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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#40
उसने अपनी दोनों टाँगें और फैला दीं। लेगिंग उसके पैरों पर और तन गई। उसकी चूत का उभार और साफ हो गयालेबिया की दरार, बीच की गीली चमक। फिर वह आगे की तरफ झुकीककड़ी को फिर से देखने के बहाने।

झुकते ही उसकी डीप नेक टॉप और खुल गया। उसकी दोनों चूचियाँ लगभग पूरी बाहर गईं। बड़ी, गोरी, भरी हुईनिप्पल छुपे हुए थे टॉप के किनारे के नीचे, लेकिन उनका उभार साफ दिख रहा था। उनकी दरार से पसीना चमक रहा थादोपहर की गर्मी का।
रिज़वान का लंड उसकी पैंट को लगभग फाड़ रहा था। उसके मुँह से लार टपकने लगीउसकी ठुड्डी पर एक बूँद गिरी। उसने उसे पोंछा नहीं। वह सुमन के स्तनों को देख रहा था, उसकी चूत को देख रहा था, उसकी खुली जांघों को देख रहा था।
साली क्या माल है, उसने अपने मन में सोचा। इसको तो अपने नीचे लाना ही पड़ेगा।
सुमन ने सब्जियाँ चुन लीं। रिज़वान ने उन्हें तौला। उसके हाथ अब भी काँप रहे थेबाटें उसकी उँगलियों से फिसल रही थीं।
"कितने हुए?" सुमन ने पूछा।
रिज़वान ने नंबर बताए। सुमन ने पर्स निकाला। उसमें से पैसे निकालेऔर उसे रिज़वान की तरफ बढ़ाया। उसकी उँगलियाँ रिज़वान की उँगलियों से छू गईं। रिज़वान पिघल गया। उसका पूरा शरीर गर्म हो गया।
उसने पैसे लिए। गिने नहीं। सीधे जेब में डाल लिए।
"नाम क्या है आपका?" सुमन ने अचानक पूछा।
रिज़वान चौंका। "रि... रिज़वान मैडम।"
"सुमन," उसने कहा। "बस सुमन।"
वह मुस्कुराई। एक लंबी, धीमी, गीली मुस्कान। फिर वह उठी। अपना टॉप एक बार ऊपर खींचालेकिन जानबूझकर उसने अपनी चूचियाँ ठीक से नहीं छुपाईं। थोड़ी बाहर ही रहने दीं। वह घर के अंदर चली गई। दरवाज़ा बंद करने से पहलेएक बार पीछे मुड़ी। और मुस्कुराई।

दरवाजा बंद हो गया।

रिज़वान अपनी जगह पर जमा रहा। पाँच सेकंड। दस सेकंड। फिर उसने अपनी पैंट के ऊपर से अपना लंड पकड़ा। जोर से दबाया। उसके सिरे पर पानी चुका थाप्री-कम। उसने देखा कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा। गली सुनसान थी। उसने अपना हाथ अपनी पैंट के अंदर डाला। दो बार हाथ लगाया। बस दो बार। फिर हाथ बाहर निकाल लियाक्योंकि गली में कुत्ता भौंकने लगा था।
उसने ठेला उठाया। आगे बढ़ गया। लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ एक चीज़ थीसुमन। उसकी खुली चूचियाँ। उसकी गीली चूत लेगिंग के नीचे। उसकी मुस्कान। उसकी आवाज़

अंदर, सुमन दरवाजे की तरफ पीठ करके खड़ी थी। उसकी साँसें तेज़ थीं। उसने अपना हाथ अपनी लेगिंग के ऊपर अपनी चूत पर रखा। गीली थी। पहले से कहीं ज्यादा गीली। उसकी उँगली ने लेगिंग के ऊपर से अपनी चूत की दरार को दबायाऔर उसकी उँगली गीली हो गई। लेगिंग पर एक गोल दाग बन गया था।

सुमन ने अपनी उँगली को अपने मुँह में डाला। अपना ही पानी चाटा। फिर मुस्कुराई।

"रिज़वान," उसने धीरे से फुसफुसाया। "कल फिर आना। तब तुम्हारा लंड मेरे सामने खड़ा होगाअकेले में।"

वह अंदर चली गई। सोफे पर लेट गई। अपनी लेगिंग उतारने से पहलेउसने अपनी चूत को एक बार और दबाया। फिर आह भरी।
राज, तुम्हारी राँड भूखी है। और यह सिर्फ दूसरा दिन है।
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 10 hours ago



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