19-06-2026, 12:12 AM
रिजवान ने अपना एक हाथ ऊपर बढ़ाया — उसने सुमन के स्तन को पकड़ लिया, जोर से दबाया, और उसे अपने मुँह में ले लिया — जिससे वह अब भी उसकी चूत चाट रहा था। उसकी जीभ एक साथ दो काम कर रही थी — एक तरफ चूत को चूसना, दूसरी तरफ स्तन को चूसना।
सुमन चीखी — एक लंबी, रुकी हुई चीख, जो उसके गले में फँस गई और फिर बाहर निकली।
"अह्ह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह्ह... बहुत... बहुत..." वह पूरा वाक्य नहीं बोल पाई।
रिजवान ने अपनी जीभ को और अंदर धकेल दिया — अब वह उसकी चूत के भीतर की गर्मी को महसूस कर रहा था, उसके रस को पी रहा था जैसे कोई शराब पी रहा हो। उसके होंठ उसके लेबिया के चारों तरफ लिपट गए — उन्हें चूसा, खींचा, और फिर से चूसा।
सुमन का शरीर काँपने लगा — पहले हल्के से, फिर पूरी तरह से। उसके पैर फैल गए, उसके पैर की उँगलियाँ मुड़ गईं, उसके स्तन हिल रहे थे — उसके शरीर में लहरें उठ रही थीं जो वह रोक नहीं सकती थी।
"मैं आ रही हूँ... रिजवान... मैं आ रही हूँ..."
रिजवान ने अपनी एक उँगली — उसके बाएँ हाथ की — सुमन की चूत के अंदर डाल दी, जबकि उसकी जीभ अभी भी उसके भीतर थी। उसकी उँगली अंदर गई — उसके अंदर की परतों को छूती हुई — और वहाँ उसने उसे घुमाया। अंदर-बाहर, अंदर-बाहर, उसी लय में — जीभ और उँगली, एक साथ, दो अलग-अलग गतियाँ।
सुमन का शरीर ऐंठ गया — उसके पेट की मांसपेशियाँ सख्त हो गईं, उसकी पीठ कमान की तरह झुक गई, उसका मुँह खुला, उसकी आँखें बंद हो गईं।
"अह्ह्ह्ह्ह्ह..." वह चीखी — एक लंबी, रुकी हुई चीख, जो उसके गले से निकली और फिर रुक गई — और फिर एक दूसरी, और एक तीसरी — और वह फट गई।
उसकी चूत ने रिजवान की जीभ और उँगली को अंदर खींच लिया — उसके रस ने उसके मुँह को भर दिया, उसका शरीर थरथरा उठा, उसके हाथ रिजवान के बालों को और जोर से खींच रहे थे, उसके पैर काँप रहे थे, उसकी साँसें नहीं आ रही थीं।
रिजवान ने रुका नहीं। उसने उसे तब तक चूसा जब तक कि उसकी चूत की धड़कन शांत नहीं हो गई। उसने अपनी जीभ को धीरे-धीरे बाहर निकाला — और अपने होंठों को चाटा, जिसमें सुमन का रस था।
"तुम्हारा स्वाद," उसने कहा। "बहुत मीठा है।"
सुमन चीखी — एक लंबी, रुकी हुई चीख, जो उसके गले में फँस गई और फिर बाहर निकली।
"अह्ह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह्ह... बहुत... बहुत..." वह पूरा वाक्य नहीं बोल पाई।
रिजवान ने अपनी जीभ को और अंदर धकेल दिया — अब वह उसकी चूत के भीतर की गर्मी को महसूस कर रहा था, उसके रस को पी रहा था जैसे कोई शराब पी रहा हो। उसके होंठ उसके लेबिया के चारों तरफ लिपट गए — उन्हें चूसा, खींचा, और फिर से चूसा।
सुमन का शरीर काँपने लगा — पहले हल्के से, फिर पूरी तरह से। उसके पैर फैल गए, उसके पैर की उँगलियाँ मुड़ गईं, उसके स्तन हिल रहे थे — उसके शरीर में लहरें उठ रही थीं जो वह रोक नहीं सकती थी।
"मैं आ रही हूँ... रिजवान... मैं आ रही हूँ..."
रिजवान ने अपनी एक उँगली — उसके बाएँ हाथ की — सुमन की चूत के अंदर डाल दी, जबकि उसकी जीभ अभी भी उसके भीतर थी। उसकी उँगली अंदर गई — उसके अंदर की परतों को छूती हुई — और वहाँ उसने उसे घुमाया। अंदर-बाहर, अंदर-बाहर, उसी लय में — जीभ और उँगली, एक साथ, दो अलग-अलग गतियाँ।
सुमन का शरीर ऐंठ गया — उसके पेट की मांसपेशियाँ सख्त हो गईं, उसकी पीठ कमान की तरह झुक गई, उसका मुँह खुला, उसकी आँखें बंद हो गईं।
"अह्ह्ह्ह्ह्ह..." वह चीखी — एक लंबी, रुकी हुई चीख, जो उसके गले से निकली और फिर रुक गई — और फिर एक दूसरी, और एक तीसरी — और वह फट गई।
उसकी चूत ने रिजवान की जीभ और उँगली को अंदर खींच लिया — उसके रस ने उसके मुँह को भर दिया, उसका शरीर थरथरा उठा, उसके हाथ रिजवान के बालों को और जोर से खींच रहे थे, उसके पैर काँप रहे थे, उसकी साँसें नहीं आ रही थीं।
रिजवान ने रुका नहीं। उसने उसे तब तक चूसा जब तक कि उसकी चूत की धड़कन शांत नहीं हो गई। उसने अपनी जीभ को धीरे-धीरे बाहर निकाला — और अपने होंठों को चाटा, जिसमें सुमन का रस था।
"तुम्हारा स्वाद," उसने कहा। "बहुत मीठा है।"


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