19-06-2026, 03:12 PM
अब आगे..
दोनों ने फिर एक दूसरे को देखा और खिलखिला कर हंस पड़े। रिशा ने राजू को एक चुम्मा दिया और कॉल रिसीव किया। "नमस्ते?" "हैलो दीदी!!...मैं उमा!!"
रिशा -”उमा!!!...कैसी हो? बड़े दिनों बाद याद किया?...."
उमा-“हां दीदी, आज ही मेरा वीज़ा आया है। मैं अगले महीने ऑस्ट्रेलिया जा रही हूं!!"
रिशा - “वाह!!!!...कांगो यारर...अब तो तेरे वहां भी आशिक होंगे...हेहे!!"
उमा-“कहां दीदी... मैं वैसे भी वहां काम में बिजी रहूंगी। कॉरपोरेट वर्ल्ड में तो बस चूतिये ही भरे होते हैं। आपको तो पता ही है।" उमा नटखट अंदाज में बोली.
रिशा - “चुप कर शैतान। कहीं मेरे देवर ने सुन लिया तो?" राजू के कान खड़े हो गए, वो भाभी की शैतानी भरी बातें सुनने को सरक कर उसके पास आ गया। रिशा ने फोन स्पीकर मोड पर कर दिया।
"अरे.... तो उसे भी कुछ सिखा देना ना..." उमा चहकी। रिशा खिलखिला उठी. "हाहाहाहा!!! चुप करो और ये बताओ यहां कब आ रही हो?. 5 साल हो गए तुझे देखे हुए.. अब तो काफी बड़ी हो गई होगी"
![[Image: IMG-7389.jpg]](https://i.ibb.co/B2g57Qxw/IMG-7389.jpg)
"हां दीदी... मुझे भी जिज्जू से मिलने का मन हो रहा है।" रिशा राजू की तरफ पीठ की बात कर रही थी। राजू ने आगे बढ़ कर रिशा से खुद को चिपका लिया। रिशा अचानक स्पर्श से सिहर उठी और तेज सिस्कारी लेते हुए बोली... "सस्स्स्स्स.... ते-तेरे जीजाजी तो यहां नहीं है। व-वो के-किसी काम से बाहर हो गए हैं"। राजू के हाथ किसी नाग की तरह रिशा के संगमरमर जैसे जिस्म पर लिपट गए। जवान जिस्मो की गरमाहट ने दोनों को बड़ी राहत दी। रिशा अब काफी आराम से बात करने लगी।
“उमा बोली "ओह.. तो फिर मैं बोर हो जाऊंगी ना.."
"क्यों?? राजू हैं ना.." उसने फ़ोन पर मुस्कुराते हुए कहा
"राजू?? वो तो बच्चा है"
ना रे!! बहुत बड़ा हो गया है वो"। राजू ने धीरे से अपना लंड रिशा की गांड में घुसा दिया। बड़ी मुश्किल से उसने अपनी कराह को काबू किया।
"क्या सच है?" उमा ने पूछा.
राजू ने हल्की कमर पीछे करके एक सटिक वार किया तो पूरा लंड गांड में जड़ तक धंस गया। चुनकी जाँघें चिपकी हुई थी, छेद टाइट लग रहा था। रिशा बड़ी मुश्किल से सिस्की को रोके हुए बोली। "ह-हा-हां काफ़ी बड़ा है" "
क्या?" उमा ने पूछा.
"राजू काफ़ी बड़ा हो चुका है पगली... और जवान भी।" उधर राजू ने हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिये।
“सच!! फिर तो मजा आएगा छेड़ने में''
सोच ले. आह! वो छोड़ेगा नही तुझे"
"अच्छा दीदी मैं फ़ोन रखती हूँ। कल शाम तक आ जाऊँगी।
ठीक है?" "ओ-ओ-ओक्क!!! कल शाम.. बब्ब-ब-बाय!!!" कह कर रिशा ने राजू को खींच कर अपने गरम बदन से सटा लिया।
राजू ने मौका पाते ही दनादन शॉट्स लगाना शुरू किया और उसके स्तनो को दोनों हाथों में थाम लिया। रिशा ने भी उसकी हथेलियों को ऊपर से पकड़ लिया और स्तनो की मालिश करवाते हुए गांड पेलवाने लगी।
![[Image: IMG-7597.jpg]](https://i.ibb.co/JFkx8VjT/IMG-7597.jpg)
शॉट्स तेज और तगड़े पड रहे थे. थोड़ी ही देर में कमरे में अब जाँघों और नितंबो के टकराने की आवाज़ फिर गूंजने लगी। दोनों एक दूसरे से नाग की तरह लिपटे हुए थे। राजू ने उसके स्तनो को कस कर थामा हुआ था। लगतार पड़ती ठोकरो से रिशा के नितंब गुलाबी पड़ गए थे। मदहोशी में राजू ने उसे अपने ऊपर खींच लिया। अब वो रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में आ गई।
![[Image: IMG-7575.jpg]](https://i.ibb.co/m5z2qnbn/IMG-7575.jpg)
रिशा ने हाथ पीछे राजू के सीने पर टीका दीये और सहारा लेकर अपने नितंबो से उसकी जाँघों पर मर्दन करती हुई सिस्कारियो के साथ लंड गांड में लेने लगी। मुलायम गद्देदार चूतडो की रगड से राजू भी मतवाला हो गया। उसने हथेलियों में रिशा की गांड के मुलायम मांस को थाम लिया और जोर जोर से मालिश करने लगा। बीच
बीच में वो गांड पे हल्की थपकियां भी देता जा रहा था। रिशा कुछ ही देर में जोश में आ गई, और उछल उछल कर गांड मरवाने लगी। स्पीड ज्यादा नही थी लेकिन शॉट्स तगड़े पड रहे थे। काफ़ी देर तक इसी स्थिति में खेल चलता रहा।
एक आखिरी शॉट के साथ रिशा लंड पे पूरा बैठ गई। लंड जड़ तक गांड में घुसा हुआ फड़फड़ा रहा था। रिशा पीठ के बाल राजू के ऊपर लेट गई और अपना सिर उसके कंधे पे टीका लिया। ऐसा करने से उसकी कमर में तनाव आ गया और उसके भरे हुए स्तन भी काफी तन गए। राजू ने रिशा के गाल चूमते हुए उसके निपल्स से खेलना शुरू कर दिया। वो उसके निपल्स को उगलियों के बीच हल्के हल्के मसल रहा था। फ़िर दोनों निपल्स को खींच कर लम्बा कर देता। काफ़ी देर तक यूं ही चलता रहा। उसकी इस हरकत ने और गांड में फंसे गरम लौडे ने रिशा का बुरा हाल कर दिया था। वो तेज़ सिस्कारियाँ ले रही थी और अपने होठों को भी चबा रही थी। "स्स्स!!!!! आअहह!!! ऊऊहह!!! और करो ना देवरजी! आह!! ओह!! बहुत मजा आ रहा है हाआइइइइ! हां...ऊहह मां!!! मैं पागल हो जाऊंगी देवरजी!!! उम्म्ह!! म्म्म्ह्ह्ह्फ्फ्म्म!!!!!" राज ने जोश में आ कर उसके स्तनो को जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया, मानो उनका सारा रस ही निचोड़ लेगा। उसका लंड तो पूरे जोश में था ही. रिशा अचानक हुए जोशीले हमले के लिए तैयार न थी। चूचियों की मालिश के नशे में अपने चरम पर पहुंच गई और अपना रस छोड़ दिया।
चूत का रस, रिशा के नितंबों से होकर राजू की जाँघों, लंड और टट्टो को भीगोता चला गया। राजू ने जोश में आकर रिशा की गुलाबी चुचियों पर थप्पड़ बरसा दिये।
आआआहह!!!!!!!" रिशा चिल्लाई और जोश में आकर उठ कर सीधी बैठ गई। उसके हाथ आगे बिस्तर पर टिकाये और गांड उछाल उछाल कर वापस मरवाने लगी। क्या अद्भुत नजारा था। रिशा की गोरी चिकनी गांड और उसमें अंदर बाहर सरकता हुआ राजू का मोटा तगड़ा लंड। राजू एकटक उसकी मलाईदार गांड को निहार रहा था। मुलायम मांस के टुकड़ों की थिरकन उसे उर जोश दिला रही थी। लंड यूं अंदर बाहर हो रहा था मानो मक्खन में छुरी. वो कभी नितंबों पे हाथ फिरता तो कभी एक चुटकी काट देता। जैसी ही वो चुटकी करता रिशा की गांड टाइट हो जाती और रिशा नये जोश में आकर और तेजी से उछलने लगती। राजू अब पूरे जोश में आ गया और रिशा की गांड पे हर शॉट पर एक तमाचा मार देता। रिशा भी मीठे दर्द भरी सिस्कारियाँ लेती और फिर दोगुने उत्साह से लंड पे गिर जाती। काफ़ी देर ऐसा ही चलता रहा। रिशा के नितंबों का रंग अब लाल पड़ चूका था। वो काफ़ी थक भी गई थी। उसकी सांसें उखड़ रही थी। मनोनमाद के चरम को अब तक वो कई बार छू चुकी थी। लेकिन फिर भी वो रुकने का नाम नही ले रही थी।
राजू ने ऊपर आ कर उसे अपने आगोश में ले लिया और पलटा। अब रिशा पेट के बाल बिस्तर पर हो गई और राजू उसके ऊपर। कड़क लंड के दबाव ने रही सही कसर भी पूरी कर दी। राजू दंड पेलने की स्थिति में आ गया और कमर से हल्के हल्के लम्बे शॉट देने लगा। रिशा हर शॉट पर कराह रही थी... "आह!! आह!! आह! आह! आह!! म्म्ह!! म्म्ह!! ओह्ह!! आआह!!!हाऐइ!! हां!!! हैई!!! ओह्ह!! ओह्ह राजू!!" राजू उसकी आहों से और जोश में शॉट लगाने लगा। जिस्म फिर से तबाही मचाने लगे। कमरे में फिर आहों और ठोकरो की आवाज गूंजने लगी। राजू बस झड़ने ही वाला था. रिशा को उसका लंड थोड़ा फूलता सा महसूस हुआ, तो वो झट से पलटी। लंड गांड से बाहर निकल आया, और रिशा ने अपने रसीले होठों की कैद में कर लिया। वो पूरी तन्मयता से लिंग का रसस्वादन कर रही थी। जल्दी ही राजू अपने चरम पर पहुंच गया, और रिशा के मुंह में गरम खोलते वीर्य की नदी बह गई।
रिशा ने भी वीर्य की एक बूँद बर्बाद की और घूँट भर-भर कर वीर्य पीने लगी। इस बार रिशा ने कोई चूक नहीं की और बिना बर्बाद किए सारा वीर्य पीती चली गई। वो प्यार भरे अंदाज़ में लंड चूस रही थी जैसे कतरा कतरा वीर्य निचोड़ लेगी। राजू के पैरो में कम्पन होना शुरू हो गया तब जा कर रिशा ने उसे छोड़ा। फिर उसके स्थिर पडते लिंग पर रस भर चुम्बन करती हुई, उसकी नाभि से होती हुई सीने पे गई। फिर राजू को एक अलसाये अंदाज़ में चुम्बन दिया। राज भी हल्के हल्के चूमने लगा. थकन के कारण दोनों नग्न जिस्म एक दूसरे की गर्माहट में समा गए। अब तक रात ढल चुकी थी। राजू ने हाथ बढ़ा कर फोन लिया और डिनर होम डिलीवरी ऑर्डर किया। जब तक खाना आया तब तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे। खाना खाने के बाद थोड़ी बातें शुरू हुईं।
"कल उमा आ जाएगी तो फिर यूं साथ भी नहीं रह पाएंगे।" राजू ने मायुस होते हुए कहा।
"कुछ नहीं होगा ऐसा। मेरे पास इक आइडिया है"।
"क्या?"
दोनों ने फिर एक दूसरे को देखा और खिलखिला कर हंस पड़े। रिशा ने राजू को एक चुम्मा दिया और कॉल रिसीव किया। "नमस्ते?" "हैलो दीदी!!...मैं उमा!!"
रिशा -”उमा!!!...कैसी हो? बड़े दिनों बाद याद किया?...."
उमा-“हां दीदी, आज ही मेरा वीज़ा आया है। मैं अगले महीने ऑस्ट्रेलिया जा रही हूं!!"
रिशा - “वाह!!!!...कांगो यारर...अब तो तेरे वहां भी आशिक होंगे...हेहे!!"
उमा-“कहां दीदी... मैं वैसे भी वहां काम में बिजी रहूंगी। कॉरपोरेट वर्ल्ड में तो बस चूतिये ही भरे होते हैं। आपको तो पता ही है।" उमा नटखट अंदाज में बोली.
रिशा - “चुप कर शैतान। कहीं मेरे देवर ने सुन लिया तो?" राजू के कान खड़े हो गए, वो भाभी की शैतानी भरी बातें सुनने को सरक कर उसके पास आ गया। रिशा ने फोन स्पीकर मोड पर कर दिया।
"अरे.... तो उसे भी कुछ सिखा देना ना..." उमा चहकी। रिशा खिलखिला उठी. "हाहाहाहा!!! चुप करो और ये बताओ यहां कब आ रही हो?. 5 साल हो गए तुझे देखे हुए.. अब तो काफी बड़ी हो गई होगी"
![[Image: IMG-7389.jpg]](https://i.ibb.co/B2g57Qxw/IMG-7389.jpg)
"हां दीदी... मुझे भी जिज्जू से मिलने का मन हो रहा है।" रिशा राजू की तरफ पीठ की बात कर रही थी। राजू ने आगे बढ़ कर रिशा से खुद को चिपका लिया। रिशा अचानक स्पर्श से सिहर उठी और तेज सिस्कारी लेते हुए बोली... "सस्स्स्स्स.... ते-तेरे जीजाजी तो यहां नहीं है। व-वो के-किसी काम से बाहर हो गए हैं"। राजू के हाथ किसी नाग की तरह रिशा के संगमरमर जैसे जिस्म पर लिपट गए। जवान जिस्मो की गरमाहट ने दोनों को बड़ी राहत दी। रिशा अब काफी आराम से बात करने लगी।
“उमा बोली "ओह.. तो फिर मैं बोर हो जाऊंगी ना.."
"क्यों?? राजू हैं ना.." उसने फ़ोन पर मुस्कुराते हुए कहा
"राजू?? वो तो बच्चा है"
ना रे!! बहुत बड़ा हो गया है वो"। राजू ने धीरे से अपना लंड रिशा की गांड में घुसा दिया। बड़ी मुश्किल से उसने अपनी कराह को काबू किया।
"क्या सच है?" उमा ने पूछा.
राजू ने हल्की कमर पीछे करके एक सटिक वार किया तो पूरा लंड गांड में जड़ तक धंस गया। चुनकी जाँघें चिपकी हुई थी, छेद टाइट लग रहा था। रिशा बड़ी मुश्किल से सिस्की को रोके हुए बोली। "ह-हा-हां काफ़ी बड़ा है" "
क्या?" उमा ने पूछा.
"राजू काफ़ी बड़ा हो चुका है पगली... और जवान भी।" उधर राजू ने हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिये।
“सच!! फिर तो मजा आएगा छेड़ने में''
सोच ले. आह! वो छोड़ेगा नही तुझे"
"अच्छा दीदी मैं फ़ोन रखती हूँ। कल शाम तक आ जाऊँगी।
ठीक है?" "ओ-ओ-ओक्क!!! कल शाम.. बब्ब-ब-बाय!!!" कह कर रिशा ने राजू को खींच कर अपने गरम बदन से सटा लिया।
राजू ने मौका पाते ही दनादन शॉट्स लगाना शुरू किया और उसके स्तनो को दोनों हाथों में थाम लिया। रिशा ने भी उसकी हथेलियों को ऊपर से पकड़ लिया और स्तनो की मालिश करवाते हुए गांड पेलवाने लगी।
![[Image: IMG-7597.jpg]](https://i.ibb.co/JFkx8VjT/IMG-7597.jpg)
शॉट्स तेज और तगड़े पड रहे थे. थोड़ी ही देर में कमरे में अब जाँघों और नितंबो के टकराने की आवाज़ फिर गूंजने लगी। दोनों एक दूसरे से नाग की तरह लिपटे हुए थे। राजू ने उसके स्तनो को कस कर थामा हुआ था। लगतार पड़ती ठोकरो से रिशा के नितंब गुलाबी पड़ गए थे। मदहोशी में राजू ने उसे अपने ऊपर खींच लिया। अब वो रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में आ गई।
![[Image: IMG-7575.jpg]](https://i.ibb.co/m5z2qnbn/IMG-7575.jpg)
रिशा ने हाथ पीछे राजू के सीने पर टीका दीये और सहारा लेकर अपने नितंबो से उसकी जाँघों पर मर्दन करती हुई सिस्कारियो के साथ लंड गांड में लेने लगी। मुलायम गद्देदार चूतडो की रगड से राजू भी मतवाला हो गया। उसने हथेलियों में रिशा की गांड के मुलायम मांस को थाम लिया और जोर जोर से मालिश करने लगा। बीच
बीच में वो गांड पे हल्की थपकियां भी देता जा रहा था। रिशा कुछ ही देर में जोश में आ गई, और उछल उछल कर गांड मरवाने लगी। स्पीड ज्यादा नही थी लेकिन शॉट्स तगड़े पड रहे थे। काफ़ी देर तक इसी स्थिति में खेल चलता रहा।
एक आखिरी शॉट के साथ रिशा लंड पे पूरा बैठ गई। लंड जड़ तक गांड में घुसा हुआ फड़फड़ा रहा था। रिशा पीठ के बाल राजू के ऊपर लेट गई और अपना सिर उसके कंधे पे टीका लिया। ऐसा करने से उसकी कमर में तनाव आ गया और उसके भरे हुए स्तन भी काफी तन गए। राजू ने रिशा के गाल चूमते हुए उसके निपल्स से खेलना शुरू कर दिया। वो उसके निपल्स को उगलियों के बीच हल्के हल्के मसल रहा था। फ़िर दोनों निपल्स को खींच कर लम्बा कर देता। काफ़ी देर तक यूं ही चलता रहा। उसकी इस हरकत ने और गांड में फंसे गरम लौडे ने रिशा का बुरा हाल कर दिया था। वो तेज़ सिस्कारियाँ ले रही थी और अपने होठों को भी चबा रही थी। "स्स्स!!!!! आअहह!!! ऊऊहह!!! और करो ना देवरजी! आह!! ओह!! बहुत मजा आ रहा है हाआइइइइ! हां...ऊहह मां!!! मैं पागल हो जाऊंगी देवरजी!!! उम्म्ह!! म्म्म्ह्ह्ह्फ्फ्म्म!!!!!" राज ने जोश में आ कर उसके स्तनो को जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया, मानो उनका सारा रस ही निचोड़ लेगा। उसका लंड तो पूरे जोश में था ही. रिशा अचानक हुए जोशीले हमले के लिए तैयार न थी। चूचियों की मालिश के नशे में अपने चरम पर पहुंच गई और अपना रस छोड़ दिया।
चूत का रस, रिशा के नितंबों से होकर राजू की जाँघों, लंड और टट्टो को भीगोता चला गया। राजू ने जोश में आकर रिशा की गुलाबी चुचियों पर थप्पड़ बरसा दिये।
आआआहह!!!!!!!" रिशा चिल्लाई और जोश में आकर उठ कर सीधी बैठ गई। उसके हाथ आगे बिस्तर पर टिकाये और गांड उछाल उछाल कर वापस मरवाने लगी। क्या अद्भुत नजारा था। रिशा की गोरी चिकनी गांड और उसमें अंदर बाहर सरकता हुआ राजू का मोटा तगड़ा लंड। राजू एकटक उसकी मलाईदार गांड को निहार रहा था। मुलायम मांस के टुकड़ों की थिरकन उसे उर जोश दिला रही थी। लंड यूं अंदर बाहर हो रहा था मानो मक्खन में छुरी. वो कभी नितंबों पे हाथ फिरता तो कभी एक चुटकी काट देता। जैसी ही वो चुटकी करता रिशा की गांड टाइट हो जाती और रिशा नये जोश में आकर और तेजी से उछलने लगती। राजू अब पूरे जोश में आ गया और रिशा की गांड पे हर शॉट पर एक तमाचा मार देता। रिशा भी मीठे दर्द भरी सिस्कारियाँ लेती और फिर दोगुने उत्साह से लंड पे गिर जाती। काफ़ी देर ऐसा ही चलता रहा। रिशा के नितंबों का रंग अब लाल पड़ चूका था। वो काफ़ी थक भी गई थी। उसकी सांसें उखड़ रही थी। मनोनमाद के चरम को अब तक वो कई बार छू चुकी थी। लेकिन फिर भी वो रुकने का नाम नही ले रही थी।
राजू ने ऊपर आ कर उसे अपने आगोश में ले लिया और पलटा। अब रिशा पेट के बाल बिस्तर पर हो गई और राजू उसके ऊपर। कड़क लंड के दबाव ने रही सही कसर भी पूरी कर दी। राजू दंड पेलने की स्थिति में आ गया और कमर से हल्के हल्के लम्बे शॉट देने लगा। रिशा हर शॉट पर कराह रही थी... "आह!! आह!! आह! आह! आह!! म्म्ह!! म्म्ह!! ओह्ह!! आआह!!!हाऐइ!! हां!!! हैई!!! ओह्ह!! ओह्ह राजू!!" राजू उसकी आहों से और जोश में शॉट लगाने लगा। जिस्म फिर से तबाही मचाने लगे। कमरे में फिर आहों और ठोकरो की आवाज गूंजने लगी। राजू बस झड़ने ही वाला था. रिशा को उसका लंड थोड़ा फूलता सा महसूस हुआ, तो वो झट से पलटी। लंड गांड से बाहर निकल आया, और रिशा ने अपने रसीले होठों की कैद में कर लिया। वो पूरी तन्मयता से लिंग का रसस्वादन कर रही थी। जल्दी ही राजू अपने चरम पर पहुंच गया, और रिशा के मुंह में गरम खोलते वीर्य की नदी बह गई।
रिशा ने भी वीर्य की एक बूँद बर्बाद की और घूँट भर-भर कर वीर्य पीने लगी। इस बार रिशा ने कोई चूक नहीं की और बिना बर्बाद किए सारा वीर्य पीती चली गई। वो प्यार भरे अंदाज़ में लंड चूस रही थी जैसे कतरा कतरा वीर्य निचोड़ लेगी। राजू के पैरो में कम्पन होना शुरू हो गया तब जा कर रिशा ने उसे छोड़ा। फिर उसके स्थिर पडते लिंग पर रस भर चुम्बन करती हुई, उसकी नाभि से होती हुई सीने पे गई। फिर राजू को एक अलसाये अंदाज़ में चुम्बन दिया। राज भी हल्के हल्के चूमने लगा. थकन के कारण दोनों नग्न जिस्म एक दूसरे की गर्माहट में समा गए। अब तक रात ढल चुकी थी। राजू ने हाथ बढ़ा कर फोन लिया और डिनर होम डिलीवरी ऑर्डर किया। जब तक खाना आया तब तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे। खाना खाने के बाद थोड़ी बातें शुरू हुईं।
"कल उमा आ जाएगी तो फिर यूं साथ भी नहीं रह पाएंगे।" राजू ने मायुस होते हुए कहा।
"कुछ नहीं होगा ऐसा। मेरे पास इक आइडिया है"।
"क्या?"


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