19-06-2026, 11:39 PM
सुमन ने अपना सिर नीचे झुकाया — और संदीप के लंड को अपने मुँह में ले लिया।
उसके गरम, नम मुँह ने उसके लंड को अंदर खींच लिया — पूरा — उसका सिरा उसके गले के पीछे तक चला गया। संदीप की साँसें रुक गईं। उसके हाथ सुमन के बालों में जा गिरे।
"अह्ह्ह..." संदीप कराहा — एक दबी हुई, रुकी हुई कराह।
सुमन ने उसे चूसना शुरू किया — धीरे-धीरे — अपने होठों से उसके लंड को खींचते हुए, अपनी जीभ से उसके सिरे को घुमाते हुए। उसका मुँह उसके लंड के चारों तरफ लिपटा हुआ था — और वह उसे अंदर-बाहर कर रही थी, उसी लय में — जैसे कोई मुँह से कोई गीत गा रहा हो।
"अह्ह्ह... सुमन... तुम... बहुत अच्छा..." संदीप की साँसें फट रही थीं — उसके पैर काँप रहे थे — उसके हाथ सुमन के बालों को जोर से खींच रहे थे।
सुमन ने तेज़ किया। उसके होंठ और तेज़ी से उसके लंड को चूस रहे थे — उसकी जीभ उसके सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी — उसके गले ने उसे और गहरा अंदर खींच लिया।
"मैं... मैं आ रहा हूँ..." संदीप चीखा — एक लंबी, रुकी हुई चीख — "मैं आ रहा हूँ, सुमन..."
सुमन रुकी नहीं। उसने और तेज़ किया — और उसी समय, संदीप का बीज उसके मुँह में आ गया — गरम, गाढ़ा, चिपचिपा — उसके गले के पीछे बह गया। सुमन ने उसे निगल लिया — पूरा — बिना रुके, बिना रुके।
"अह्ह्ह्ह्ह..." संदीप की चीख धीरे-धीरे शांत हुई — और वह ढीला पड़ गया — उसका शरीर थक गया था।
सुमन ने अपना मुँह संदीप के लंड से हटाया — और उसे देखा।
उसकी आँखें अब भी गीली थीं — पर अब वह उस आग में जल रही थी जो अब भी बुझी नहीं थी।
"तुम्हारा लंड," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शांति थी — "बहुत बड़ा था। पर मेरी चूत अब भी प्यासी है।"
संदीप ने अपनी साँसें काबू की — और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई।
"मैडम," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहरी, धीमी भूख थी — "मैं आपको चोदने से नहीं रोक सकता। पर मैं आपको बताना चाहता हूँ — रिजवान ने आपको जो दिया है — वह सिर्फ एक शुरुआत है। अगर आप मुझे चाहेंगी — तो मैं आपको वह दूँगा जो रिजवान नहीं दे सकता।"
सुमन की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई — एक ऐसी चमक जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी — उसकी चूत की आग अब बुझी नहीं थी, बल्कि उसने संदीप के बीज को निगल लिया था — और उसके अंदर एक और आग जल रही थी।
सुमन घर पहुँची — अकेले।
उसके कपड़े गीले थे — उसकी लेगिंग, उसकी कमीज, उसके बाल — सब कुछ। उसकी चूत अब भी धड़क रही थी — और अब संदीप के बीज की गर्मी ने उसे और भी अधिक जला दिया था।
वह बिस्तर पर लेट गई — और उसके दिमाग में रिजवान, इमरान, संदीप और राज — सब एक साथ घूम रहे थे। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह किसे चाहती है — और किसे नहीं।
उसके गरम, नम मुँह ने उसके लंड को अंदर खींच लिया — पूरा — उसका सिरा उसके गले के पीछे तक चला गया। संदीप की साँसें रुक गईं। उसके हाथ सुमन के बालों में जा गिरे।
"अह्ह्ह..." संदीप कराहा — एक दबी हुई, रुकी हुई कराह।
सुमन ने उसे चूसना शुरू किया — धीरे-धीरे — अपने होठों से उसके लंड को खींचते हुए, अपनी जीभ से उसके सिरे को घुमाते हुए। उसका मुँह उसके लंड के चारों तरफ लिपटा हुआ था — और वह उसे अंदर-बाहर कर रही थी, उसी लय में — जैसे कोई मुँह से कोई गीत गा रहा हो।
"अह्ह्ह... सुमन... तुम... बहुत अच्छा..." संदीप की साँसें फट रही थीं — उसके पैर काँप रहे थे — उसके हाथ सुमन के बालों को जोर से खींच रहे थे।
सुमन ने तेज़ किया। उसके होंठ और तेज़ी से उसके लंड को चूस रहे थे — उसकी जीभ उसके सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी — उसके गले ने उसे और गहरा अंदर खींच लिया।
"मैं... मैं आ रहा हूँ..." संदीप चीखा — एक लंबी, रुकी हुई चीख — "मैं आ रहा हूँ, सुमन..."
सुमन रुकी नहीं। उसने और तेज़ किया — और उसी समय, संदीप का बीज उसके मुँह में आ गया — गरम, गाढ़ा, चिपचिपा — उसके गले के पीछे बह गया। सुमन ने उसे निगल लिया — पूरा — बिना रुके, बिना रुके।
"अह्ह्ह्ह्ह..." संदीप की चीख धीरे-धीरे शांत हुई — और वह ढीला पड़ गया — उसका शरीर थक गया था।
सुमन ने अपना मुँह संदीप के लंड से हटाया — और उसे देखा।
उसकी आँखें अब भी गीली थीं — पर अब वह उस आग में जल रही थी जो अब भी बुझी नहीं थी।
"तुम्हारा लंड," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शांति थी — "बहुत बड़ा था। पर मेरी चूत अब भी प्यासी है।"
संदीप ने अपनी साँसें काबू की — और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई।
"मैडम," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहरी, धीमी भूख थी — "मैं आपको चोदने से नहीं रोक सकता। पर मैं आपको बताना चाहता हूँ — रिजवान ने आपको जो दिया है — वह सिर्फ एक शुरुआत है। अगर आप मुझे चाहेंगी — तो मैं आपको वह दूँगा जो रिजवान नहीं दे सकता।"
सुमन की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई — एक ऐसी चमक जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी — उसकी चूत की आग अब बुझी नहीं थी, बल्कि उसने संदीप के बीज को निगल लिया था — और उसके अंदर एक और आग जल रही थी।
सुमन घर पहुँची — अकेले।
उसके कपड़े गीले थे — उसकी लेगिंग, उसकी कमीज, उसके बाल — सब कुछ। उसकी चूत अब भी धड़क रही थी — और अब संदीप के बीज की गर्मी ने उसे और भी अधिक जला दिया था।
वह बिस्तर पर लेट गई — और उसके दिमाग में रिजवान, इमरान, संदीप और राज — सब एक साथ घूम रहे थे। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह किसे चाहती है — और किसे नहीं।



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