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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#64
छह महीने पहले की बात है। राज और सुमन की शादी को डेढ़ साल हो चुके थे।
राज सुमन से प्यार करता था — बहुत करता था। पर उसके अंदर कुछ और भी था — एक बेचैनी, एक संदेह, एक ऐसी चिंता जो उसे रातों-रात जगाए रखती थी।
वह सोचता था — क्या सुमन सच में मेरी है? क्या वह मुझसे प्यार करती है? या वह मुझसे शादी करके बस एक सुरक्षित जीवन चाहती थी?
यह सवाल उसे दिन-रात परेशान करता था। पर जब भी वह सुमन से पूछना चाहता, तो उसकी हिम्मत नहीं होती थी। वह डरता था — कहीं सच बहुत दर्दनाक न निकले।

एक दिन, नीशा को राज  का फोन आया। नीशा — सुमन की छोटी बहन। वह कहती थी — "राज, मुझसे मिलना है। बहुत ज़रूरी है।"

राज एक कैफे में मिला। नीशा वहाँ पहले से ही बैठी थी — उसके हाथ में एक फाइल थी, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान।

"राज," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक जहर था, "तुम जानते हो सुमन कौन है? असली सुमन? वह नहीं जो तुम्हारे सामने है — वह जो तुमसे छिपी हुई है?"

राज की धड़कनें बढ़ गईं।

"क्या मतलब?" उसने पूछा।

नीशा ने फाइल खोली। उसमें से कुछ तस्वीरें निकालीं — और उन्हें राज के सामने रख दिया।

फोटो में सुमन थी — पर वह सुमन नहीं थी जो राज जानता था।

उसमें सुमन एक क्लब में थी — एक अजनबी की गोद में — उसके हाथ उस आदमी की गर्दन पर थे। दूसरी फोटो में — सुमन एक होटल के कमरे में — उसके बाल बिखरे हुए — उसकी कमीज उतरी हुई — उसके स्तन दिख रहे थे। तीसरी फोटो में — सुमन एक कार में — एक आदमी के साथ — उसका हाथ उस आदमी की जांघ पर था।

"यह सब — शादी से पहले का है," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक तृप्ति थी। "सुमन जितनी सीधी दिखती है — उतनी नहीं है। उसके कई बॉयफ्रेंड थे — और ना जाने कितनों से वह चुदवा चुकी है।"

राज का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने वह फोटो उठाई — उसकी आँखें उस पर टिक गईं — उसका हाथ काँप रहा था।

"यह... यह सब झूठ है," उसने कहा — पर उसकी आवाज़ में पूरा यकीन नहीं था।
"मैं झूठ नहीं बोल रही," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी चमक थी। "यह सच है। और मैं तुम्हें और सच बताऊँगी — अगर तुम सुनना चाहोगे।"

राज और नीशा कैफे में घंटों बैठे रहे।

नीशा ने उसे एक-एक करके सब कुछ बताया — सुमन के बॉयफ्रेंड्स के नाम, उसके क्लब जाने की आदतें, उसके रात को घर से निकल जाने के किस्से, उसके होटलों में जाने की कहानियाँ — और यह भी कि कैसे सुमन ने उसके पिछले बॉयफ्रेंड को राज से पहले मिलने के लिए कहा था।

"सुमन ने मुझसे कहा था," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कड़वाहट थी — "राज तो बस एक अच्छा आदमी है — पर वह बहुत बोरिंग है। मैं उसे चाहती हूँ — पर मुझे उससे अच्छा सेक्स भी चाहिए।"

राज का चेहरा और भी सफेद पड़ गया। उसका दिल दुखने लगा — एक ऐसा दर्द जो उसने कभी महसूस नहीं किया था।

"यह सब तुम क्यों बता रही हो?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में दर्द था — "तुम उसकी बहन हो।"
"मैं उसकी बहन हूँ," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक जहर था — "पर मैं तुम्हें सच जानने का हक देती हूँ। क्योंकि तुम उसके पति हो — और तुम वह नहीं जानते जो तुम्हें जानना चाहिए।"
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - Yesterday, 12:27 PM



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