16-06-2026, 01:35 PM
मैंने अपनी अंगुली पर गंगाजल लगाया और बिना किसी रुकावट के चंपा की मोटी, कसी हुई गांड के छेद में जोर से घुसा दी।
“ऊईईई माँ!!! मर गई!!! फट गई मेरी गांड!!!” मैत्री रचित कहानी है.
चंपा ज़ोर से चिल्लाई। उसका पूरा भारी शरीर दर्द से तड़प उठा। उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, और उसके मुँह से एक दर्द भरी कराह निकली।
उसकी बहू, काजल, ने उसकी चीखें सुनीं और ऊपर भागी। उसने यह नंगा और गंदा सीन देखा - उसकी सास, चंपा, और उसकी ननद, अंजलि, दोनों नंगी लेटी थीं, और बाबा की उंगली चंपा की गांड में घुसी हुई थी - काजल का चेहरा लाल हो गया। वह वहीं खड़ी रही, न हिली, न बोली। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। यह सीन देखकर, उसकी गांड में भी कुछ होने लगा और उसने अपना एक हाथ अपनी पीठ के पीछे ले जाकर अपनी गांड को सहलाना शुरू कर दिया।
मैंने काजल की तरफ देखकर इशारा किया, “आजा आजा...बैठ जा बेटी।”
काजल शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में धीरे से बैठ गई।
काजल धीरे से बैठ गई, उसके गालों और आँखों में शर्म और एक्साइटमेंट का मिक्सचर साफ़ दिख रहा था। माँ और बेटी इतने करीब कैसे आ सकती थीं? ज़रूर बाबाजी का कोई जादू हुआ होगा।
फिर मैंने अपने लंड पर गंगाजल लगाया और एक ही जोरदार, पाशविक झटके में पूरा का पूरा 9.5 इंच लंबा और मोटा लंड चंपा की मोटी गांड में घुसा दिया। रचयिता मैत्री।
"आआआआआह!!! उउउउ...ईईएए...यह फट गई!!! मेरी गांड फट गई, बाबाजी!"
चंपा ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी। मेरे लंड के प्रेशर से उसकी भारी गांड का छेद और चौड़ा हो गया था। मैंने तुरंत उसे ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया - अब और ज़ोर से, और ज़ोर से, और अंदर तक… हर धक्के के साथ, चंपा मुझे बड़े मज़े से उसकी गांड चोदने के लिए छेड़ रही थी। हर धक्के के साथ उसके गंद के गोले ऊपर से नीचे तक घूम रहे थे। उसकी गांड कांप रही थी। उसका छेद फैल रहा था और मेरे लंड को निगल रहा था।
यह सब देखकर, काजल पहले से ही अराउज़ हो चुकी थी। उसने भी अपनी गांड तैयार कर ली थी और अब अपनी गांड चुदवाने के लिए तैयार थी। उसने अपनी चूत का रस अपनी गांड में मलकर चिकना कर लिया था। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं, और उसकी चूत थोड़ी गीली हो रही थी। मैंने उसे इशारा किया, और काजल ने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए। अब वह भी पूरी तरह नंगी थी।
मैंने 15 मिनट तक चंपा की गांड ज़ोर से चोदी। फिर मैंने अंजलि को ऊपर उठाया और उसकी गांड भी ज़ोर से चोदी। अंजलि भी दर्द और मज़े के मिले-जुले एहसास में चिल्लाती और अपनी गांड हिलाती रही। अंजलि की गांड चंपा से ज़्यादा सख़्त और टाइट थी लेकिन मेरा लंड भी कहा कम था। उसकी गांड का किला पलवार में ढेह गया था और अब वह भोस के जैसा था।
जब मैं थक गया, तो मैंने उन तीनों से आँखें बंद करके मंत्र पढ़ने को कहा। मैंने अपना लंड गंगाजल से धोया और सीधे काजल के मुँह में डाल दिया। काजल उसे बड़े प्यार और लगन से चूसने लगी। नीचे बाकी दो औरतें मेरे लखोटा से खेल रही थीं। अब ऐसे में कौन सा लंड टिकनेवाला होगा भाई! थोड़ी देर बाद मैंने अपना वीर्य काजल के मुँह में उड़ेल दिया। काजल ने आँखें बंद करके उसे ऐसे निगल लिया, जैसे चॉकलेट चबा रही हो।
*******************
जुड़े रहिये दोस्तों.
मैत्री.
“ऊईईई माँ!!! मर गई!!! फट गई मेरी गांड!!!” मैत्री रचित कहानी है.
चंपा ज़ोर से चिल्लाई। उसका पूरा भारी शरीर दर्द से तड़प उठा। उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, और उसके मुँह से एक दर्द भरी कराह निकली।
उसकी बहू, काजल, ने उसकी चीखें सुनीं और ऊपर भागी। उसने यह नंगा और गंदा सीन देखा - उसकी सास, चंपा, और उसकी ननद, अंजलि, दोनों नंगी लेटी थीं, और बाबा की उंगली चंपा की गांड में घुसी हुई थी - काजल का चेहरा लाल हो गया। वह वहीं खड़ी रही, न हिली, न बोली। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। यह सीन देखकर, उसकी गांड में भी कुछ होने लगा और उसने अपना एक हाथ अपनी पीठ के पीछे ले जाकर अपनी गांड को सहलाना शुरू कर दिया।
मैंने काजल की तरफ देखकर इशारा किया, “आजा आजा...बैठ जा बेटी।”
काजल शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में धीरे से बैठ गई।
काजल धीरे से बैठ गई, उसके गालों और आँखों में शर्म और एक्साइटमेंट का मिक्सचर साफ़ दिख रहा था। माँ और बेटी इतने करीब कैसे आ सकती थीं? ज़रूर बाबाजी का कोई जादू हुआ होगा।
फिर मैंने अपने लंड पर गंगाजल लगाया और एक ही जोरदार, पाशविक झटके में पूरा का पूरा 9.5 इंच लंबा और मोटा लंड चंपा की मोटी गांड में घुसा दिया। रचयिता मैत्री।
"आआआआआह!!! उउउउ...ईईएए...यह फट गई!!! मेरी गांड फट गई, बाबाजी!"
चंपा ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी। मेरे लंड के प्रेशर से उसकी भारी गांड का छेद और चौड़ा हो गया था। मैंने तुरंत उसे ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया - अब और ज़ोर से, और ज़ोर से, और अंदर तक… हर धक्के के साथ, चंपा मुझे बड़े मज़े से उसकी गांड चोदने के लिए छेड़ रही थी। हर धक्के के साथ उसके गंद के गोले ऊपर से नीचे तक घूम रहे थे। उसकी गांड कांप रही थी। उसका छेद फैल रहा था और मेरे लंड को निगल रहा था।
यह सब देखकर, काजल पहले से ही अराउज़ हो चुकी थी। उसने भी अपनी गांड तैयार कर ली थी और अब अपनी गांड चुदवाने के लिए तैयार थी। उसने अपनी चूत का रस अपनी गांड में मलकर चिकना कर लिया था। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं, और उसकी चूत थोड़ी गीली हो रही थी। मैंने उसे इशारा किया, और काजल ने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए। अब वह भी पूरी तरह नंगी थी।
मैंने 15 मिनट तक चंपा की गांड ज़ोर से चोदी। फिर मैंने अंजलि को ऊपर उठाया और उसकी गांड भी ज़ोर से चोदी। अंजलि भी दर्द और मज़े के मिले-जुले एहसास में चिल्लाती और अपनी गांड हिलाती रही। अंजलि की गांड चंपा से ज़्यादा सख़्त और टाइट थी लेकिन मेरा लंड भी कहा कम था। उसकी गांड का किला पलवार में ढेह गया था और अब वह भोस के जैसा था।
जब मैं थक गया, तो मैंने उन तीनों से आँखें बंद करके मंत्र पढ़ने को कहा। मैंने अपना लंड गंगाजल से धोया और सीधे काजल के मुँह में डाल दिया। काजल उसे बड़े प्यार और लगन से चूसने लगी। नीचे बाकी दो औरतें मेरे लखोटा से खेल रही थीं। अब ऐसे में कौन सा लंड टिकनेवाला होगा भाई! थोड़ी देर बाद मैंने अपना वीर्य काजल के मुँह में उड़ेल दिया। काजल ने आँखें बंद करके उसे ऐसे निगल लिया, जैसे चॉकलेट चबा रही हो।
*******************
जुड़े रहिये दोस्तों.
मैत्री.



![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)