15-06-2026, 11:46 PM
(This post was last modified: 15-06-2026, 11:47 PM by Certified Addict. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
मिश्रा अंकल ने अपनी लुंगी ऊपर खींच ली। उनका लंड बाहर आ गया — बूढ़ा, सख्त तो था, लेकिन उम्र के निशान थे। नीली नसें उभरी हुई थीं। सिरा गहरा लाल। वह पहले से ही गीला था।
सुमन ने उसकी तरफ देखा। फिर उसने अपना हाथ बढ़ाया — उसने मिश्रा अंकल का लंड पकड़ लिया। गर्म। सख्त। धड़क रहा था।
मिश्रा अंकल चिल्ला पड़े — "अह्ह बेटा... बहुत दिनों बाद किसी ने छुआ है..."
सुमन ने हाथ लगाना शुरू किया — धीरे-धीरे, ऊपर-नीचे, गीले सिरे पर अंगूठा घुमाते हुए। उसने दूसरा हाथ उनकी बॉल्स पर रख दिया — ढीली, भरी हुई, गर्म।
मिश्रा अंकल का पूरा शरीर काँपने लगा। उन्होंने सुमन की चूचियाँ छोड़ दीं — अब उनके दोनों हाथ सुमन के कंधों पर थे, उसे पकड़ रहे थे, जैसे डूब रहे हों।
"बेटा... बस... बस और मत... मैं आ जाऊँगा..."
"अभी नहीं अंकल," सुमन ने फुसफुसाया। उसने हाथ रोक लिया। वह खड़ी हो गई।
मिश्रा अंकल ने उसकी तरफ देखा — बेचारगी से, भूख से। उनका लंड हवा में खड़ा था, पानी टपक रहा था।
सुमन उनके सामने खड़ी हो गई। उसने अपनी नाइटी ऊपर खींची — धीरे-धीरे। पहले जांघें खुलीं, फिर चूत, फिर पेट। उसने नाइटी अपनी चूचियों के ऊपर रोक दी — अब वह नंगी थी। सिर्फ नाइटी उसके कंधों पर लटक रही थी।
"अब देखो अंकल," उसने कहा। "जितना चाहो देखो।"
मिश्रा अंकल घूर रहे थे — सुमन की नंगी चूत पर, उसके गीले लेबिया पर, उसके काले बालों पर, उसकी बड़ी, लटकती चूचियों पर, सख्त निप्पल पर।
उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया — उनकी उँगलियाँ सुमन की चूत पर फिरने लगीं। बाहर से। ऊपर-नीचे। लेबिया के बीच की दरार में।
सुमन कराह रही थी — लेकिन अब खुलकर। "हाँ... अंकल... वहीं..."
मिश्रा अंकल की एक उँगली अंदर घुस गई। बिना रुकावट के — सुमन की चूत गीली थी, खुली हुई, तैयार। उसने उँगली अंदर डाली — गहराई तक।
सुमन चिल्लाई — "अह्ह्ह!"
उसकी उँगली अंदर घूमी, बाहर आई, फिर अंदर। धीरे-धीरे। मिश्रा अंकल ने उँगली से ही चोदना शुरू कर दिया था — सुमन की चूत को। सुमन ने अपने हाथ उनके कंधों पर रख दिए — अपना संतुलन बनाए रखने के लिए। उसके घुटने झुक रहे थे।
"अंकल... अंकल... और... और तेज़..."
तभी — फोन बजा।
तेज़। तीखी घंटी।
[b]सुमन की आँखें खुल गईं। उसने फोन उठाया — स्क्रीन देखी। राज।
[/b]
उसने मिश्रा अंकल की तरफ देखा — उनकी उँगली अभी भी उसकी चूत के अंदर थी। सुमन ने अपनी आँखों से इशारा किया — रुको मत।
उसने कॉल उठा ली।
सुमन ने उसकी तरफ देखा। फिर उसने अपना हाथ बढ़ाया — उसने मिश्रा अंकल का लंड पकड़ लिया। गर्म। सख्त। धड़क रहा था।
मिश्रा अंकल चिल्ला पड़े — "अह्ह बेटा... बहुत दिनों बाद किसी ने छुआ है..."
सुमन ने हाथ लगाना शुरू किया — धीरे-धीरे, ऊपर-नीचे, गीले सिरे पर अंगूठा घुमाते हुए। उसने दूसरा हाथ उनकी बॉल्स पर रख दिया — ढीली, भरी हुई, गर्म।
मिश्रा अंकल का पूरा शरीर काँपने लगा। उन्होंने सुमन की चूचियाँ छोड़ दीं — अब उनके दोनों हाथ सुमन के कंधों पर थे, उसे पकड़ रहे थे, जैसे डूब रहे हों।
"बेटा... बस... बस और मत... मैं आ जाऊँगा..."
"अभी नहीं अंकल," सुमन ने फुसफुसाया। उसने हाथ रोक लिया। वह खड़ी हो गई।
मिश्रा अंकल ने उसकी तरफ देखा — बेचारगी से, भूख से। उनका लंड हवा में खड़ा था, पानी टपक रहा था।
सुमन उनके सामने खड़ी हो गई। उसने अपनी नाइटी ऊपर खींची — धीरे-धीरे। पहले जांघें खुलीं, फिर चूत, फिर पेट। उसने नाइटी अपनी चूचियों के ऊपर रोक दी — अब वह नंगी थी। सिर्फ नाइटी उसके कंधों पर लटक रही थी।
"अब देखो अंकल," उसने कहा। "जितना चाहो देखो।"
मिश्रा अंकल घूर रहे थे — सुमन की नंगी चूत पर, उसके गीले लेबिया पर, उसके काले बालों पर, उसकी बड़ी, लटकती चूचियों पर, सख्त निप्पल पर।
उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया — उनकी उँगलियाँ सुमन की चूत पर फिरने लगीं। बाहर से। ऊपर-नीचे। लेबिया के बीच की दरार में।
सुमन कराह रही थी — लेकिन अब खुलकर। "हाँ... अंकल... वहीं..."
मिश्रा अंकल की एक उँगली अंदर घुस गई। बिना रुकावट के — सुमन की चूत गीली थी, खुली हुई, तैयार। उसने उँगली अंदर डाली — गहराई तक।
सुमन चिल्लाई — "अह्ह्ह!"
उसकी उँगली अंदर घूमी, बाहर आई, फिर अंदर। धीरे-धीरे। मिश्रा अंकल ने उँगली से ही चोदना शुरू कर दिया था — सुमन की चूत को। सुमन ने अपने हाथ उनके कंधों पर रख दिए — अपना संतुलन बनाए रखने के लिए। उसके घुटने झुक रहे थे।
"अंकल... अंकल... और... और तेज़..."
तभी — फोन बजा।
तेज़। तीखी घंटी।
[b]सुमन की आँखें खुल गईं। उसने फोन उठाया — स्क्रीन देखी। राज।
[/b]
उसने मिश्रा अंकल की तरफ देखा — उनकी उँगली अभी भी उसकी चूत के अंदर थी। सुमन ने अपनी आँखों से इशारा किया — रुको मत।
उसने कॉल उठा ली।


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