5 hours ago
राज का सवाल — "यह सब तुम्हें कैसे पता?"
राज की आँखों में एक अजीब सी चमक थी — वह चमक जो गुस्से और भूख के बीच झूल रही थी। उसका लंड अब भी पैंट में सख्त था — और उसका दिमाग अब भी सुमन के अतीत की तस्वीरों से भरा हुआ था।
उसने अपनी कॉफी का एक घूँट लिया — और फिर नीशा की तरफ देखा।
"यह सब तुम्हें कैसे पता?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में अब कोई गुस्सा नहीं था — बस एक ठंडी जिज्ञासा थी।
नीशा ने अपनी कॉफी रखी। उसके चेहरे पर वही मुस्कान थी — वह मुस्कान जो कह रही थी — मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी — यह सवाल आने का।
"जीजू," उसने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "सुमन मेरी बहन है। हम साथ बड़ी हुई हैं। एक ही कमरे में सोई हैं। एक ही कॉलेज गई हैं। एक ही कॉलेज गई हैं। और जब सुमन ने नौकरी करनी शुरू की — तो मैं भी उसके साथ थी।"
राज ने अपना सिर झुकाया — वह सुन रहा था — पर उसकी आँखें नीशा पर ही थीं।
"सुमन ने जब पहली नौकरी की — तब मैं भी उसी शहर में थी," नीशा ने कहना शुरू किया — "मैं उसके साथ रहती थी। उसके साथ क्लब जाती थी। उसके साथ पार्टियाँ करती थी। उसके साथ बिजनेस ट्रिप्स पर जाती थी — हाँ, बॉस उसे अपने साथ ले जाता था — और वह मुझे भी अपने साथ ले जाती थी — क्योंकि मुझे वहाँ खाना-पीना अच्छा लगता था — और सुमन को मेरा साथ अच्छा लगता था।"
"तो तुमने सब कुछ देखा है?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी जिज्ञासा थी।
"सब कुछ," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "मैंने उसके बॉस को उसके साथ होटल में घुसते देखा है — मैंने उसे करण के साथ क्लब में नाचते देखा है — मैंने उसे विशाल के साथ कार में चुंबन करते देखा है — मैंने उसे रात में घर से निकलते देखा है — और मैंने उसे वापस आते देखा है — सुबह — उसके कपड़े अस्त-व्यस्त — उसके बाल बिखरे हुए — उसके चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति।"
राज का लंड और सख्त हो गया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपनी पैंट में हाथ डाला — बिना सोचे — उसे दबाया — पर उसने खुद को रोक लिया।
"तुम्हें शायद यह भी पता हो — कि मैंने कुछ फोटो खींची थीं," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक चमक थी — "जब सुमन बॉस के साथ होटल में घुस रही थी — तब मैंने उसकी फोटो खींची थी। जब वह करण के साथ क्लब से निकल रही थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी। जब वह विशाल के साथ कार में थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी। और जब वह रात में घर से निकल रही थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी।"
"तो तुमने यह सब — क्यों?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कड़वाहट थी।
"क्योंकि," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक जहर था — "मैं चाहती थी कि सुमन का असली चेहरा किसी को पता चले — पर उससे पहले मैं खुद उसे समझना चाहती थी — कि वह क्या है — और क्या नहीं।"
राज ने अपनी आँखें बंद कर लीं — उसने सोचा — नीशा — वह सुमन की बहन है — पर वह उसे इतनी जलन से देखती है — क्यों?
"तुम सोच रहे हो — मैं सुमन से जलती हूँ?" नीशा ने कहा — जैसे उसने राज का मन पढ़ लिया हो — "हाँ — मैं जलती हूँ — पर सिर्फ इसलिए नहीं कि वह मुझसे ज्यादा सुंदर है — या मुझसे ज्यादा अमीर है — या मुझसे ज्यादा सफल है। मैं जलती हूँ — क्योंकि वह वह सब करती है — और फिर भी उसे कोई पकड़ नहीं पाता — और मैं — मैं वह सब नहीं कर सकती — और मुझे हर कोई पकड़ लेता है।"
"तो तुम उसे बदनाम करना चाहती हो?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में अब गुस्सा नहीं था — बस एक अजीब सी शांति थी।
"नहीं," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "मैं उसे उसकी असली जगह दिखाना चाहती हूँ — और मैं चाहती हूँ कि तुम उसे उसी रूप में देखो — जैसी वह है — बिना किसी झूठ के — बिना किसी दिखावे के — और फिर तुम फैसला करो — कि तुम उसे प्यार करते हो — या नफरत — या फिर — कुछ और।"
राज ने गहरी साँस ली — उसका लंड अब भी सख्त था — और उसका दिमाग अब भी सुमन की तस्वीरों से भरा हुआ था।
राज की आँखों में एक अजीब सी चमक थी — वह चमक जो गुस्से और भूख के बीच झूल रही थी। उसका लंड अब भी पैंट में सख्त था — और उसका दिमाग अब भी सुमन के अतीत की तस्वीरों से भरा हुआ था।
उसने अपनी कॉफी का एक घूँट लिया — और फिर नीशा की तरफ देखा।
"यह सब तुम्हें कैसे पता?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में अब कोई गुस्सा नहीं था — बस एक ठंडी जिज्ञासा थी।
नीशा ने अपनी कॉफी रखी। उसके चेहरे पर वही मुस्कान थी — वह मुस्कान जो कह रही थी — मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी — यह सवाल आने का।
"जीजू," उसने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "सुमन मेरी बहन है। हम साथ बड़ी हुई हैं। एक ही कमरे में सोई हैं। एक ही कॉलेज गई हैं। एक ही कॉलेज गई हैं। और जब सुमन ने नौकरी करनी शुरू की — तो मैं भी उसके साथ थी।"
राज ने अपना सिर झुकाया — वह सुन रहा था — पर उसकी आँखें नीशा पर ही थीं।
"सुमन ने जब पहली नौकरी की — तब मैं भी उसी शहर में थी," नीशा ने कहना शुरू किया — "मैं उसके साथ रहती थी। उसके साथ क्लब जाती थी। उसके साथ पार्टियाँ करती थी। उसके साथ बिजनेस ट्रिप्स पर जाती थी — हाँ, बॉस उसे अपने साथ ले जाता था — और वह मुझे भी अपने साथ ले जाती थी — क्योंकि मुझे वहाँ खाना-पीना अच्छा लगता था — और सुमन को मेरा साथ अच्छा लगता था।"
"तो तुमने सब कुछ देखा है?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी जिज्ञासा थी।
"सब कुछ," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "मैंने उसके बॉस को उसके साथ होटल में घुसते देखा है — मैंने उसे करण के साथ क्लब में नाचते देखा है — मैंने उसे विशाल के साथ कार में चुंबन करते देखा है — मैंने उसे रात में घर से निकलते देखा है — और मैंने उसे वापस आते देखा है — सुबह — उसके कपड़े अस्त-व्यस्त — उसके बाल बिखरे हुए — उसके चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति।"
राज का लंड और सख्त हो गया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपनी पैंट में हाथ डाला — बिना सोचे — उसे दबाया — पर उसने खुद को रोक लिया।
"तुम्हें शायद यह भी पता हो — कि मैंने कुछ फोटो खींची थीं," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक चमक थी — "जब सुमन बॉस के साथ होटल में घुस रही थी — तब मैंने उसकी फोटो खींची थी। जब वह करण के साथ क्लब से निकल रही थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी। जब वह विशाल के साथ कार में थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी। और जब वह रात में घर से निकल रही थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी।"
"तो तुमने यह सब — क्यों?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कड़वाहट थी।
"क्योंकि," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक जहर था — "मैं चाहती थी कि सुमन का असली चेहरा किसी को पता चले — पर उससे पहले मैं खुद उसे समझना चाहती थी — कि वह क्या है — और क्या नहीं।"
राज ने अपनी आँखें बंद कर लीं — उसने सोचा — नीशा — वह सुमन की बहन है — पर वह उसे इतनी जलन से देखती है — क्यों?
"तुम सोच रहे हो — मैं सुमन से जलती हूँ?" नीशा ने कहा — जैसे उसने राज का मन पढ़ लिया हो — "हाँ — मैं जलती हूँ — पर सिर्फ इसलिए नहीं कि वह मुझसे ज्यादा सुंदर है — या मुझसे ज्यादा अमीर है — या मुझसे ज्यादा सफल है। मैं जलती हूँ — क्योंकि वह वह सब करती है — और फिर भी उसे कोई पकड़ नहीं पाता — और मैं — मैं वह सब नहीं कर सकती — और मुझे हर कोई पकड़ लेता है।"
"तो तुम उसे बदनाम करना चाहती हो?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में अब गुस्सा नहीं था — बस एक अजीब सी शांति थी।
"नहीं," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "मैं उसे उसकी असली जगह दिखाना चाहती हूँ — और मैं चाहती हूँ कि तुम उसे उसी रूप में देखो — जैसी वह है — बिना किसी झूठ के — बिना किसी दिखावे के — और फिर तुम फैसला करो — कि तुम उसे प्यार करते हो — या नफरत — या फिर — कुछ और।"
राज ने गहरी साँस ली — उसका लंड अब भी सख्त था — और उसका दिमाग अब भी सुमन की तस्वीरों से भरा हुआ था।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)