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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#68
कैफे का वह कोना। अब अंधेरा हो चुका था। बाहर रात का सन्नाटा था — और अंदर — राज और नीशा के बीच एक अलग ही सन्नाटा था।
घंटों तक वे सुमन के बारे में बात कर रहे थे — उसके अतीत के बारे में — उसके बॉयफ्रेंड्स के बारे में — उसके बॉस के बारे में — उसके करण के बारे में — उसके विशाल के बारे में — और जैसे-जैसे नीशा सुमन की चुदाई की कहानियाँ सुना रही थी — राज के अंदर की आग और भड़कती जा रही थी।
"जीजू," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में अब एक अलग ही नमी थी — "तुम्हारा लंड — तुम्हारी पैंट में — कितना सख्त हो गया है — मुझे दिख रहा है।"
राज ने नीचे देखा — उसका लंड पूरी तरह सख्त था — उसकी पैंट में एक तम्बू बना हुआ था। उसने अपनी आँखें नीशा पर उठाईं — उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी — वह चमक जो कह रही थी — 'मैं तुम्हें चाहती हूँ — और अब मैं तुम्हें लूँगी।'
"नीशा..." राज ने कहना शुरू किया — पर नीशा ने उसे रोक दिया।
"चुप रहो," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था — "अब और बात नहीं — अब और कहानियाँ नहीं — अब बस महसूस करो।"
उसने अपना हाथ बढ़ाया — और राज की जांघ पर रख दिया — ऊपर — बहुत ऊपर — उसके लंड के ठीक ऊपर। उसकी उँगलियाँ उसके पैंट के कपड़े पर हल्की-हल्की दब रही थीं — ऊपर-नीचे — जैसे कोई संगीत का ताल देख रही हो।

"तुम्हारा लंड," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "बहुत सख्त है — कितनी देर से तुम सुमन के बारे में सुन रहे हो — और तुम्हारा लंड उसे सुनकर सख्त हो गया — यह मतलब तुम उसे चाहते हो — पर अब — मैं तुम्हें वह दूँगी — जो सुमन नहीं दे सकती।"

उसने राज के लंड को पकड़ लिया — पैंट के ऊपर से ही — और धीरे-धीरे — मसलना शुरू कर दिया — ऊपर-नीचे — जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो।

"अह्ह्ह..." राज की साँसें रुक गईं — उसकी आँखें बंद हो गईं — उसका सिर पीछे झुक गया।

"सोचो," नीशा ने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी धुन थी — "सोचो — सुमन — उसके बॉस के साथ — होटल के कमरे में — उसका लंड उसकी चूत में — वह उसे चोद रहा है — और वह कराह रही है — 'आह — आह — और — आह' — और वह उसके बाल खींच रही है — और उसकी चूत उसके लंड को चूस रही है — और वह कराह रहा है — 'तेरी चूत — बहुत गरम है — और' — और वह उसे और गहरा चोद रहा है — और वह चीख रही है — 'और — और — रुक मत — रुक मत — मैं आ रही हूँ'।"
राज का लंड और सख्त हो गया — इतना सख्त कि उसे दर्द हो रहा था — और नीशा के हाथ में वह धड़क रहा था।

"अब," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था — "अपनी पैंट खोलो — और मुझे अपना लंड दिखाओ — मैं देखना चाहती हूँ — कि सुमन का पति — उसका लंड कैसा है।"

राज ने अपनी पैंट का बटन खोला — ज़िप खोली — और अपना लंड बाहर निकाला — वह बाहर आ गया — काला, मोटा, नसों से भरा हुआ — इतना सख्त कि उसकी नसें बाहर उभर आई थीं — और उसके सिरे से एक बूँद टपक रही थी — उसकी लार — या उसकी भूख — पता नहीं।

"तुम्हारा लंड," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी आश्चर्य थी — "बहुत बड़ा है — बहुत मोटा — सुमन को इसका मज़ा आता होगा — पर आज — यह मेरा है।"

उसने अपना हाथ बढ़ाया — और उसके लंड को पकड़ लिया — उसकी उँगलियाँ उसके चारों तरफ लिपट गईं — और वह धीरे-धीरे — उसे मसलना शुरू कर दिया — ऊपर-नीचे — जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो।
"अह्ह्ह..." राज कराहा — एक लंबी, रुकी हुई कराह — "नीशा... बहुत... बहुत अच्छा..."

"अब," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अलग ही नमी थी — "मैं तुम्हें सुमन के बारे में और बताऊँगी — पर इसके लिए — तुम्हें मुझे और देखना होगा।"

उसने अपनी कुर्सी से खड़े होकर — राज के सामने घुटने टेक दिए — उसकी आँखें राज के लंड पर थीं — और उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे — जैसे वह उसे अपने मुँह में लेने के लिए तैयार हो रही हो।

"सोचो," उसने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी धुन थी — "सुमन — जब वह अपने बॉस के सामने घुटनों पर बैठती थी — और उसका लंड चूसती थी — उसी तरह — जैसे मैं अब तुम्हारा चूसूँगी — और उसके मुँह में उसका बीज आता था — और वह उसे निगल लेती थी — और फिर वह अपने होठों को चाटती थी — और कहती थी — 'और चाहिए?' — और उसका बॉस — वह उसके बाल खींचता था — और उसे और गहरा अपने लंड पर धकेलता था।"
राज की साँसें फट गईं — उसका लंड नीशा के होंठों के ठीक सामने था — और नीशा ने अपना मुँह खोला — और उसे अंदर ले लिया।

नीशा का मुँह — गरम, नम, गीला — राज के लंड को अंदर खींच लिया — पूरा — उसका सिरा उसके गले के पीछे तक चला गया — और उसके होंठ उसके लंड के चारों तरफ लिपट गए।

"अह्ह्ह्ह..." राज चीखा — एक दबी हुई, रुकी हुई चीख — उसके हाथ नीशा के बालों में जा गिरे — और उसने उसे अपने लंड पर दबा लिया।

नीशा ने उसे चूसना शुरू किया — धीरे-धीरे — उसके होठों से उसके लंड को खींचते हुए — उसकी जीभ से उसके सिरे को घुमाते हुए — और उसका मुँह उसके लंड के चारों तरफ लिपटा हुआ था — जैसे कोई नदी के पानी को पी रहा हो।

"सोचो," नीशा ने कहा — अपने मुँह में से — उसकी आवाज़ गीली और गरम थी — "सुमन — जब वह अपने बॉस को चूसती थी — तो उसे कितना मज़ा आता था — वह उसके बाल खींचती थी — और उसका मुँह — उसके लंड पर — और वह सोचती थी — 'यह लंड — मेरा है — और मैं इसे अब चूसूंगी — और फिर — यह मुझे चोदेगा — और फिर — मैं उसे और चाहूंगी'।"
राज का लंड और सख्त हो गया — इतना सख्त कि वह नीशा के गले के पीछे तक जा रहा था — और नीशा उसे और गहरा अंदर ले रही थी — बिना रुके — बिना हिचके।
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 21-06-2026, 12:54 PM



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