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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#60
संदीप रुका नहीं।

उसने अपनी गाड़ी को एक सुनसान रास्ते पर मोड़ लियाजहाँ कोई रोशनी नहीं थी, कोई आवाज़ नहीं थी। उसने गाड़ी रोकी। वह सुमन की तरफ मुड़ाऔर अंधेरे में, उसके हाथ सुमन के स्तनों पर गए।
"तुम्हारी चूचियाँ," उसने कहाउसकी आवाज़ में अब कोई शर्म नहीं थी। "इतनी बड़ी। इतनी गरम।"
उसने उन्हें दबायाजोर सेउसकी उँगलियाँ उसके निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थीं। सुमन के निप्पल पत्थर की तरह कड़े हो चुके थे।
सुमन की आँखें बंद थींपर उसके मुँह से "आह" निकल रही थी। उसने संदीप के सिर को अपनी चूचियों पर दबा लियाजैसे वह और चाहती हो।
"चूसो मुझे," उसने कहाउसकी आवाज़ में एक आदेश था, एक बेचैनी, एक भूख। "चूसो मेरी चूचियाँ।"
संदीप ने अपना मुँह उसके बाएँ स्तन पर रख दिया। उसने उसे पूरा मुँह में ले लियानिप्पल, आइरोला, सब कुछऔर जोर से चूसा।
"अह्ह्ह्ह..." सुमन चीखीउसकी पीठ कमान की तरह झुक गई, उसके हाथ संदीप के बालों में जा गिरे।
संदीप ने उसके निप्पल को दाँतों से दबायाहल्का साऔर फिर चूसा। उसकी जीभ उसके निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी। उसके होंठ उसे खींच रहे थे। उसने दूसरा स्तन पकड़ाउसे भी चूसादोनों को बारी-बारी से, बिना रुके।
सुमन का शरीर काँप रहा था। उसकी चूत अब पानी छोड़ रही थीइतना कि उसकी लेगिंग पूरी तरह गीली हो चुकी थी।

संदीप का हाथ अब नीचे की तरफ सरक गया।

उसने सुमन की लेगिंग के अंदर हाथ डालाबिना पूछे, बिना रुकेऔर उसकी नंगी चूत को छू लिया।

"तुम्हारी चूत," उसने कहाउसकी आवाज़ में अब एक गहरी, जंगली भूख थी। "इतनी गीली... इतनी गरम..."

"अंदर डालो," सुमन ने कहाउसकी आवाज़ में अब कोई सवाल नहीं था। "अंदर डालो अपनी उँगली।"

संदीप ने अपनी उँगलीउसके मध्यमासुमन की चूत के अंदर डाल दी। उसकी उँगली बिना किसी रुकावट के अंदर गईउसकी चूत इतनी गीली थी कि वह फिसल गई। उसने अपनी उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू कियाधीरे-धीरेऔर फिर तेज़।

"अह्ह्ह्ह्ह..." सुमन चीखीउसके मुँह से एक लंबी, रुकी हुई चीख निकली। "बहुत अच्छा... बहुत अच्छा लग रहा है..."

संदीप ने अपनी दूसरी उँगली भी अंदर डाल दीअब दो उँगलियाँ उसकी चूत के अंदरऔर उन्हें घुमाना शुरू कर दिया। वह उसके अंदर की परतों को छू रहा थाउसके रस को महसूस कर रहा थाऔर उसकी चूत उसकी उँगलियों को चूस रही थी।

सुमन का शरीर काँप रहा थाउसके पैर फैल गए थे, उसके स्तन हिल रहे थे, उसके हाथ संदीप के बालों में थेऔर उसके मुँह से "आह... आह... आह..." निकल रहा था, बिना रुके।
"मुझे चोदो, संदीप," उसने कहाउसकी आवाज़ में एक आदेश था — "मुझे चोदो। अब।"

[b]सुमन ने अपना हाथ नीचे बढ़ायासंदीप की पैंट पर।
[/b]

उसने उसकी पैंट का बटन खोलाजोर सेऔर ज़िप खींची। उसका लंड बाहर गयाकाला, मोटा, नसों से भरा हुआ, इतना सख्त कि उसकी नसें बाहर उभर आई थींऔर उसके सिरे से पानी टपक रहा था।

"तुम्हारा लंड," सुमन ने कहाउसकी आवाज़ में एक अजीब सी आश्चर्य थी। "बहुत बड़ा है।"

"तुम चाहोगी तो," संदीप ने कहाउसकी आवाज़ में एक अजीब सी बेचैनी थी। "पर अभी... अभी नहीं।"

"क्यों?" सुमन ने पूछाउसकी आवाज़ में गुस्सा था।

"क्योंकि," संदीप ने कहाउसकी आवाज़ में एक शरारत थी"अगर मैं तुम्हें अभी चोद दूँगातो तुम रिजवान को भूल जाओगी। और मुझे तुम याद रखोगी। पर अगर मैं तुम्हें अभी नहीं चोदूँगातो तुम मुझे और चाहोगी।"

सुमन की आँखों में एक अजीब सी चमक गई। उसने संदीप के लंड को पकड़ लियाउसे हाथ में लियाऔर धीरे से मसलना शुरू कर दिया।

"तोमुँह?" उसने पूछाउसकी आवाज़ में एक शरारत थी।
[b]"हाँ," संदीप ने कहाउसकी आवाज़ में एक गहरी, रुकी हुई भूख थी। "मुँह।"[/b]
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 3 hours ago



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