3 hours ago
संदीप रुका नहीं।
उसने अपनी गाड़ी को एक सुनसान रास्ते पर मोड़ लिया — जहाँ कोई रोशनी नहीं थी, कोई आवाज़ नहीं थी। उसने गाड़ी रोकी। वह सुमन की तरफ मुड़ा — और अंधेरे में, उसके हाथ सुमन के स्तनों पर आ गए।
"तुम्हारी चूचियाँ," उसने कहा — उसकी आवाज़ में अब कोई शर्म नहीं थी। "इतनी बड़ी। इतनी गरम।"
उसने उन्हें दबाया — जोर से — उसकी उँगलियाँ उसके निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थीं। सुमन के निप्पल पत्थर की तरह कड़े हो चुके थे।
सुमन की आँखें बंद थीं — पर उसके मुँह से "आह" निकल रही थी। उसने संदीप के सिर को अपनी चूचियों पर दबा लिया — जैसे वह और चाहती हो।
"चूसो मुझे," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था, एक बेचैनी, एक भूख। "चूसो मेरी चूचियाँ।"
संदीप ने अपना मुँह उसके बाएँ स्तन पर रख दिया। उसने उसे पूरा मुँह में ले लिया — निप्पल, आइरोला, सब कुछ — और जोर से चूसा।
"अह्ह्ह्ह..." सुमन चीखी — उसकी पीठ कमान की तरह झुक गई, उसके हाथ संदीप के बालों में जा गिरे।
संदीप ने उसके निप्पल को दाँतों से दबाया — हल्का सा — और फिर चूसा। उसकी जीभ उसके निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी। उसके होंठ उसे खींच रहे थे। उसने दूसरा स्तन पकड़ा — उसे भी चूसा — दोनों को बारी-बारी से, बिना रुके।
सुमन का शरीर काँप रहा था। उसकी चूत अब पानी छोड़ रही थी — इतना कि उसकी लेगिंग पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
संदीप का हाथ अब नीचे की तरफ सरक गया।
उसने सुमन की लेगिंग के अंदर हाथ डाला — बिना पूछे, बिना रुके — और उसकी नंगी चूत को छू लिया।
"तुम्हारी चूत," उसने कहा — उसकी आवाज़ में अब एक गहरी, जंगली भूख थी। "इतनी गीली... इतनी गरम..."
"अंदर डालो," सुमन ने कहा — उसकी आवाज़ में अब कोई सवाल नहीं था। "अंदर डालो अपनी उँगली।"
संदीप ने अपनी उँगली — उसके मध्यमा — सुमन की चूत के अंदर डाल दी। उसकी उँगली बिना किसी रुकावट के अंदर गई — उसकी चूत इतनी गीली थी कि वह फिसल गई। उसने अपनी उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया — धीरे-धीरे — और फिर तेज़।
"अह्ह्ह्ह्ह..." सुमन चीखी — उसके मुँह से एक लंबी, रुकी हुई चीख निकली। "बहुत अच्छा... बहुत अच्छा लग रहा है..."
संदीप ने अपनी दूसरी उँगली भी अंदर डाल दी — अब दो उँगलियाँ उसकी चूत के अंदर — और उन्हें घुमाना शुरू कर दिया। वह उसके अंदर की परतों को छू रहा था — उसके रस को महसूस कर रहा था — और उसकी चूत उसकी उँगलियों को चूस रही थी।
सुमन का शरीर काँप रहा था — उसके पैर फैल गए थे, उसके स्तन हिल रहे थे, उसके हाथ संदीप के बालों में थे — और उसके मुँह से "आह... आह... आह..." निकल रहा था, बिना रुके।
"मुझे चोदो, संदीप," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था — "मुझे चोदो। अब।"
[b]सुमन ने अपना हाथ नीचे बढ़ाया — संदीप की पैंट पर।
[/b]
उसने उसकी पैंट का बटन खोला — जोर से — और ज़िप खींची। उसका लंड बाहर आ गया — काला, मोटा, नसों से भरा हुआ, इतना सख्त कि उसकी नसें बाहर उभर आई थीं — और उसके सिरे से पानी टपक रहा था।
"तुम्हारा लंड," सुमन ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी आश्चर्य थी। "बहुत बड़ा है।"
"तुम चाहोगी तो," संदीप ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी बेचैनी थी। "पर अभी... अभी नहीं।"
"क्यों?" सुमन ने पूछा — उसकी आवाज़ में गुस्सा था।
"क्योंकि," संदीप ने कहा — उसकी आवाज़ में एक शरारत थी, "अगर मैं तुम्हें अभी चोद दूँगा — तो तुम रिजवान को भूल जाओगी। और मुझे तुम याद रखोगी। पर अगर मैं तुम्हें अभी नहीं चोदूँगा — तो तुम मुझे और चाहोगी।"
सुमन की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उसने संदीप के लंड को पकड़ लिया — उसे हाथ में लिया — और धीरे से मसलना शुरू कर दिया।
"तो — मुँह?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में एक शरारत थी।
[b]"हाँ," संदीप ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहरी, रुकी हुई भूख थी। "मुँह।"[/b]
उसने अपनी गाड़ी को एक सुनसान रास्ते पर मोड़ लिया — जहाँ कोई रोशनी नहीं थी, कोई आवाज़ नहीं थी। उसने गाड़ी रोकी। वह सुमन की तरफ मुड़ा — और अंधेरे में, उसके हाथ सुमन के स्तनों पर आ गए।
"तुम्हारी चूचियाँ," उसने कहा — उसकी आवाज़ में अब कोई शर्म नहीं थी। "इतनी बड़ी। इतनी गरम।"
उसने उन्हें दबाया — जोर से — उसकी उँगलियाँ उसके निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थीं। सुमन के निप्पल पत्थर की तरह कड़े हो चुके थे।
सुमन की आँखें बंद थीं — पर उसके मुँह से "आह" निकल रही थी। उसने संदीप के सिर को अपनी चूचियों पर दबा लिया — जैसे वह और चाहती हो।
"चूसो मुझे," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था, एक बेचैनी, एक भूख। "चूसो मेरी चूचियाँ।"
संदीप ने अपना मुँह उसके बाएँ स्तन पर रख दिया। उसने उसे पूरा मुँह में ले लिया — निप्पल, आइरोला, सब कुछ — और जोर से चूसा।
"अह्ह्ह्ह..." सुमन चीखी — उसकी पीठ कमान की तरह झुक गई, उसके हाथ संदीप के बालों में जा गिरे।
संदीप ने उसके निप्पल को दाँतों से दबाया — हल्का सा — और फिर चूसा। उसकी जीभ उसके निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी। उसके होंठ उसे खींच रहे थे। उसने दूसरा स्तन पकड़ा — उसे भी चूसा — दोनों को बारी-बारी से, बिना रुके।
सुमन का शरीर काँप रहा था। उसकी चूत अब पानी छोड़ रही थी — इतना कि उसकी लेगिंग पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
संदीप का हाथ अब नीचे की तरफ सरक गया।
उसने सुमन की लेगिंग के अंदर हाथ डाला — बिना पूछे, बिना रुके — और उसकी नंगी चूत को छू लिया।
"तुम्हारी चूत," उसने कहा — उसकी आवाज़ में अब एक गहरी, जंगली भूख थी। "इतनी गीली... इतनी गरम..."
"अंदर डालो," सुमन ने कहा — उसकी आवाज़ में अब कोई सवाल नहीं था। "अंदर डालो अपनी उँगली।"
संदीप ने अपनी उँगली — उसके मध्यमा — सुमन की चूत के अंदर डाल दी। उसकी उँगली बिना किसी रुकावट के अंदर गई — उसकी चूत इतनी गीली थी कि वह फिसल गई। उसने अपनी उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया — धीरे-धीरे — और फिर तेज़।
"अह्ह्ह्ह्ह..." सुमन चीखी — उसके मुँह से एक लंबी, रुकी हुई चीख निकली। "बहुत अच्छा... बहुत अच्छा लग रहा है..."
संदीप ने अपनी दूसरी उँगली भी अंदर डाल दी — अब दो उँगलियाँ उसकी चूत के अंदर — और उन्हें घुमाना शुरू कर दिया। वह उसके अंदर की परतों को छू रहा था — उसके रस को महसूस कर रहा था — और उसकी चूत उसकी उँगलियों को चूस रही थी।
सुमन का शरीर काँप रहा था — उसके पैर फैल गए थे, उसके स्तन हिल रहे थे, उसके हाथ संदीप के बालों में थे — और उसके मुँह से "आह... आह... आह..." निकल रहा था, बिना रुके।
"मुझे चोदो, संदीप," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था — "मुझे चोदो। अब।"
[b]सुमन ने अपना हाथ नीचे बढ़ाया — संदीप की पैंट पर।
[/b]
उसने उसकी पैंट का बटन खोला — जोर से — और ज़िप खींची। उसका लंड बाहर आ गया — काला, मोटा, नसों से भरा हुआ, इतना सख्त कि उसकी नसें बाहर उभर आई थीं — और उसके सिरे से पानी टपक रहा था।
"तुम्हारा लंड," सुमन ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी आश्चर्य थी। "बहुत बड़ा है।"
"तुम चाहोगी तो," संदीप ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी बेचैनी थी। "पर अभी... अभी नहीं।"
"क्यों?" सुमन ने पूछा — उसकी आवाज़ में गुस्सा था।
"क्योंकि," संदीप ने कहा — उसकी आवाज़ में एक शरारत थी, "अगर मैं तुम्हें अभी चोद दूँगा — तो तुम रिजवान को भूल जाओगी। और मुझे तुम याद रखोगी। पर अगर मैं तुम्हें अभी नहीं चोदूँगा — तो तुम मुझे और चाहोगी।"
सुमन की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उसने संदीप के लंड को पकड़ लिया — उसे हाथ में लिया — और धीरे से मसलना शुरू कर दिया।
"तो — मुँह?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में एक शरारत थी।
[b]"हाँ," संदीप ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहरी, रुकी हुई भूख थी। "मुँह।"[/b]


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)