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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#61
सुमन ने अपना सिर नीचे झुकायाऔर संदीप के लंड को अपने मुँह में ले लिया।

उसके गरम, नम मुँह ने उसके लंड को अंदर खींच लियापूराउसका सिरा उसके गले के पीछे तक चला गया। संदीप की साँसें रुक गईं। उसके हाथ सुमन के बालों में जा गिरे।
"अह्ह्ह..." संदीप कराहाएक दबी हुई, रुकी हुई कराह।
सुमन ने उसे चूसना शुरू कियाधीरे-धीरेअपने होठों से उसके लंड को खींचते हुए, अपनी जीभ से उसके सिरे को घुमाते हुए। उसका मुँह उसके लंड के चारों तरफ लिपटा हुआ थाऔर वह उसे अंदर-बाहर कर रही थी, उसी लय मेंजैसे कोई मुँह से कोई गीत गा रहा हो।
"अह्ह्ह... सुमन... तुम... बहुत अच्छा..." संदीप की साँसें फट रही थींउसके पैर काँप रहे थेउसके हाथ सुमन के बालों को जोर से खींच रहे थे।
सुमन ने तेज़ किया। उसके होंठ और तेज़ी से उसके लंड को चूस रहे थेउसकी जीभ उसके सिरे पर गोल-गोल घूम रही थीउसके गले ने उसे और गहरा अंदर खींच लिया।
"मैं... मैं रहा हूँ..." संदीप चीखाएक लंबी, रुकी हुई चीख — "मैं रहा हूँ, सुमन..."
सुमन रुकी नहीं। उसने और तेज़ कियाऔर उसी समय, संदीप का बीज उसके मुँह में गयागरम, गाढ़ा, चिपचिपाउसके गले के पीछे बह गया। सुमन ने उसे निगल लियापूराबिना रुके, बिना रुके।
"अह्ह्ह्ह्ह..." संदीप की चीख धीरे-धीरे शांत हुईऔर वह ढीला पड़ गयाउसका शरीर थक गया था।

सुमन ने अपना मुँह संदीप के लंड से हटायाऔर उसे देखा।

उसकी आँखें अब भी गीली थींपर अब वह उस आग में जल रही थी जो अब भी बुझी नहीं थी।

"तुम्हारा लंड," उसने कहाउसकी आवाज़ में एक अजीब सी शांति थी — "बहुत बड़ा था। पर मेरी चूत अब भी प्यासी है।"

संदीप ने अपनी साँसें काबू कीऔर उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक गई।

"मैडम," उसने कहाउसकी आवाज़ में एक गहरी, धीमी भूख थी — "मैं आपको चोदने से नहीं रोक सकता। पर मैं आपको बताना चाहता हूँरिजवान ने आपको जो दिया हैवह सिर्फ एक शुरुआत है। अगर आप मुझे चाहेंगीतो मैं आपको वह दूँगा जो रिजवान नहीं दे सकता।"
सुमन की आँखों में एक अजीब सी चमक गईएक ऐसी चमक जो उसने पहले कभी नहीं देखी थीउसकी चूत की आग अब बुझी नहीं थी, बल्कि उसने संदीप के बीज को निगल लिया थाऔर उसके अंदर एक और आग जल रही थी।

सुमन घर पहुँचीअकेले।

उसके कपड़े गीले थेउसकी लेगिंग, उसकी कमीज, उसके बालसब कुछ। उसकी चूत अब भी धड़क रही थीऔर अब संदीप के बीज की गर्मी ने उसे और भी अधिक जला दिया था।
वह बिस्तर पर लेट गईऔर उसके दिमाग में रिजवान, इमरान, संदीप और राजसब एक साथ घूम रहे थे। उसे समझ नहीं रहा था कि वह किसे चाहती हैऔर किसे नहीं।
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 19-06-2026, 11:39 PM



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