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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#66
"बॉस अपनी बिजनेस ट्रिप पर सुमन को अपने साथ ले जाता था," नीशा ने कहना जारी रखा — "वे एक ही होटल में रुकते थे — और अक्सर एक ही कमरे में। वह उसे अपने साथ क्लबों में ले जाता था — पार्टियों में — शराब पीने — और रात भर वे साथ होते थे।"

"और सुमन?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी जिज्ञासा थी — "वह क्या करती थी?"

"वह उन सब में मजा लेती थी," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक तृप्ति थी — "वह बहुत मॉडर्न थी — बहुत आज़ाद थी — वह क्लबों में जाती थी — पार्टियाँ करती थी — नाइट आउट करती थी — बिजनेस ट्रिप्स पर जाती थी — और इन सब में वह कई मर्दों से मिली — जिनमें से एक था करण।"

राज ने गहरी साँस ली। उसका दिल धड़क रहा था — पर वह रुकना नहीं चाहता था।

"करण और सुमन एक बिजनेस मीटिंग में मिले," नीशा ने कहना शुरू किया — "करण उस समय एक कंपनी में काम करता था — जो सुमन की कंपनी के साथ काम कर रही थी। वे एक प्रोजेक्ट पर एक साथ काम कर रहे थे — और उसी दौरान उनके बीच कुछ शुरू हुआ — और फिर बढ़ गया — और आखिरकार वे एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए।"

"पर करण शादीशुदा था?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कड़वाहट थी।

"हाँ," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक तृप्ति थी — "पर सुमन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। वह चाहती थी — और उसने ले लिया।"
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 1 hour ago



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