18-06-2026, 08:46 PM
“एक्क... दो... तीीीन... चााार....”
अचानक भरे हुए हॉल में ये आवाज़ गूँज उठी।
सभी टेबल पर बैठे शराब पीते, कार्ड्स खेलते मर्दों की नज़र कमरे के दूसरी तरफ़ चली गई।
जहाँ दीवाली के बाद वाली कॉलोनी पार्टी में औरतें कुछ खेल रही थीं।
वहाँ से अब तक सिर्फ़ हँसी-खिलखिलाने की आवाज़ें ही आ रही थीं — “नहीं नहीं... अरे मैं नहीं पीती... अरे थोड़ा तो चलता है...”
माहौल खुशनुमा था।
मगर “एक... दो... तीन...” की तालियों और गिनती की आवाज़ ने सबका ध्यान खींच लिया।
सबकी नज़र उधर गई तो नज़ारा कुछ ऐसा था कि किसी की नज़र हट ही नहीं रही थी।
मेरी बीवी — नेहा।
जैसे वो कोई शर्त हार गई हो।
आस-पास दो छोटे लड़के (एक तो गुप्ता जी का बेटा था, दूसरे को मैंने देखा था मगर नाम नहीं जानता) रस्सी घुमा रहे थे।
दोनों के हाथ में रस्सी का एक-एक सिरा।
बीच में नेहा।
खूबसूरत... थोड़े नशे में...
एक बेहद महँगी सिल्क साड़ी में।
फुल मेकअप, सिंदूर, पायल, सब कुछ।
ब्लैकलेस स्लीवलेस ब्लाउज़।
नेहा दोनों हाथों से साड़ी को पकड़े हुए थी, जिसकी वजह से साड़ी पहले से ही घुटनों के थोड़े नीचे तक चढ़ी हुई थी।
और जैसे ही वो कूदती...
एक पल के लिए उसकी गोरी-गोरी जाँघें चमक जातीं।
ऊपर उसके भारी, दूध जैसे स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे।
ब्लाउज़ का कपड़ा इतना पतला और टाइट था कि हर कूद के साथ उसकी निप्पल्स की आउटलाइन साफ़ दिख रही थी।
कमरे के सारे मर्द अब ऊपर देखें या नीचे — ये तय नहीं कर पा रहे थे।
कुछ तो मुँह खुला लिए घूर रहे थे।
कुछ शराब का ग्लास हाथ में थामे बीच में ही रुक गए थे।
हॉल में अचानक सन्नाटा-सा छा गया था, सिर्फ़ रस्सी की फटफटाहट और नेहा की हल्की-हल्की साँसों की आवाज़ आ रही थी।
“आठ... नौ... दस...”
नेहा अभी भी कूद रही थी। उसके स्तन हर कूद के साथ जोर-जोर से उछल रहे थे। साड़ी और भी ऊपर चढ़ गई थी। उसकी गोरी जाँघें बार-बार चमक रही थीं।
तभी मेरे पास वाली टेबल से दो मर्द फुसफुसाते हुए कमेंट करने लगे। उनकी आवाज़ काफी हद तक सुनाई दे रही थी।साड़ी में भी कितनी सेक्सी लग रही है।
"हर कूद के साथ उछल रहे हैं उसके बोब्स... उफ्फ...”
"सम कितना lucky है यार... रात में इसका क्या हाल करता होगा...”
“ग्यारह... बारह...”
नेहा अभी भी कूद रही थी।
अचानक उसके दाएँ पैर की पायल रस्सी में उलझ गई।
वो लड़खड़ा गई और आगे की तरफ़ झुक गई।
दूसरे लड़के की तरफ़ गिरने वाली थी, लेकिन उस लड़के ने तुरंत उसे थाम लिया।
राहुल ने भी मौका नहीं छोड़ा — उसने नेहा की कमर पकड़ ली।
अब मेरी बीवी दोनों लड़कों के बीच में लगभग चिपकी हुई खड़ी थी।
लड़का: “आंटी, आप सही हैं?”
नेहा ने शर्माते हुए मुस्कुराकर सही होने का इशारा किया।
उछलने की वजह से उसकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह सरक चुका था।
ब्लाउज़ भी काफी सरक गया था — बस थोड़ा और नीचे सरकता तो उसके भारी स्तन सबके सामने आ जाते।
पसीने की एक चमकती लकीर उसकी गर्दन से शुरू होकर क्लिवेज की गहरी खाई में जा रही थी।
दोनों लड़के इतने पास थे कि उन्होंने वो खजाना अच्छे से देख लिया था।
नेहा ने तुरंत होश में आकर दोनों हाथों से ब्लाउज़ को एडजस्ट किया और हाँफते हुए बोली,
नेहा: “सॉरी... मैं 20 नहीं कर पाई...”
भीड़ में से किसी औरत ने हँसते हुए आवाज़ लगाई,
औरत: “पूरे करो!”
नेहा ने शर्म से कहा, “श्श्श...”
मगर तब तक देर हो चुकी थी।
पूरी भीड़ में माहौल गर्म हो गया।
सब एक स्वर में चिल्लाने लगे —
भीड़: “पूरे करो... पूरे करो... पूरे करो!”
हर कोई फिर से वही नज़ारा देखना चाहता था — नेहा के उछलते स्तन, उसकी चढ़ी हुई साड़ी, पसीने से चमकता शरीर...
तभी सामने से एक बुजुर्ग आंटी आगे आईं — गुप्ता जी की पत्नी।
उन्होंने राहुल का हाथ पकड़कर उसे नेहा से अलग किया और सख्ती से बोलीं,
गुप्ता जी की पत्नी: “हो गया... बहुत हो गया!"
भीड़ चुप हो गई।
एकदम सन्नाटा छा गया।
नेहा ने जल्दी से अपना पल्लू ठीक किया और शर्म से सिर झुका लिया।
उसका चेहरा गहरे लाल हो रहा था।
धीरे-धीरे सब अपने-अपने खेल में लग गए।
टेबल पर फिर से पत्ते बाँटे जाने लगे।
लेकिन अब माहौल पहले जैसा नहीं था।
मैंने साफ़ देखा — कई आदमियों को अपनी पैंट में लंड को एडजस्ट करते हुए।
नज़ारा ही ऐसा था।
पटेल कपल से आखिरी बातचीत के 2-3 महीने बाद ये पहला मौका था जब मैं अपनी बीवी की हरकतों की वजह से दूसरे मर्दों के लंड तनते हुए देख रहा था।
मुझे लगा था कि अब ऐसे मौके बहुत कम ही मिलेंगे।
नेहा ने मन बना लिया था कि हम जिग्नेश वाले कपल से नहीं मिलेंगे।
दिवाली के आस-पास ऑफिस में काम का प्रेशर भी बहुत था।
“बेकार आदमी” की जॉब शिफ्ट होने के बाद न तो कोई चैट हुई, न कोई बात।
शायद जब आदमी की फोकस पेट की भूख पर होता है, तो हवस पीछे की सीट पर चली जाती है।
थोड़ी देर खेलने के बाद अचानक लाउड म्यूजिक शुरू हो गया।
पार्टी का आखिरी हिस्सा — ज्यादातर ऐसे ही होता था। आखिर में सब डांस पर उतर आते थे।
पहले लड़कियों ने डांस फ्लोर पर कब्जा कर लिया।
धीरे-धीरे वो हँसते-खेलते अपने-अपने पतियों का हाथ पकड़कर उन्हें खींचने लगीं।
जब नेहा मुझे लेने आई, तब मैं टेबल पर चार लोगों के साथ बैठा था।
नेहा ने झुककर मेरे दोनों हाथ थाम लिए।
“उफ्फ...”
मैंने उसकी आवाज़ सुनी।
वो पसीने से पूरी तरह भीगी हुई थी।
उसकी गर्दन, ब्लाउज़ का क्लिवेज, सब पसीने से चमक रहा था।
साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था और ब्लाउज़ अब भी पहले से ज्यादा टाइट लग रहा था।
थोड़ी देर में सारे टेबल खाली हो गए।
लोग बीच में डांस कर रहे थे।
केवल कुछ टेबल्स पर ही लोग बचे थे।
एक टेबल पर मैंने गुप्ता जी को अकेले बैठे देखा।
शराब पी रहे थे, हाथ में सिगरेट।
उनकी पत्नी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी — शायद घर चली गई थीं।
मुझे थोड़ी मायूसी हुई।
शायद नेहा ने भी देख लिया।
नेहा ने मेरा हाथ और कसकर पकड़ा और मुझे खींचते हुए गुप्ता जी की टेबल की तरफ ले गई।
नेहा: (मीठी और नशीली आवाज़ में)
“अंकल, आप भी आइए ना...”
गुप्ता जी ने ऊपर देखा।
नेहा को इस हाल में देखकर उनके चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई।
गुप्ता जी: (धीरे से मुस्कुराते हुए)
“बेटी, मुझे ये सब नहीं आता...
पर मैं तो बस तुम्हें देखता रह रहा हूँ।
तुम कमाल हो...”
ये कहते हुए उनकी मुस्कान में साफ़ डबल मीनिंग था।
उनकी नज़र नेहा के पसीने से भीगे ब्लाउज़ और क्लिवेज पर घूम गई।
फिर उन्होंने सिगरेट का कश लिया और फिर से नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा।
हम सब थक चुके थे।
नेहा ने गुप्ता जी को फिर से कुछ नहीं कहा।
उसने मेरी तरफ़ देखा, आँखों में शरारत भरी हुई थी।
नेहा: (धीमी, नशीली आवाज़ में)
“मैं वॉशरूम जा के आती हूँ।
तुम अपनी बोतल ले लो...
फिर घर पर पार्टी करते हैं।”
कहते हुए उसने मुझे एक बेहद शरारती आँख मारी।
नशे वाली वो मुस्कान... वो चमकती आँखें...
गुप्ता जी ने ये सब देखा भी और सुना भी।
उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई।
फिर हम दोनों ने नेहा को लहराते हुए जाते हुए देखा।
उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था।
नाइट वाली लाइट्स में उसकी गोल, मोटी गांड़ हिल रही थी — हर कदम के साथ ऊपर-नीचे, बाएँ-दाएँ।
पसीने से भीगी साड़ी उसके शरीर से चिपक रही थी, जिससे उसकी कमर की कट और गांड़ की शेप और साफ़ दिख रही थी।
गुप्ता जी भी उसे घूर रहे थे।
जब नेहा आँखों से ओझल हो गई, तो मैंने बोतल हाथ में लेकर डांस फ्लोर की तरफ़ नज़र घुमाई।
नया टैलेंट देखने की कोशिश की।
मगर नेहा जैसा कुछ भी नहीं था।
एक बहुत जवान लड़की जरूर थी — शायद 19-20 साल की।
छोटे-छोटे कपड़ों में — क्रॉप टॉप और बहुत छोटी स्कर्ट।
शरीर अच्छा था, कसी हुई कमर, मोटी जाँघें।
उसे देखते हुए मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था।
उम्र कम थी, लेकिन सेक्सी लड़की सेक्सी लड़की होती है — चाहे उम्र कुछ भी हो।
उसमें कुछ अदा थी, कुछ चाल थी, जो आकर्षित कर रही थी।
शायद इसलिए भी कि नेहा डांस फ्लोर पर नहीं थी, तो सबकी नज़रें उसकी तरफ़ चली गई थीं।
वो लड़की जोर-जोर से डांस कर रही थी।
हर मूवमेंट के साथ उसकी छोटी स्कर्ट ऊपर चढ़ रही थी, जिससे उसकी जाँघों का ऊपरी हिस्सा नजर आ रहा था।
क्रॉप टॉप से उसका नाभि और पेट का निचला हिस्सा साफ़ दिख रहा था।
मेल और फीमेल वॉशरूम एक ही दरवाजे से जाते थे, इसलिए बाहर आने-जाने वाले एक ही रास्ते से होकर गुजरते थे।
नेहा को गए हुए पूरे 15 मिनट हो चुके थे।
मैं और गुप्ता जी एक ही टेबल पर बैठे पेग पी रहे थे।
दोनों की नज़रें बार-बार वॉशरूम वाले गेट की तरफ जा रही थीं।
तभी नेहा बाहर निकली।
राहुल के साथ।
दोनों के शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे।
राहुल नेहा के बहुत करीब खड़ा था — उसकी बाँह नेहा की कमर के पास थी।
नेहा थोड़ा नशे में झूम रही थी, लेकिन वो राहुल की बात ध्यान से सुन रही थी।
राहुल उसके कान में कुछ फुसफुसा रहा था।
नेहा ने सिर झुकाकर ध्यान से सुना, फिर हल्के से हँसी और उसने राहुल के सीने पर एक प्यारा सा मुक्का मार दिया।
नेहा: “अरे शैतान... बंद करो!”
राहुल भी हँसा और नेहा की कमर पर हाथ रखकर उसे थोड़ा और करीब खींच लिया।
नेहा ने हल्का विरोध किया, लेकिन पूरी तरह नहीं हटाया।
मैं और गुप्ता जी टेबल पर बैठे थे। तभी गुप्ता जी के मुँह से हल्की सी गुस्से भरी आवाज़ निकली,
गुप्ता जी: “भेंचोद... ये यहाँ क्या कर रहा है?”
जाहिर था वो नेहा को राहुल के साथ इतने करीब देखकर बिल्कुल खुश नहीं थे। उनकी नज़रें सिकुड़ गई थीं और हाथ में पेग का ग्लास कसकर पकड़ा हुआ था।
तभी राहुल ने नेहा से कुछ कहा और इशारा किया — डांस फ्लोर पर उस जवान लड़की की तरफ़, जो छोटे कपड़ों में ज़ोर-ज़ोर से डांस कर रही थी।
नेहा ने मुस्कुराते हुए उसी अंदाज़ में हाथ हिलाया, जैसे राहुल ने इशारा किया था।
उसकी मुस्कान में शरारत थी। वो लड़की ने भी नेहा को देखकर हाथ हिलाया और हँस दी।
उस जवान लड़की ने नेहा की तरफ़ देखा।
राहुल ने इशारे से नेहा को दिखाया, जैसे बता रहा हो — “ये वही है जिसके बारे में मैं बता रहा था।”
लड़की ने मुंह पर हाथ रखकर हल्के से हँसी।
वो राहुल की हमउम्र लग रही थी, शायद उसकी क्लोज़ फ्रेंड।
लग रहा था कि राहुल ने नेहा के बारे में उसे पहले ही कुछ खास बातें बता रखी थीं।
लड़की ने नेहा की तरफ़ इशारा करके तेज़, चुभती हुई आवाज़ में पुकारा,
लड़की: “आंटी... आइए ना...!”
नेहा ने हाथ के इशारे से मना कर दिया।
वो थोड़ा पीछे हट गई।
लेकिन लड़की ने कुछ और कहा (जो मुझे दूर से सुनाई नहीं दिया), और राहुल ने तुरंत मौका पकड़ लिया।
उसने नेहा का हाथ थामा और हल्का सा खींचकर उसे डांस फ्लोर की तरफ़ ले गया।
नेहा नशे में लड़खड़ाती हुई उसके साथ चली गई।
उसकी चाल अनिश्चित थी, लेकिन वो विरोध भी नहीं कर पा रही थी।
राहुल ने नेहा को डांस फ्लोर के बीच में ले जाकर अपनी तरफ़ घुमाया।
राहुल उस जवान लड़की के पीछे चला गया।
म्यूजिक बहुत तेज़ था, इसलिए उनकी बातें कुछ समझ नहीं आ रही थीं।
शायद उन्हें लग रहा था कि कोई उन्हें देख भी नहीं रहा है।
मगर मेरी और गुप्ता जी की नज़रें पूरी तरह उसी तरफ़ जमी हुई थीं।
कुछ बात करते-करते राहुल ने लड़की के नंगे कंधे पर हल्का सा किस कर दिया।
लड़की ने हल्का सा मुस्कुराकर कंधा सिकोड़ लिया।
साफ़ दिख रहा था कि ये सिर्फ़ दोस्ती से कहीं आगे की बात थी।
तभी टेबल पर ज़ोर से “धम!” की आवाज़ आई।
गुप्ता जी: (गुस्से में, नशे में चढ़कर)
“भेंचोद... फिर बोलता है कि मदरचोद के एग्ज़ाम में नंबर नहीं आते!”
बोलते-बोलते गुप्ता जी ने अफरा-तफरी में अपनी बोतल ढूँढी, एक नीट पेग बनाया और एक घूँट में पूरा गला खाली कर दिया।
फिर वो लड़खड़ाते हुए खड़े हो गए और सीधे डांस फ्लोर की तरफ़ बढ़ गए।
जहाँ नेहा, वो जवान लड़की और राहुल तीनों नाच रहे थे।
गुप्ता जी झूमते-झामते डांस फ्लोर की तरफ़ बढ़े। नशा इतना चढ़ा हुआ था कि वो ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे।
शायद आज पहली बार उन्हें पता चला कि उनकी बेटे की गर्लफ्रेंड कौन है — वो वही लड़की जिसे वो थोड़ी देर पहले लिंग खड़ा करने वाली नज़रों से घूर रहे थे।
अब तीनों एक साथ नाच रहे थे — राहुल, नेहा और वो लड़की।
भीड़ की वजह से तीनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
गुप्ता जी जैसे ही पहुँचे, उन्होंने राहुल का हाथ जोर से पकड़ा और उसे खींचकर डांस फ्लोर से बाहर ले गए।
लड़की ने एक पल के लिए उनके पीछे जाने की कोशिश की, लेकिन नेहा ने तुरंत उसका हाथ थाम लिया।
नेहा ने उसके कान में कुछ कहा। लड़की रुक गई।
मैं टेबल पर बैठा पूरा तमाशा देख रहा था।
अचानक भरे हुए हॉल में ये आवाज़ गूँज उठी।
सभी टेबल पर बैठे शराब पीते, कार्ड्स खेलते मर्दों की नज़र कमरे के दूसरी तरफ़ चली गई।
जहाँ दीवाली के बाद वाली कॉलोनी पार्टी में औरतें कुछ खेल रही थीं।
वहाँ से अब तक सिर्फ़ हँसी-खिलखिलाने की आवाज़ें ही आ रही थीं — “नहीं नहीं... अरे मैं नहीं पीती... अरे थोड़ा तो चलता है...”
माहौल खुशनुमा था।
मगर “एक... दो... तीन...” की तालियों और गिनती की आवाज़ ने सबका ध्यान खींच लिया।
सबकी नज़र उधर गई तो नज़ारा कुछ ऐसा था कि किसी की नज़र हट ही नहीं रही थी।
मेरी बीवी — नेहा।
जैसे वो कोई शर्त हार गई हो।
आस-पास दो छोटे लड़के (एक तो गुप्ता जी का बेटा था, दूसरे को मैंने देखा था मगर नाम नहीं जानता) रस्सी घुमा रहे थे।
दोनों के हाथ में रस्सी का एक-एक सिरा।
बीच में नेहा।
खूबसूरत... थोड़े नशे में...
एक बेहद महँगी सिल्क साड़ी में।
फुल मेकअप, सिंदूर, पायल, सब कुछ।
ब्लैकलेस स्लीवलेस ब्लाउज़।
नेहा दोनों हाथों से साड़ी को पकड़े हुए थी, जिसकी वजह से साड़ी पहले से ही घुटनों के थोड़े नीचे तक चढ़ी हुई थी।
और जैसे ही वो कूदती...
एक पल के लिए उसकी गोरी-गोरी जाँघें चमक जातीं।
ऊपर उसके भारी, दूध जैसे स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे।
ब्लाउज़ का कपड़ा इतना पतला और टाइट था कि हर कूद के साथ उसकी निप्पल्स की आउटलाइन साफ़ दिख रही थी।
कमरे के सारे मर्द अब ऊपर देखें या नीचे — ये तय नहीं कर पा रहे थे।
कुछ तो मुँह खुला लिए घूर रहे थे।
कुछ शराब का ग्लास हाथ में थामे बीच में ही रुक गए थे।
हॉल में अचानक सन्नाटा-सा छा गया था, सिर्फ़ रस्सी की फटफटाहट और नेहा की हल्की-हल्की साँसों की आवाज़ आ रही थी।
“आठ... नौ... दस...”
नेहा अभी भी कूद रही थी। उसके स्तन हर कूद के साथ जोर-जोर से उछल रहे थे। साड़ी और भी ऊपर चढ़ गई थी। उसकी गोरी जाँघें बार-बार चमक रही थीं।
तभी मेरे पास वाली टेबल से दो मर्द फुसफुसाते हुए कमेंट करने लगे। उनकी आवाज़ काफी हद तक सुनाई दे रही थी।साड़ी में भी कितनी सेक्सी लग रही है।
"हर कूद के साथ उछल रहे हैं उसके बोब्स... उफ्फ...”
"सम कितना lucky है यार... रात में इसका क्या हाल करता होगा...”
“ग्यारह... बारह...”
नेहा अभी भी कूद रही थी।
अचानक उसके दाएँ पैर की पायल रस्सी में उलझ गई।
वो लड़खड़ा गई और आगे की तरफ़ झुक गई।
दूसरे लड़के की तरफ़ गिरने वाली थी, लेकिन उस लड़के ने तुरंत उसे थाम लिया।
राहुल ने भी मौका नहीं छोड़ा — उसने नेहा की कमर पकड़ ली।
अब मेरी बीवी दोनों लड़कों के बीच में लगभग चिपकी हुई खड़ी थी।
लड़का: “आंटी, आप सही हैं?”
नेहा ने शर्माते हुए मुस्कुराकर सही होने का इशारा किया।
उछलने की वजह से उसकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह सरक चुका था।
ब्लाउज़ भी काफी सरक गया था — बस थोड़ा और नीचे सरकता तो उसके भारी स्तन सबके सामने आ जाते।
पसीने की एक चमकती लकीर उसकी गर्दन से शुरू होकर क्लिवेज की गहरी खाई में जा रही थी।
दोनों लड़के इतने पास थे कि उन्होंने वो खजाना अच्छे से देख लिया था।
नेहा ने तुरंत होश में आकर दोनों हाथों से ब्लाउज़ को एडजस्ट किया और हाँफते हुए बोली,
नेहा: “सॉरी... मैं 20 नहीं कर पाई...”
भीड़ में से किसी औरत ने हँसते हुए आवाज़ लगाई,
औरत: “पूरे करो!”
नेहा ने शर्म से कहा, “श्श्श...”
मगर तब तक देर हो चुकी थी।
पूरी भीड़ में माहौल गर्म हो गया।
सब एक स्वर में चिल्लाने लगे —
भीड़: “पूरे करो... पूरे करो... पूरे करो!”
हर कोई फिर से वही नज़ारा देखना चाहता था — नेहा के उछलते स्तन, उसकी चढ़ी हुई साड़ी, पसीने से चमकता शरीर...
तभी सामने से एक बुजुर्ग आंटी आगे आईं — गुप्ता जी की पत्नी।
उन्होंने राहुल का हाथ पकड़कर उसे नेहा से अलग किया और सख्ती से बोलीं,
गुप्ता जी की पत्नी: “हो गया... बहुत हो गया!"
भीड़ चुप हो गई।
एकदम सन्नाटा छा गया।
नेहा ने जल्दी से अपना पल्लू ठीक किया और शर्म से सिर झुका लिया।
उसका चेहरा गहरे लाल हो रहा था।
धीरे-धीरे सब अपने-अपने खेल में लग गए।
टेबल पर फिर से पत्ते बाँटे जाने लगे।
लेकिन अब माहौल पहले जैसा नहीं था।
मैंने साफ़ देखा — कई आदमियों को अपनी पैंट में लंड को एडजस्ट करते हुए।
नज़ारा ही ऐसा था।
पटेल कपल से आखिरी बातचीत के 2-3 महीने बाद ये पहला मौका था जब मैं अपनी बीवी की हरकतों की वजह से दूसरे मर्दों के लंड तनते हुए देख रहा था।
मुझे लगा था कि अब ऐसे मौके बहुत कम ही मिलेंगे।
नेहा ने मन बना लिया था कि हम जिग्नेश वाले कपल से नहीं मिलेंगे।
दिवाली के आस-पास ऑफिस में काम का प्रेशर भी बहुत था।
“बेकार आदमी” की जॉब शिफ्ट होने के बाद न तो कोई चैट हुई, न कोई बात।
शायद जब आदमी की फोकस पेट की भूख पर होता है, तो हवस पीछे की सीट पर चली जाती है।
थोड़ी देर खेलने के बाद अचानक लाउड म्यूजिक शुरू हो गया।
पार्टी का आखिरी हिस्सा — ज्यादातर ऐसे ही होता था। आखिर में सब डांस पर उतर आते थे।
पहले लड़कियों ने डांस फ्लोर पर कब्जा कर लिया।
धीरे-धीरे वो हँसते-खेलते अपने-अपने पतियों का हाथ पकड़कर उन्हें खींचने लगीं।
जब नेहा मुझे लेने आई, तब मैं टेबल पर चार लोगों के साथ बैठा था।
नेहा ने झुककर मेरे दोनों हाथ थाम लिए।
“उफ्फ...”
मैंने उसकी आवाज़ सुनी।
वो पसीने से पूरी तरह भीगी हुई थी।
उसकी गर्दन, ब्लाउज़ का क्लिवेज, सब पसीने से चमक रहा था।
साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था और ब्लाउज़ अब भी पहले से ज्यादा टाइट लग रहा था।
थोड़ी देर में सारे टेबल खाली हो गए।
लोग बीच में डांस कर रहे थे।
केवल कुछ टेबल्स पर ही लोग बचे थे।
एक टेबल पर मैंने गुप्ता जी को अकेले बैठे देखा।
शराब पी रहे थे, हाथ में सिगरेट।
उनकी पत्नी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी — शायद घर चली गई थीं।
मुझे थोड़ी मायूसी हुई।
शायद नेहा ने भी देख लिया।
नेहा ने मेरा हाथ और कसकर पकड़ा और मुझे खींचते हुए गुप्ता जी की टेबल की तरफ ले गई।
नेहा: (मीठी और नशीली आवाज़ में)
“अंकल, आप भी आइए ना...”
गुप्ता जी ने ऊपर देखा।
नेहा को इस हाल में देखकर उनके चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई।
गुप्ता जी: (धीरे से मुस्कुराते हुए)
“बेटी, मुझे ये सब नहीं आता...
पर मैं तो बस तुम्हें देखता रह रहा हूँ।
तुम कमाल हो...”
ये कहते हुए उनकी मुस्कान में साफ़ डबल मीनिंग था।
उनकी नज़र नेहा के पसीने से भीगे ब्लाउज़ और क्लिवेज पर घूम गई।
फिर उन्होंने सिगरेट का कश लिया और फिर से नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा।
हम सब थक चुके थे।
नेहा ने गुप्ता जी को फिर से कुछ नहीं कहा।
उसने मेरी तरफ़ देखा, आँखों में शरारत भरी हुई थी।
नेहा: (धीमी, नशीली आवाज़ में)
“मैं वॉशरूम जा के आती हूँ।
तुम अपनी बोतल ले लो...
फिर घर पर पार्टी करते हैं।”
कहते हुए उसने मुझे एक बेहद शरारती आँख मारी।
नशे वाली वो मुस्कान... वो चमकती आँखें...
गुप्ता जी ने ये सब देखा भी और सुना भी।
उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई।
फिर हम दोनों ने नेहा को लहराते हुए जाते हुए देखा।
उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था।
नाइट वाली लाइट्स में उसकी गोल, मोटी गांड़ हिल रही थी — हर कदम के साथ ऊपर-नीचे, बाएँ-दाएँ।
पसीने से भीगी साड़ी उसके शरीर से चिपक रही थी, जिससे उसकी कमर की कट और गांड़ की शेप और साफ़ दिख रही थी।
गुप्ता जी भी उसे घूर रहे थे।
जब नेहा आँखों से ओझल हो गई, तो मैंने बोतल हाथ में लेकर डांस फ्लोर की तरफ़ नज़र घुमाई।
नया टैलेंट देखने की कोशिश की।
मगर नेहा जैसा कुछ भी नहीं था।
एक बहुत जवान लड़की जरूर थी — शायद 19-20 साल की।
छोटे-छोटे कपड़ों में — क्रॉप टॉप और बहुत छोटी स्कर्ट।
शरीर अच्छा था, कसी हुई कमर, मोटी जाँघें।
उसे देखते हुए मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था।
उम्र कम थी, लेकिन सेक्सी लड़की सेक्सी लड़की होती है — चाहे उम्र कुछ भी हो।
उसमें कुछ अदा थी, कुछ चाल थी, जो आकर्षित कर रही थी।
शायद इसलिए भी कि नेहा डांस फ्लोर पर नहीं थी, तो सबकी नज़रें उसकी तरफ़ चली गई थीं।
वो लड़की जोर-जोर से डांस कर रही थी।
हर मूवमेंट के साथ उसकी छोटी स्कर्ट ऊपर चढ़ रही थी, जिससे उसकी जाँघों का ऊपरी हिस्सा नजर आ रहा था।
क्रॉप टॉप से उसका नाभि और पेट का निचला हिस्सा साफ़ दिख रहा था।
मेल और फीमेल वॉशरूम एक ही दरवाजे से जाते थे, इसलिए बाहर आने-जाने वाले एक ही रास्ते से होकर गुजरते थे।
नेहा को गए हुए पूरे 15 मिनट हो चुके थे।
मैं और गुप्ता जी एक ही टेबल पर बैठे पेग पी रहे थे।
दोनों की नज़रें बार-बार वॉशरूम वाले गेट की तरफ जा रही थीं।
तभी नेहा बाहर निकली।
राहुल के साथ।
दोनों के शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे।
राहुल नेहा के बहुत करीब खड़ा था — उसकी बाँह नेहा की कमर के पास थी।
नेहा थोड़ा नशे में झूम रही थी, लेकिन वो राहुल की बात ध्यान से सुन रही थी।
राहुल उसके कान में कुछ फुसफुसा रहा था।
नेहा ने सिर झुकाकर ध्यान से सुना, फिर हल्के से हँसी और उसने राहुल के सीने पर एक प्यारा सा मुक्का मार दिया।
नेहा: “अरे शैतान... बंद करो!”
राहुल भी हँसा और नेहा की कमर पर हाथ रखकर उसे थोड़ा और करीब खींच लिया।
नेहा ने हल्का विरोध किया, लेकिन पूरी तरह नहीं हटाया।
मैं और गुप्ता जी टेबल पर बैठे थे। तभी गुप्ता जी के मुँह से हल्की सी गुस्से भरी आवाज़ निकली,
गुप्ता जी: “भेंचोद... ये यहाँ क्या कर रहा है?”
जाहिर था वो नेहा को राहुल के साथ इतने करीब देखकर बिल्कुल खुश नहीं थे। उनकी नज़रें सिकुड़ गई थीं और हाथ में पेग का ग्लास कसकर पकड़ा हुआ था।
तभी राहुल ने नेहा से कुछ कहा और इशारा किया — डांस फ्लोर पर उस जवान लड़की की तरफ़, जो छोटे कपड़ों में ज़ोर-ज़ोर से डांस कर रही थी।
नेहा ने मुस्कुराते हुए उसी अंदाज़ में हाथ हिलाया, जैसे राहुल ने इशारा किया था।
उसकी मुस्कान में शरारत थी। वो लड़की ने भी नेहा को देखकर हाथ हिलाया और हँस दी।
उस जवान लड़की ने नेहा की तरफ़ देखा।
राहुल ने इशारे से नेहा को दिखाया, जैसे बता रहा हो — “ये वही है जिसके बारे में मैं बता रहा था।”
लड़की ने मुंह पर हाथ रखकर हल्के से हँसी।
वो राहुल की हमउम्र लग रही थी, शायद उसकी क्लोज़ फ्रेंड।
लग रहा था कि राहुल ने नेहा के बारे में उसे पहले ही कुछ खास बातें बता रखी थीं।
लड़की ने नेहा की तरफ़ इशारा करके तेज़, चुभती हुई आवाज़ में पुकारा,
लड़की: “आंटी... आइए ना...!”
नेहा ने हाथ के इशारे से मना कर दिया।
वो थोड़ा पीछे हट गई।
लेकिन लड़की ने कुछ और कहा (जो मुझे दूर से सुनाई नहीं दिया), और राहुल ने तुरंत मौका पकड़ लिया।
उसने नेहा का हाथ थामा और हल्का सा खींचकर उसे डांस फ्लोर की तरफ़ ले गया।
नेहा नशे में लड़खड़ाती हुई उसके साथ चली गई।
उसकी चाल अनिश्चित थी, लेकिन वो विरोध भी नहीं कर पा रही थी।
राहुल ने नेहा को डांस फ्लोर के बीच में ले जाकर अपनी तरफ़ घुमाया।
राहुल उस जवान लड़की के पीछे चला गया।
म्यूजिक बहुत तेज़ था, इसलिए उनकी बातें कुछ समझ नहीं आ रही थीं।
शायद उन्हें लग रहा था कि कोई उन्हें देख भी नहीं रहा है।
मगर मेरी और गुप्ता जी की नज़रें पूरी तरह उसी तरफ़ जमी हुई थीं।
कुछ बात करते-करते राहुल ने लड़की के नंगे कंधे पर हल्का सा किस कर दिया।
लड़की ने हल्का सा मुस्कुराकर कंधा सिकोड़ लिया।
साफ़ दिख रहा था कि ये सिर्फ़ दोस्ती से कहीं आगे की बात थी।
तभी टेबल पर ज़ोर से “धम!” की आवाज़ आई।
गुप्ता जी: (गुस्से में, नशे में चढ़कर)
“भेंचोद... फिर बोलता है कि मदरचोद के एग्ज़ाम में नंबर नहीं आते!”
बोलते-बोलते गुप्ता जी ने अफरा-तफरी में अपनी बोतल ढूँढी, एक नीट पेग बनाया और एक घूँट में पूरा गला खाली कर दिया।
फिर वो लड़खड़ाते हुए खड़े हो गए और सीधे डांस फ्लोर की तरफ़ बढ़ गए।
जहाँ नेहा, वो जवान लड़की और राहुल तीनों नाच रहे थे।
गुप्ता जी झूमते-झामते डांस फ्लोर की तरफ़ बढ़े। नशा इतना चढ़ा हुआ था कि वो ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे।
शायद आज पहली बार उन्हें पता चला कि उनकी बेटे की गर्लफ्रेंड कौन है — वो वही लड़की जिसे वो थोड़ी देर पहले लिंग खड़ा करने वाली नज़रों से घूर रहे थे।
अब तीनों एक साथ नाच रहे थे — राहुल, नेहा और वो लड़की।
भीड़ की वजह से तीनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
गुप्ता जी जैसे ही पहुँचे, उन्होंने राहुल का हाथ जोर से पकड़ा और उसे खींचकर डांस फ्लोर से बाहर ले गए।
लड़की ने एक पल के लिए उनके पीछे जाने की कोशिश की, लेकिन नेहा ने तुरंत उसका हाथ थाम लिया।
नेहा ने उसके कान में कुछ कहा। लड़की रुक गई।
मैं टेबल पर बैठा पूरा तमाशा देख रहा था।


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