20-06-2026, 01:46 PM
सुबह होते ही सूरज ने पूरे घर को इकट्ठा कर लिया। मुखिया गजराज, चंपा, अंजली, काजल - सबको हॉल में बुलाया गया। सूरज का चेहरा लाल था, आँखें आग उगल रही थीं और हाथ काँप रहे थे।प्रस्तुतकर्ता मैत्री पटेल।
जब सब इकट्ठे हो गए, तो सूरज ने एक-एक करके वो सब कुछ फाड़-फाड़कर रख दिया जो उसने पिछले चार दिनों में छिपकर देखा था। अंजली के साथ बाबा की जोरदार चुदाई, चंपा की मोटी गांड मारना, काजल को रात भर चोदना - हर अश्लील दृश्य बिना कोई शर्म छुपाए, बिना कोई शब्द छोड़ते हुए बता दिया।
मुखिया गजराज सुनते ही कुर्सी से उछल पड़ा। सूरज, क्या माँ चोदते हो,” उसका चेहरा भी गुस्से से लाल हो गया, नसें फूल गईं और आँखें खून से भर गईं। वह काँपते हाथों से उठा और बाबा की तरफ बढ़ा।
“हरामी! कमीने ठग! तेरी माँ को चोदु, बहनचोद साले, तू दूसरों की बीवियों और बेटियों को चोदने के लिए यह सब नाटक रच रहा था? पूजा? प्रेत? भगवान ***? सब झूठ था! तूने मेरी बेटी, मेरी बीवी और मेरी बहू को भी नहीं छोड़ा! साले, तूने हमारे घर की इज्जत को तार-तार कर दिया!” वह गुस्से से उबल रहा था। उसके हाथ-पैर कांप रहे थे। वह किसी भी समय बाबाजी पर हमला कर सकता था। मैत्री की पेशकश।
बाबा कुछ बोलने की कोशिश करते, लेकिन मुखिया ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और जोर से थप्पड़ जड़ दिया।
“चुप! भोसडिके, एक शब्द भी निकाला तो जीभ काट लूँगा! और तेरी गांड मारूंगा वह अलग से।”
मुखिया जानता था कि अगर यह बात गाँव में फैली तो उसकी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। इसलिए उसने तुरंत एक चाल चली। उसने बाबा पर चोरी का आरोप लगा दिया।
“इसने हमारे घर से सोने-चाँदी के गहने और पैसे चुराए हैं! यह एक बड़ा ठग और धोखेबाज है!”
उसने तुरंत गाँव वालों को बुलवा लिया। बाबा को घसीटते हुए गाँव के चौपाल में ले जाया गया। भीड़ इकट्ठी हो गई। मुखिया ने नाटकीय अंदाज में चिल्लाकर कहा,
“देखो भाइयो! यह बाबा नहीं, एक बड़ा ठग और बलात्कारी है! इसने पूजा के नाम पर हमारे घर की औरतों का शोषण करने की कोशिश की है और साथ में चोरी भी की है!”
अब यह तो मुखिया की आवाज थी, गाँव में सभी लोग की नजरो में बहोत बड़ा सन्मानित व्यक्ति था। यह सब सुनते ही,गाँव वालों में आग लग गई। उन्होंने ना आगे देखा न पीछे, न किसी ने कुछ सोचने की कोशिश भी की। अब भीड़ को कैसे दबाये?
“मारो साले, मादरचोद को!” संपादिका फनलवर है।
“कमीने ठग, बहनचोद!”
“औरतों का शोषण करने वाला हरामखोर भेड़िया!”
“नंगा करके पीटो!”
जिसके हाथ में जो आया वह सब लेके बाबाजी की तरफ धसे - लाठियाँ, जूतों और मुक्कों की बौछार शुरू हो गई। बाबा को जमीन पर गिरा दिया गया। उनके कपड़े फट गए, शरीर पर खून के निशान पड़ गए, चेहरा सूज गया। महिलाएँ गालियाँ बक रही थीं और बच्चे पत्थर फेंक रहे थे। उसके शरीर पर सभी जगह मार के निशाँ पड़ने लगे।
आखिरकार गाँव वालों ने उन्हें बुरी तरह पीटा और गाँव की सीमा के बाहर घसीटकर धकेल दिया।
“निकल जा यहाँ से हरामखोर! फिर कभी इस गाँव की तरफ मुँह मत दिखाना! और आया भी तो समज ले तेरी गांड में डंडे घुसायेंगे।”
बाबा लंगड़ाते हुए, शरीर पर चोटों के साथ, फटी धोती पहने गाँव से बाहर निकल गए। चेहरा सूजा हुआ था, होंठ से खून टपक रहा था।
जब वे काफी दूर निकल गए, तो रास्ते में रजनी और गीता दिखाई दिए। उनके साथ गीता का पति भी था। तीनों ने मुझे देखते ही झुककर प्रणाम किया।
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जुड़े रहिये दोस्तों
मैत्री.
जब सब इकट्ठे हो गए, तो सूरज ने एक-एक करके वो सब कुछ फाड़-फाड़कर रख दिया जो उसने पिछले चार दिनों में छिपकर देखा था। अंजली के साथ बाबा की जोरदार चुदाई, चंपा की मोटी गांड मारना, काजल को रात भर चोदना - हर अश्लील दृश्य बिना कोई शर्म छुपाए, बिना कोई शब्द छोड़ते हुए बता दिया।
मुखिया गजराज सुनते ही कुर्सी से उछल पड़ा। सूरज, क्या माँ चोदते हो,” उसका चेहरा भी गुस्से से लाल हो गया, नसें फूल गईं और आँखें खून से भर गईं। वह काँपते हाथों से उठा और बाबा की तरफ बढ़ा।
“हरामी! कमीने ठग! तेरी माँ को चोदु, बहनचोद साले, तू दूसरों की बीवियों और बेटियों को चोदने के लिए यह सब नाटक रच रहा था? पूजा? प्रेत? भगवान ***? सब झूठ था! तूने मेरी बेटी, मेरी बीवी और मेरी बहू को भी नहीं छोड़ा! साले, तूने हमारे घर की इज्जत को तार-तार कर दिया!” वह गुस्से से उबल रहा था। उसके हाथ-पैर कांप रहे थे। वह किसी भी समय बाबाजी पर हमला कर सकता था। मैत्री की पेशकश।
बाबा कुछ बोलने की कोशिश करते, लेकिन मुखिया ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और जोर से थप्पड़ जड़ दिया।
“चुप! भोसडिके, एक शब्द भी निकाला तो जीभ काट लूँगा! और तेरी गांड मारूंगा वह अलग से।”
मुखिया जानता था कि अगर यह बात गाँव में फैली तो उसकी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। इसलिए उसने तुरंत एक चाल चली। उसने बाबा पर चोरी का आरोप लगा दिया।
“इसने हमारे घर से सोने-चाँदी के गहने और पैसे चुराए हैं! यह एक बड़ा ठग और धोखेबाज है!”
उसने तुरंत गाँव वालों को बुलवा लिया। बाबा को घसीटते हुए गाँव के चौपाल में ले जाया गया। भीड़ इकट्ठी हो गई। मुखिया ने नाटकीय अंदाज में चिल्लाकर कहा,
“देखो भाइयो! यह बाबा नहीं, एक बड़ा ठग और बलात्कारी है! इसने पूजा के नाम पर हमारे घर की औरतों का शोषण करने की कोशिश की है और साथ में चोरी भी की है!”
अब यह तो मुखिया की आवाज थी, गाँव में सभी लोग की नजरो में बहोत बड़ा सन्मानित व्यक्ति था। यह सब सुनते ही,गाँव वालों में आग लग गई। उन्होंने ना आगे देखा न पीछे, न किसी ने कुछ सोचने की कोशिश भी की। अब भीड़ को कैसे दबाये?
“मारो साले, मादरचोद को!” संपादिका फनलवर है।
“कमीने ठग, बहनचोद!”
“औरतों का शोषण करने वाला हरामखोर भेड़िया!”
“नंगा करके पीटो!”
जिसके हाथ में जो आया वह सब लेके बाबाजी की तरफ धसे - लाठियाँ, जूतों और मुक्कों की बौछार शुरू हो गई। बाबा को जमीन पर गिरा दिया गया। उनके कपड़े फट गए, शरीर पर खून के निशान पड़ गए, चेहरा सूज गया। महिलाएँ गालियाँ बक रही थीं और बच्चे पत्थर फेंक रहे थे। उसके शरीर पर सभी जगह मार के निशाँ पड़ने लगे।
आखिरकार गाँव वालों ने उन्हें बुरी तरह पीटा और गाँव की सीमा के बाहर घसीटकर धकेल दिया।
“निकल जा यहाँ से हरामखोर! फिर कभी इस गाँव की तरफ मुँह मत दिखाना! और आया भी तो समज ले तेरी गांड में डंडे घुसायेंगे।”
बाबा लंगड़ाते हुए, शरीर पर चोटों के साथ, फटी धोती पहने गाँव से बाहर निकल गए। चेहरा सूजा हुआ था, होंठ से खून टपक रहा था।
जब वे काफी दूर निकल गए, तो रास्ते में रजनी और गीता दिखाई दिए। उनके साथ गीता का पति भी था। तीनों ने मुझे देखते ही झुककर प्रणाम किया।
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जुड़े रहिये दोस्तों
मैत्री.


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