16-06-2026, 01:47 AM
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अपडेट–9–
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पिंकी अब पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। वह सलीम और उसके दोस्तों के साथ घूमने-फिरने लगी थी। कॉलेज की सहेलियाँ अब उससे दूरी बना चुकी थीं। मोहल्ले की औरतें अपनी लड़कियों को चेतावनी देने लगी थीं कि पिंकी से दूर रहो, वह रास्ता खराब कर देगी। लेकिन पिंकी को अब किसी की परवाह नहीं थी।
सलीम ने उसे पहले कई बार चूम लिया था। अंधेरी गलियों में,, या अपनी बाइक के पीछे बैठाकर उसे कॉलेज की बाउंड्री के बाहर स्थित झाड़ियों में ले जाता । अन्दर क्लासेज चल रही होती और बाहर झाड़ियों में सलीम उसके कच्चे बदन को मैच्योर करता । सलीम के दोस्त उसका गेट पर इंतजार करते । और कॉलेज की लड़कियां उसके बारे में बातें बना कर उसपे हंसती। लड़के उससे डायरेक्टली या इनडायरेक्टली उससे बात करने, पटाने की कोशिश करते । कुछ उससे छेड़छाड़ भी करते । जो पिंकी को परेशान करता पिंकी सलीम से बोल के उसको धमकवा देती या पिटाई करवा देती । वो बदनाम हो चुकी थी । कॉलेज से भी घर में उसकी शिकायत जा चुकी थी । एक बार ब्रिज और सरला को बुलाया भी था प्रिंसिपल ने । लेकिन पिंकी नहीं सुधरी ।
वो सलीम के प्यार में पड़ के सही गलत को समझना छोड़ चुकी थी । सलीम उसे मानसिक रूप से तो जवान कर ही चुका था अब शारीरिक रूप से भी उसे चुदाई के लिया तैयार कर रहा था । उसने पिंकी के होंठों को जोर-जोर से चूसा था। उसने उसके स्तनों को भी कपड़ों के ऊपर से मर्दाना अंदाज में दबाया और मसला था। पिंकी हर बार कराह उठती, लेकिन सलीम आगे बढ़ने के लिए सही जगह और मौके की तलाश में था। आखिरकार उसने पिंकी को मनाकर तैयार कर लिया था। पिंकी भी अब पूरी तरह तैयार थी।
एक दिन सुबह पिंकी कॉलेज के बजाय सलीम के साथ भाग निकली। कॉलेज की यूनिफॉर्म में ही वह सलीम की पुरानी मारुति कार में बैठ गई। सलीम ने कार स्टार्ट की और भगलपुर के नजदीक एक सुनसान सड़क की ओर बढ़ गया। रास्ते में दोनों कम बात कर रहे थे, लेकिन हवा में कामुकता साफ महसूस हो रही थी। दोनों जानते थे कि आज घूमने का बहाना सिर्फ था — असली मकसद कुछ और था।
कार सुनसान जगह पर पहुँचकर एक पेड़ के नीचे रुकी। चारों तरफ खेत और झाड़ियाँ थीं, कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था। सलीम ने इंजन बंद किया और पिंकी की ओर मुड़ा।
“आज कोई रुकावट नहीं है बेबी,” सलीम ने कहा और पिंकी को अपनी तरफ खींच लिया।
उसने पिंकी के होंठों को जोर से चूम लिया। पिंकी भी जवाब दे रही थी। दोनों की जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। सलीम का हाथ पिंकी की कॉलेज शर्ट के बटन खोलने लगा। एक-एक बटन खोलते हुए उसने उसके गोरे, भरे हुए स्तनों को बाहर निकाला। ब्रा को ऊपर खींचकर उसने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। पिंकी सिसकारियाँ भर रही थी, “सलीम… हाँ… और जोर से…”
सलीम ने पिंकी को कार की सीट पर पीछे की तरफ झुका दिया। उसकी छोटी स्कर्ट को कमर तक ऊपर चढ़ा दिया। पिंकी की सफेद पैंटी अब पूरी तरह दिख रही थी। सलीम ने पैंटी को एक तरफ सरकाया और अपनी उँगलियों से उसकी गीली योनि को सहलाने लगा। पिंकी की साँसें तेज हो गईं। वह कराह रही थी और अपनी जाँघें फैला रही थी।
“मुझे चाहिए… अब मत रुकना,” पिंकी ने हाँफते हुए कहा।
सलीम ने अपनी पैंट का चेन खोला। उसका खड़ा, मोटा लिंग बाहर निकला। उसने पिंकी की जाँघों को चौड़ा किया और धीरे-धीरे अपना लिंग उसकी गीली योनि में दबाना शुरू किया। पिंकी ने आह भर दी। सलीम ने एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लिंग अंदर तक उतार दिया।
पिंकी की कॉलेज यूनिफॉर्म की सफेद शर्ट के बटन खुले हुए थे, ब्रा ऊपर चढ़ी हुई थी और उसके भरे-भरे, गोरे स्तन बाहर निकले हुए थे। उसकी छोटी स्कर्ट कमर तक चढ़ी हुई थी और सफेद पैंटी एक तरफ सरकी हुई थी।
सलीम उसके ऊपर झुका हुआ था। उसका मोटा, खड़ा लिंग पिंकी की गीली योनि में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ पिंकी की देह काँप रही थी।
कार की सीट पर पिंकी लेटी हुई थी। सलीम उसके ऊपर झुका हुआ जोर-जोर से धक्के दे रहा था। हर धक्के के साथ पिंकी के स्तन उछल रहे थे। सलीम एक हाथ से उसके स्तन को मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़े हुए तेजी से चोद रहा था।
“कितनी टाइट है तू… आह…,” सलीम गुर्राया।
सलीम उसके ऊपर झुका हुआ था। उसका मोटा, खड़ा लिंग पिंकी की गीली योनि में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ पिंकी की देह काँप रही थी।
“आह… सलीम… धीरे… इतना मोटा है तेरा…” पिंकी ने आँखें बंद करके कराहते हुए कहा।
सलीम मुस्कुराया। उसने एक जोरदार धक्का दिया जिससे पिंकी के स्तन उछल पड़े।
“क्या धीरे? तू तो चाहती है कि मैं फाड़ दूँ तुझे आज। बोल ना मेरी रानी, कितना जोर से चोदूँ तुझे?”
पिंकी ने अपनी जाँघें और चौड़ी कीं, अपने नितंब ऊपर उठाए और लाल-लाल होकर बोली,
“जोर से… बहुत जोर से चोद मुझे… मैं तेरी हूँ आज… पूरा दिन कॉलेज में तेरे बारे में सोच-सोच कर गीली होती रही थी मैं…”
सलीम ने रफ्तार बढ़ा दी। कार की सीट हिलने लगी। “तेरी ये टाइट चूत… आह… कितनी गीली है… साली, तू तो पूरी रंडी बन गई है मेरी। कॉलेज की ये यूनिफॉर्म पहनकर भी कितनी गंदी हो गई है तू।”
पिंकी ने अपनी आँखें खोलीं और सलीम की गर्दन में हाथ डालकर उसे और गहराई से चूम लिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे को चाट रही थीं। सलीम ने पिंकी के एक स्तन को जोर से मसलते हुए निप्पल को उँगलियों से खींचा।
“हाँ… चूस मेरे स्तन… काट ले… आह!” पिंकी चीखी।
तभी सलीम ने अचानक रुककर पिंकी का फोन उठा लिया, जो डैशबोर्ड पर पड़ा था। उसने कैमरा ऑन किया और रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। स्क्रीन पर पिंकी का नंगा बदन, खुले स्तन और उसकी योनि में आधा घुसा हुआ उसका लिंग साफ दिख रहा था।
पिंकी ने तुरंत आँखें फाड़ीं।
“सलीम! क्या कर रहा है? फोन रख दे! बंद कर रिकॉर्डिंग! नहीं… कोई देख लेगा तो…”
वह घबराकर उठने की कोशिश करने लगी, लेकिन सलीम ने उसे दोनों हाथों से दबाकर नीचे रखा और तेज धक्का देते हुए बोला,
“श्श्श… आराम से मेरी जान। देख, कितनी हॉट लग रही है तू। ये वीडियो सिर्फ हम दोनों के लिए होगा। मैं कभी किसी को नहीं दिखाऊँगा। तू देख कितनी सेक्सी है… तेरे ये उछलते स्तन… तेरी गीली चूत में मेरा लंड… सब रिकॉर्ड हो रहा है।”
पिंकी ने शर्म से चेहरा घुमाया, लेकिन सलीम ने उसका चेहरा पकड़कर कैमरे की तरफ घुमाया।
“देख… कैमरे को देख। बोल, तू क्या चाहती है? बोल ना… ‘सलीम मुझे जोर से चोदो’…”
पिंकी पहले हिचकिचाई, फिर सलीम के तेज धक्कों से उसका जोश बढ़ने लगा। उसकी साँसें और तेज हो गईं।
“सलीम… बंद कर… आह… नहीं… हाँ… मतलब… बस तू ही देखना… कोई और नहीं…”
सलीम हँसा और कैमरे को और पास लाकर पिंकी की योनि में घुसते अपने लिंग पर फोकस किया।
“बोल ना रानी… बताकर देख, कितनी गंदी हो तू।”
पिंकी अब पूरी तरह जोश में आ चुकी थी। उसने अपनी जाँघें सलीम की कमर के चारों तरफ लपेट लीं और कराहते हुए बोली,
“हाँ… चोद मुझे… जोर से चोद अपनी पिंकी को… तेरी ये मोटी लंड मेरी चूत में बहुत अच्छा लग रहा है… आह… और तेज… फाड़ दे मेरी चूत आज… मैं तेरी गंदी रंडी हूँ सलीम… वीडियो बना ले… बस तू ही देखना… मैं तेरे लिए नंगी नाचूँगी भी…”
सलीम का उत्साह बढ़ गया। उसने फोन को एक हाथ में पकड़कर रिकॉर्डिंग जारी रखी और दूसरे हाथ से पिंकी के स्तनों को जोर-जोर से मसलने लगा।
“वाह मेरी रंडी… कितनी बोल्ड हो गई है। देख, तेरा रस मेरे लंड पर कैसे चमक रहा है। बोल, तुझे पसंद है ना जब मैं तुझे इस तरह रिकॉर्ड करता हूँ? अगली बार तेरे दोस्तों के सामने भी दिखाऊँ क्या?”
पिंकी ने शर्म से आँखें बंद कीं लेकिन अपने नितंब ऊपर-नीचे करने लगी।
“नहीं… सिर्फ तू… आह… लेकिन… हाँ… जोश में अच्छा लग रहा है… मत रोकना… चोदते रहो मुझे… मेरे स्तन पकड़ो… काटो… मैं झड़ने वाली हूँ… तेज… तेज करो सलीम… आह… हाँ… हाँ…!”
सलीम ने रफ्तार और बढ़ा दी। कार अब जोर-जोर से हिल रही थी। फोन की रिकॉर्डिंग में पिंकी के कराहने की आवाजें, शरीर की टकराहट की आवाजें और सलीम के गुर्राने की आवाजें साफ कैद हो रही थीं।
“तेरी चूत कितनी गरम है… मैं अंदर ही छोड़ दूँगा आज… बोल, लेना है ना मेरा माल?” सलीम हाँफते हुए बोला।
पिंकी पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी। उसने कैमरे की तरफ देखकर लजाते हुए लेकिन कामातुर स्वर में कहा,
“हाँ… अंदर छोड़ दो… मेरी चूत भर दो अपना गर्म वीर्य… मैं तेरी हूँ… तेरी पिंकी… तेरी गंदी छोटी रंडी… और तेज चोदो… मुझे आज फाड़ दो… आह… आ रहा है… सलीम… मैं झड़ रही हूँ…!”
पिंकी का पूरा शरीर काँप उठा। उसकी योनि सिकुड़ने लगी और वह जोर से झड़ गई। सलीम ने भी कुछ और धक्के मारकर गहराई तक जाकर अपना गर्म वीर्य पिंकी की चूत के अंदर छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपटे हुए हाँफ रहे थे।
सलीम ने फोन को अभी भी रिकॉर्डिंग पर रखा हुआ था। उसने पिंकी के होंठों को चूमते हुए धीरे से कहा,
“देखा… कितना खूबसूरत वीडियो बना है। अब तू हमेशा मेरी रहेगी।”
सलीम ने मुस्कुराते हुए पिंकी के होंठों को फिर से चूमा और बोला, “अब तू पूरी तरह मेरी हो गई।”
पिंकी ने शर्माते हुए लेकिन संतुष्ट मुस्कान के साथ सिर हिलाया।
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अगले दिन शाम को पिंकी कॉलेज से लौटी तो उसका मन कुछ और ही चल रहा था। सलीम के साथ कार वाली उस गर्म दोपहर के बाद उसमें एक नई हिम्मत और शरारत भर गई थी। इस इंसीडेंट के बाद उसने एक महीने में 4 – 5 बार सलीम से अलग अलग जगहों पर शारीरिक संबंध बनाए । उसका रिबन कट चुका था , घरवालों को शक तक नहीं हुआ । कुछ दिन बाद सलीम किसी काम से कुछ समय के लिए दूसरे शहर चला जाता है । एक महीना गुजर गया था । लेकिन जैसे ही दूसरा महीना शुरू हुआ पिंकी को कुछ महसूस होने लगा । क्या ? इतने कम समय में ही उसका शरीर सेक्स का आदि बन चुका था । उंगली , मोमबत्ती से पिंकी को अब मजा नहीं आता था । दिनों दिन उसकी चूत खुजलाने लगी थी, लेकिन वो बाहर किसी और के साथ भी नहीं करना च रही थी । वैसे भी उसे सलीम से डर भी लगता था कि कहीं उसे पता चल गया तो ठीक नहीं होगा । लेकिन पिंकी की निगोडी जवानी उसे परेशान कर रही थी ।
ऐसे में जब वो अपने बाप बृजमोहन की नजरे अपने बदन पर घूरते हुए पाती है तो उसके दिमाग में एक शैतानी खयाल आता है । आता भी क्यों न , ब्रिज अब उसे चोरी चुप नहीं बल्कि खुल्लम खुल्ला देखता था । वो सोचती जा बाप बेशर्म, तो वो क्यों करे शरम ।
वह जानती थी कि पापा अब उसकी रील्स देखते हैं, चुपके से उसे घूरते हैं। उसने फैसला किया कि की वो अपनी भूख का सामान घर में ही ढूंढेगी । उसने बृजमोहन को भ्रष्ट करने का फैसला कर लिया अगले ही पल उसने मन बना लिया आज वह घर में ही पापा को सेड्यूस करेगी।
पिंकी ने अपने कमरे में जाकर wardrobe खोला। उसने सबसे छोटी वाली जींस स्कर्ट निकाली — वो वाली जो उसके नितंबों को मुश्किल से ढक पाती थी। ऊपर उसने एक बहुत टाइट, काली क्रॉप टॉप चुना जिसमें गहरी V-नेकलाइन थी और ब्रा की लेस साफ झाँक रही थी। ब्रा भी उसने पुश-अप वाली पहनी ताकि उसके भरे-भरे स्तन और ऊपर उठकर दिखें। बाल खुले छोड़ दिए, होंठों पर चमकदार लाल लिपस्टिक लगाई और थोड़ी सी परफ्यूम भी छाती पर छिड़की।
आईने के सामने खड़े होकर उसने खुद को देखा। स्कर्ट इतनी छोटी थी कि जरा सा भी झुकने पर उसकी गोल, गोरी जाँघें और पैंटी का किनारा दिख जाता। क्रॉप टॉप से उसकी नाभि, कमर की पूरी लाइन और स्तनों का ऊपरी हिस्सा खुला हुआ था।
“आज पापा को कंट्रोल नहीं रहेगा…” वह खुद से मुस्कुराई।
नीचे लिविंग रूम में बृजमोहन टीवी देख रहा था। सरला रसोई में थी। पिंकी सीधे लिविंग रूम में आई और जानबूझकर पापा के सामने से गुजरी। उसकी चाल में अतिरिक्त लचक थी।
“पापा, पानी देना…” कहकर वह सोफे के पास झुक गई। स्कर्ट ऊपर चढ़ गई और उसके नितंबों का निचला हिस्सा साफ दिखने लगा।
बृजमोहन की आँखें फट गईं। उसका गला सूख गया। “पिंकी… ये क्या पहना है तूने? इतनी छोटी स्कर्ट घर में भी?”
पिंकी मुस्कुराई, सीधे खड़ी हुई और जानबूझकर अपनी कमर को हिलाते हुए बोली,
“क्यों पापा? क्या प्रॉब्लम है? आप तो पहले भी देखते रहते हो ना… अब शर्म क्यों आ रही है? मैं तो बस घर में आराम से हूँ।”
वह बृजमोहन के ठीक सामने सोफे पर बैठ गई, लेकिन पैर फैलाकर ऐसे कि उसकी जाँघें पूरी तरह खुली रहें। स्कर्ट और ऊपर चढ़ गई। पिंकी ने धीरे से अपनी जाँघ पर हाथ फेरा और पापा की तरफ देखते हुए बोली,
“पापा, आपकी नजरें तो आजकल मेरी टांगों पर ही अटक जाती हैं। बोलो ना… अच्छी लग रही हूँ क्या मैं? या फिर गुस्सा आ रहा है?”
बृजमोहन का चेहरा लाल हो गया। वह आँखें हटाने की कोशिश कर रहा था लेकिन नहीं हट पा रहा था। पिंकी के उभरे स्तन, खुली जाँघें और उसकी शरारती मुस्कान देखकर उसका शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था।
पिंकी और आगे बढ़ी। वह उठकर बृजमोहन के पास आई, उसके कुर्सी के हत्थे पर बैठ गई और अपनी कमर को थोड़ा झुकाकर बोली,
“पापा… आपने मेरी रील्स देखीं ना? उसमें मैं स्कर्ट ऊपर करके नाचती हूँ… आपको कैसी लगीं? बताओ ना… क्या सोचते हो जब मेरी जाँघें और ये…” वह जानबूझकर अपनी छाती को हल्का सा दबाकर बोली, “ये सब देखते हो?”
बृजमोहन की साँसें तेज हो गईं। उसका हाथ काँप रहा था।
“पिंकी… तू मेरी बेटी है… ये सब गलत है… मत कर…”
पिंकी ने हँसकर उसके कंधे पर हाथ रखा, उँगलियाँ हल्के से दबाईं और कान के पास फुसफुसाई,
“बेटी तो हूँ… लेकिन अब मैं बड़ी हो गई हूँ पापा। देखो ना मेरा बदन… कितना बदल गया है। आपकी नजरें तो खुद ही मेरे स्तनों और जाँघों पर जाती हैं। बोलो… छूना चाहते हो क्या? या बस देखते रहना पसंद है?”
वह उठी और बृजमोहन के सामने घूम गई, नितंबों को हिलाते हुए। स्कर्ट इतनी ऊपर थी कि पैंटी का आधा हिस्सा दिख रहा था। फिर वह मुड़ी और पापा की गोद के पास खड़ी हो गई।
“पापा… डरो मत। मैं जानती हूँ आप क्या सोच रहे हो। जब मैं छोटी स्कर्ट पहनकर घूमती हूँ तो आपका मन विचलित हो जाता है ना? बताओ… मेरे इन कपड़ों में मुझे देखकर क्या महसूस होता है आपको?”
बृजमोहन कुछ बोल नहीं पा रहा था। उसकी आँखें पिंकी के खुल्लम-खुल्ला प्रदर्शन पर अटकी हुई थीं। पिंकी ने और आगे बढ़कर उसकी जाँघ पर अपना एक पैर रख दिया, जिससे उसकी पूरी जाँघ और गीली पैंटी का किनारा साफ दिख गया।
“देखो पापा… सलीम तो मुझे छूता है… चूमता है… लेकिन आप तो मेरे पापा हो… फिर भी आपकी नजरें मुझे रंडी की तरह देखती हैं। बोलो ना… आज मैं आपके लिए ही तो ये छोटे कपड़े पहने हैं। Provoke करने के लिए… अब बताओ, सफल हुई या नहीं?”
पिंकी की ये बोल्ड बातें सुनकर बृजमोहन का पूरा शरीर गर्म हो गया। वह उठने की कोशिश कर रहा था लेकिन पिंकी ने उसे दबाकर बैठा रखा और अपनी छाती उसके चेहरे के पास ले आई।
“चाहो तो छू लो पापा… बस एक बार… मैं किसी को नहीं बताऊँगी।”
उसकी आवाज में शरारत, लालच और provocation का मिश्रण था। बृजमोहन की इच्छाशक्ति अब टूटने के कगार पर थी।
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पिंकी बृजमोहन के सामने खड़ी थी, उसकी छोटी स्कर्ट लगभग कमर तक चढ़ी हुई, जाँघें खुलीं और स्तन क्रॉप टॉप से उभरकर बाहर झाँक रहे थे। बृजमोहन की साँसें भारी हो चुकी थीं। तभी सरला कमरे में आई।
सरला ने एक नजर में सब कुछ देख लिया — पिंकी की provocative मुद्रा, बृजमोहन का लाल चेहरा और तनाव। लेकिन उसके चेहरे पर न गुस्सा था, न हैरानी। सिर्फ एक हल्की, मजाकिया मुस्कान।
सरला: (हँसते हुए, आराम से सोफे पर बैठते हुए) “अरे वाह! क्या ड्रामा चल रहा है यहाँ? बृजमोहन, तुम्हारा चेहरा देखकर लग रहा है जैसे कोई भूत देख लिया हो। पिंकी बेटा, आज तो तुमने पापा को पूरी तरह घेर लिया है।”
पिंकी: (पापा की आँखों में गहरी, भूखी नजर डालते हुए, अपनी जाँघ को हल्का रगड़ते हुए) “मम्मी, पापा मुझे समझा रहे थे कि ये कपड़े ठीक नहीं… लेकिन उनकी नजरें तो मेरे बदन पर घूम ही रही हैं। पापा, सच बताओ ना… अंदर क्या चल रहा है? वो पुराना पिता वाला conscience अभी भी लड़ रहा है, या फिर वो दबी हुई इच्छा जो आपको रातों को परेशान करती है?”
बृजमोहन: (काँपती आवाज में, असहज होकर) “सरला… देखो तो इसको… ये क्या कर रही है? तुम इसे कुछ बोलो ना…”
सरला: (मजाक उड़ाते हुए, हँसकर) “अरे छोड़ो ना बृजमोहन! लड़की जवान हो गई है, थोड़ा tease कर रही है अपने पापा को। इतना गंभीर क्यों हो रहे हो? जैसे कभी तुमने छोटी-छोटी बातों पर इतना रिएक्ट नहीं किया हो। हाँ पिंकी, जारी रखो… पापा को अच्छा लग रहा होगा।”
सरला की इस हल्की, टाल देने वाली बात से बृजमोहन और भी असहज हो गया। उसका चेहरा अब और लाल हो चुका था।
पिंकी: (पापा के और करीब आकर, अपनी आवाज को नरम लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से तीखा बनाते हुए) “देखा पापा? मम्मी को कोई प्रॉब्लम नहीं है। तो अब आप क्यों इतना संघर्ष कर रहे हैं? क्या आपको guilt हो रहा है कि आप अपनी बेटी को इस तरह देख रहे हैं? मेरी जाँघें, मेरे स्तन, मेरी कमर… सब कुछ आपको आकर्षित कर रहा है, फिर भी आप खुद से लड़ रहे हैं। बताइए ना… ये लड़ाई कितनी और लंबी चलेगी? या फिर आप जानते हैं कि हारना तय है?”
सरला: (चाय का कप उठाते हुए, हल्के-फुल्के अंदाज में) “हाँ बृजमोहन, इतना टेंशन मत लो। पिंकी बस मस्ती कर रही है। तुम भी तो कभी-कभी देख लेते हो इसे… सब नॉर्मल है। फैमिली है हमारी।”
पिंकी: (बहाना बनाते हुए, अपनी कमर को हल्का मोड़ते हुए) “पापा, मेरी कमर में बहुत दर्द है… कॉलेज से आकर थक गई हूँ। बस एक बार गोद में बिठा लीजिए ना। मम्मी के सामने तो कोई प्रॉब्लम नहीं है, है ना मम्मी?”
सरला: (मुस्कुराते हुए, मजाकिया लहजे में) “बैठा दो ना बृजमोहन। गोद में बिठाने से कमर का दर्द तो ठीक हो जाएगा। मैं तो देख रही हूँ, पिंकी को आराम चाहिए।”
पिंकी ने तुरंत बृजमोहन की गोद में बैठ जाने का फैसला कर लिया। उसकी छोटी स्कर्ट पूरी तरह ऊपर सरक गई। उसके नंगे, गर्म नितंब सीधे बृजमोहन की जाँघों पर, उसके उत्तेजित लिंग के ऊपर दब गए। वह धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाने लगी — बहुत सूक्ष्म, लेकिन जानबूझकर रगड़ते हुए।
पिंकी: (पापा के कान के पास फुसफुसाते हुए, लेकिन सरला के सुनने लायक आवाज में, मनोवैज्ञानिक तनाव बढ़ाते हुए) “आह… पापा… आपकी गोद कितनी गर्म है। नीचे कुछ तो बहुत सख्त हो गया है… क्या मेरी ये नरम जाँघें और नितंब दबाने से हो रहा है? या फिर वो गुप्त इच्छा जो आपको सालों से खाए जा रही है — अपनी बेटी को इस तरह महसूस करने की? मम्मी देख रही हैं और हँस रही हैं… अब बताइए, ये guilt आपको और उत्तेजित कर रहा है या तोड़ रहा है? आपकी साँसें क्यों इतनी तेज हो गई हैं? महसूस कीजिए ना… आपकी बेटी की गर्माहट आपके लंड के इतने करीब… कितना और सह पाएँगे आप?”
बृजमोहन: (पूरी तरह काँपते हुए, फुसफुसाकर) “पिंकी… उठो… सरला… ये… ये सब…”
सरला: (हँसते हुए, मजाक में टालते हुए) “अरे बृजमोहन, इतना घबरा क्यों रहे हो? पिंकी को दर्द है, गोद में बैठी है। फैमिली टाइम है ये। तुम भी एंजॉय करो ना… या फिर सच में कुछ और हो रहा है जो तुम छुपा रहे हो?”
सरला ने जानबूझकर आँख मारकर हल्का-फुल्का माहौल बनाए रखा, लेकिन उसकी नजरें दोनों पर गहरी थीं। उसे पिंकी के इस बर्ताव से कोई दिक्कत नहीं थी — बल्कि वह इसे हल्के-फुल्के अंदाज में एंजॉय कर रही थी।
पिंकी: (अपनी कमर को और गहराई से हिलाते हुए, पापा की आँखों में घूरते हुए) “पापा… अब छुपाओ मत। मैं महसूस कर रही हूँ आपके अंदर का तूफान। एक तरफ पिता का अपराधबोध, दूसरी तरफ वो भूख जो आपको मेरे बदन को निगलने को कह रही है। बोलिए ना… इस पल में आप क्या सोच रहे हैं? मुझे अपनी बेटी मानकर रोकना चाहते हैं… या फिर इस गर्म, नंगी जवानी को चोदने की कल्पना कर रहे हैं? मम्मी के सामने ही सच बोल दीजिए…”
कमरे का माहौल अब बेहद तनावपूर्ण, मनोवैज्ञानिक और कामुक था। बृजमोहन पूरी तरह फँस चुका था, जबकि सरला मजाक उड़ाते हुए सब कुछ देख रही थी।
बृजमोहन अब और सहन नहीं कर पा रहा था। पिंकी की गोद में बैठकर लगातार कमर हिलाने, उसके नंगे नितंबों की गर्मी और सरला की हल्की-फुल्की टिप्पणियों ने उसके अंदर का तूफान और बढ़ा दिया था। उसका पूरा शरीर काँप रहा था — अपराधबोध, लज्जा और अनचाही उत्तेजना का विषैला मिश्रण।
बृजमोहन: (काँपती आवाज में, पिंकी को हटाते हुए) “बस… बहुत हो गया। मुझे अकेला छोड़ दो।”
वह अचानक उठा और तेजी से कमरे से बाहर निकल गया। उसके कदम सीढ़ियों की तरफ बढ़े, लेकिन मन अभी भी वहीं अटका हुआ था।
जैसे ही वह थोड़ा दूर गया, पीछे से पिंकी और सरला की हँसी की आवाजें आने लगीं। पहले तो हल्की हँसी, फिर खुलकर।
पिंकी: (हँसते हुए) “मम्मी, देखा पापा का चेहरा? कितना लाल हो गया था… नीचे तो पूरी तरह खड़ा हो चुका था।”
सरला: (मजाकिया लहजे में हँसकर) “हाँ बेटा, तुमने तो उसे अच्छे से घेर लिया। वो अभी भी खुद से लड़ रहा है। लेकिन देख रही हूँ, कितना टूटने को तैयार है।”
दोनों फिर हँस पड़ीं। उनकी हँसी की आवाजें बृजमोहन के कानों में गूँज रही थीं। वह सीढ़ियों पर रुक गया, हाथ दीवार पर टिका दिए। उसकी साँसें तेज थीं। “ये दोनों… क्या कर रही हैं?” वह मन ही मन बड़बड़ाया, लेकिन अंदर कहीं एक गहरी जलन और उत्तेजना भी महसूस हो रही थी।
**रात का बेडरूम दृश्य (जारी)**
सरला पिंकी की छोटी स्कर्ट और क्रॉप टॉप में बृजमोहन के सामने खड़ी थी। हल्की रोशनी में उसका बदन पिंकी जैसा ही उभरकर दिख रहा था — खुली जाँघें, उभरे स्तन, और कमर की लचक। बृजमोहन की आँखें उस पर टिकी हुई थीं।
**बृजमोहन:** (साँसें तेज करते हुए, लेकिन अब आवाज में पहले जैसी कड़काहट नहीं) “सरला… ये… ये बहुत गलत है… तुम पिंकी के कपड़े पहनकर…”
पर उसके शब्द अधूरे रह गए। अपराधबोध की जगह अब उसके अंदर एक गहरी, गर्म उत्तेजना फैलने लगी थी। पिंकी की याद, शाम को उसकी गोद में बैठकर कमर हिलाने वाली गर्माहट, और अब सरला का ये रूप — सब मिलकर उसके शरीर को प्रतिक्रिया दे रहा था। उसका लिंग धीरे-धीरे सख्त होने लगा। पैंट के अंदर स्पष्ट उभार दिखने लगा।
सरला ने तुरंत नजर नीचे की और मुस्कुरा दी।
**सरला:** (धीमी, समझदार आवाज में) “देखा… तुम्हारा अपराधबोध कहाँ गया बृजमोहन? पहले तो तुम्हें शर्म आती थी, guilt महसूस होता था… लेकिन अब? अब तो तुम्हारा लंड उठ रहा है। सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने पिंकी का ये छोटा ड्रेस पहन लिया है। बोलो ना… क्या सोच रहे हो इस वक्त? कि ये मैं हूँ… या फिर कल्पना कर रहे हो कि ये पिंकी है जो तुम्हारे सामने खड़ी है?”
**बृजमोहन:** (आँखें बंद करके, लेकिन साँसें और तेज होकर) “सरला… मत बोलो ऐसा… मैं… मैं कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा हूँ… लेकिन… ये शरीर… ये उत्तेजना… रुक क्यों नहीं रही…”
उसका लिंग अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था। पैंट में साफ उभार दिख रहा था। वह खुद को रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आँखें बार-बार सरला की खुली जाँघों और उभरे स्तनों पर जा रही थीं।
**सरला:** (बेड पर उसके पास सरकते हुए, अपनी जाँघ को जानबूझकर उसके पैर से सटाते हुए) “क्यों रोकना चाहते हो? देखो, तुम्हारा शरीर तो सच बोल रहा है। अपराधबोध नहीं, बल्कि भूख जाग रही है। जब पिंकी तुम्हारी गोद में बैठी थी, तब भी यही हुआ था ना? उसकी नरम नितंबों की गर्माहट, उसकी जाँघों का दबाव… और अब मैं ये ड्रेस पहनकर आई हूँ तो तुम्हें लग रहा है जैसे वो खुद आ गई हो। बताओ… इस उत्तेजना में क्या चल रहा है तुम्हारे दिमाग में? पिता वाला रोल अभी भी बचा हुआ है, या वो पूरी तरह टूट चुका है?”
**बृजमोहन:** (हाँफते हुए, हाथ अपने ऊपर रखने की कोशिश करते हुए लेकिन हट जाते हुए) “मुझे… मुझे नहीं पता… मैं समझ नहीं पा रहा… पिंकी मेरी बेटी है… लेकिन जब वो इस तरह कपड़े पहनकर आती है… जब तुम ये पहनकर आई हो… तो अंदर कुछ और ही हो रहा है। ये उत्तेजना… ये गर्मी… रुक नहीं रही।”
सरला ने हाथ आगे बढ़ाया और धीरे से बृजमोहन की जाँघ पर रख दिया। फिर उँगलियाँ ऊपर सरकाकर उभार के पास ले गई, लेकिन छुई नहीं।
**सरला:** (कान में फुसफुसाते हुए) “झूठ मत बोलो। अपराधबोध नाम की चीज अब बची ही नहीं है तुममें। सिर्फ उत्तेजना है। तुम सोच रहे हो कि पिंकी की ये छोटी स्कर्ट, ये टाइट टॉप… उसके नंगे नितंब, उसकी जाँघें… सब कुछ। और मैं ये पहनकर तुम्हें दिखा रही हूँ कि तुम कितना पागल हो रहे हो। महसूस करो ना… तुम्हारा लंड कितना सख्त हो गया है। ये पिंकी की जवानी की ताकत है बृजमोहन… जो तुम्हें तोड़ रही है।”
**बृजमोहन:** (आँखें खोलकर सरला को देखते हुए, आवाज में अब शर्म कम और कामुकता ज्यादा) “सरला… तुम जानती हो सब… मुझे रोक क्यों नहीं रही? ये… ये गलत है… फिर भी… मैं रोक नहीं पा रहा… ये उत्तेजना… बहुत तेज है…”
सरला ने हल्के से मुस्कुराकर अपनी स्कर्ट को और थोड़ा ऊपर सरका दिया, पिंकी की तरह जाँघें दिखाते हुए।
**सरला:** “रोकना नहीं चाहती। मैं देखना चाहती हूँ कि तुम कितना आगे जाते हो। अब बताओ… इस पल में तुम्हें क्या चाहिए? मुझे रोकना… या फिर पिंकी की याद में इस उत्तेजना को और बढ़ाना?”
कमरे में भारी सन्नाटा था। बृजमोहन का लिंग अब पूरी तरह खड़ा और तना हुआ था। अपराधबोध लगभग गायब हो चुका था, जगह ले रही थी सिर्फ निषिद्ध उत्तेजना।
--- सरला अपनी पैंटी दिखाते हुए, बृजमोहन की जाँघ पर बैठ गई। उसकी गर्म जाँघें बृजमोहन की उत्तेजित जगह से सट गईं।
सरला: (कान में फुसफुसाते हुए, कमर हल्का हिलाते हुए) “तो अब छुपाओ मत। महसूस करो। पिंकी की ये स्कर्ट पहनकर मैं तुम्हें बता रही हूँ कि तुम कितना गिर चुके हो। तुम्हारी बेटी की जवानी ने तुम्हें तोड़ दिया है। बोलो… अगर पिंकी अभी इस वक्त अंदर आ जाए और इसी ड्रेस में तुम्हारी गोद में बैठ जाए… तो तुम क्या करोगे? उसे रोकोगे… या फिर उसकी गर्म चूत को महसूस करते हुए अपना लंड अंदर डाल दोगे?”
बृजमोहन: (अब पूरी तरह उत्तेजित, हाथ सरला की कमर पर रखते हुए) “सरला… मत पूछो ऐसा… मैं… मैं सोच भी नहीं सकता… लेकिन… शरीर तो चाह रहा है। उसकी नरम देह… उसकी गर्मी… मुझे लगता है कि मैं अब कंट्रोल में नहीं हूँ। ये उत्तेजना… मुझे पागल कर रही है।”
सरला ने बृजमोहन की पैंट का चेन खोलना शुरू कर दिया। उसका हाथ अंदर घुसा और सीधे खड़े लिंग को पकड़ लिया।
सरला: (धीरे-धीरे हाथ हिलाते हुए, आँखों में चमक के साथ) “तो अब मान लो। अपराधबोध मर चुका है। अब सिर्फ इच्छा बची है। पिंकी तुम्हारी बेटी है, लेकिन वो अब तुम्हारी सबसे बड़ी कामुक कल्पना भी बन चुकी है। मैं इसे रोकने नहीं आई… बल्कि बढ़ाने आई हूँ। बताओ… आज रात तुम क्या चाहते हो? सिर्फ कल्पना? या फिर असल में आगे बढ़ना चाहते हो?”
बृजमोहन की साँसें अब बहुत तेज हो गई थीं। उसने सरला की कमर को कसकर पकड़ लिया और उसकी जाँघों को सहलाने लगा। कमरे में सिर्फ उनकी भारी साँसें और कपड़ों की सरसराहट की आवाज गूँज रही थी। उत्तेजना अब पूरे चरम पर थी।
**रात का बेडरूम – चरम**
सरला ने बृजमोहन की गोद में बैठकर उसका लिंग पकड़ लिया था। बृजमोहन अब पूरी तरह उत्तेजित था। उसकी आंखो में सिर्फ जलती हुई भूख थी।
**सरला:** (लिंग को धीरे-धीरे हाथ से हिलाते हुए) “देखा… कितना सख्त हो गया है। पिंकी की याद में ना? अब झूठ मत बोलो।”
बृजमोहन ने जवाब में सरला को जोर से चूम लिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे में उलझ गईं। बृजमोहन ने सरला की क्रॉप टॉप ऊपर खींचकर उसके स्तनों को बाहर निकाला और जोर से चूसने लगा। सरला कराह उठी।
**सरला:** (हाँफते हुए) “चूसो… जोर से चूसो… सोच रहे हो ना कि ये पिंकी के स्तन हैं? उसकी जवानी को चूस रहे हो?”
बृजमोहन ने सरला को बेड पर धकेल दिया। उसने अपनी पैंट उतारी, खड़ा लिंग बाहर निकाला और सरला की जाँघों को फैलाकर एक जोरदार धक्का दिया। पूरा लिंग सरला की गीली योनि में चला गया।
**बृजमोहन:** (जोर-जोर से धक्के देते हुए) “आह… बहुत गर्म है… आज बहुत दिनों बाद…”
**सरला:** (नितंब ऊपर उठाकर, कराहते हुए) “जोर से चोदो मुझे… लेकिन सोचो पिंकी को… सोचो कि तुम उसकी छोटी स्कर्ट ऊपर करके उसकी टाइट चूत में घुस रहे हो… बोलो… कल्पना कर रहे हो ना?”
बृजमोहन की रफ्तार बढ़ गई। वह सरला को जोर-जोर से चोद रहा था, लेकिन उसकी आँखें बंद थीं और दिमाग में पिंकी थी — उसकी गोद में बैठी हुई, नंगे नितंब, ।
**बृजमोहन:** (गुर्राते हुए) “हाँ… सोच रहा हूँ… उसकी जाँघें… उसके नितंब… आह… बहुत टाइट होगी वो…”
सरला ने मुस्कुराते हुए अपनी कमर हिलाई और बृजमोहन की पीठ पर नाखून गड़ाए।
**सरला:** “तो चोदो मुझे… उसकी जगह… आज मैं पिंकी हूँ तुम्हारे लिए… मेरी चूत में अपना सारा गुस्सा और भूख निकाल दो…”
दोनों काफी देर तक जोर-जोर से सेक्स करते रहे। बृजमोहन ने सरला को कई पोजीशन में चोदा — ऊपर से, कुत्ते की मुद्रा में, और आखिर में सरला के ऊपर चढ़कर। आखिर में दोनों एक साथ झड़ गए। बृजमोहन ने सरला के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ा।
दोनों हाँफते हुए बेड पर लेट गए। सरला ने बृजमोहन के सीने पर हाथ फेरते हुए कहा,
" मजा आया या नहीं "
" बहुत"
" इसे रोलप्ले कहते हैं, समझे पतिदेव "
" यानी कि तुम मुझे जोश दिलाने के लिए ये सब कर रही थी "
" बहुत से शादी शुदा लोग अपनी सेक्स लाइफ को चटपटा बनाने के लिए ये सब करते हैं, इसमें कभी पति ड्राइवर बन जाता तो कभी पड़ोसी, बीवी भी कभी कुछ बन जाती है , कभी कुछ "
" जैसे बेटी ? "
" हां, बेटी , बहन , मां , भाभी , साली या कोई कॉल गर्ल, "
" अच्छा"
" हां जी "
" लेकिन तुम यह सब कहां से सीखी , पहले तो तुमने कभी कुछ ऐसा किया नहीं "
" वो छोड़ो, तुम ये बताओ कि तुम्हें कैसा लगा "
" अच्छा लगा "
बृजमोहन कुछ को सोचने लगा
" क्या सोच रहे हो "
" कुछ नहीं "
" वैसे एक बात कहूं, अगर तुम्हे मौका मिला तो क्या वाकई में तुम पेल दोगे क्या उसे "
“ नहीं, ये क्या कह रही हो तुम, ये ठीक नहीं होगा सरला "
" ओह हो, ठीक नहीं होगा , जब मुझे कोई दिक्कत नहीं है तो तुम क्यों डर रहे हो , वैसे अंदर से तो तुम भी यही चाहते हो है न "
" नहीं तो"
" तो फिर उसे हर टाइम घूरते क्यों रहते हो , उसने बताया मुझे की आजकल उसकी रीलें देखते रहते हो तुम "
" ये उसने कहा तुमसे "
" वो मुझे सब बताती है, कि तुम क्या देखते हो और .... कहां देखते हो "
" वो कपड़े ही ऐसे पहनती है, की मेरी नजर चली जाती है, लेकिन "
" लेकिन क्या, बोलो न, "
" कुछ नहीं "
" अब छुपाओ मत जी ? कह दिया करो जो मन में है , एक बात बोलूं पिंकी भी तुम्हें पसंद करती है ।”
" सरला, वो तुम्हारी भी तो बेटी है , तुम उसकी मां हो, मुझे समझ में नहीं आ रहा तुम कैसे ऐसे उसके बारे में कह रही हो , "
" मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है "
लेकिन मुझे है, मै बाप हूं उसका, वो अब छोटी बच्ची नहीं रही , कई लड़के उसकी जवानी की तिजोरी लूटना चाहते हैं, मै अगर सख्ती न करूं , तो वो किस हद तक चली जाएगी , तुम्हें पता नहीं, तुम जो कह रही हो फिर वो न मेरी इज्ज़त करेगी और न डरेगी मुझसे "
" देखो जी, तुमने मीना और रेखा पे भी तो कंट्रोल करने की कोशिश की थी, फिर क्या रोक पाए तुम उसे ? " इसीलिए तो कह रही हूं अगर तुम ही भंवरा बनके, अपनी उगाई कली का रस पी लो तो वो बाहर मुंह नहीं मारेगी , वरना देख लेना जल्द ही, वो किसी न किसी के साथ अपना मुंह काला करवा ही लेगी "
ये तो तुम्हे भी पता है, कि वो आजकल उस सलीम के साथ घूम रही है "
ब्रजमोहन चुप हो जाता है ।
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पिंकी अब पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। वह सलीम और उसके दोस्तों के साथ घूमने-फिरने लगी थी। कॉलेज की सहेलियाँ अब उससे दूरी बना चुकी थीं। मोहल्ले की औरतें अपनी लड़कियों को चेतावनी देने लगी थीं कि पिंकी से दूर रहो, वह रास्ता खराब कर देगी। लेकिन पिंकी को अब किसी की परवाह नहीं थी।
सलीम ने उसे पहले कई बार चूम लिया था। अंधेरी गलियों में,, या अपनी बाइक के पीछे बैठाकर उसे कॉलेज की बाउंड्री के बाहर स्थित झाड़ियों में ले जाता । अन्दर क्लासेज चल रही होती और बाहर झाड़ियों में सलीम उसके कच्चे बदन को मैच्योर करता । सलीम के दोस्त उसका गेट पर इंतजार करते । और कॉलेज की लड़कियां उसके बारे में बातें बना कर उसपे हंसती। लड़के उससे डायरेक्टली या इनडायरेक्टली उससे बात करने, पटाने की कोशिश करते । कुछ उससे छेड़छाड़ भी करते । जो पिंकी को परेशान करता पिंकी सलीम से बोल के उसको धमकवा देती या पिटाई करवा देती । वो बदनाम हो चुकी थी । कॉलेज से भी घर में उसकी शिकायत जा चुकी थी । एक बार ब्रिज और सरला को बुलाया भी था प्रिंसिपल ने । लेकिन पिंकी नहीं सुधरी ।
वो सलीम के प्यार में पड़ के सही गलत को समझना छोड़ चुकी थी । सलीम उसे मानसिक रूप से तो जवान कर ही चुका था अब शारीरिक रूप से भी उसे चुदाई के लिया तैयार कर रहा था । उसने पिंकी के होंठों को जोर-जोर से चूसा था। उसने उसके स्तनों को भी कपड़ों के ऊपर से मर्दाना अंदाज में दबाया और मसला था। पिंकी हर बार कराह उठती, लेकिन सलीम आगे बढ़ने के लिए सही जगह और मौके की तलाश में था। आखिरकार उसने पिंकी को मनाकर तैयार कर लिया था। पिंकी भी अब पूरी तरह तैयार थी।
एक दिन सुबह पिंकी कॉलेज के बजाय सलीम के साथ भाग निकली। कॉलेज की यूनिफॉर्म में ही वह सलीम की पुरानी मारुति कार में बैठ गई। सलीम ने कार स्टार्ट की और भगलपुर के नजदीक एक सुनसान सड़क की ओर बढ़ गया। रास्ते में दोनों कम बात कर रहे थे, लेकिन हवा में कामुकता साफ महसूस हो रही थी। दोनों जानते थे कि आज घूमने का बहाना सिर्फ था — असली मकसद कुछ और था।
कार सुनसान जगह पर पहुँचकर एक पेड़ के नीचे रुकी। चारों तरफ खेत और झाड़ियाँ थीं, कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था। सलीम ने इंजन बंद किया और पिंकी की ओर मुड़ा।
“आज कोई रुकावट नहीं है बेबी,” सलीम ने कहा और पिंकी को अपनी तरफ खींच लिया।
उसने पिंकी के होंठों को जोर से चूम लिया। पिंकी भी जवाब दे रही थी। दोनों की जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। सलीम का हाथ पिंकी की कॉलेज शर्ट के बटन खोलने लगा। एक-एक बटन खोलते हुए उसने उसके गोरे, भरे हुए स्तनों को बाहर निकाला। ब्रा को ऊपर खींचकर उसने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। पिंकी सिसकारियाँ भर रही थी, “सलीम… हाँ… और जोर से…”
सलीम ने पिंकी को कार की सीट पर पीछे की तरफ झुका दिया। उसकी छोटी स्कर्ट को कमर तक ऊपर चढ़ा दिया। पिंकी की सफेद पैंटी अब पूरी तरह दिख रही थी। सलीम ने पैंटी को एक तरफ सरकाया और अपनी उँगलियों से उसकी गीली योनि को सहलाने लगा। पिंकी की साँसें तेज हो गईं। वह कराह रही थी और अपनी जाँघें फैला रही थी।
“मुझे चाहिए… अब मत रुकना,” पिंकी ने हाँफते हुए कहा।
सलीम ने अपनी पैंट का चेन खोला। उसका खड़ा, मोटा लिंग बाहर निकला। उसने पिंकी की जाँघों को चौड़ा किया और धीरे-धीरे अपना लिंग उसकी गीली योनि में दबाना शुरू किया। पिंकी ने आह भर दी। सलीम ने एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लिंग अंदर तक उतार दिया।
पिंकी की कॉलेज यूनिफॉर्म की सफेद शर्ट के बटन खुले हुए थे, ब्रा ऊपर चढ़ी हुई थी और उसके भरे-भरे, गोरे स्तन बाहर निकले हुए थे। उसकी छोटी स्कर्ट कमर तक चढ़ी हुई थी और सफेद पैंटी एक तरफ सरकी हुई थी।
सलीम उसके ऊपर झुका हुआ था। उसका मोटा, खड़ा लिंग पिंकी की गीली योनि में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ पिंकी की देह काँप रही थी।
कार की सीट पर पिंकी लेटी हुई थी। सलीम उसके ऊपर झुका हुआ जोर-जोर से धक्के दे रहा था। हर धक्के के साथ पिंकी के स्तन उछल रहे थे। सलीम एक हाथ से उसके स्तन को मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़े हुए तेजी से चोद रहा था।
“कितनी टाइट है तू… आह…,” सलीम गुर्राया।
सलीम उसके ऊपर झुका हुआ था। उसका मोटा, खड़ा लिंग पिंकी की गीली योनि में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ पिंकी की देह काँप रही थी।
“आह… सलीम… धीरे… इतना मोटा है तेरा…” पिंकी ने आँखें बंद करके कराहते हुए कहा।
सलीम मुस्कुराया। उसने एक जोरदार धक्का दिया जिससे पिंकी के स्तन उछल पड़े।
“क्या धीरे? तू तो चाहती है कि मैं फाड़ दूँ तुझे आज। बोल ना मेरी रानी, कितना जोर से चोदूँ तुझे?”
पिंकी ने अपनी जाँघें और चौड़ी कीं, अपने नितंब ऊपर उठाए और लाल-लाल होकर बोली,
“जोर से… बहुत जोर से चोद मुझे… मैं तेरी हूँ आज… पूरा दिन कॉलेज में तेरे बारे में सोच-सोच कर गीली होती रही थी मैं…”
सलीम ने रफ्तार बढ़ा दी। कार की सीट हिलने लगी। “तेरी ये टाइट चूत… आह… कितनी गीली है… साली, तू तो पूरी रंडी बन गई है मेरी। कॉलेज की ये यूनिफॉर्म पहनकर भी कितनी गंदी हो गई है तू।”
पिंकी ने अपनी आँखें खोलीं और सलीम की गर्दन में हाथ डालकर उसे और गहराई से चूम लिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे को चाट रही थीं। सलीम ने पिंकी के एक स्तन को जोर से मसलते हुए निप्पल को उँगलियों से खींचा।
“हाँ… चूस मेरे स्तन… काट ले… आह!” पिंकी चीखी।
तभी सलीम ने अचानक रुककर पिंकी का फोन उठा लिया, जो डैशबोर्ड पर पड़ा था। उसने कैमरा ऑन किया और रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। स्क्रीन पर पिंकी का नंगा बदन, खुले स्तन और उसकी योनि में आधा घुसा हुआ उसका लिंग साफ दिख रहा था।
पिंकी ने तुरंत आँखें फाड़ीं।
“सलीम! क्या कर रहा है? फोन रख दे! बंद कर रिकॉर्डिंग! नहीं… कोई देख लेगा तो…”
वह घबराकर उठने की कोशिश करने लगी, लेकिन सलीम ने उसे दोनों हाथों से दबाकर नीचे रखा और तेज धक्का देते हुए बोला,
“श्श्श… आराम से मेरी जान। देख, कितनी हॉट लग रही है तू। ये वीडियो सिर्फ हम दोनों के लिए होगा। मैं कभी किसी को नहीं दिखाऊँगा। तू देख कितनी सेक्सी है… तेरे ये उछलते स्तन… तेरी गीली चूत में मेरा लंड… सब रिकॉर्ड हो रहा है।”
पिंकी ने शर्म से चेहरा घुमाया, लेकिन सलीम ने उसका चेहरा पकड़कर कैमरे की तरफ घुमाया।
“देख… कैमरे को देख। बोल, तू क्या चाहती है? बोल ना… ‘सलीम मुझे जोर से चोदो’…”
पिंकी पहले हिचकिचाई, फिर सलीम के तेज धक्कों से उसका जोश बढ़ने लगा। उसकी साँसें और तेज हो गईं।
“सलीम… बंद कर… आह… नहीं… हाँ… मतलब… बस तू ही देखना… कोई और नहीं…”
सलीम हँसा और कैमरे को और पास लाकर पिंकी की योनि में घुसते अपने लिंग पर फोकस किया।
“बोल ना रानी… बताकर देख, कितनी गंदी हो तू।”
पिंकी अब पूरी तरह जोश में आ चुकी थी। उसने अपनी जाँघें सलीम की कमर के चारों तरफ लपेट लीं और कराहते हुए बोली,
“हाँ… चोद मुझे… जोर से चोद अपनी पिंकी को… तेरी ये मोटी लंड मेरी चूत में बहुत अच्छा लग रहा है… आह… और तेज… फाड़ दे मेरी चूत आज… मैं तेरी गंदी रंडी हूँ सलीम… वीडियो बना ले… बस तू ही देखना… मैं तेरे लिए नंगी नाचूँगी भी…”
सलीम का उत्साह बढ़ गया। उसने फोन को एक हाथ में पकड़कर रिकॉर्डिंग जारी रखी और दूसरे हाथ से पिंकी के स्तनों को जोर-जोर से मसलने लगा।
“वाह मेरी रंडी… कितनी बोल्ड हो गई है। देख, तेरा रस मेरे लंड पर कैसे चमक रहा है। बोल, तुझे पसंद है ना जब मैं तुझे इस तरह रिकॉर्ड करता हूँ? अगली बार तेरे दोस्तों के सामने भी दिखाऊँ क्या?”
पिंकी ने शर्म से आँखें बंद कीं लेकिन अपने नितंब ऊपर-नीचे करने लगी।
“नहीं… सिर्फ तू… आह… लेकिन… हाँ… जोश में अच्छा लग रहा है… मत रोकना… चोदते रहो मुझे… मेरे स्तन पकड़ो… काटो… मैं झड़ने वाली हूँ… तेज… तेज करो सलीम… आह… हाँ… हाँ…!”
सलीम ने रफ्तार और बढ़ा दी। कार अब जोर-जोर से हिल रही थी। फोन की रिकॉर्डिंग में पिंकी के कराहने की आवाजें, शरीर की टकराहट की आवाजें और सलीम के गुर्राने की आवाजें साफ कैद हो रही थीं।
“तेरी चूत कितनी गरम है… मैं अंदर ही छोड़ दूँगा आज… बोल, लेना है ना मेरा माल?” सलीम हाँफते हुए बोला।
पिंकी पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी। उसने कैमरे की तरफ देखकर लजाते हुए लेकिन कामातुर स्वर में कहा,
“हाँ… अंदर छोड़ दो… मेरी चूत भर दो अपना गर्म वीर्य… मैं तेरी हूँ… तेरी पिंकी… तेरी गंदी छोटी रंडी… और तेज चोदो… मुझे आज फाड़ दो… आह… आ रहा है… सलीम… मैं झड़ रही हूँ…!”
पिंकी का पूरा शरीर काँप उठा। उसकी योनि सिकुड़ने लगी और वह जोर से झड़ गई। सलीम ने भी कुछ और धक्के मारकर गहराई तक जाकर अपना गर्म वीर्य पिंकी की चूत के अंदर छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपटे हुए हाँफ रहे थे।
सलीम ने फोन को अभी भी रिकॉर्डिंग पर रखा हुआ था। उसने पिंकी के होंठों को चूमते हुए धीरे से कहा,
“देखा… कितना खूबसूरत वीडियो बना है। अब तू हमेशा मेरी रहेगी।”
सलीम ने मुस्कुराते हुए पिंकी के होंठों को फिर से चूमा और बोला, “अब तू पूरी तरह मेरी हो गई।”
पिंकी ने शर्माते हुए लेकिन संतुष्ट मुस्कान के साथ सिर हिलाया।
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अगले दिन शाम को पिंकी कॉलेज से लौटी तो उसका मन कुछ और ही चल रहा था। सलीम के साथ कार वाली उस गर्म दोपहर के बाद उसमें एक नई हिम्मत और शरारत भर गई थी। इस इंसीडेंट के बाद उसने एक महीने में 4 – 5 बार सलीम से अलग अलग जगहों पर शारीरिक संबंध बनाए । उसका रिबन कट चुका था , घरवालों को शक तक नहीं हुआ । कुछ दिन बाद सलीम किसी काम से कुछ समय के लिए दूसरे शहर चला जाता है । एक महीना गुजर गया था । लेकिन जैसे ही दूसरा महीना शुरू हुआ पिंकी को कुछ महसूस होने लगा । क्या ? इतने कम समय में ही उसका शरीर सेक्स का आदि बन चुका था । उंगली , मोमबत्ती से पिंकी को अब मजा नहीं आता था । दिनों दिन उसकी चूत खुजलाने लगी थी, लेकिन वो बाहर किसी और के साथ भी नहीं करना च रही थी । वैसे भी उसे सलीम से डर भी लगता था कि कहीं उसे पता चल गया तो ठीक नहीं होगा । लेकिन पिंकी की निगोडी जवानी उसे परेशान कर रही थी ।
ऐसे में जब वो अपने बाप बृजमोहन की नजरे अपने बदन पर घूरते हुए पाती है तो उसके दिमाग में एक शैतानी खयाल आता है । आता भी क्यों न , ब्रिज अब उसे चोरी चुप नहीं बल्कि खुल्लम खुल्ला देखता था । वो सोचती जा बाप बेशर्म, तो वो क्यों करे शरम ।
वह जानती थी कि पापा अब उसकी रील्स देखते हैं, चुपके से उसे घूरते हैं। उसने फैसला किया कि की वो अपनी भूख का सामान घर में ही ढूंढेगी । उसने बृजमोहन को भ्रष्ट करने का फैसला कर लिया अगले ही पल उसने मन बना लिया आज वह घर में ही पापा को सेड्यूस करेगी।
पिंकी ने अपने कमरे में जाकर wardrobe खोला। उसने सबसे छोटी वाली जींस स्कर्ट निकाली — वो वाली जो उसके नितंबों को मुश्किल से ढक पाती थी। ऊपर उसने एक बहुत टाइट, काली क्रॉप टॉप चुना जिसमें गहरी V-नेकलाइन थी और ब्रा की लेस साफ झाँक रही थी। ब्रा भी उसने पुश-अप वाली पहनी ताकि उसके भरे-भरे स्तन और ऊपर उठकर दिखें। बाल खुले छोड़ दिए, होंठों पर चमकदार लाल लिपस्टिक लगाई और थोड़ी सी परफ्यूम भी छाती पर छिड़की।
आईने के सामने खड़े होकर उसने खुद को देखा। स्कर्ट इतनी छोटी थी कि जरा सा भी झुकने पर उसकी गोल, गोरी जाँघें और पैंटी का किनारा दिख जाता। क्रॉप टॉप से उसकी नाभि, कमर की पूरी लाइन और स्तनों का ऊपरी हिस्सा खुला हुआ था।
“आज पापा को कंट्रोल नहीं रहेगा…” वह खुद से मुस्कुराई।
नीचे लिविंग रूम में बृजमोहन टीवी देख रहा था। सरला रसोई में थी। पिंकी सीधे लिविंग रूम में आई और जानबूझकर पापा के सामने से गुजरी। उसकी चाल में अतिरिक्त लचक थी।
“पापा, पानी देना…” कहकर वह सोफे के पास झुक गई। स्कर्ट ऊपर चढ़ गई और उसके नितंबों का निचला हिस्सा साफ दिखने लगा।
बृजमोहन की आँखें फट गईं। उसका गला सूख गया। “पिंकी… ये क्या पहना है तूने? इतनी छोटी स्कर्ट घर में भी?”
पिंकी मुस्कुराई, सीधे खड़ी हुई और जानबूझकर अपनी कमर को हिलाते हुए बोली,
“क्यों पापा? क्या प्रॉब्लम है? आप तो पहले भी देखते रहते हो ना… अब शर्म क्यों आ रही है? मैं तो बस घर में आराम से हूँ।”
वह बृजमोहन के ठीक सामने सोफे पर बैठ गई, लेकिन पैर फैलाकर ऐसे कि उसकी जाँघें पूरी तरह खुली रहें। स्कर्ट और ऊपर चढ़ गई। पिंकी ने धीरे से अपनी जाँघ पर हाथ फेरा और पापा की तरफ देखते हुए बोली,
“पापा, आपकी नजरें तो आजकल मेरी टांगों पर ही अटक जाती हैं। बोलो ना… अच्छी लग रही हूँ क्या मैं? या फिर गुस्सा आ रहा है?”
बृजमोहन का चेहरा लाल हो गया। वह आँखें हटाने की कोशिश कर रहा था लेकिन नहीं हट पा रहा था। पिंकी के उभरे स्तन, खुली जाँघें और उसकी शरारती मुस्कान देखकर उसका शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था।
पिंकी और आगे बढ़ी। वह उठकर बृजमोहन के पास आई, उसके कुर्सी के हत्थे पर बैठ गई और अपनी कमर को थोड़ा झुकाकर बोली,
“पापा… आपने मेरी रील्स देखीं ना? उसमें मैं स्कर्ट ऊपर करके नाचती हूँ… आपको कैसी लगीं? बताओ ना… क्या सोचते हो जब मेरी जाँघें और ये…” वह जानबूझकर अपनी छाती को हल्का सा दबाकर बोली, “ये सब देखते हो?”
बृजमोहन की साँसें तेज हो गईं। उसका हाथ काँप रहा था।
“पिंकी… तू मेरी बेटी है… ये सब गलत है… मत कर…”
पिंकी ने हँसकर उसके कंधे पर हाथ रखा, उँगलियाँ हल्के से दबाईं और कान के पास फुसफुसाई,
“बेटी तो हूँ… लेकिन अब मैं बड़ी हो गई हूँ पापा। देखो ना मेरा बदन… कितना बदल गया है। आपकी नजरें तो खुद ही मेरे स्तनों और जाँघों पर जाती हैं। बोलो… छूना चाहते हो क्या? या बस देखते रहना पसंद है?”
वह उठी और बृजमोहन के सामने घूम गई, नितंबों को हिलाते हुए। स्कर्ट इतनी ऊपर थी कि पैंटी का आधा हिस्सा दिख रहा था। फिर वह मुड़ी और पापा की गोद के पास खड़ी हो गई।
“पापा… डरो मत। मैं जानती हूँ आप क्या सोच रहे हो। जब मैं छोटी स्कर्ट पहनकर घूमती हूँ तो आपका मन विचलित हो जाता है ना? बताओ… मेरे इन कपड़ों में मुझे देखकर क्या महसूस होता है आपको?”
बृजमोहन कुछ बोल नहीं पा रहा था। उसकी आँखें पिंकी के खुल्लम-खुल्ला प्रदर्शन पर अटकी हुई थीं। पिंकी ने और आगे बढ़कर उसकी जाँघ पर अपना एक पैर रख दिया, जिससे उसकी पूरी जाँघ और गीली पैंटी का किनारा साफ दिख गया।
“देखो पापा… सलीम तो मुझे छूता है… चूमता है… लेकिन आप तो मेरे पापा हो… फिर भी आपकी नजरें मुझे रंडी की तरह देखती हैं। बोलो ना… आज मैं आपके लिए ही तो ये छोटे कपड़े पहने हैं। Provoke करने के लिए… अब बताओ, सफल हुई या नहीं?”
पिंकी की ये बोल्ड बातें सुनकर बृजमोहन का पूरा शरीर गर्म हो गया। वह उठने की कोशिश कर रहा था लेकिन पिंकी ने उसे दबाकर बैठा रखा और अपनी छाती उसके चेहरे के पास ले आई।
“चाहो तो छू लो पापा… बस एक बार… मैं किसी को नहीं बताऊँगी।”
उसकी आवाज में शरारत, लालच और provocation का मिश्रण था। बृजमोहन की इच्छाशक्ति अब टूटने के कगार पर थी।
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पिंकी बृजमोहन के सामने खड़ी थी, उसकी छोटी स्कर्ट लगभग कमर तक चढ़ी हुई, जाँघें खुलीं और स्तन क्रॉप टॉप से उभरकर बाहर झाँक रहे थे। बृजमोहन की साँसें भारी हो चुकी थीं। तभी सरला कमरे में आई।
सरला ने एक नजर में सब कुछ देख लिया — पिंकी की provocative मुद्रा, बृजमोहन का लाल चेहरा और तनाव। लेकिन उसके चेहरे पर न गुस्सा था, न हैरानी। सिर्फ एक हल्की, मजाकिया मुस्कान।
सरला: (हँसते हुए, आराम से सोफे पर बैठते हुए) “अरे वाह! क्या ड्रामा चल रहा है यहाँ? बृजमोहन, तुम्हारा चेहरा देखकर लग रहा है जैसे कोई भूत देख लिया हो। पिंकी बेटा, आज तो तुमने पापा को पूरी तरह घेर लिया है।”
पिंकी: (पापा की आँखों में गहरी, भूखी नजर डालते हुए, अपनी जाँघ को हल्का रगड़ते हुए) “मम्मी, पापा मुझे समझा रहे थे कि ये कपड़े ठीक नहीं… लेकिन उनकी नजरें तो मेरे बदन पर घूम ही रही हैं। पापा, सच बताओ ना… अंदर क्या चल रहा है? वो पुराना पिता वाला conscience अभी भी लड़ रहा है, या फिर वो दबी हुई इच्छा जो आपको रातों को परेशान करती है?”
बृजमोहन: (काँपती आवाज में, असहज होकर) “सरला… देखो तो इसको… ये क्या कर रही है? तुम इसे कुछ बोलो ना…”
सरला: (मजाक उड़ाते हुए, हँसकर) “अरे छोड़ो ना बृजमोहन! लड़की जवान हो गई है, थोड़ा tease कर रही है अपने पापा को। इतना गंभीर क्यों हो रहे हो? जैसे कभी तुमने छोटी-छोटी बातों पर इतना रिएक्ट नहीं किया हो। हाँ पिंकी, जारी रखो… पापा को अच्छा लग रहा होगा।”
सरला की इस हल्की, टाल देने वाली बात से बृजमोहन और भी असहज हो गया। उसका चेहरा अब और लाल हो चुका था।
पिंकी: (पापा के और करीब आकर, अपनी आवाज को नरम लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से तीखा बनाते हुए) “देखा पापा? मम्मी को कोई प्रॉब्लम नहीं है। तो अब आप क्यों इतना संघर्ष कर रहे हैं? क्या आपको guilt हो रहा है कि आप अपनी बेटी को इस तरह देख रहे हैं? मेरी जाँघें, मेरे स्तन, मेरी कमर… सब कुछ आपको आकर्षित कर रहा है, फिर भी आप खुद से लड़ रहे हैं। बताइए ना… ये लड़ाई कितनी और लंबी चलेगी? या फिर आप जानते हैं कि हारना तय है?”
सरला: (चाय का कप उठाते हुए, हल्के-फुल्के अंदाज में) “हाँ बृजमोहन, इतना टेंशन मत लो। पिंकी बस मस्ती कर रही है। तुम भी तो कभी-कभी देख लेते हो इसे… सब नॉर्मल है। फैमिली है हमारी।”
पिंकी: (बहाना बनाते हुए, अपनी कमर को हल्का मोड़ते हुए) “पापा, मेरी कमर में बहुत दर्द है… कॉलेज से आकर थक गई हूँ। बस एक बार गोद में बिठा लीजिए ना। मम्मी के सामने तो कोई प्रॉब्लम नहीं है, है ना मम्मी?”
सरला: (मुस्कुराते हुए, मजाकिया लहजे में) “बैठा दो ना बृजमोहन। गोद में बिठाने से कमर का दर्द तो ठीक हो जाएगा। मैं तो देख रही हूँ, पिंकी को आराम चाहिए।”
पिंकी ने तुरंत बृजमोहन की गोद में बैठ जाने का फैसला कर लिया। उसकी छोटी स्कर्ट पूरी तरह ऊपर सरक गई। उसके नंगे, गर्म नितंब सीधे बृजमोहन की जाँघों पर, उसके उत्तेजित लिंग के ऊपर दब गए। वह धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाने लगी — बहुत सूक्ष्म, लेकिन जानबूझकर रगड़ते हुए।
पिंकी: (पापा के कान के पास फुसफुसाते हुए, लेकिन सरला के सुनने लायक आवाज में, मनोवैज्ञानिक तनाव बढ़ाते हुए) “आह… पापा… आपकी गोद कितनी गर्म है। नीचे कुछ तो बहुत सख्त हो गया है… क्या मेरी ये नरम जाँघें और नितंब दबाने से हो रहा है? या फिर वो गुप्त इच्छा जो आपको सालों से खाए जा रही है — अपनी बेटी को इस तरह महसूस करने की? मम्मी देख रही हैं और हँस रही हैं… अब बताइए, ये guilt आपको और उत्तेजित कर रहा है या तोड़ रहा है? आपकी साँसें क्यों इतनी तेज हो गई हैं? महसूस कीजिए ना… आपकी बेटी की गर्माहट आपके लंड के इतने करीब… कितना और सह पाएँगे आप?”
बृजमोहन: (पूरी तरह काँपते हुए, फुसफुसाकर) “पिंकी… उठो… सरला… ये… ये सब…”
सरला: (हँसते हुए, मजाक में टालते हुए) “अरे बृजमोहन, इतना घबरा क्यों रहे हो? पिंकी को दर्द है, गोद में बैठी है। फैमिली टाइम है ये। तुम भी एंजॉय करो ना… या फिर सच में कुछ और हो रहा है जो तुम छुपा रहे हो?”
सरला ने जानबूझकर आँख मारकर हल्का-फुल्का माहौल बनाए रखा, लेकिन उसकी नजरें दोनों पर गहरी थीं। उसे पिंकी के इस बर्ताव से कोई दिक्कत नहीं थी — बल्कि वह इसे हल्के-फुल्के अंदाज में एंजॉय कर रही थी।
पिंकी: (अपनी कमर को और गहराई से हिलाते हुए, पापा की आँखों में घूरते हुए) “पापा… अब छुपाओ मत। मैं महसूस कर रही हूँ आपके अंदर का तूफान। एक तरफ पिता का अपराधबोध, दूसरी तरफ वो भूख जो आपको मेरे बदन को निगलने को कह रही है। बोलिए ना… इस पल में आप क्या सोच रहे हैं? मुझे अपनी बेटी मानकर रोकना चाहते हैं… या फिर इस गर्म, नंगी जवानी को चोदने की कल्पना कर रहे हैं? मम्मी के सामने ही सच बोल दीजिए…”
कमरे का माहौल अब बेहद तनावपूर्ण, मनोवैज्ञानिक और कामुक था। बृजमोहन पूरी तरह फँस चुका था, जबकि सरला मजाक उड़ाते हुए सब कुछ देख रही थी।
बृजमोहन अब और सहन नहीं कर पा रहा था। पिंकी की गोद में बैठकर लगातार कमर हिलाने, उसके नंगे नितंबों की गर्मी और सरला की हल्की-फुल्की टिप्पणियों ने उसके अंदर का तूफान और बढ़ा दिया था। उसका पूरा शरीर काँप रहा था — अपराधबोध, लज्जा और अनचाही उत्तेजना का विषैला मिश्रण।
बृजमोहन: (काँपती आवाज में, पिंकी को हटाते हुए) “बस… बहुत हो गया। मुझे अकेला छोड़ दो।”
वह अचानक उठा और तेजी से कमरे से बाहर निकल गया। उसके कदम सीढ़ियों की तरफ बढ़े, लेकिन मन अभी भी वहीं अटका हुआ था।
जैसे ही वह थोड़ा दूर गया, पीछे से पिंकी और सरला की हँसी की आवाजें आने लगीं। पहले तो हल्की हँसी, फिर खुलकर।
पिंकी: (हँसते हुए) “मम्मी, देखा पापा का चेहरा? कितना लाल हो गया था… नीचे तो पूरी तरह खड़ा हो चुका था।”
सरला: (मजाकिया लहजे में हँसकर) “हाँ बेटा, तुमने तो उसे अच्छे से घेर लिया। वो अभी भी खुद से लड़ रहा है। लेकिन देख रही हूँ, कितना टूटने को तैयार है।”
दोनों फिर हँस पड़ीं। उनकी हँसी की आवाजें बृजमोहन के कानों में गूँज रही थीं। वह सीढ़ियों पर रुक गया, हाथ दीवार पर टिका दिए। उसकी साँसें तेज थीं। “ये दोनों… क्या कर रही हैं?” वह मन ही मन बड़बड़ाया, लेकिन अंदर कहीं एक गहरी जलन और उत्तेजना भी महसूस हो रही थी।
**रात का बेडरूम दृश्य (जारी)**
सरला पिंकी की छोटी स्कर्ट और क्रॉप टॉप में बृजमोहन के सामने खड़ी थी। हल्की रोशनी में उसका बदन पिंकी जैसा ही उभरकर दिख रहा था — खुली जाँघें, उभरे स्तन, और कमर की लचक। बृजमोहन की आँखें उस पर टिकी हुई थीं।
**बृजमोहन:** (साँसें तेज करते हुए, लेकिन अब आवाज में पहले जैसी कड़काहट नहीं) “सरला… ये… ये बहुत गलत है… तुम पिंकी के कपड़े पहनकर…”
पर उसके शब्द अधूरे रह गए। अपराधबोध की जगह अब उसके अंदर एक गहरी, गर्म उत्तेजना फैलने लगी थी। पिंकी की याद, शाम को उसकी गोद में बैठकर कमर हिलाने वाली गर्माहट, और अब सरला का ये रूप — सब मिलकर उसके शरीर को प्रतिक्रिया दे रहा था। उसका लिंग धीरे-धीरे सख्त होने लगा। पैंट के अंदर स्पष्ट उभार दिखने लगा।
सरला ने तुरंत नजर नीचे की और मुस्कुरा दी।
**सरला:** (धीमी, समझदार आवाज में) “देखा… तुम्हारा अपराधबोध कहाँ गया बृजमोहन? पहले तो तुम्हें शर्म आती थी, guilt महसूस होता था… लेकिन अब? अब तो तुम्हारा लंड उठ रहा है। सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने पिंकी का ये छोटा ड्रेस पहन लिया है। बोलो ना… क्या सोच रहे हो इस वक्त? कि ये मैं हूँ… या फिर कल्पना कर रहे हो कि ये पिंकी है जो तुम्हारे सामने खड़ी है?”
**बृजमोहन:** (आँखें बंद करके, लेकिन साँसें और तेज होकर) “सरला… मत बोलो ऐसा… मैं… मैं कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा हूँ… लेकिन… ये शरीर… ये उत्तेजना… रुक क्यों नहीं रही…”
उसका लिंग अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था। पैंट में साफ उभार दिख रहा था। वह खुद को रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आँखें बार-बार सरला की खुली जाँघों और उभरे स्तनों पर जा रही थीं।
**सरला:** (बेड पर उसके पास सरकते हुए, अपनी जाँघ को जानबूझकर उसके पैर से सटाते हुए) “क्यों रोकना चाहते हो? देखो, तुम्हारा शरीर तो सच बोल रहा है। अपराधबोध नहीं, बल्कि भूख जाग रही है। जब पिंकी तुम्हारी गोद में बैठी थी, तब भी यही हुआ था ना? उसकी नरम नितंबों की गर्माहट, उसकी जाँघों का दबाव… और अब मैं ये ड्रेस पहनकर आई हूँ तो तुम्हें लग रहा है जैसे वो खुद आ गई हो। बताओ… इस उत्तेजना में क्या चल रहा है तुम्हारे दिमाग में? पिता वाला रोल अभी भी बचा हुआ है, या वो पूरी तरह टूट चुका है?”
**बृजमोहन:** (हाँफते हुए, हाथ अपने ऊपर रखने की कोशिश करते हुए लेकिन हट जाते हुए) “मुझे… मुझे नहीं पता… मैं समझ नहीं पा रहा… पिंकी मेरी बेटी है… लेकिन जब वो इस तरह कपड़े पहनकर आती है… जब तुम ये पहनकर आई हो… तो अंदर कुछ और ही हो रहा है। ये उत्तेजना… ये गर्मी… रुक नहीं रही।”
सरला ने हाथ आगे बढ़ाया और धीरे से बृजमोहन की जाँघ पर रख दिया। फिर उँगलियाँ ऊपर सरकाकर उभार के पास ले गई, लेकिन छुई नहीं।
**सरला:** (कान में फुसफुसाते हुए) “झूठ मत बोलो। अपराधबोध नाम की चीज अब बची ही नहीं है तुममें। सिर्फ उत्तेजना है। तुम सोच रहे हो कि पिंकी की ये छोटी स्कर्ट, ये टाइट टॉप… उसके नंगे नितंब, उसकी जाँघें… सब कुछ। और मैं ये पहनकर तुम्हें दिखा रही हूँ कि तुम कितना पागल हो रहे हो। महसूस करो ना… तुम्हारा लंड कितना सख्त हो गया है। ये पिंकी की जवानी की ताकत है बृजमोहन… जो तुम्हें तोड़ रही है।”
**बृजमोहन:** (आँखें खोलकर सरला को देखते हुए, आवाज में अब शर्म कम और कामुकता ज्यादा) “सरला… तुम जानती हो सब… मुझे रोक क्यों नहीं रही? ये… ये गलत है… फिर भी… मैं रोक नहीं पा रहा… ये उत्तेजना… बहुत तेज है…”
सरला ने हल्के से मुस्कुराकर अपनी स्कर्ट को और थोड़ा ऊपर सरका दिया, पिंकी की तरह जाँघें दिखाते हुए।
**सरला:** “रोकना नहीं चाहती। मैं देखना चाहती हूँ कि तुम कितना आगे जाते हो। अब बताओ… इस पल में तुम्हें क्या चाहिए? मुझे रोकना… या फिर पिंकी की याद में इस उत्तेजना को और बढ़ाना?”
कमरे में भारी सन्नाटा था। बृजमोहन का लिंग अब पूरी तरह खड़ा और तना हुआ था। अपराधबोध लगभग गायब हो चुका था, जगह ले रही थी सिर्फ निषिद्ध उत्तेजना।
--- सरला अपनी पैंटी दिखाते हुए, बृजमोहन की जाँघ पर बैठ गई। उसकी गर्म जाँघें बृजमोहन की उत्तेजित जगह से सट गईं।
सरला: (कान में फुसफुसाते हुए, कमर हल्का हिलाते हुए) “तो अब छुपाओ मत। महसूस करो। पिंकी की ये स्कर्ट पहनकर मैं तुम्हें बता रही हूँ कि तुम कितना गिर चुके हो। तुम्हारी बेटी की जवानी ने तुम्हें तोड़ दिया है। बोलो… अगर पिंकी अभी इस वक्त अंदर आ जाए और इसी ड्रेस में तुम्हारी गोद में बैठ जाए… तो तुम क्या करोगे? उसे रोकोगे… या फिर उसकी गर्म चूत को महसूस करते हुए अपना लंड अंदर डाल दोगे?”
बृजमोहन: (अब पूरी तरह उत्तेजित, हाथ सरला की कमर पर रखते हुए) “सरला… मत पूछो ऐसा… मैं… मैं सोच भी नहीं सकता… लेकिन… शरीर तो चाह रहा है। उसकी नरम देह… उसकी गर्मी… मुझे लगता है कि मैं अब कंट्रोल में नहीं हूँ। ये उत्तेजना… मुझे पागल कर रही है।”
सरला ने बृजमोहन की पैंट का चेन खोलना शुरू कर दिया। उसका हाथ अंदर घुसा और सीधे खड़े लिंग को पकड़ लिया।
सरला: (धीरे-धीरे हाथ हिलाते हुए, आँखों में चमक के साथ) “तो अब मान लो। अपराधबोध मर चुका है। अब सिर्फ इच्छा बची है। पिंकी तुम्हारी बेटी है, लेकिन वो अब तुम्हारी सबसे बड़ी कामुक कल्पना भी बन चुकी है। मैं इसे रोकने नहीं आई… बल्कि बढ़ाने आई हूँ। बताओ… आज रात तुम क्या चाहते हो? सिर्फ कल्पना? या फिर असल में आगे बढ़ना चाहते हो?”
बृजमोहन की साँसें अब बहुत तेज हो गई थीं। उसने सरला की कमर को कसकर पकड़ लिया और उसकी जाँघों को सहलाने लगा। कमरे में सिर्फ उनकी भारी साँसें और कपड़ों की सरसराहट की आवाज गूँज रही थी। उत्तेजना अब पूरे चरम पर थी।
**रात का बेडरूम – चरम**
सरला ने बृजमोहन की गोद में बैठकर उसका लिंग पकड़ लिया था। बृजमोहन अब पूरी तरह उत्तेजित था। उसकी आंखो में सिर्फ जलती हुई भूख थी।
**सरला:** (लिंग को धीरे-धीरे हाथ से हिलाते हुए) “देखा… कितना सख्त हो गया है। पिंकी की याद में ना? अब झूठ मत बोलो।”
बृजमोहन ने जवाब में सरला को जोर से चूम लिया। दोनों की जीभें एक-दूसरे में उलझ गईं। बृजमोहन ने सरला की क्रॉप टॉप ऊपर खींचकर उसके स्तनों को बाहर निकाला और जोर से चूसने लगा। सरला कराह उठी।
**सरला:** (हाँफते हुए) “चूसो… जोर से चूसो… सोच रहे हो ना कि ये पिंकी के स्तन हैं? उसकी जवानी को चूस रहे हो?”
बृजमोहन ने सरला को बेड पर धकेल दिया। उसने अपनी पैंट उतारी, खड़ा लिंग बाहर निकाला और सरला की जाँघों को फैलाकर एक जोरदार धक्का दिया। पूरा लिंग सरला की गीली योनि में चला गया।
**बृजमोहन:** (जोर-जोर से धक्के देते हुए) “आह… बहुत गर्म है… आज बहुत दिनों बाद…”
**सरला:** (नितंब ऊपर उठाकर, कराहते हुए) “जोर से चोदो मुझे… लेकिन सोचो पिंकी को… सोचो कि तुम उसकी छोटी स्कर्ट ऊपर करके उसकी टाइट चूत में घुस रहे हो… बोलो… कल्पना कर रहे हो ना?”
बृजमोहन की रफ्तार बढ़ गई। वह सरला को जोर-जोर से चोद रहा था, लेकिन उसकी आँखें बंद थीं और दिमाग में पिंकी थी — उसकी गोद में बैठी हुई, नंगे नितंब, ।
**बृजमोहन:** (गुर्राते हुए) “हाँ… सोच रहा हूँ… उसकी जाँघें… उसके नितंब… आह… बहुत टाइट होगी वो…”
सरला ने मुस्कुराते हुए अपनी कमर हिलाई और बृजमोहन की पीठ पर नाखून गड़ाए।
**सरला:** “तो चोदो मुझे… उसकी जगह… आज मैं पिंकी हूँ तुम्हारे लिए… मेरी चूत में अपना सारा गुस्सा और भूख निकाल दो…”
दोनों काफी देर तक जोर-जोर से सेक्स करते रहे। बृजमोहन ने सरला को कई पोजीशन में चोदा — ऊपर से, कुत्ते की मुद्रा में, और आखिर में सरला के ऊपर चढ़कर। आखिर में दोनों एक साथ झड़ गए। बृजमोहन ने सरला के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ा।
दोनों हाँफते हुए बेड पर लेट गए। सरला ने बृजमोहन के सीने पर हाथ फेरते हुए कहा,
" मजा आया या नहीं "
" बहुत"
" इसे रोलप्ले कहते हैं, समझे पतिदेव "
" यानी कि तुम मुझे जोश दिलाने के लिए ये सब कर रही थी "
" बहुत से शादी शुदा लोग अपनी सेक्स लाइफ को चटपटा बनाने के लिए ये सब करते हैं, इसमें कभी पति ड्राइवर बन जाता तो कभी पड़ोसी, बीवी भी कभी कुछ बन जाती है , कभी कुछ "
" जैसे बेटी ? "
" हां, बेटी , बहन , मां , भाभी , साली या कोई कॉल गर्ल, "
" अच्छा"
" हां जी "
" लेकिन तुम यह सब कहां से सीखी , पहले तो तुमने कभी कुछ ऐसा किया नहीं "
" वो छोड़ो, तुम ये बताओ कि तुम्हें कैसा लगा "
" अच्छा लगा "
बृजमोहन कुछ को सोचने लगा
" क्या सोच रहे हो "
" कुछ नहीं "
" वैसे एक बात कहूं, अगर तुम्हे मौका मिला तो क्या वाकई में तुम पेल दोगे क्या उसे "
“ नहीं, ये क्या कह रही हो तुम, ये ठीक नहीं होगा सरला "
" ओह हो, ठीक नहीं होगा , जब मुझे कोई दिक्कत नहीं है तो तुम क्यों डर रहे हो , वैसे अंदर से तो तुम भी यही चाहते हो है न "
" नहीं तो"
" तो फिर उसे हर टाइम घूरते क्यों रहते हो , उसने बताया मुझे की आजकल उसकी रीलें देखते रहते हो तुम "
" ये उसने कहा तुमसे "
" वो मुझे सब बताती है, कि तुम क्या देखते हो और .... कहां देखते हो "
" वो कपड़े ही ऐसे पहनती है, की मेरी नजर चली जाती है, लेकिन "
" लेकिन क्या, बोलो न, "
" कुछ नहीं "
" अब छुपाओ मत जी ? कह दिया करो जो मन में है , एक बात बोलूं पिंकी भी तुम्हें पसंद करती है ।”
" सरला, वो तुम्हारी भी तो बेटी है , तुम उसकी मां हो, मुझे समझ में नहीं आ रहा तुम कैसे ऐसे उसके बारे में कह रही हो , "
" मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है "
लेकिन मुझे है, मै बाप हूं उसका, वो अब छोटी बच्ची नहीं रही , कई लड़के उसकी जवानी की तिजोरी लूटना चाहते हैं, मै अगर सख्ती न करूं , तो वो किस हद तक चली जाएगी , तुम्हें पता नहीं, तुम जो कह रही हो फिर वो न मेरी इज्ज़त करेगी और न डरेगी मुझसे "
" देखो जी, तुमने मीना और रेखा पे भी तो कंट्रोल करने की कोशिश की थी, फिर क्या रोक पाए तुम उसे ? " इसीलिए तो कह रही हूं अगर तुम ही भंवरा बनके, अपनी उगाई कली का रस पी लो तो वो बाहर मुंह नहीं मारेगी , वरना देख लेना जल्द ही, वो किसी न किसी के साथ अपना मुंह काला करवा ही लेगी "
ये तो तुम्हे भी पता है, कि वो आजकल उस सलीम के साथ घूम रही है "
ब्रजमोहन चुप हो जाता है ।


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