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अध्याय 15
मेरी तबीयत अचानक इस कदर बिगड़ी कि मुझे लगा जैसे मेरा दम घुट जाएगा। भीतर एक भयंकर उथल-पुथल मच चुकी थी। मैं तेज़ी से पलट गया और बिना कुछ सोचे-समझे वॉशरूम की तरफ भागा।
मेरे कदम ज़मीन पर टिक नहीं रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी खौफनाक धुंध में, हवा में पैर मार रहा हूँ। कानों के पर्दे सुन्न हो चुके थे—बाहर तेज़ म्यूज़िक बज रहा था... मेहमानों का शोर-शराबा, हँसने-बोलने की आवाज़ें... सब कुछ जैसे एक झटके में पूरी तरह बंद हो गया था। चारों तरफ एक सन्नाटा था, जिसमें सिर्फ मेरी भारी होती साँसें चल रही थीं।
मेरी बंद होती आँखों के सामने सिर्फ और सिर्फ अम्मी और विशाल की वही घिनौनी, बेशरम और कामुक गुफ्तगू गूँज रही थी। 'काले सूट के नीचे लाल पैन्टी... गुलाबी टिप्स... जादूगर...' ये शब्द मेरे दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहे थे। मैं पागलों की तरह वॉशरूम में घुसा, कांपते हाथों से दरवाज़ा लॉक किया और सीधा बेसिन पर झुक गया।
अंदर एक ऐसा उबाल आया कि थोड़ी देर पहले बड़े चाव से खाया हुआ वह कबाब... वह लज़ीज़ बिरयानी... सब कुछ मेरे हलक में वापस आ गया। मैं बेसिन पर और नीचे झुका और ज़ोर-ज़ोर से हांफते हुए सब कुछ उगल दिया। ऐसा लगा जैसे मेरे जिस्म ने अम्मी की उस गंदी हकीकत के ज़हर को अपने भीतर कबूल करने से साफ इनकार कर दिया था।
मैं बुरी तरह हांफ रहा था, मेरी छाती धौंकनी की तरह ऊपर-नीचे हो रही थी और लगातार उल्टी करने की वजह से मेरी आँखों से पानी बह रहा था। जब मैंने हिम्मत जुटाकर आईने की तरफ देखा, तो उसमें मेरी आँखें पूरी तरह खून की तरह लाल हो चुकी थीं—शर्म, सदमे और एक अजीब सी वासना के मिले-जुले अहसास से।
अब मैं पूरी तरह जान गया था। यह महज़ फोन पर होने वाला कोई मामूली फ्लर्ट या टाइमपास नहीं था। वह दरिंदा... वह 'विशाल'... यहाँ आ चुका था। इसी वक्त। इसी पल। ठीक हमारे घर के बाहर, गली के घने अंधेरे में अपनी कार की सीट पर बैठा अम्मी के इस तड़पते हुए जिस्म को नोचने का इंतज़ार कर रहा था। और अम्मी... अम्मी ऊपर छत पर अपने उस सुर्ख लाल रंग के अंडरगारमेंट्स और तंग काले सूट के जाल में उसे कैद करने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा चुकी थीं।
इस खौफनाक और बदन में आग लगा देने वाले सच को जानकर मेरे पैरों के बीच का लंड पैंट के अंदर और तेज़ी से कसमसाने लगा था। वह कड़ा होकर पूरी तरह तन चुका था। मेरी आँखों के सामने फिर से अम्मी की वही होश उड़ा देने वाली पिक्चर घूम गई, जिसमें वह आईने की तरफ देखते हुए गहरी झुकी हुई थीं।
उनके वो सुडौल मम्मे उस सुर्ख लाल रंग की ब्रा में से आधे बाहर छलक रहे थे, और उनके वो तीखे गुलाबी टिप्स साफ़ नज़र आ रहे थे। अम्मी का वह कामुक रूप .. इन एहसासों ने मिलकर मेरे भीतर वासना और बेचैनी का एक ऐसा सैलाब ला दिया था जिसे रोकना अब मेरे बस में नहीं था।
और मेरी अम्मी... उससे मिलने... जा रही थीं। यह एक प्लान था। एक मुलाक़ात जो अब होने वाली थी। मैंने अपने चेहरे को तौलिए से रगड़ा। मेरे अंदर का गुस्सा, मेरी बेचारगी को दबा रहा था। एक सर्द, ठंडा कहर मेरी रगों में दौड़ने लगा।
मैंने दरवाज़ा खोला और बाहर निकला।
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विशाल अपनी कार की सीट पर बैठा, फोन की स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए खुद से बुदबुदाता है:
विशाल: "सायमा की 200 से भी ज़्यादा तस्वीरें हैं मेरे पास... लेकिन आयशा के होश उड़ाने के लिए ये 25 तस्वीरें काफी हैं। चलो, इन्हें एक अलग फोल्डर में ट्रांसफर करता हूँ..."
वह एक-एक करके तस्वीरें सिलेक्ट करने लगता है, और उसकी आँखों में हवस की चमक आ जाती है।
विशाल (मुस्कुराते हुए): "वाह सायमा... इस पहली तस्वीर में कैसे पागलों की तरह मुझे चूम रही हो। और इसमें... सीधा मेरी गोद में बैठी हो। अहा! यहाँ तो मेरे हाथ सीधे तुम्हारे मम्मों पर हैं। वैसे... तुम्हारी आयशा के वो भारी और सुडौल मम्मे... उनके आगे तुम्हारे ये छोटे-छोटे नींबू जैसे स्तन तो कुछ भी नहीं हैं। खैर, ये जो एक-दो तस्वीरें हैं जिनमें तुम पूरी तरह नंगी हो, ये तुम्हारी आयशा का कलेजा कंपाने के लिए सबसे बेहतरीन हैं।"
तभी वह एक और खास तस्वीर पर रुकता है, जहाँ उसका अपना अंग पूरी तरह तना हुआ है।
विशाल (अहंकार से हंसते हुए): "और यह रही सबसे बड़ी चाल... मेरा यह 10 इंच का लंबा और मोटा लंड, जिसे तुमने अपने इन नाज़ुक हाथों में थाम रखा है। जब तुम्हारी आयशा इस तस्वीर को देखेगी, तो उसका पूरा बदन कांप उठेगा।"
विशाल मन में अपनी रणनीति तैयार करता है:
विशाल (मन में): "मैं उसे साफ़ कहूँगा—'आयशा, ये रही तुम्हारी सायमा की 25 तस्वीरें। तुमने जो अपनी वो मदहोश कर देने वाली लाल ब्रा वाली सेल्फी भेजी है, उसके इनाम के तौर पर तुम इनमें से अपनी मर्जी की कोई भी 6 तस्वीरें चुनकर अभी डिलीट करवा सकती हो।' कितना सीधा और सस्ता सौदा है!"
वह कार का शीशा थोड़ा नीचे करता है, गली के अंधेरे को देखता है और गहरी साँस लेता है।
विशाल (कुटिलता से मुस्कुराते हुए): "लेकिन 6 तस्वीरें डिलीट करना तो महज़ एक बहाना है... असली मज़ा तो तब आएगा जब वह इन तस्वीरों के बीच मेरे इस 10 इंच के लंड को देखेगी। जब उसकी नजर इस भीमकाय आकार पर पड़ेगी, तो उसका दिमाग सुन्न हो जाएगा। वह आने वाले कल के लिए अभी से मानसिक रूप से तैयार हो जाएगी कि जब यह औजार उसके उस भरे हुए बदन के अंदर जाएगा, तो उसका क्या हाल होगा... वह खुद तड़पकर मेरे आगे घुटने टेक देगी।"
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आयशा हॉल के एक कोने में खड़ी, भीड़ से नज़रें चुराकर अपने फोन को सीने से भींचे हुए गहरे असमंजस में डूबी हैं। उनके मन में एक भयानक युद्ध चल रहा है:
आयशा (मन में बेहद घबराई हुई): "हे खुदा... मैं क्या करूँ? छत पर जाऊँ या नहीं? एक तरफ मेरी बच्ची, मेरी सायमा की इज़्ज़त का सवाल है। अगर मैं ऊपर जाती हूँ, तो उस दरिंदे विशाल के फोन से सायमा की वो छह गंदी तस्वीरें हमेशा के लिए मिटा सकूँगी... अपनी सायमा की जिंदगी का एक हिस्सा सुरक्षित कर पाऊँगी।"
आयशा (आंतरिक डर और कँपकँपी के साथ): "लेकिन... मेरा दूसरा मन मुझे बुरी तरह आगाह कर रहा है। विशाल कोई सीधा सौदा करने नहीं आया है। वह मेरे जिस्म पर और ज़्यादा हक़ जताने की कोशिश करेगा और अपनी हदें पार करेगा। फोन पर उसने साफ़-साफ़ लफ़्ज़ों में कहा था कि वह मुझे इसी तंग काले सूट और अंदर पहने उन सुर्ख लाल रंग के अंडरगारमेंट्स में लाइव देखना चाहता है... इसका सीधा सा मतलब है कि वह छत के उस अंधेरे में मेरे बदन से यह काला सूट पूरी तरह उतार फेंकेगा!"
इस खौफनाक और नग्न सच की कल्पना करते ही आयशा की रीढ़ की हड्डी में एक गर्म सिहरन दौड़ जाती है। वह अपनी आँखें बंद कर लेती है।
आयशा (हाँफते हुए, मन में): "सूट उतारने के बाद क्या वह वहीं रुक जाएगा? या वह उससे भी आगे बढ़ेगा... मेरे उस बेबस बदन को अपनी मर्दानगी के नीचे कुचलने की कोशिश करेगा? क्या मैं उसे रोक पाऊँगी?"
अजीब बात यह थी कि पकड़े जाने के इस भयंकर डर और विशाल के हाथों अपने बदन के नोचे जाने की इस खौफनाक कल्पना ने आयशा के भीतर वासना की एक छुपी हुई आग को भड़का दिया था। बंद आँखों के पीछे जैसे ही उन्होंने खुद को विशाल की बांहों में नंगा महसूस किया, उनके काले सूट के भीतर, उस सुर्ख लाल ब्रा में कैद उनके दोनों गोल मम्मों के गुलाबी निपल्स कड़े होकर पूरी तरह तन गए। उनका अंग-अंग इस अनचाही उत्तेजना से सुलगने लगा था।
आयशा (भारी आवाज़ में खुद से फुसफुसाते हुए): "उफ़्फ़... मेरा बदन इस तरह क्यों रिएक्ट कर रहा है? मुझे वहाँ जाना होगा... अपनी बेटी के लिए... चाहे उसकी कीमत मुझे अपने जिस्म से ही क्यों न चुकानी पड़े..."
और वह दबे पाँव, धड़कते दिल के साथ सीढ़ियों की तरफ कदम बढ़ा देती है।
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म्यूज़िक और लोगों का शोर एक दीवार की तरह मुझसे टकराया। लॉन में अब भी वही जश्न था। लोग हंस रहे थे, खा रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मेरी निगाहें फौरन उस टेबल पर गईं। कुर्सी खाली थी। अम्मी जा चुकी थीं।
मेरा दिल एक पल के लिए रुका। क्या मैं लेट हो गया?
मैं सायमा खाला के पास गया और बहुत ही नॉर्मल सी आवाज़ में पूछा,
“सायमा खाला…..अम्मी को आपने देखा?”
“अरे…वह तेरे अब्बू से बात करने गेट के पास गयी है….नेटवर्क नहीं आ रहा था इसलिए….” सायमा खाला ने जवाब दिया।
सायमा खाला के लफ़्ज़ मेरे कानों में एक तीर की तरह लगे। "अब्बू से बात करने गेट के पास गई है… नेटवर्क नहीं आ रहा था।" यह झूठ था। बिल्कुल साफ़, चिकना झूठ। अम्मी ने यह बहाना बनाया होगा ताकि कोई शक न हो। लेकिन मैं जानता था। मैं सब जानता था।
मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। मैं सायमा खाला को सिर्फ एक मुस्कुराहट दे कर पलट गया, लेकिन अंदर से मैं टूट रहा था। मैं तेज़ी से भीड़ को चीरता हुआ गेट की तरफ बढ़ा। रात की हवा ठंडी थी, लेकिन मेरे जिस्म में एक जलता हुआ बुखार था। हर कदम के साथ, मेरे दिमाग में वह चैट के लफ़्ज़ गूँज रहे थे: "टेरेस पर आ जाओ... सिर्फ 10 मिनट... मैं आपके बहुत करीब हूँ।"
गेट के पास पहुँचा तो वहाँ अम्मी नहीं थीं। सिर्फ एक-दो वॉचमैन खड़े थे, सिगरेट पीते हुए बातें कर रहे थे। उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुराए, लेकिन मैं उनसे कुछ नहीं पूछा। मुझे पता था कि अम्मी यहाँ नहीं होंगी। यह सिर्फ बहाना था। असली जगह तो टेरेस थी।
मैं घर की तरफ दौड़ा। सायमा खाला का घर बड़ा था—दो मंज़िला—और ऊपर टेरेस था। सीढ़ियाँ अंधेरी थीं, सिर्फ एक छोटी सी बल्ब की रोशनी थी। मैं आहिस्ता से ऊपर चढ़ा, अपनी सांस को रोक कर। दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी कि लग रहा था जैसे कोई सुन लेगा।
टेरेस का दरवाज़ा हल्का सा खुला हुआ था। मेरे कदम वहीं ठिठक गए, मैंने खुद को दीवार की ओट में छुपाया और साँस रोककर बाहर देखा। रात का गहरा सन्नाटा और अंधेरा चारों तरफ फैला था, लेकिन शहर की दूर से आती आवारा लाइट्स की मद्धम रोशनी छत पर एक धुंधला सा साया बना रही थी।
वहाँ अम्मी खड़ी थीं। बिल्कुल अकेली। उनके कांपते हाथों में उनका फोन कसकर भींचा हुआ था और वह घबराहट में लगातार अपनी गर्दन घुमाकर इधर-उधर देख रही थीं।
उनके चेहरे के हाव-भाव... उफ़, उसमें एक अजीब सी छटपटाहट, एक गहरी बेचैनी थी, जैसे वह किसी अनचाहे लेकिन बेहद तीव्र इंतज़ार की आग में जल रही हों।
उनका वह तंग काला सूट इस रात के स्याह अंधेरे में उनके गोरे बदन को और भी ज़्यादा नुमाया और गहरा बना रहा था।
फिर, छत के एक कोने के गहरे साए में से एक आवाज़ आई— "आयशा..."
वह आवाज़ कानों में पड़ते ही मेरा पूरा वजूद सख्त हो गया, मेरे पैरों के बीच का अंग पैंट को फाड़ देने की हद तक तन गया। यह आवाज़... वही थी। उसी दरिंदे विशाल की।
अम्मी एक झटके में पीछे पलट गईं, उनकी थमी हुई साँसें तेज़ हो गईं।
"विशाल….." उनके होठों से एक बेबस फुसफुसाहट निकली।
विशाल उस घने साए से बाहर निकलकर सीधे अम्मी के हुस्न के ठीक सामने खड़ा हो गया।
उसने एक टाइट ब्राउन टी-शर्ट और ब्लू जींस पहन रखी थी। वह टी-शर्ट उसके चौड़े, गठीले सीने और मजबूत बाज़ुओं पर इस कदर कसी हुई थी कि उसकी मर्दानगी का उभार साफ झलक रहा था। उसका चेहरा... बिल्कुल साफ़ और क्लीन-शेव्ड था, लेकिन उसकी रंगत गहरी और साँवली थी।
उसके सिर पर घने काले बाल थे, जो रात की इस ठंडी हवा में थोड़े बिखरे हुए थे। उसके सीधे हाथ की कलाई पर एक लाल रंग का धागा बंधा हुआ था। अम्मी उस कसरती और लंबे कद के मर्द को अपने इतने करीब देखकर अंदर तक सिहर उठी थीं, और उनका वह काला सूट उनके भारी होते सीने के साथ ऊपर-नीचे होने लगा था।
“पागल हो गए हो? कोई देख लेता तो?” आयशा इधर-उधर देखते हुए बोलीं।
“कोई नहीं देखेगा, डोंट वरी,” विशाल ने कहा।
“इतना कॉन्फिडेंस?” आयशा ने कहा।
“सब लोग खाने में बिज़ी हैं…और लॉन के ऊपर तो मंडप भी बंधा हुआ है…” उसने कहा।
विशाल आयशा के और करीब आता है। उसकी आवाज़ में एक मद्धम सी शरारत और नज़दीकी है।
"थैंक्स फॉर सेंडिंग योर पिक्चर इन ब्रा एंड पैन्टी, आयशा। जैसा मैंने वादा किया था, अब तुम सायमा की 6 पिक डिलीट कर सकती हो... वैसे, सच कहूं तो तुम उस तस्वीर में बेहद सेक्सी लग रही थीं," उसने अपनी जेब से फोन निकाला और स्क्रीन ऑन कर दी।
उसकी ब्राउन टी-शर्ट से छनती उसके जिस्म की तपती गर्मी आयशा को अपने बेहद पास महसूस हो रही थी, जिससे अम्मी की धड़कनें बेकाबू होकर और तेज़ हो गईं। उसने अपनी नीची निगाहों से विशाल की उंगलियों को स्क्रीन पर चलते देखा, जिससे उसकी सांसें जैसे गले में ही अटक कर रह गईं।
विशाल ने फोन सीधे अम्मी के चेहरे के सामने कर दिया और अपनी भारी आवाज़ में फुसफुसाया, "यह देखो आयशा... तुम्हारा इनाम।"
जैसे ही आयशा की नज़रें फोन की स्क्रीन पर पड़ीं, उनके होठों से एक बेबस चीख निकलते-निकलते रह गई। उन्होंने अपने कांपते हाथों से अपने मुँह को ढँक लिया। वह बुरी तरह चौंक उठी थीं, उनका पूरा बदन मानों बर्फ की तरह जम गया था। स्क्रीन पर सायमा की एक के बाद एक बेहद आपत्तिजनक तस्वीरें चल रही थीं।
आयशा की आँखें फटी की फटी रह गईं जब उन्होंने देखा कि उनकी लाडली सायमा किस कदर उस दरिंदे की बांहों में नग्न होकर अपनी इज़्ज़त गंवा चुकी थी। किसी तस्वीर में सायमा विशाल को पागलों की तरह चूम रही थी, तो किसी में वह उसकी गोद में बेबस बैठी थी। सबसे ज़्यादा झकझोर देने वाली वो तस्वीरें थीं जहाँ सायमा के छोटे-छोटे नींबू जैसे स्तन पूरी तरह नंगे थे और विशाल के मजबूत, साँवले हाथ उन्हें बेरहमी से भींच रहे थे। और उस पूरी कतार के बीच में, विशाल के उस भीमकाय 10 इंच के कड़े और मोटे लंड की तस्वीर भी चमक रही थी, जिसे सायमा ने अपने नाजुक हाथों में थाम रखा था।
आयशा का दिमाग पूरी तरह सुन्न हो चुका था। वह अंदर तक हिल गई थीं कि ये तस्वीरें कितनी ज़्यादा रिवीलिंग थीं। वह अच्छी तरह समझ गईं कि अगर इनमें से एक भी तस्वीर बाहर लीक हो गई या रिश्तेदारों के हाथ लग गई, तो सायमा का भविष्य हमेशा के लिए तबाह हो जाएगा; उसकी जिंदगी और शादी की हर उम्मीद मिट्टी में मिल जाएगी।
विशाल ने आयशा के चेहरे पर उड़ती हवाइयाँ और उनके तंग काले सूट के अंदर कांपते उनके भारी मम्मों के उभार को देखा, तो उसकी हवस और बढ़ गई। वह आयशा के और करीब खिसक आया, उसकी जींस अम्मी के कपड़ों से छूने लगी।
उसने आयशा के कान के पास झुककर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए कहा, "देखा, आयशा? तुम्हारी सिर्फ एक लाल ब्रा वाली सेल्फी के बदले मैं तुम्हें इनमें से कोई भी छह तस्वीरें अभी डिलीट करने का मौका दे रहा हूँ। लेकिन... अगर तुम्हें अपनी बेटी का पूरा भविष्य सुरक्षित चाहिए, तो तुम्हें मेरी हर बात माननी होगी।"
विशाल ने अपनी शातिर मुस्कान के साथ अपना फोन आयशा के ठंडे और कांपते हाथों में थमा दिया। आयशा ने जैसे ही उस फोन को पकड़ा, उसके हाथ और तेज़ी से थरथराने लगे।
विशाल ने आयशा के कंधे पर अपना मजबूत हाथ रखा और उनके कान के बिल्कुल पास झुककर अपनी गर्म, हवस भरी साँसें छोड़ते हुए फुसफुसाया, "लो आयशा, अपनी मर्ज़ी की कोई भी छह तस्वीरें चुनकर अभी डिलीट कर लो... मैं अपना वादा पूरा कर रहा हूँ।"
आयशा अभी उन तस्वीरों को देख ही रही थीं कि विशाल ने उनके कान की लौ को अपनी साँसों से सहलाते हुए आगे कहा, "वैसे... मेरी फेवरिट तो वही है जिसमें सायमा ने मेरे इस १० इंच के कड़े लंड को अपने हाथों में थाम रखा है, और दूसरी वो... जहाँ मेरे ये हाथ उसके उन छोटे-छोटे मम्मों को भींच रहे हैं। देखना, कहीं अपनी फेवरिट तस्वीरें मत डिलीट कर देना।"
यह कहते ही विशाल बेहद चालाकी से आयशा के ठीक पीछे चला गया। आयशा का पूरा ध्यान इस वक्त फोन की स्क्रीन पर था, जहाँ वह भारी तनाव और कशमकश में यह तय करने की कोशिश कर रही थीं कि कौन सी छह तस्वीरें सायमा के भविष्य के लिए सबसे ज़्यादा खतरनाक हैं और जिन्हें पहले डिलीट करना चाहिए।
लेकिन तभी, पीछे खड़े विशाल ने अपने कदम और आगे बढ़ाए और वह आयशा के नितंबों से बिल्कुल सटकर खड़ा हो गया। आयशा की साँसें गले में ही अटक गईं जब उनके उन गोल कूल्हों पर पीछे से विशाल के पैंट के अंदर कड़ा हो चुका वह लंबा और सख्त लंड साफ़ महसूस होने लगा। विशाल की जींस का कपड़ा आयशा के उस तंग काले सूट के कपड़े को चीरता हुआ उनके जिस्म की गहराइयों में अपनी मुकम्मल कड़ाई का अहसास करा रहा था।
आयशा का बदन उस छुअन से अंदर तक सिहर गया। एक तरफ स्क्रीन पर सायमा की नग्न तस्वीरें डिलीट करने का मानसिक दबाव था, और दूसरी तरफ अपनी पीठ और कूल्हों पर उस गैर मर्द की मर्दानगी का वह भयानक उभार... इस कशमकश ने आयशा के भीतर के तापमान को बढ़ा दिया था, और उनके उस काले सूट के नीचे छिपे गुलाबी निपल्स और ज़्यादा कड़े होकर कसमसाने लगे थे। वह हिल भी नहीं पा रही थीं और न ही उस छुअन को मना कर पा रही थीं।
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दीवार की ओट में दुबके, साँस रोके जब मैं इस खौफनाक और मदहोश कर देने वाले मंज़र को देख रहा था, तो मेरे दिमाग में विचारों का एक भयानक तूफ़ान चल रहा था।
दूरी की वजह से मैं वह साफ़-साफ़ नहीं सुन पा रहा था जो विशाल ने अम्मी के कानों में इतनी नज़दीकी से फुसफुसाया था। लेकिन मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं जब मैंने देखा कि विशाल ने अपने फोन की स्क्रीन ऑन करके अम्मी के चेहरे के ठीक सामने की। उस रोशनी में अम्मी का चेहरा साफ़ दिख रहा था—वो बुरी तरह कांप उठी थीं, उनके पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई थी।
मेरे दिमाग में कई गंदे और खौफनाक सवाल कौंधने लगे: आखिर उस फोन में ऐसा क्या था जिसे देखकर अम्मी इस कदर थरथरा गईं? क्या वह अम्मी की ही वो अश्लील तस्वीरें थीं जो उन्होंने थोड़ी देर पहले सुर्ख लाल ब्रा में आईने के सामने झुककर विशाल को भेजी थीं? या फिर वह विशाल के अपने नंगे बदन की तस्वीरें थीं, जिन्हें दिखाकर वह अम्मी को डरा रहा था और अपनी मर्दानगी का जाल बिछा रहा था? अम्मी के चेहरे का खौफ और बदन की कँपकँपी साफ़ बता रही थी कि जो कुछ भी स्क्रीन पर था, वह बेहद खतरनाक और उत्तेजक था।
इसके बाद जो हुआ, उसने तो मेरे जिस्म का पूरा खून ही खौला दिया। विशाल ने वह फोन अम्मी के कांपते हाथों में थमा दिया और खुद घूमकर ठीक अम्मी के पीछे जाकर खड़ा हो गया। अब अम्मी की पूरी पीठ और उनके भारी, गोल कूल्हे विशाल के कसरती बदन और उसके चौड़े सीने से पूरी तरह सट चुके थे।
अम्मी फोन में कुछ बहुत ध्यान से देख रही थीं, शायद तस्वीरें स्क्रॉल कर रही थीं, और इसी का फायदा उठाकर विशाल के दोनों मजबूत, साँवले हाथ अम्मी के तंग काले सूट के ऊपर से उनके पेट और पतली कमर पर टिक गए थे। वह अम्मी को पीछे से अपनी बांहों के घेरे में कस चुका था।
विशाल लगातार अम्मी के कानों के पास अपने होठों को ले जाकर कुछ फुसफुसा रहा था, और उसकी गर्म साँसें अम्मी के गले और गालों को छू रही थीं। अम्मी उस छुअन से बेबस थीं, उनका ध्यान फोन पर था लेकिन उनका बदन पीछे से महसूस हो रही उस कड़क मर्दानगी के दबाव से धीरे-धीरे कसमसा रहा था।
अम्मी की यह लाचारी और विशाल की यह बढ़ती जा रही कामुक ज़्यादती देखकर मेरे पैरों के बीच का हिस्सा पैंट को फाड़ देने की हद तक कड़ा हो चुका था, और मैं चाहकर भी वहाँ से अपनी नज़रें नहीं हटा पा रहा था।
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आयशा कांपते हाथों से विशाल के फोन में उन 25 तस्वीरों को स्क्रॉल कर रही हैं। उनका दिल सीने को फाड़ देने की हद तक धड़क रहा है।
आयशा (मन में बेहद तनाव के साथ): "मुझे सबसे पहले उस तस्वीर को मिटाना होगा... जो सबसे घिनौनी और खतरनाक है..."
वह अपनी कांपती उंगली स्क्रीन पर ले जाती हैं और विशाल के उस 10 इंच के कड़े लंड वाली तस्वीर पर 'Delete' बटन दबा देती हैं।
विशाल (जैसे ही अम्मी बटन दबाती हैं, वह पीछे से अपने पूरे वजन के साथ अपने कड़े लंड को अम्मी के नितंबों के बीच भींचता है और उनके कान के पास फुसफुसाता है): "उफ़्फ़ आयशा... आपने तो मेरी सबसे फेवरिट फोटो ही डिलीट कर दी... इतनी नफ़रत है मेरे इस लंड से?"
आयशा की साँस रुक जाती है, उसका बदन पीछे की उस भयंकर कड़ाई से सिहर उठता है। विशाल उनके कान की लौ को चूमते हुए आगे बोलता है:
विशाल: "तस्वीर तो फोन से डिलीट कर दी तुमने... लेकिन क्या इसे अपने दिमाग से निकाल पाओगी? सच-सच बताना आयशा... क्या यह आकार तुम्हारे पति के लंड से बहुत ज़्यादा बड़ा और मोटा नहीं है?"
आयशा विशाल के इस शर्मनाक सवाल को अनसुना करने की कोशिश करती हैं। वह इस भारी दबाव और शर्म से बचने के लिए थोड़ा आगे बढ़ने की कोशिश करती हैं, लेकिन विशाल की मजबूत पकड़ उन्हें अपनी जगह से हिलने नहीं देती।
आयशा (मन में हांफते हुए): "हे खुदा, यह मुझे जकड़ता जा रहा है... मुझे जल्दी से बाकी तस्वीरें मिटानी होंगी..."
वह तुरंत दूसरी सबसे खतरनाक तस्वीर की तरफ बढ़ती हैं—जहाँ सायमा के स्तन पूरी तरह नंगे नज़र आ रहे थे। जैसे ही वह उस तस्वीर को सिलेक्ट करके 'Delete' का बटन दबाती हैं...
विशाल (एक गहरी और हवस भरी आह भरते हुए): "ओह... तो बेटी के नंगे मम्मों की फोटो भी बर्दाश्त नहीं हुई..."
जैसे ही आयशा की उंगली स्क्रीन से हटती है, विशाल के पेट पर टिके दोनों हाथ ऊपर की तरफ सरकते हैं। वह आयशा के उस तंग काले सूट के ऊपर से ही उनके दोनों भारी, सुडौल और कसमसाते मम्मों को अपने बड़े-बड़े हाथों के शिकंजे में कस लेता है।
आयशा (चौंककर, दबी हुई आवाज़ में): "अह्ह... विशाल... यह क्या कर रहे हो... छोड़ो मुझे..."
विशाल (पीछे से उनके बदन को और ज़ोर से अपने सीने से भींचते हुए, और उनके मम्मों को सूट के ऊपर से ही बेरहमी से दबाते हुए): "शशश... आवाज़ नीचे आयशा... भूल गईं, नीचे सब लोग हैं? अभी तो सिर्फ दो तस्वीरें डिलीट हुई हैं... चार अभी भी बाकी हैं। और तुम्हारी बेटी के मम्मों से कहीं ज़्यादा रसीले और भारी मम्मे तो तुम्हारे हैं... इन्हें बिना छुए मैं तुम्हें तस्वीरें कैसे डिलीट करने दूँ?"
काले सूट के भीतर, उस सुर्ख लाल ब्रा में कैद आयशा के मम्मों के गुलाबी निपल्स विशाल के हाथों की उस आक्रामक छुअन से पूरी तरह पत्थर की तरह कड़े हो जाते हैं। वह चाहकर भी विशाल को धक्का नहीं दे पा रही थीं ।
आयशा के मम्मों पर विशाल के हाथ का शिकंजा कस चुका है, लेकिन वह अपनी पूरी हिम्मत बटोरकर खुद को समेटने की कोशिश करती हैं।
आयशा (मन में घबराते और हांफते हुए): "मुझे रुकना नहीं है... अगर मैं इस वक्त कमज़ोर पड़ी तो सायमा कभी इस दरिंदे के चंगुल से आज़ाद नहीं हो पाएगी। मुझे बाकी की चारों तस्वीरें भी तुरंत डिलीट करनी होंगी, चाहे यह मेरे जिस्म के साथ कुछ भी करे..."
आयशा कांपती उँगलियों से स्क्रीन पर बची हुई चार सबसे खतरनाक तस्वीरों को एक-एक करके सिलेक्ट करने लगती हैं—पहली जिसमें सायमा विशाल को पागलों की तरह चूम रही थी, दूसरी जिसमें सायमा सिर्फ ब्रा और पैन्टी में थी, तीसरी जिसमें वह विशाल की गोद में बैठी थी, और चौथी ऐसी ही एक और आपत्तिजनक तस्वीर। वह तेज़ी से 'Delete' बटन की तरफ बढ़ती हैं।
विशाल (आयशा की इस हड़बड़ाहट को भांपते हुए कुटिलता से मुस्कुराता है और अपने इरादे और आक्रामक कर देता है): "इतनी जल्दी क्या है आयशा... अभी तो असली खेल शुरू हुआ है।"
विशाल अपने दोनों हाथों में से एक हाथ को अम्मी के मम्मे से हटाता है और उसे धीरे-धीरे नीचे सरकाते हुए उनके तंग काले सूट के नीचे डाल देता है। उसका साँवला और खुरदरा हाथ आयशा के सूट के अंदर छिपे उनके बिल्कुल नंगे, रेशम जैसे चिकने और गर्म पेट पर रेंगने लगता है। दूसरा हाथ अभी भी सूट के ऊपर से उनके दूसरे भारी मम्मे को कसकर भींचे हुए है।
आयशा (पेट पर गैर-मर्द के सीधे हाथ का अहसास होते ही अंदर तक सिहर उठती हैं, उनके मुँह से एक दबी हुई आह निकलती है): "अह्ह्ह... उफ़्फ़..."
आयशा (मन में वासना और खौफ में जलते हुए): "या खुदा... इसका हाथ सीधे मेरे नंगे पेट पर घूम रहा है... कितना गर्म हाथ है इसका। मेरा बदन क्यों इस कदर पिघल रहा है? मुझे खुद पर काबू रखना होगा, पर इसकी छुअन मुझे अंधा कर रही है..."
विशाल अब पूरी तरह बहक चुका है। वह अम्मी की गर्दन के पास झुकता है और अपने गीले होठों से उनकी गोरी, सुराहीदार गर्दन को पागलों की तरह चाटने और चूमने लगता है। अम्मी के काले सूट के भीतर, लाल ब्रा में कैद उनके दोनों गुलाबी निपल्स इस दोहरे हमले से कड़े होकर पत्थर जैसे हो चुके हैं।
विशाल (अम्मी के कान की लौ को अपने दाँतों से हल्का सा भींचते हुए बेहद कामुक आवाज़ में फुसफुसाता है): "सुनो आयशा... आज तो तुम सिर्फ अपनी बेटी की खातिर यह सब मजबूरी में बर्दाश्त कर रही हो... और मैं तुम्हें सिर्फ छू रहा हूँ..."
वह अपने हाथ को उनके नंगे पेट पर और नीचे नाभि की तरफ ले जाते हुए अपनी कड़क मर्दानगी को पीछे उनके कूल्हों पर और ज़ोर से दबाता है।
Deepak Kapoor
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