18-06-2026, 11:34 PM
शाम के 2 बजे थे। सुमन नहा चुकी थी। उसने नए कपड़े पहने — वही जो उसने राज के लिए खरीदे थे। काले रंग का बिकनी सेट। ऊपर से एक पारदर्शी साड़ी। अंदर कुछ नहीं। बस वह बिकनी — जो उसकी चूचियों को उठाए हुए थी, उनके बीच की दरार को गहरा कर रही थी। और नीचे — बिकनी का निचला हिस्सा — जो उसकी चूत पर खिंच रहा था। उसके लैबिया का आकार साफ दिख रहा था।
वह आईने के सामने खड़ी हुई। मोबाइल उठाया।
नया इंस्टाग्राम अकाउंट — नाम: "अकेली_रानी_100"
उसने अपनी तस्वीरें लीं। पहली — आईने में। पूरा बदन। चूचियाँ। गांड। गीली जरूरत भरी आँखें।
दूसरी — बिस्तर पर लेटी हुई। एक हाथ से अपनी चूची दबाती हुई। दूसरा हाथ कैमरे के लिए अलग।
तीसरी — पीछे से। गांड हवा में उठी हुई। बिकनी की डोरी गांड की दरार में धंसी हुई।
उसने सब अपलोड कर दीं। पब्लिक अकाउंट।
पाँच मिनट में पचास लाइक्स। बीस कमेंट्स।
"क्या माल है" "दिखाओ और" "डीएम देखो" "कितनी गरम हो बे"
सुमन ने सब इग्नोर किया। उसे सिर्फ एक चीज़ चाहिए थी — ध्यान। देखा जाना। वांछित होना।
शाम के 5 बजे। सुमन ने टेलीग्राम खोला। एक ग्रुप में उसने लिखा — "कोई वीडियो कॉल पर मेरे साथ टाइम पास करेगा? बिना फेस दिखाए। बिना नाम।"
एक मिनट में दस रिक्वेस्ट।
उसने रैंडमली एक चुन लिया। नाम था "नो_नेम_69"।
कॉल कनेक्ट हुई।
दूसरी तरफ एक आदमी था। उसका चेहरा दिखता था — गोरा, दाढ़ी, 30 के आसपास। वह अपनी कमीज उतार चुका था। उसकी छाती पर बाल थे। उसकी पैंट खुली थी। उसका लंड बाहर था — खड़ा हुआ। काला मोटा। नसों से भरा। उसका सिरा चमक रहा था — पानी से।
सुमन ने अपना चेहरा नहीं दिखाया। उसने सिर्फ अपनी गर्दन से नीचे का हिस्सा दिखाया।
"नमस्ते," उस आदमी ने कहा। उसकी आवाज़ भारी थी।
"नमस्ते," सुमन ने कहा। उसने अपनी बिकनी का ऊपरी हिस्सा खोल दिया।
उसके स्तन बाहर आ गए। बड़े। गोरे। निप्पल कड़े। पसीने से चमकते हुए।
उस आदमी की साँसें तेज़ हो गईं। "तुम... कमाल हो।"
सुमन मुस्कुराई। उसने अपनी चूचियाँ दोनों हाथों में पकड़ लीं। दबाया। उठाया। अपने निप्पलों को अपनी उँगलियों से मरोड़ा।
"अह्ह्ह..." वह कराही।
उस आदमी ने अपना लंड पकड़ लिया। हिलाना शुरू कर दिया। ऊपर-नीचे। तेज़ी से।
"तुम अपनी चूत दिखाओ। जल्दी।"
सुमन ने अपनी बिकनी नीचे उतारी। उसकी नंगी चूत। शेव्ड। गीली। लैबिया फूले हुए। बीच का छेद — बंद था। पर पानी टपक रहा था।
उसने अपनी उँगली उसके ऊपर फेरी। अपने रस को इकट्ठा किया। फिर अपने निप्पल पर लगा दिया। फिर चूसा। अपनी ही उँगली।
"तुम पागल हो," उस आदमी ने कहा। "बिल्कुल पागल।"
"हाँ," सुमन ने कहा। "पागल हूँ। चार दिन से लंड नहीं मिला।"
उस आदमी की आँखें लाल हो गईं। उसने अपना लंड और तेज़ी से हिलाया। उसके अंडकोष ऊपर-नीचे हो रहे थे।
"अपनी चूत में उँगली डालो," उसने आदेश दिया।
सुमन ने डाल दी। एक। फिर दो। तीन।
तीन उँगलियाँ। उसकी चूत ने उन्हें चूस लिया। अंदर तक। उसने उन्हें घुमाया। बाहर निकाला। फिर अंदर। तेज़ी से।
"हाँ... चोदो मुझे... अपने लंड से चोदो... मैं तुम्हारी राँड हूँ..." उसकी आवाज़ फट रही थी।
उस आदमी की साँसें अब सिर्फ घरघराहट थीं। उसका लंड फड़क रहा था। उसके अंडकोष सिकुड़ रहे थे।
"मैं आ रहा हूँ... तुम्हारे चेहरे पर... तुम्हारी चूचियों पर..."
"हाँ... आ जाओ... भर दो मुझे..."
उस आदमी ने जोर से कराहा। उसका बीज हवा में छूटा — उसके पेट पर, उसकी छाती पर, उसकी गर्दन पर। सफेद। गरम। चिपचिपा।
उसी सेकंड — सुमन की चूत ने उसकी उँगलियों को बाहर निकाल दिया। पानी का फव्वारा। कैमरे पर। उसके हाथ से लेकर उसके पेट तक। बिस्तर पर गिरा। वह कराहती रही।
"अह्ह्ह... राज... राज... मैं तुम्हारे बिना मर जाऊँगी..."
उसने कुछ पलों के लिए आँखें बंद कर लीं। जब खोलीं — कॉल डिस्कनेक्ट हो चुकी थी।
उस आदमी का अकाउंट गायब था। नाम बदल चुका था। सुमन अकेली थी।
फिर से।
वह आईने के सामने खड़ी हुई। मोबाइल उठाया।
नया इंस्टाग्राम अकाउंट — नाम: "अकेली_रानी_100"
उसने अपनी तस्वीरें लीं। पहली — आईने में। पूरा बदन। चूचियाँ। गांड। गीली जरूरत भरी आँखें।
दूसरी — बिस्तर पर लेटी हुई। एक हाथ से अपनी चूची दबाती हुई। दूसरा हाथ कैमरे के लिए अलग।
तीसरी — पीछे से। गांड हवा में उठी हुई। बिकनी की डोरी गांड की दरार में धंसी हुई।
उसने सब अपलोड कर दीं। पब्लिक अकाउंट।
पाँच मिनट में पचास लाइक्स। बीस कमेंट्स।
"क्या माल है" "दिखाओ और" "डीएम देखो" "कितनी गरम हो बे"
सुमन ने सब इग्नोर किया। उसे सिर्फ एक चीज़ चाहिए थी — ध्यान। देखा जाना। वांछित होना।
शाम के 5 बजे। सुमन ने टेलीग्राम खोला। एक ग्रुप में उसने लिखा — "कोई वीडियो कॉल पर मेरे साथ टाइम पास करेगा? बिना फेस दिखाए। बिना नाम।"
एक मिनट में दस रिक्वेस्ट।
उसने रैंडमली एक चुन लिया। नाम था "नो_नेम_69"।
कॉल कनेक्ट हुई।
दूसरी तरफ एक आदमी था। उसका चेहरा दिखता था — गोरा, दाढ़ी, 30 के आसपास। वह अपनी कमीज उतार चुका था। उसकी छाती पर बाल थे। उसकी पैंट खुली थी। उसका लंड बाहर था — खड़ा हुआ। काला मोटा। नसों से भरा। उसका सिरा चमक रहा था — पानी से।
सुमन ने अपना चेहरा नहीं दिखाया। उसने सिर्फ अपनी गर्दन से नीचे का हिस्सा दिखाया।
"नमस्ते," उस आदमी ने कहा। उसकी आवाज़ भारी थी।
"नमस्ते," सुमन ने कहा। उसने अपनी बिकनी का ऊपरी हिस्सा खोल दिया।
उसके स्तन बाहर आ गए। बड़े। गोरे। निप्पल कड़े। पसीने से चमकते हुए।
उस आदमी की साँसें तेज़ हो गईं। "तुम... कमाल हो।"
सुमन मुस्कुराई। उसने अपनी चूचियाँ दोनों हाथों में पकड़ लीं। दबाया। उठाया। अपने निप्पलों को अपनी उँगलियों से मरोड़ा।
"अह्ह्ह..." वह कराही।
उस आदमी ने अपना लंड पकड़ लिया। हिलाना शुरू कर दिया। ऊपर-नीचे। तेज़ी से।
"तुम अपनी चूत दिखाओ। जल्दी।"
सुमन ने अपनी बिकनी नीचे उतारी। उसकी नंगी चूत। शेव्ड। गीली। लैबिया फूले हुए। बीच का छेद — बंद था। पर पानी टपक रहा था।
उसने अपनी उँगली उसके ऊपर फेरी। अपने रस को इकट्ठा किया। फिर अपने निप्पल पर लगा दिया। फिर चूसा। अपनी ही उँगली।
"तुम पागल हो," उस आदमी ने कहा। "बिल्कुल पागल।"
"हाँ," सुमन ने कहा। "पागल हूँ। चार दिन से लंड नहीं मिला।"
उस आदमी की आँखें लाल हो गईं। उसने अपना लंड और तेज़ी से हिलाया। उसके अंडकोष ऊपर-नीचे हो रहे थे।
"अपनी चूत में उँगली डालो," उसने आदेश दिया।
सुमन ने डाल दी। एक। फिर दो। तीन।
तीन उँगलियाँ। उसकी चूत ने उन्हें चूस लिया। अंदर तक। उसने उन्हें घुमाया। बाहर निकाला। फिर अंदर। तेज़ी से।
"हाँ... चोदो मुझे... अपने लंड से चोदो... मैं तुम्हारी राँड हूँ..." उसकी आवाज़ फट रही थी।
उस आदमी की साँसें अब सिर्फ घरघराहट थीं। उसका लंड फड़क रहा था। उसके अंडकोष सिकुड़ रहे थे।
"मैं आ रहा हूँ... तुम्हारे चेहरे पर... तुम्हारी चूचियों पर..."
"हाँ... आ जाओ... भर दो मुझे..."
उस आदमी ने जोर से कराहा। उसका बीज हवा में छूटा — उसके पेट पर, उसकी छाती पर, उसकी गर्दन पर। सफेद। गरम। चिपचिपा।
उसी सेकंड — सुमन की चूत ने उसकी उँगलियों को बाहर निकाल दिया। पानी का फव्वारा। कैमरे पर। उसके हाथ से लेकर उसके पेट तक। बिस्तर पर गिरा। वह कराहती रही।
"अह्ह्ह... राज... राज... मैं तुम्हारे बिना मर जाऊँगी..."
उसने कुछ पलों के लिए आँखें बंद कर लीं। जब खोलीं — कॉल डिस्कनेक्ट हो चुकी थी।
उस आदमी का अकाउंट गायब था। नाम बदल चुका था। सुमन अकेली थी।
फिर से।


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