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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#51
रात के 11 बजे। राज ने वीडियो कॉल किया।
सुमन बिस्तर पर थी। लाइट धीमी। उसने एक पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी। अंदर कुछ नहीं।
"हैलो जान," राज मुस्कुराया। होटल के कमरे में था। उसने भी अपनी कमीज उतार रखी थी। उसका लंड उसकी पैंट के अंदर सख्त हो रहा था।
"हैलो," सुमन ने कहा। उसकी आवाज़ में तकलीफ थी।
"क्या हुआ?" राज ने पूछा।
"तुम याद रहे हो। बहुत।"
"मैं भी। कल रहा हूँ। शाम तक।"
"कल बहुत दूर है," सुमन ने अपनी नाइटी उतार दी। नंगी। उसकी चूचियाँ कैमरे में। उसका चेहरा अंधेरे में।
राज की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपनी पैंट खोल दी। उसका लंड बाहर गया। खड़ा। बिना छुएवह हवा में था।
"मैं तुम्हें देख रहा हूँ," राज ने कहा।
"देखो," सुमन ने कहा। उसने अपनी चूचियाँ पकड़ीं। दबाईं। निप्पल मरोड़े। अपनी जीभ से निप्पल चाटा।
राज ने अपना लंड पकड़ लिया। हिलाने लगा।
"अपनी चूत दिखाओ," उसने कहा।
सुमन ने अपनी जाँघें खोल दीं। चूत। नंगी। गीली। लैबिया फूले हुए। बीच की दरार से पानी निकल रहा था।
"कितनी गीली है?" राज ने पूछा।
"बहुत। चार दिन से तुम्हारे लंड के लिए तरस रही है।"
"क्या कर रही थी चार दिन में?"
"सोच रही थी। तुम्हारे बारे में। उस रात के बारे में। क्लब वाली रात।"
राज की हरकतें तेज़ हो गईं। उसका लंड फड़क रहा था।
"क्या सोच रही थी?"
"सोच रही थीकाश वहाँ तुम होते। तो मैं उन दोनों के साथ चली जाती। उनके कमरे में। क्या होता वहाँ?"
राज की आँखों में आग थी। उसने अपना लंड और तेज़ी से हिलाया।
"क्या होता, बता," उसने कहा।
सुमन ने अपनी चूत में तीन उँगलियाँ डाल दीं। तेज़ी से। पागलों की तरह।
"वह मुझे ले जाते। मेरे कपड़े उतारते। एक मेरा मुँह चोदता। एक मेरी चूत। दोनों एक साथ। मैं चीखती। पर कोई नहीं सुनता। वे मुझे रात भर चोदते। सुबह तक मैं उनकी राँड बन जाती।"
राज कराह उठा। "साली राँड... मेरी राँड..."
"हाँ तुम्हारी। सिर्फ तुम्हारी। लेकिन आज रातमैं अपनी हूँ।"
सुमन ने अपनी उँगलियाँ और गहरी डाल दीं। अपनी चूत को चीरती हुई। उसकी चूत ने उँगलियों को चूसा। पानी टपका।
राज का लंड फटने वाला था। वह हिल रहा थापूरा शरीर हिल रहा था।
"मैं... रहा... हूँ..."
" जाओ... मेरे अंदर... भर दो मुझे..."
राज चीखा। उसका बीज हवा में छूटाउसके पेट पर, उसके हाथ पर, कैमरे के लेंस पर। सफेद धब्बे।
सुमन भी फट गई। उसकी चूत ने उसकी उँगलियों को बाहर फेंका। पानी की एक और लहर। बिस्तर की चादर अब पूरी तरह भीग चुकी थी।
वह कराहती रही। "राज... राज... मैं..."
शब्द नहीं निकले।
दोनों चुप हो गए। स्क्रीन पर एक दूसरे को देख रहे थे। साँसें सामान्य हो रही थीं।
राज बोला — "सुनो। मैंने तुम्हारे लिए एक गिफ्ट भेजा है। कल जाएगा।"
सुमन की आँखें चमक गईं। "क्या?"
"सरप्राइज़। पसंद आएगा। बहुत।"
वह मुस्कुराई। थकी हुई, तृप्त, और फिर से भूखी।
"मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगी। गिफ्ट का भी। तुम्हारा भी।"
राज ने कहा — "गुड नाइट, मेरी राँड।"
"गुड नाइट, मेरे लंड।"
कॉल डिस्कनेक्ट हो गई।
सुमन अकेली थी। बिस्तर भीगा हुआ था। उसका शरीर दर्द कर रहा थाभूख से। कल राज रहा था। कल गिफ्ट रहा था।
वह सोच में पड़ गई। क्या होगा कल? क्या गिफ्ट है? लंड? कोई खिलौना? कोई नया आदमी?
वह मुस्कुराई। अंधेरे में।
"कल," उसने कहा"कल मैं फिर से जलूँगी। और इस बारपूरी तरह।"
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 18-06-2026, 11:36 PM



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