18-06-2026, 10:13 PM
(This post was last modified: 18-06-2026, 10:14 PM by Certified Addict. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
सुमन बाजार के अंदर घुस गई। भीड़ थी। गर्मी थी। धूप तेज़ थी। पर उसके अंदर की आग उससे भी तेज़ थी।
वह चल रही थी। उसकी लेगिंग में पसीना और उसकी चूत का रस एक हो गया था। गीला पैच अब साफ दिख रहा था। पर उसे परवाह नहीं थी।
तभी — पीछे से आवाज़ आई।
"मैडम जी... मैडम..."
सुमन ने मुस्कुरा दी। खुद से। क्योंकि पिछले दो महीनों में बहुत कुछ बदल गया था। अब वह वो सुमन नहीं थी जो गली में चुपके से चलती थी। अब उसे राह चलते लोग आवाज़ लगाते थे। पुरुष। जवान। बूढ़े। सब।
वह मुस्कुरा देती थी। पीछे मुड़कर देखती थी। नहीं डरती थी।
उसने मुड़कर देखा।
रिजवान।
वही पतला, दुबला, चालाक रिजवान। वही आँखें जो उसके शरीर को कपड़ों के अंदर भी नंगा कर देती थीं। वही मुस्कान जो झूठी थी पर फिर भी खींचती थी।
सुमन मुस्कुरा दी। उसने कहा, "रिजवान।"
रिजवान करीब आ गया। उसकी साँसों में तंबाकू की बू थी। उसकी आँखें नीचे — उसके स्तनों पर, उसके क्लीवेज पर — फिर ऊपर।
"मैडम, आप यहाँ? क्या काम था?"
सुमन की जीभ ने कुछ सोचा, पर उसके मुँह ने कुछ और कहा — "कुछ काम था।"
रिजवान झट से बोला, "शायद मैं आपकी कोई मदद कर दूं?"
सुमन उसे घूरने लगी। ऐसे घूरा जैसे कहना चाहती हो — तू जानता है मुझे क्या चाहिए, रिजवान। तू देख चुका है मेरी गांड। तू सूंघ चुका है मेरी चूत।
पर उसने कुछ नहीं कहा। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि बहाना क्या बनाए।
फिर बोली — "मैं कुछ कपड़े सिलवाने आई हूँ।"
रिजवान की आँखें चमक गईं। उसने दोनों हाथ जोड़े, जैसे कोई राहत की सांस ली हो।
"अरे, अच्छा हुआ। बहुत अच्छा हुआ कि आप मुझे मिल गईं। चलिए, मेरे दोस्त की दुकान है। बहुत अच्छा टेलर मास्टर है। एक बार उसके यहाँ सिलवा लिया तो बार-बार वहीं जाओगे। डबल मीनिंग — सिलाई भी अच्छी, और... बाकी भी।"
वह जोर से हंसा। अपनी बात पर। सुमन भी मुस्कुरा दी। क्योंकि वह सब समझ चुकी थी।
चलो, उसने सोचा। आज और आगे।
"चलो, रिजवान। दिखाओ अपनी दुकान।"
रिजवान उसे एक बहुत पतली गली में ले गया। दो दीवारों के बीच। इतनी तंग कि दो आदमी साथ नहीं चल सकते थे।
और भीड़ थी। भयंकर भीड़। लोग धक्का दे रहे थे। कोई पीछे से छू के निकल रहा था। कोई सामने से रगड़ के।
सुमन का बड़ा सा गांड हर कदम पर किसी न किसी के हाथ लग रहा था। उसके स्तन किसी के कंधे से रगड़ खा रहे थे। वह बेचैन थी। पर रुकी नहीं।
उसकी चूत अब पूरी तरह गीली थी। लेगिंग में पानी उतर आया था।
रिजवान उसके ठीक आगे चल रहा था। वह बीच-बीच में पीछे मुड़ता। देखता। मुस्कुराता।
फिर गली खत्म हुई। एक छोटी सी दुकान।
वह चल रही थी। उसकी लेगिंग में पसीना और उसकी चूत का रस एक हो गया था। गीला पैच अब साफ दिख रहा था। पर उसे परवाह नहीं थी।
तभी — पीछे से आवाज़ आई।
"मैडम जी... मैडम..."
सुमन ने मुस्कुरा दी। खुद से। क्योंकि पिछले दो महीनों में बहुत कुछ बदल गया था। अब वह वो सुमन नहीं थी जो गली में चुपके से चलती थी। अब उसे राह चलते लोग आवाज़ लगाते थे। पुरुष। जवान। बूढ़े। सब।
वह मुस्कुरा देती थी। पीछे मुड़कर देखती थी। नहीं डरती थी।
उसने मुड़कर देखा।
रिजवान।
वही पतला, दुबला, चालाक रिजवान। वही आँखें जो उसके शरीर को कपड़ों के अंदर भी नंगा कर देती थीं। वही मुस्कान जो झूठी थी पर फिर भी खींचती थी।
सुमन मुस्कुरा दी। उसने कहा, "रिजवान।"
रिजवान करीब आ गया। उसकी साँसों में तंबाकू की बू थी। उसकी आँखें नीचे — उसके स्तनों पर, उसके क्लीवेज पर — फिर ऊपर।
"मैडम, आप यहाँ? क्या काम था?"
सुमन की जीभ ने कुछ सोचा, पर उसके मुँह ने कुछ और कहा — "कुछ काम था।"
रिजवान झट से बोला, "शायद मैं आपकी कोई मदद कर दूं?"
सुमन उसे घूरने लगी। ऐसे घूरा जैसे कहना चाहती हो — तू जानता है मुझे क्या चाहिए, रिजवान। तू देख चुका है मेरी गांड। तू सूंघ चुका है मेरी चूत।
पर उसने कुछ नहीं कहा। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि बहाना क्या बनाए।
फिर बोली — "मैं कुछ कपड़े सिलवाने आई हूँ।"
रिजवान की आँखें चमक गईं। उसने दोनों हाथ जोड़े, जैसे कोई राहत की सांस ली हो।
"अरे, अच्छा हुआ। बहुत अच्छा हुआ कि आप मुझे मिल गईं। चलिए, मेरे दोस्त की दुकान है। बहुत अच्छा टेलर मास्टर है। एक बार उसके यहाँ सिलवा लिया तो बार-बार वहीं जाओगे। डबल मीनिंग — सिलाई भी अच्छी, और... बाकी भी।"
वह जोर से हंसा। अपनी बात पर। सुमन भी मुस्कुरा दी। क्योंकि वह सब समझ चुकी थी।
चलो, उसने सोचा। आज और आगे।
"चलो, रिजवान। दिखाओ अपनी दुकान।"
रिजवान उसे एक बहुत पतली गली में ले गया। दो दीवारों के बीच। इतनी तंग कि दो आदमी साथ नहीं चल सकते थे।
और भीड़ थी। भयंकर भीड़। लोग धक्का दे रहे थे। कोई पीछे से छू के निकल रहा था। कोई सामने से रगड़ के।
सुमन का बड़ा सा गांड हर कदम पर किसी न किसी के हाथ लग रहा था। उसके स्तन किसी के कंधे से रगड़ खा रहे थे। वह बेचैन थी। पर रुकी नहीं।
उसकी चूत अब पूरी तरह गीली थी। लेगिंग में पानी उतर आया था।
रिजवान उसके ठीक आगे चल रहा था। वह बीच-बीच में पीछे मुड़ता। देखता। मुस्कुराता।
फिर गली खत्म हुई। एक छोटी सी दुकान।



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