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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#89
कुछ देर के लिए राजू रिशा की गोद में सिर रख कर सुस्ताने लगा। सोया हुआ राजू रिशा को बड़ा ही प्यारा लग रहा था। उसने अपनी गर्दन झुकाते हुए राजू के चेहरे पर एक चुम्बन जड़ दिया! राजू की विशाल छाती पर वो धीरे से अपनी उँगलिया घुमामे लगी!


[Image: IMG-7462.jpg] 
सोए हुए राजू का लंड अंगड़ाई लेने लगा। थोड़ा नीचे खिसकते हुए रिशा ने राजू का लंड दुबारा मुँह में भर लिया। वो अब क्षण भर भी इस लंड से दूर नहीं रहना चाहती थी। राजू फिर उत्तेजित हो उठा. रिशा लंड की जड़ को जीभ से चाटते हुए तनाव में आते देखने लगी। वो फिर नाग की तरह सर उठा कर लहराने लगा।

 
उधर राजू भी उत्तेजना में आकर रिशा को अपनी बाहों के जकड़ लिया और उसके होठों को चूमने लगा। फ़िर उसने रिशा को धीरे से बिस्तर पर लिटाया और उसके भग्नाशा पर टूट पड़ा। उसकी जीभ गुलाबी पंखुड़ियों के बीच फंसी हुई भाग को छेड़ रही थी।

  [Image: IMG-7414.jpg]
रिशा के पैर वापस कांपने लगे और मदहोशी में उसने राजू के लिंग को वापस मुँह में ले लिया और पूरी जान लगा कर चुसना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियाँ राजू की जाँघों में चुभ रही थी। राजू ने भी जवाब में उसकी कोमल मांसल गांड को जोर से काट लिया। रिशा चिल्ला उठी लेकिन रुकी नही। उसने इठला कर अपने निताम्बो को लहरा के राजू को निमंत्रण दिया। राजू ने गद्देदार मांस को हाथों में भर लिया और वापस उन्हें चूमने लगा। फिर छेद पर जिभ से ठोकर करते हुए जिभ अंदर डाल दी। दी। रिशा उन्माद में पागल राजू के लंड को गले तक भरे हुए पड़ी हुई थी। उसकी चीखे लंड से टकरा कर एक मादक सा कंपन पैदा करती तो राजू सिहर उठता। रिशा मानो लंड से अपनी जान लेना चाहती हो। वो उसके टट्टो को उंगलियों से सहला रही थी तभी, राजू के लंड के एक और वार से वो लड़खड़ा गई और उसके बगल में गिर गई, लेकिन लंड अभी भी उसके मुँह में ही था और राजू भी चुत से चिपक गया था। अब दोनों अगल बगल लेटे 69 कर रहे थे. ये बड़ी

  
आरामदायक स्थिति थी जिसे दोनों को और मजा आने लगा। उत्तेजना में राजू रिशा के ऊपर आ गया. रिशा सीधी लेटी हुई थी और राजू उसके गले तक समा गया। राजू ने धीरे से कमर उठा कर लंड को बाहर निकाला तो रिशा की जान में जान आई। संभालने का मौका दिए बिना ही राज ने अपना लंड रिशा के मुँह में जड़ तक पेल दिया। फिर उसने रिशा के मुँह में दनादन तेज़ शॉट लगाने शुरू कर दिए जैसे वो कोई चुत थी। रिशा बस उक्क!! उक्क! उक्क! उक्क!! की आवाज ही कर पा रही थी. पुरा मुँह राजू के लंड से चिपके रस से भर गया था।

  [Image: IMG-7401.jpg]
राजू थोड़ी देर ऐसे ही पेलता रहा और फिर थक कर बगल में लेट गया। मौका सही था. रिशा झट से लंड पे सवार हो गई। उसकी दहकती दरार में जैसे ही गरम लोहा दाखिल हुआ उसने एक राहत भारी सांस ली। उसने राजू के मजबूत सीने पर अपने हाथ टिकाए और पंजो के बाल बैठ कर गांड उछाल उछाल कर चूत पेलवाने लगी।

राजू भी उसके चुचिओ के साथ खेलने लगा जिसमें उसकी मस्ती दोगुनी हो उठी। चूत और लंड के मिलन से फच फच की आवाज़ गूँज रही थी।


  
थोड़ी देर में ही रिशा की गति अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। अब टकराव उसकी गांड और राजू की जाँघों के बीच हो रहा था। कमरे में गीली जांघों और मुलायम मांसल गांड के टकराने का संगीत गूंज रहा। रिशा की आहें तेज़ हो चुकी थी। राजू भी मदहोशी में तेज़ आहें भर रहा था। तभी राजू ने रिशा को नितम्बो से थाम लिया और दनादन कमर हिलाते हुए रिशा को पेलने लगा। ऐसे में रिशा तैयार न थी और वो झड़ने लगी। उसके नाख़ून राजू के सीने को खुरचने लगे। ऑर्गेज्म इतना तेज़ था कि उसके पैरो की अंगलिया तक ऐंठ गई। वो लगतार काँप रही थी पर राजू को उसपे दया नहीं आई और वो शॉट पेलता रहा। लंड से फच फच की आवाज रिशा को पागल बना रही थी। रिशा एक बार फिर झड़ गई। उसे लगा कि उसकी जान जाने वाली है। चूत की दीवारें बेइंतहा घर्षण से आग जैसी गर्म हो चुकी थीं। उसने ऊपर से हटने की कोशिश की तो लंड चूत से बाहर आ गया। रिशा ने राहत की सांस ली ही थी कि राजू ने रिशा को अपने लंड पर वापस खींच लिया। रिशा थोड़ा लड़खड़ायी और लंड पर गिर पड़ी। उसकी एक दर्दनाक चीख निकल पड़ी। राजू को भी असीम कसाव का अनुभव हुआ और वो भी चीखने लगा। रिशा और राजू दोनो की नज़र लंड पे गयी तो पाया की चूत के बजाय लंड गांड में घुस गया था, वो भी जड़ तक। रिशा को जैसे ही पूरी स्थिति का ज्ञान हुआ वो जोर से बोली.... "आआहह!!!...हायईई...जाआलिम्म...मार ही डाला आज मुझे..!!!"। लेकिन हिलने की कोशिश भी ना की। अचानक हुई हरकत से दोनों ही सन्न रह गए थे। दोनों थोड़ी देर यूं ही पड़े हुए सांस लेते रहे। राजू ने रिशा को खींच कर अपने से चिपका लिया और बोला "मुझे माफ़ कर दो भाभी... मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। मैं बस थोड़ा बहक गया था।"

  
राज की घबराई आवाज़ सुनकर उसने उसे दिलासा दिया। रिशा ने उसे चूमते हुए ना में सर हिलाया और धीरे धीरे कमर हिला कर गांड में लंड लेने लगी। दोनों एक दूसरे से चिपके हुए हौले हौले हिलने लगे। जब गांड थोड़ी ढीली पड़ी तो स्पीड अपने आप बढ़ गई। अब राजू ने लंबे समय तक आराम से शॉट लगाना शुरू किया ताकि वो गांड का पूरा मजा ले सके। रिशा भी कमर की हल्की हरकत से लंड गांड में ले रही थी। राजू ने फिर रिशा को स्थिर कर लिया और लम्बे धीमे शॉट्स लगाने लगा। धीरे से अंदर घुसता लौड़ा उसके जज्बातो में आग लगा देता। वो जब भी तेजी दिखाती राजू उसके मम्मो को दबोच कर वापस स्थिर कर देता। काफ़ी देर तक ऊपर रहने के कारण रिशा अब थक चुकी थी, लेकिन वासना का नशा यूं चढ़ा हुआ था कि दोनों बहकते रहना चाहते थे। रिशा निडाल होकर उसके बगल में गिर पड़ी। राजू भी उठ कर बैठ गया. रिशा ने अपना सर उसकी गोद में रख लिया और लंड को प्यार करने लगी। उसकी आंखें बंद थीं और चेहरे पर एक मुस्कान खेल रही थी। तभी सेलफोन की घंटी बजेगी। दोनों चौंक कर इधर उधर देखने लगे मानो कि चोरी पकड़ी गई हो जैसे!
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 19-06-2026, 03:08 PM



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