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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#33
रातआखिरी चुदाई

रात का खाना खत्म हुआ। बत्तियाँ मंद थीं। बेडरूम में सिर्फ पंखे की आवाज़ और दो धड़कनों का तेज़ होता शोर था।
राज ने सुमन को बिस्तर पर लिटाया। उसने उसके सारे कपड़े उतार दिएएक-एक करके। ब्रा, चड्डी, नाइटीसब फर्श पर बिखर गया।
सुमन नागी थी। उसकी चूचियाँ बिस्तर पर फैल गईंबड़ी, गोरी, निप्पल खड़े। उसकी चूतपहले से ही गीलीलैबिया फूली हुई, उसके अंदर की गर्मी बाहर रही थी।
राज ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड खड़ा हो चुका थासख्त, लाल, नसें उभरी हुई। उसने सुमन के ऊपर चढ़ गया। अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ाऊपर-नीचे, बार-बार।
सुमन कराह उठी। "अंदर डाल... प्लीज़... आज रात मुझे ऐसे चोद कि एक हफ्ते तक तेरी याद आती रहे..."
राज ने अंदर डाल दिया।
एक ही झटके मेंपूरा। सुमन की चूत ने उसका लंड ऐसे पकड़ा जैसे कोई भूखा मुँह। उसके अंदर की परतें राज के लंड को चूस रही थींगीली, गरम, पागल।
राज ने धक्के देने शुरू किए। तेज़, गहरे, बेरहम।
"हाँ... हाँ... चोद मुझे..." सुमन चिल्लाई। "याद रख मैं तेरी राँड हूँ... सिर्फ तेरी... तू कहीं भी जा... मेरी चूत तेरा इंतज़ार करेगी..."
राज ने उसकी टांगें अपने कंधों पर उठा लीं। अब वह और अंदर जा रहा था। सुमन के अंदर वह गहराई थी जहाँ कोई और नहीं गया थासिर्फ राज।
सुमन पागल हो रही थी। उसने अपने नाखून राज की पीठ में गड़ा दिए। खून निकल आयालेकिन राज को दर्द नहीं हुआ। सिर्फ और चाहत हुई।
"मेरे अंदर जा," सुमन ने कहा। "भर दे मुझे। पूरा भर दे। अपना दूध मेरी चूत में डाल दे... ताकि एक हफ्ते तक मैं तेरी गंध अपने अंदर रख सकूँ..."
राज ने और तेज़ किया। उसका लंड अब मशीन की तरह सुमन के अंदर जा रहा थाबाहर, अंदर, बाहर, अंदर। सुमन की चूत की गीली आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी।
"तू रहा है... मुझे लग रहा है..." सुमन चिल्लाई। " जा... मेरे अंदर... अंदर ही अंदर छूट रही हूँ मैं..."
एक आखिरी धक्का। राज का लंड सुमन के बिल्कुल अंदर धँस गया। उसका सिरा उसके गर्भाशय को छू रहा था। सुमन ने अपना मुँह खोल दियाकोई आवाज़ नहीं निकली। बस साँसें। फिर उसके शरीर ने हिलना बंद कर दिया। वह सख्त हो गईफिर ढीली पड़ गई।
राज ने उसके अंदर रिलीज़ कर दिया। गर्म, गाढ़ा, बहुत सारा। सुमन की चूत उसे पी रही थी। वह नहीं चाहती थी कि एक बूँद भी बाहर जाए।
राज उसके ऊपर गिर पड़ा। दोनों के शरीर पसीने से नहाए हुए थे। उनकी साँसें मिल रही थीं। उनकी चूत और लंड अभी भी जुड़े हुए थेराज ने अपना लंड बाहर नहीं निकाला। उसे अंदर ही रहने दिया। सुमन ने उसे और अंदर खींच लिया।
"सो जा," राज ने फुसफुसाया। "मैं अभी बाहर नहीं निकलूँगा। पूरी रात तेरे अंदर रहूँगा।"
सुमन की आँखें बंद हो गईं। उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान थी। उसकी चूत अभी भी राज के लंड को पकड़े हुए थीजैसे उसे जाने नहीं देना चाहती थी।
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 15-06-2026, 11:54 PM



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