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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#48
रिजवान ने लार टपकाते हुए कहा — "हाये, क्या कमाल का माल है यार। क्या गांड है। क्या चूचियाँ।"

इमरान बोला — "बहन की लोडी, बहुत गर्मी है इसके अंदर। लगता है इसका पति इसे चोदता नहीं है।"
"नहीं चोदता होगा, या फिर चोदता है तो बहुत कम। पर यार, इसकी चूत ने मेरी उँगली जला दी। गर्म आग थी।"
"जल्दी अपने नीचे होगी ये रांड। बहुत जल्दी।"
"अगले हफ्ते आएगी फिटिंग कराने।"
"तो फिर वहाँ से... आगे।"
दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा। और हँसे। धीरे से। गीले लंडों के साथ।
बाहर सुमन गली में खड़ी थी। उसकी साँसें तेज़ थीं। उसकी चूत धड़क रही थी। उसने फोन निकाला। राज का नंबर देखा। कॉल नहीं की।
बल्कि एक मैसेज लिखा — सब ठीक है। जल्दी जाओ।
फिर उस मैसेज को डिलीट कर दिया। और लिखा — कब रहे हो?
सेन्ड कर दिया।
राज को पता था कुछ। पर सब कुछ नहीं।
और सुमन चुप रही। अपनी गीली लेगिंग। अपनी जलती चूट। अपने सख्त निप्पल। और अपने अगले हफ्ते के इंतज़ार के साथ।

रिज़वान के मन में कुछ और ही चल रहा था। सुमन में कितनी भी आग हो पर उसे अपनी हद पता है जिससे वो इतनी आसानी से पार नहीं करेगी। इसके लिए कुछ प्लान बनाना पड़ेगा, और रिज़वान इस काम में लग जाता है कि कहीं से कुछ ऐसा हाथ लगे कि वो अपनी हद से आगे बढ़ जाए।
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 18-06-2026, 11:14 PM



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