Thread Rating:
  • 2 Vote(s) - 3 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#47
अब तीनों एक ही लय में थे। सुमन आगे-पीछे हिल रही थीउसके स्तन इमरान की तरफ, उसकी गांड रिजवान की तरफ। उसकी चूत से पानी टपक रहा था। लेगिंग का गीला पैच अब पूरे कपड़े में फैल चुका था। उसके पीछे रिजवान का लंड उसकी गांड पर रगड़ रहा थाधीरे-धीरे, फिर तेज़, फिर धीरे। उसके सामने इमरान की उँगलियाँ उसके निप्पल पर गोले लगा रही थीं।

रिजवान का लंड अब पैंट से बाहर निकलने को था। उसने अपना कमर का बटन खोल दियाधीरे से, चुपके से, सुमन को पता चले। पर सुमन को पता चल गया। उसने उसकी जींस का बटन खुलते हुए सुना। उसने उसकी चैन खुलते हुए सुनी। और फिरउसने उसका लंड महसूस किया। बिना कपड़े के। सीधा। काला। गर्म। सख्त। उसकी लेगिंग के ऊपर से नहींवह तो पहले भी था। अब वह सीधा उसकी लेगिंग के नीचे, उसकी गांड की दरार में, सिर्फ एक पतले कपड़े के बीच में था। और वह कपड़ा अब पूरी तरह गीला था। उसकी चूत के रस से। उसकी लेगिंग पारदर्शी हो चुकी थी।
रिजवान का लंड उसकी चूत के ठीक बाहर था। बस एक धागा बाकी था।

इमरान अब काउंटर के पार से बाहर गया था। वह सुमन के बिल्कुल सामने खड़ा था। उसने इंची टेप निकाल ली थी। बहाना चाहिए था। और उसके पास था।

"मैडम, नाप ले लूँ? फिर कपड़ा कट जाएगा।"

सुमन ने अपना सिर हिलाया। हाँ।

इमरान ने टेप उसके कंधे पर रखा। फिर उसके सीने पर। फिर उसकी कमर पर। पर हर बार उसके हाथ कुछ देर और रुकते थे। उसकी उँगलियाँ दबती थीं। सहलाती थीं। मसलती थीं।

फिर टेप नीचे आया। उसकी नाभि। उसके कूल्हे। और फिरउसकी टांगों के बीच से।

इमरान ने टेप को उसकी चूत के ऊपर से गुजारा। पर उसका हाथ टेप के साथ नहीं, बल्कि टेप के नीचे था। उसकी हथेली सुमन की चूत पर थी। सीधे। लेगिंग के ऊपर से। उसने दबाया। उसकी चूत ने जवाब दियावह फूल गई, वह सख्त हो गई, उसने और पानी छोड़ दिया।

इमरान ने अपनी हथेली को दबाते हुए टेप को पीछे खींचा। टेप उसकी गांड की दरार में घुस गया। गीली दरार। गर्म दरार।

"कितना टाइट रखना है मैडम?" उसने पूछा। उसकी आवाज़ में साँस थी। हीट थी। लंड था।
सुमन ने कहा — "जितना..." उसकी साँस रुक गई। "...तुम रख सकते हो।"

इमरान ने टेप और कस दिया। टेप उसकी चूत और गांड के बीच फँस गया। वह पूरी तरह गीला हो चुका था। इमरान ने टेप को उतारा। अपनी उँगलियों से उसे सहलाया। और फिरउसने अपनी उँगलियाँ अपने मुँह तक उठाईं। चाटा। अपना हाथ चाटा। सुमन के रस को चाटा।

सुमन ने देखा। उसकी आँखें खुली हुई थीं। वह देख रही थी। उसने कुछ नहीं कहा।

रिजवान पीछे अब पूरी तरह अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ रहा था। उसकी लेगिंग अब पूरी तरह नीचे उतरने को थी। वह बस अपने हाथों से उसे थामे हुए था। एक और हरकतऔर उसकी गांड नंगी हो जाती।

पर सुमन ने हाथ बढ़ाया। अपनी गांड पर। उसने रिजवान का हाथ पकड़ लिया। धीरे से। उसे हटाया नहीं। बस पकड़ लिया।

उसने कहा — "बस। आज बस।"

रिजवान रुक गया। पर उसका लंड नहीं रुका। वह हवा में खड़ा था। नंगा। काला। मोटा। उसकी नोक से एक बूँद टपकी। सुमन की लेगिंग पर।

उसने कपड़े चुन लिए। पैसे दिए। और बिना पीछे देखे दुकान से बाहर निकल गई।

बाहर गली में उसके पैर काँप रहे थे। उसकी चूत जल रही थी। उसकी लेगिंग बर्बाद हो चुकी थी। और वह जानती थीवह दोबारा आएगी। बस कुछ दिनों में। फिटिंग के नाम पर।
और अगली बार, वह रिजवान का हाथ नहीं पकड़ेगी।
Like Reply


Messages In This Thread
RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 18-06-2026, 11:07 PM



Users browsing this thread: 6 Guest(s)