17-06-2026, 06:55 PM
“अंजलि ने आपकी सेवा में कोई कमी तो नहीं छोड़ी? उसका पति होने से वह थोड़ी गभारै हुई थी।“ चंपा ने लंड को थोडा दबाते हुए कहा। “मेरे इस राजा को अंजलि क चोदने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई न।”
“अरे नहीं रानी अच्छे से चुदवाती है तेरी बेटी।“ मैंने लंड को धोती से बहार निकालते हुए कहा। प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
जैसे ही मेरा लंड बहार आया और सीधा चंपा के मुंह में गायब हो गया। थोड़ी देर के बाद चंपा की गांड अच्छे से चुद रही थी। और मेरे लंड को आराम दे रही थी। जब चुदाई ख़तम हुई कपडे पहने पर।
चंपा ने बाबा की धोती सरकाई, लंड को पकड़ा और बाबा के पास लेट गई।
उसी रात अंजली के पति सुरज ने अपनी पत्नी को सिर्फ 1-2 बार हल्का-हल्का चोदा। अंजली ने भी कोई जोश नहीं दिखाया।
जबकि बाबा ने चंपा को पूरी रात जमकर चोदा। चंपा की मोटी गांड और भारी चूचियों का पूरा मजा लिया। बाबा ने उसे कई पोजीशन में चोदा - कभी ऊपर से, कभी पीछे से, कभी गोदी में बिठाकर। चंपा बार-बार चीखती, “बाबाजी… फट गई… आह्ह्ह… और जोर से…” और बाबा उसे और तेज चोदते रहे।
ये सिलसिला लगातार 3 रातों तक चला। हर रात चंपा बाबा के कमरे में जाती और सुबह थककर, सूजी हुई चूत लेके वापस आती। जब भी मुखिया उसके पास आता तो वह कह देती की पूजा वाला घर है अभी नहीं।
चौथी रात जब चंपा बाबा के कमरे की तरफ जा रही थी, तो काजल ने उसे रोक लिया।
काजल: “माँ जी, आज आप रहने दीजिए। आज मैं बाबा जी की सेवा करूँगी। सारा पुण्य आप ही कमाओगी क्या? थोड़ा हमारे लिए भी छोड़ दीजिए ना।”
“मेरे पैरो के बिच में भी खुजली होती है।“ काजल ने सासुजी के बोबले को धीरे दबाते हुए कहा। मैत्री की रचना।
“अब मैं क्या कर सकती हूँ बेटी, बाबाजी मेंरी गांड और चूत दोनों मारते रहते है और मुझे उनकी सेवा करने में मजा आता है। पर बात तो तेरी भी सही है तेरे छेद को भी मजा आना चाहिए। चल चुप-चाप अन्दर चली जा और बाबजी की अच्छे से सेवा करना। अपने दोनों छेदों को भर लेना। बाद में मैं ही चली जाया करुँगी। तेरी चूत बड़ी हो रही है। अच्छा है की मेरा बेटा यहाँ नहीं है। चल जा अन्दर और मजे कर ले।“ वैसे उसे पसंद तो नहीं आया था।
चंपा मुंह बनाती हुई वापस अपने कमरे में चली गई। मुखिया ने पूछा तो उसने बताया कि बहू आज बाबा की सेवा करना चाहती है तो मैंने उसे अन्दर भेज दिया।
उस चौथी रात काजल बाबा के कमरे में गई और बाबा ने उसे भी पूरी रात जी भरकर चोदा। काजल की टाइट, कुंवारी चूत और जवानी का पूरा आनंद लिया। बाबा ने पहले उसे चूत चाटकर तैयार किया, फिर लंड घुसाकर फाड़ा और आखिर में उसके मुँह में वीर्य उड़ेल दिया।
काजल पूरी रात “बाबाजी… धीरे… आह्ह्ह… और जोर से…” कहती रही। और मैं उसे चोदता रहा। पूरी रात उसे नंगी रखी और जब चाहा और मनचाहा छेद को चोदता रहा। और वह बिना रोक-टोक अपने छेदों को चुदवाती रही। सुबह वह भी लंगडाती हुई बहार चली गई थी। जिसे सासुमा ने देखा और मुस्कुराई।
“ठीक से सेवा की न बहु?” सासुमा ने बहु की गांड पर एक थप्पड़ मारते हुए कहा। दोनों सांस-बहु एक दुसरे के सामने मंद-मद मुस्कुराते हुए और एक-दुसरे की गांड को थपथपाते हुए रसोई घर की ओर चल पड़ी।
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आज के लिए यही तक.
मैत्री की तरफ से जय भारत।।
“अरे नहीं रानी अच्छे से चुदवाती है तेरी बेटी।“ मैंने लंड को धोती से बहार निकालते हुए कहा। प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
जैसे ही मेरा लंड बहार आया और सीधा चंपा के मुंह में गायब हो गया। थोड़ी देर के बाद चंपा की गांड अच्छे से चुद रही थी। और मेरे लंड को आराम दे रही थी। जब चुदाई ख़तम हुई कपडे पहने पर।
चंपा ने बाबा की धोती सरकाई, लंड को पकड़ा और बाबा के पास लेट गई।
उसी रात अंजली के पति सुरज ने अपनी पत्नी को सिर्फ 1-2 बार हल्का-हल्का चोदा। अंजली ने भी कोई जोश नहीं दिखाया।
जबकि बाबा ने चंपा को पूरी रात जमकर चोदा। चंपा की मोटी गांड और भारी चूचियों का पूरा मजा लिया। बाबा ने उसे कई पोजीशन में चोदा - कभी ऊपर से, कभी पीछे से, कभी गोदी में बिठाकर। चंपा बार-बार चीखती, “बाबाजी… फट गई… आह्ह्ह… और जोर से…” और बाबा उसे और तेज चोदते रहे।
ये सिलसिला लगातार 3 रातों तक चला। हर रात चंपा बाबा के कमरे में जाती और सुबह थककर, सूजी हुई चूत लेके वापस आती। जब भी मुखिया उसके पास आता तो वह कह देती की पूजा वाला घर है अभी नहीं।
चौथी रात जब चंपा बाबा के कमरे की तरफ जा रही थी, तो काजल ने उसे रोक लिया।
काजल: “माँ जी, आज आप रहने दीजिए। आज मैं बाबा जी की सेवा करूँगी। सारा पुण्य आप ही कमाओगी क्या? थोड़ा हमारे लिए भी छोड़ दीजिए ना।”
“मेरे पैरो के बिच में भी खुजली होती है।“ काजल ने सासुजी के बोबले को धीरे दबाते हुए कहा। मैत्री की रचना।
“अब मैं क्या कर सकती हूँ बेटी, बाबाजी मेंरी गांड और चूत दोनों मारते रहते है और मुझे उनकी सेवा करने में मजा आता है। पर बात तो तेरी भी सही है तेरे छेद को भी मजा आना चाहिए। चल चुप-चाप अन्दर चली जा और बाबजी की अच्छे से सेवा करना। अपने दोनों छेदों को भर लेना। बाद में मैं ही चली जाया करुँगी। तेरी चूत बड़ी हो रही है। अच्छा है की मेरा बेटा यहाँ नहीं है। चल जा अन्दर और मजे कर ले।“ वैसे उसे पसंद तो नहीं आया था।
चंपा मुंह बनाती हुई वापस अपने कमरे में चली गई। मुखिया ने पूछा तो उसने बताया कि बहू आज बाबा की सेवा करना चाहती है तो मैंने उसे अन्दर भेज दिया।
उस चौथी रात काजल बाबा के कमरे में गई और बाबा ने उसे भी पूरी रात जी भरकर चोदा। काजल की टाइट, कुंवारी चूत और जवानी का पूरा आनंद लिया। बाबा ने पहले उसे चूत चाटकर तैयार किया, फिर लंड घुसाकर फाड़ा और आखिर में उसके मुँह में वीर्य उड़ेल दिया।
काजल पूरी रात “बाबाजी… धीरे… आह्ह्ह… और जोर से…” कहती रही। और मैं उसे चोदता रहा। पूरी रात उसे नंगी रखी और जब चाहा और मनचाहा छेद को चोदता रहा। और वह बिना रोक-टोक अपने छेदों को चुदवाती रही। सुबह वह भी लंगडाती हुई बहार चली गई थी। जिसे सासुमा ने देखा और मुस्कुराई।
“ठीक से सेवा की न बहु?” सासुमा ने बहु की गांड पर एक थप्पड़ मारते हुए कहा। दोनों सांस-बहु एक दुसरे के सामने मंद-मद मुस्कुराते हुए और एक-दुसरे की गांड को थपथपाते हुए रसोई घर की ओर चल पड़ी।
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आज के लिए यही तक.
मैत्री की तरफ से जय भारत।।


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