के 11 बज रहे थे। होटल की गलियारे में सन्नाटा था  सिर्फ दीवारों पर लगी मंद रोशनी जल रही थी। शाहिद 412 नंबर कमरे के बाहर खड़ा था। उसके हाथ में मोबाइल था  पर उसकी आँखें कीहोल पर टिकी हुई थीं  और उसके अंदर एक अजीब सी बेचैनी थी  वह बेचैनी जो उसे कुछ ऐसा दिखाने को मजबूर कर रही थी  जो उसे नहीं देखना चाहिए था।

उसने अपनी आँख कीहोल में लगाई  और उसने देखा  राज और नीशा  उस कमरे के अंदर  और उसका दिल तेज़ धड़कने लगा  उसके हाथ काँपने लगे  और उसका लंड  उसकी पैंट में  सख्त होने लगा  धीरे-धीरे  जैसे कोई जाग रहा हो।



कमरे के अंदर मंद रोशनी थी  बेडसाइड लैंप की पीली रोशनी  जो नीशा के शरीर पर पड़ रही थी  और उसे सुनहरा बना रही थी।

राज कमरे के बीचोंबीच खड़ा था  पूरी तरह नंगा। उसका शरीर मजबूत और भरा हुआ था। उसकी छाती पर काले बाल थे  और उसके पेट पर मांसपेशियों की रेखाएँ थीं  जो उसकी हर साँस के साथ उभर रही थीं। उसका लंड  वह हवा में सीधा खड़ा था  काला, मोटा, नसों से भरा हुआ  उसके सिरे से एक बूँद चमक रही थी  उसकी लार  या उसकी भूख  पता नहीं  पर वह वहाँ थी  टपकने को तैयार।
नीशा बिस्तर के किनारे बैठी थी  उसका नाइट गाउन  काला, पतला, लेस वाला  उसके शरीर पर लिपटा हुआ था। नाइट गाउन के अंदर उसके स्तन स्वतंत्र थे  उनका भार उसके कपड़े को नीचे खींच रहा था  और उसके निप्पल  वे कड़े हो गए थे  कपड़े के नीचे से दो काली बूँदों की तरह। उसकी जांघें नंगी थीं  और उनके बीच  उसकी चूत  नाइट गाउन के नीचे  अधखुली  गीली  चमकती हुई  उसके लेबिया फूले हुए  और उनके बीच  एक गुलाबी रंग  जो मंद रोशनी में चमक रहा था। उसकी आँखें राज पर थीं  उसकी आँखों में भूख थी  वह भूख जो कह रही थी  'आओ  मुझे लो  मुझे चोदो  मुझे तोड़ो।'
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 3 hours ago



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