15-06-2026, 01:37 AM
खौफ और साजिश--1
मीरा दोनों के बीच बैठी थी, उसका नीला रेशमी नाइटगाउन जगह-जगह से शेर के गाढ़े लाल खून से भीगा हुआ था। गीला होने की वजह से रेशम का वह कपड़ा मीरा के जिस्म से बुरी तरह चिपक गया था, जिससे उसके भारी स्तनों और उभरे हुए नितंबों की बनावट शेर की आँखों के सामने बिल्कुल साफ़ झलक रही थी।
शेर वहां लेटा हुआ मीरा के शरीर की हर हरकत का लुत्फ ले रहा था। जब मीरा पट्टियाँ ठीक करने के लिए झुकती, तो उसके नाइटगाउन के ढीले गले से उसके उरोजों की गहरी खाई शेर की आँखों के ठीक सामने आ जाती। शेर को अपनी जांघ के जख्म में भी एक वहशी लहर महसूस हो रही थी।
शेर [आंतरिक संवाद]: 'आह... मेमसाब! आपके इस भीगे हुए नीले लिबास के नीचे जो खजाना छिपा है, उसे देखकर मेरा खून उबल रहा है। आपको लग रहा है कि आप अपने जख्मी वफादार की सेवा कर रही हैं, पर आप नहीं जानतीं कि आपका यह झुका हुआ बदन मेरे अंदर कैसी तबाही मचा रहा है।'
मीरा का दिमाग अभी भी सदमे में था। वह पूरी तरह बेखबर थी कि उसका लिबास और उसकी स्थिति कितनी उत्तेजक हो चुकी हैं। वह तो बस अहसान के बोझ तले दबी हुई थी।
मीरा [धीमी और कांपती आवाज़ में]: "शेर... आज तुमने जो किया, उसके बाद मैं तुम्हें किस नज़र से देखूँ, मुझे समझ नहीं आ रहा। तुमने मेरी कोख उजड़ने से बचा ली। तुम कह रहे थे न कि अहसान कैसा... पर सच तो ये है कि आज से मेरी ये जान, सब तुम्हारी कर्जदार है।"
मीरा ने भावुक होकर अपना कोमल हाथ शेर के तपते हुए हाथ पर रख दिया।
करीम ने धीरे से आगे बढ़कर उसके कांपते हुए हाथ को अपने दोनों हाथों की ओट में ले लिया। उसकी हथेलियों का खुरदरापन मीरा की मखमली त्वचा को छू रहा था। उसने सीधे मीरा की उन आँखों में देखा, जिनमें अभी भी डर और कृतज्ञता के आँसू तैर रहे थे।
करीम [भरी हुई, आवाज़ में]: "ऐसा मत बोलिए मीरा मैडम... हम तो आपके पैर की धूल भी नहीं हैं। हमारी क्या औकात जो आप पर कोई अहसान करें?"
करीम [भरी हुई आवाज़ में]: ये तो मेरा फर्ज था, मैडम जी, इसमें अहसान कैसा? बस रोना बंद कीजिए; आपके इन आँसूओं का बोझ मुझसे बर्दाश्त नहीं होता।
शेर ने बात आगे बढ़ाते हुए अपना हाथ धीरे से आगे बढ़ाया और अपनी खुरदरी उंगलियों से मीरा के गालों पर ढलक आए आँसू पोंछने लगा। ऊपर से तो उसका यह कदम सिर्फ एक सांत्वना देने वाला, ढाढस बंधाने वाला इशारा लग रहा था, लेकिन उसके भीतर की मंशा कुछ और ही थी। आँसू पोंछने के बहाने, उसका असली मकसद मीरा की मखमली, नर्म त्वचा को छूना और उसे महसूस करना था।
शेर अब शिकार को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए बेताब था। वह जानता था कि ऊपर पहने हुए भारी नाइटगाउन रोब के नीचे मीरा ने एक बेहद छोटी और महीन नाइटी पहन रखी है, जो उसकी सुराहीदार जांघों को बमुश्किल ढक पा रही होगी।
उसने देखा कि मीरा का नीला रोब उसके खून से जगह-जगह से लथपथ हो चुका है और गीला होने के कारण उसके बदन के उभारों से चिपका हुआ है। शेर ने अपनी आँखों में एक बनावटी फिक्र और लाचारी भरी और मीरा के चेहरे की ओर देखा।
शेर [मद्धम और भर्राई हुई आवाज़ में]: "मेमसाब... देखिए तो सही, मेरे इस गंदे खून ने आपके इस कीमती लिबास का क्या हाल कर दिया है। ये जगह-जगह से भीग गया है और आपके बदन पर चिपक रहा है... इससे आपको ठंड लग जाएगी या इन्फेक्शन हो सकता है।"
मीरा ने अपने गाउन की तरफ देखा, जो वाकई शेर के गाढ़े खून से सन चुका था और अब भारी होकर उसके जिस्म पर बोझ बन रहा था।
शेर [हौले से फुसफुसाते हुए, अपनी नज़रों को मीरा के सीने पर टिकाते हुए]: "मेमसाब... आप... आप इसे क्यों नहीं उतारतीं? ये बहुत गंदा हो चुका है। इसे उतारकर अलग रख दीजिए, वरना ये खून आपके जिस्म को सुखा देगा।"
मीरा हिचकिचाई। उसकी नैतिकता उसे एक पल के लिए रोक रही थी, लेकिन शेर के उस 'बलिदान' और उसकी मासूमियत भरे लहजे ने उसकी झिझक को कम कर दिया। उसे लगा कि शेर तो घायल है, वह तो ठीक से उठ भी नहीं पा रहा है, तो उससे पर्दा कैसा?
शेर की भूखी आँखें मीरा के कांपते हाथों को देख रही थीं जो धीरे-धीरे अपने रोब की बेल्ट की ओर बढ़ रहे थे। शेर के दिल की धड़कन बढ़ गई थी; वह बस उस पल का इंतज़ार कर रहा था जब वह रेशमी परदा हटेगा और मीरा का वह मदमस्त बदन, जो केवल उस छोटी सी नाइटी में कैद था, उसकी नज़रों के सामने नंगा हो जाएगा।
शेर [मन ही मन - एक क्रूर संतोष के साथ]: 'उतारिए मेमसाब...आज मैं देखना चाहता हूँ कि उस नीले रेशम के नीचे जन्नत का कौन सा खजाना छिपा है, जिसे पूरी तरह निचोड़ने के लिए मैंने आज सड़क पर अपना खून बहाया है। याद है मुझे वो रातें... जब मैंने उस चोरनी को पकड़ने के बहाने आपके इस जिस्म को दबोचा था। याद है मुझे वो दोपहर... जब मैंने दवा के नशे में आपको बिस्तर पर पूरी तरह नंगा करके आपके एक-एक अंग का दीदार किया था। लेकिन आज... आज का मज़ा कुछ अलग ही होगा मेमसाब! क्योंकि आज आपके ऊपर कोई नशा हावी नहीं है… आज आप पूरे होश-हवास में, खुद अपने इन गोरे हाथों से अपने कपड़े उतार रही हैं। इससे बड़ा सुख एक मर्द के लिए और क्या होगा!'
मीरा ने, बिना ज्यादा सोचे-समझे, अपने भारी नाइटगाउन के रोब की बेल्ट खोल दी और उसे अपने कंधों से सरका दिया। जैसे ही वह रेशमी गाउन फर्श पर गिरा, शेर की आँखों के सामने जन्नत का दरवाज़ा खुल गया।
मीरा के बदन पर अब सिर्फ एक बेहद छोटी, पारभासी काली नाइटी थी, जो उसकी दूधिया जाँघों के ऊपरी हिस्से तक भी बमुश्किल पहुँच पा रही थी। उस महीन कपड़े के नीचे उसके भारी उरोजों की गोलाई और निप्पल्स के उभार साफ़ झलक रहे थे।
शेर की साँसें अटक गईं। उसने देखा कि मीरा अब पास पड़े पानी के जग और तौलिए से अपने बदन पर लगे खून के धब्बों को साफ करने लगी थी।
मीरा [बेखबरी में फुसफुसाते हुए]: "उफ़, ये खून तो सूखने लगा है..."
वह सोफे के किनारे झुक गई ताकि अपने पैरों पर लगे खून को धो सके। जैसे ही वह झुकी, उसकी छोटी नाइटी ऊपर की ओर सरक गई, जिससे उसके भारी, चिकने कूल्हों का निचला हिस्सा और उसकी गोरी जाँघों का पूरा विस्तार शेर की आँखों के ठीक सामने आ गया।
मीरा अपने हाथों से पानी लेकर अपनी जाँघों और बाहों को मल रही थी। पानी की बूंदें उसके गोरे बदन पर टपकती हुई उसकी नाइटी को और भी गीला और पारदर्शी बना रही थीं।
उसका हाथ जब उसके सीने के पास के खून को साफ करने के लिए ऊपर उठा, तो उसकी नाइटी का गला और भी नीचे लटक गया। शेर वहीं लेटा हुआ, अपनी आँखों को फाड़कर मीरा के बदन के हर उतार-चढ़ाव को पी रहा था। मीरा की पीठ शेर की तरफ थी, और जब वह झुककर अपने पैरों को साफ कर रही थी, तो उसकी पीठ की सुडौल बनावट और नाइटी के नीचे छिपे उसके अंगों की थरथराहट शेर के अंदर एक वहशी तूफान पैदा कर रही थी।
मीरा को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि उसका यह सफाई करना, शेर के लिए दुनिया का सबसे कामुक नज़ारा बन चुका है। वह पूरी तरह अपनी सफाई में मग्न थी, जबकि शेर की उंगलियाँ सोफे की चादर को मज़बूती से भींच रही थीं, उसकी आँखों में हवस और जीत की एक साथ चमक थी।
शेर [आंतरिक संवाद]: 'वाह मेमसाब... क्या कयामत बदन है? ये पानी की बूंदें आपके जिस्म पर नहीं, मेरे कलेजे पर गिर रही हैं।'
मीरा इस वक्त पूरी तरह अपनी ही दुनिया में थी। उसने देखा कि शेर का गाढ़ा खून उसकी सफेद, मखमली जांघों पर जम गया है। उस खून के लाल धब्बों को अपनी गोरी त्वचा से हटाने के लिए वह सोफे के बिल्कुल किनारे पर आकर झुक गई।
जैसे ही मीरा अपनी उन नंगी, सुडौल जांघों को साफ करने के लिए नीचे की ओर झुकी, उसकी बेहद छोटी नाइटी का ढीला गला पूरी तरह से आगे की ओर लटक गया। शेर, जो ठीक उसके सामने लेटा हुआ था, उसकी आँखों के सामने अब कोई पर्दा नहीं था। मीरा के वे भारी और रसीले स्तन नाइटी की कैद से लगभग बाहर आ चुके थे।
झुकने की वजह से उनके बीच की गहरी दरार और उनके भारीपन का अहसास शेर की रगों में बिजली दौड़ा रहा था। मीरा अपने हाथों में पानी लेकर अपनी जांघों को मल रही थी, जिससे उसके शरीर में एक हल्की थरथराहट हो रही थी। उस हलचल के साथ ही उसके वे नंगे चूचे उसकी नज़रों के सामने किसी मतवाले झूले की तरह डोल रहे थे।
शेर की आँखें उन गुलाबी निप्पल्स को ढूंढ रही थीं जो उस पतले कपड़े के किनारे से बस झांकने ही वाले थे। मीरा के झुकने से उसकी नाइटी पीछे से इतनी ऊपर चढ़ गई थी कि उसकी जांघों का ऊपरी हिस्सा और उसके कूल्हों की गोलाई शेर की पहुंच से बस चंद इंच दूर थी।
शेर [मन ही मन - वहशी तड़प के साथ]: 'उफ़... मेमसाब! क्या कयामत ढा रही हैं आप? ये सफेद संगमरमर जैसी जांघें और ये भारी उरोज... आज तो मेरा ये ज़ख्म भी आपकी इस खूबसूरती पर कुर्बान है। मन कर रहा है कि इसी वक्त झपट पड़ूँ और इन मखमली अंगों को अपनी मुट्ठी में भर लूँ।'
मीरा बेखबर होकर अपनी जांघों पर पानी छिड़क रही थी, और हर बार जब वह झुकती, शेर को जन्नत का नज़ारा और भी साफ़ दिखाई देता। उसके बदन की खुशबू और पानी की नमी ने कमरे का माहौल बेहद कामुक बना दिया था।
शेर को लगा कि अब दांव खेलने का सही वक्त आ गया है। मीरा को अपने और करीब खींचने के लिए उसने अचानक दर्द से कराहने का नाटक किया और एक ज़ोरदार चीख मारी।
शेर [ज़ोर से कराहते हुए]: "आह्ह्ह... मेमसाब! ... बहुत तेज़ जलन हो रही है!"
शेर की आवाज़ सुनते ही मीरा बदहवास हो गई। वह अपनी अधनंगी हालत को पूरी तरह भूल चुकी थी। वह फौरन घुटनों के बल सोफे के पास शेर की ओर झपटी। जैसे ही वह शेर के चेहरे के पास झुकी, उसकी छोटी सी नाइटी का गला पूरी तरह से जवाब दे गया।
अब शेर की आँखों के ठीक सामने मीरा के वे भारी और रसीले स्तन अपनी पूरी चमक में थे। झुकने की वजह से वे नाइटी से लगभग बाहर आ चुके थे और उनकी लाल सुर्ख चोटियाँ उत्तेजना और कमरे की ठंडक से अकड़कर साफ़ झलक रही थीं। शेर को महसूस हो रहा था कि अगर वह ज़रा सा भी हिले, तो उसका चेहरा सीधे उन मखमली उरोजों के बीच धँस जाएगा।
मीरा ने घबराहट में शेर के कंधे को पकड़ा और उसके चेहरे के करीब अपना चेहरा रखकर पूछा।
मीरा [बेचैनी में]: "शेर! क्या हुआ? बहुत दर्द हो रहा है क्या? डॉक्टर को बुलाऊँ? बताओ मैं क्या करूँ?"
शेर ने अपनी आँखें मूंद लीं और अपना चेहरा मीरा के उन भारी अंगों की तरफ थोड़ा ऊपर उठाया। नाइटगाउन के पतले रेशम के आर-पार से मीरा के जिस्म की अत्यधिक उत्तेजक गर्माहट सीधे शेर के चेहरे को छू रही थी।
शेर [मन ही मन]: 'आह... यह जन्नत! अब बस एक कदम और... और ये मेमसाब मेरी बांहों में होंगी। इनकी ये नंगी जांघें... यह उबलता हुआ बदन...।'
शेर ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उसकी नज़रों के सामने मीरा के नंगे अंगों का सैलाब था।
तभी अचानक मीरा को एक अजीब सी असहजता का अहसास हुआ। उसे महसूस हुआ कि शेर की साँसें उसके चेहरे पर नहीं, बल्कि कहीं और थिरक रही हैं। उसने ध्यान दिया कि शेर की आँखें उसके चेहरे को नहीं देख रही थीं। मीरा ने तुरंत शेर की नज़रों की दिशा का पीछा किया और एक झटके में उसे अपनी इस बेसुध अवस्था का अहसास हुआ।
वह घुटनों के बल इस तरह झुकी हुई थी कि उसका गाउन पूरी तरह आगे लटक चुका था और उसके दोनों स्तन लगभग पूरी तरह बाहर आ चुके थे। अपनी इस निर्वस्त्र हालत को देखकर मीरा का खून जम गया। मीरा ने पीछे हटने के लिए ज़ोर लगाया, लेकिन शेर ने उसकी कलाई को थाम रखा था।
शेर की आँखों में लाचारी का मुखौटा अभी भी लगा रहा, लेकिन उसकी बातों में एक गहरा, वहशी सम्मोहन था। उसने अपनी नज़रें मीरा के उभरे हुए वक्ष पर टिकाए रखीं और बेहद कामुक, भारी आवाज़ में फुसफुसाया।
शेर [मदमस्त होकर]: "खूबसूरत... माशाअल्लाह! क्या नज़ारा है मेमसाब... इस रूप को देखने के बाद तो अगर जान भी चली जाए, तो कोई मलाल नहीं।"
मीरा [घबराकर, हाँफते हुए और खुद को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए]: "शेर! यह क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे... होश में आओ! तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या? कोई है..."
शेर [गिड़गिड़ाते हुए, पर नज़रों से मीरा के अंगों को चूसते हुए]: "मेमसाब... प्लीज... बस थोड़ा देखने दो ना। आपको क्या पता कि अपनी बीवी से दूर रहते हुए कितने साल हो गए... इस परदेस में तड़पते हुए। और आप... आप तो इतनी गोरी और इतनी खूबसूरत हो कि कोई भी मर्द अपनी सुध-बुध खो बैठे। आज बस अपनी प्यासी आँखों को सुकून दे लेने दो मेमसाब…"
मीरा [गुस्से और खौफ से काँपते हुए, अपने गाउन के पल्लू को समेटने की कोशिश में]: "नहीं शेर... यह पाप है, यह बिल्कुल गलत है! अपनी हद पार मत करो! छोड़ो मुझे!"
शेर [एक गहरी आह भरते हुए, मीरा के और करीब खिसकते हुए]: "मेमसाब... प्लीज! क्या आपको अंदाज़ा भी है कि मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ? इस दिल में आपकी क्या मूरत बसी है? अगर प्यार न होता... तो क्या मैं आज अपनी जान की बाज़ी लगाकर ज्योति बेटी को बचाता? उस तेज़ रफ्तार कार के आगे अपनी छाती अड़ा देता? मैंने अपनी परवाह नहीं की मेमसाब, क्योंकि मैं आपकी कोख उजड़ते नहीं देख सकता था। क्या मेरी इस वफादारी, इस मोहब्बत की इतनी भी कीमत नहीं है कि मैं आपकी इस जन्नत जैसी खूबसूरती का दीदार कर सकूँ?"
शेर के इन शब्दों ने मीरा के दिमाग में एक पल के लिए गहरा भ्रम पैदा कर दिया।
वह एक तरफ उसके इस खुले कामुक हमले से खौफज़दा थी, तो दूसरी तरफ उसका मन यह सोचने पर मजबूर हो रहा था कि इसी आदमी ने अभी-अभी उसकी बेटी के लिए अपना खून बहाया है।
मीरा ने खौफ और अहसानमंदी के दोराहे पर खड़े होकर अपनी भीगी आँखों से शेर की ओर देखा। उसका दिल अंदर से चीख रहा था कि वह यहाँ से भाग जाए, लेकिन शेर की लहूलुहान जाँघ और उसकी दर्द भरी आँखें उसे एक कदम भी पीछे नहीं हटने दे रही थीं।
मीरा [काँपती हुई आवाज़ में]: "शेर... मैं तुम्हारी ता उम्र अहसानमंद रहूँगी, तुमने मेरी गोदी सूनी होने से बचाई है। पर... पर यह जो तुम कर रहे हो, वो बहुत गलत है। मर्यादा मत लांघो शेर, मैं किसी और की पत्नी हूँ।"
शेर ने चेहरे पर एक गहरी निराशा और चोट खाए हुए आशिक का भाव ओढ़ा, जैसे मीरा की बातों ने उसके दिल के टुकड़े-टुकड़े कर दिए हों। उसने धीरे से अपनी पकड़ ढीली करने का नाटक किया, पर उसकी आँखें मीरा के वक्ष से हटी नहीं थीं।
शेर [निराशा और झूठे दर्द भरे लहजे में]: "अभी तो आप कह रही थीं मेमसाब, कि आप मेरी सारी उम्र कर्ज़दार रहेंगी... मेरी वफादारी के आगे नतमस्तक थीं। पर लगता है वो सब झूठ था... एक गरीब नौकर को बहलाने के लिए सिर्फ मीठे बोल थे। जैसे ही काम निकल गया, आपने मुझे फिर से वही अछूत नौकर बना दिया।"
शेर के इन शब्दों ने मीरा के सीने में एक गहरा खंजर घोंप दिया। वह अपराधबोध के गहरे दलदल में धँसने लगी। उसे लगा कि वह वाकई उस आदमी का दिल दुखा रही है जिसने अभी-अभी अपनी जान दांव पर लगाई थी।
मीरा [गहरे मानसिक तनाव और तड़प में]: "नहीं शेर! नहीं... मेरा वो मतलब बिल्कुल नहीं था। भगवान गवाह है, मैं तुम्हें कोई मामूली नौकर नहीं समझती। तुमने जो आज किया है, उसकी कोई कीमत नहीं चुका सकता..."
शेर ने देखा कि पासा पूरी तरह उसके पक्ष में पलट चुका है। उसने मौके का फायदा उठाया और अपनी कलाई को फिर से कसते हुए मीरा को अपनी तरफ से थोड़ा और खींचा। उसकी गर्म और वहशी साँसें मीरा के स्तनों के बीच की घाटी को छू रही थीं।
शेर [कामुक और याचना भरे लहजे में फुसफुसाते हुए]: "तो फिर देखने दीजिए ना मेमसाब... अपनी इस प्यासी आँखों को तृप्त कर लेने दीजिए। प्लीज... थोड़ा और झुक जाइए ना मेरे ऊपर... बस थोड़ा और..."
मीरा का दिमाग पूरी तरह सुन्न हो चुका था। शेर के शब्दों का मायाजाल ने मीरा की सोचने-समझने की शक्ति को पूरी तरह पंगु बना दिया था। वह न तो पूरी तरह हाँ कह पा रही थी और न ही उसमें पीछे हटने की हिम्मत बची थी।
मीरा का चेहरा शर्म, खौफ और एक अजीब सी बेबसी से पूरा लाल हो चुका था। अपराधबोध के उस गहरे दलदल में फँसकर, वह ना चाहते हुए भी शेर के ऊपर थोड़ा और झुक गई।
शेर की साँसें अब भारी हो चुकी थीं और उसकी आँखों में एक अजीब सी भूख तैर आई थी। उसके ठीक सामने, नाईटगाउन के उस ढीले गले से सरक कर मीरा की देह का वह हिस्सा पूरी तरह अनावृत हो चुका था। उनके दोनों सुडौल स्तन, जो इतने बेदाग़ और सफ़ेद थे कि मानो हाथ लगाने भर से मैले हो जाएँ, अब सीधे शेर की नज़रों के निशाने पर थे।
उसकी आँखें उस गोरेपन को देखकर जैसे पूरी तरह पी जाने के लिए व्याकुल हो उठी थीं। उस ढीले गले से झाँकता वह निथरा हुआ रूप देखकर शेर की राल टपकने लगी थी। वह अपनी आँखें वहाँ से हटा ही नहीं पा रहा था, और उसका पूरा वजूद उस छुअन की अगली कगार पर पहुँचने के लिए मचलने लगा था।
शेर [हवस से हांफते हुए और अपनी उंगलियों से मीरा की कलाई को सहलाते हुए]: "कितने खूबसूरत हैं मेमसाब... माशाअल्लाह! ये लाल-लाल निपल्स तो ऐसे लग रहे हैं जैसे चीख-चीख कर मुझे ही अपने पास बुला रहे हों... मुझे चूसने के लिए कह रहे हों।"
शेर के मुँह से इतनी गंदी और अश्लील बात सुनकर मीरा अंदर तक काँप उठी। मर्यादा की आख़िरी दीवार को ढहते देख उसने हिम्मत जुटाई।
मीरा [कमज़ोर और थरथराती आवाज़ में]: "बस शेर... बहुत हो गया। प्लीज..."
शेर ने सीधे मीरा की आँखों में देखा।
शेर [अधिकारपूर्ण आवाज़ में]: "नहीं मेमसाब... इतनी जल्दी कैसे? मेरी प्यास अभी नहीं बुझी है। अभी तो सिर्फ दीदार हुआ है।"
शेर [मन ही मन - चरम आनंद और शैतानी जीत की खुशी में]: 'वाह रे किस्मत! मज़ा आ गया। यह पहली बार है जब मैं मेमसाब के इन झूलते हुए उरोजों को इतनी नज़दीक से देख रहा हूँ, और वो भी तब जब वह पूरे होश-हवास में हैं। इस वक्त उनके जिस्म पर किसी दवा का कोई नशा नहीं है, ना ही मेरे पास उस चोरनी को पकड़ने का कोई झूठा बहाना है। यह कोई सपना या भ्रम नहीं है… यह हकीकत में सिर्फ और सिर्फ मीरा मेमसाब हैं, जो आज इस नौकर की आँखों की भूख मिटाने के लिए खुद मेरे ऊपर झुकी हुई हैं।'
मीरा बेबसी से अपनी आँखें बंद किए खड़ी थी, और उसके आँसू शेर के सीने पर गिर रहे थे। उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस वफादारी के बदले वह अपनी आबरू का सौदा कर रही थी, वह शेर की एक सोची-समझी खूनी साजिश का हिस्सा थी।
मीरा जब उस बेबस मुद्रा में उसके ऊपर झुकी हुई थी, तब शेर की बर्दाश्त का बांध पूरी तरह टूट गया। उसने अपनी आँखों के सामने झूलते हुए उन गोरे अंगों को सिर्फ देखना गँवारा नहीं किया।
अपने दोनों बड़े हाथों को तेज़ी से ऊपर उठाया और सीधे मीरा के नाइटगाउन के खुले हुए गले के अंदर डाल दिया। बिना किसी हिचकिचाहट के, उसने मीरा के उन दोनों नंगे, सुडौल और भारी उरोजों को अपनी मजबूत हथेलियों के शिकंजे में दबोच लिया।
रेशमी गाउन के अंदर शेर की कड़क उँगलियों ने जैसे ही उस मखमली, अछूते बदन को भींचा, मीरा के हलक से एक तीखी चीख निकल गई।
मीरा [तड़पकर और काँपते हुए]: "आह्हऽऽऽ! शेर..."
उसके पूरे शरीर में मानो बिजली की एक तेज़ लहर दौड़ गई। वह सिहरन इतनी तीव्र थी कि डर के बावजूद उसके मुँह से एक बेहद कामुक कराह निकल पड़ी। उसका पूरा बदन उस छुअन से काठ की तरह कड़ा हो गया।
मीरा [हाँफते हुए, अपनी आँखें बंद किए सिसकने लगी]: "नहीं शेर... मत करो... प्लीज छोड़ो मुझे... आऽऽह, यह बहुत गलत है... "
शेर के बड़े और खुरदरे हाथ मीरा के मखमली जिस्म की टोह ले रहे थे। शुरुआत में उसकी हरकतें धीमी और बेहद शातिर थीं; उसकी उँगलियाँ गाउन के अंदर मीरा की मखमली और नाज़ुक त्वचा को इस तरह सहला रही थीं मानो वह किसी नए इलाके का नक्शा तैयार कर रहा हो, उसकी सीमाओं को नाप रहा हो। वह मीरा के जिस्म के हर एक उभार, हर एक सिहरन को अपनी हथेलियों में दर्ज कर रहा था।
मीरा उस थरथराहट से पूरी तरह सुन्न पड़ चुकी थी, उसकी साँसें तेज़ और भारी हो रही थीं। लेकिन जैसे ही शेर को लगा कि उसने मीरा के पूरे बदन की कशिश को अपनी मुट्ठी में ले लिया है, उसके सब्र का बांध टूट गया।
उसने अपने बाएं हाथ की पकड़ को अचानक कड़ा किया और पूरी वहशी ताकत के साथ मीरा के बाएं स्तन को अपनी मुट्ठी में भींचकर पूरी तरह मसल दिया।
मीरा [तड़पकर, दर्द और तीखी उत्तेजना के एक मिले-जुले झटके से चीख उठी]: "ऊँऽऽऽह! शेर... आऽऽह... छोड़ो... बहुत... बहुत दर्द हो रहा है!"
उस अचानक और क्रूर दबाव से मीरा की आँखों के आगे अंधेरा छा गया। नाइटगाउन के पतले रेशम के अंदर उसका गोरा वक्ष शेर की कड़क उँगलियों के बीच पूरी तरह पिचक चुका था। शेर की उँगलियों के नाखून मीरा की नाज़ुक त्वचा में धँस रहे थे, जिससे वहाँ गहरे लाल निशान उभरने लगे थे।
शेर [हवस से पूरी तरह अंधा होकर]: "कसम से मेमसाब... इतनी कड़क और रसीली चीज़ मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में नहीं छुई। चिल्लाओ मत... दबाने दो इसे... अभी तो इस दर्द का असली मज़ा आना बाकी है।"
शेर [मन ही मन - चरम कामुक उन्माद में]: 'हाँ... तड़पो मेमसाब! इसी तड़प को देखने के लिए तो मैंने अपनी जान दांव पर लगाई थी। यह तुम्हारा भरा हुआ बदन आज मेरी इस मुट्ठी से बचकर कहीं नहीं जा सकता।'
मीरा ने अपने दोनों हाथ शेर के मजबूत कंधों पर टिका दिए और खुद को ऊपर ढकेलने की आख़िरी कोशिश करने लगी, लेकिन शेर का दूसरा हाथ अब उसकी पतली कमर को नीचे से पकड़कर उसे अपने और करीब खींच रहा था, जिससे उसका पूरा वक्षस्थल शेर के मुँह के और नज़दीक आता जा रहा था।
लेकिन शेर के हाथ अब थमने वाले नहीं थे। उसने अपनी उँगलियाँ और फैलाकर उन मांसल उभारों को बेरहमी से दबाने लगा। नाइटगाउन के अंदर छिपे उन लाल निपल्स को उसने अपनी उँगलियों के बीच भींच दिया।
शेर [हवस के गहरे उन्माद में]: "कैसे छोड़ दूँ मेमसाब? इन चीज़ों को तो सिर्फ दबाने और चूसने के लिए ही ऊपर वाले ने बनाया है। देखो तो सही, हाथ में लेते ही कैसे ये गर्म हो रहे हैं।"
शेर [मन ही मन]: 'ओह माय गॉड! क्या मलाई जैसा जिस्म है? यह कड़कपन, यह गर्माहट... इसके सामने तो दुनिया की हर औरत फीकी है। आज तो इन चीज़ों को मसलकर इनका सारा रस पी जाऊँगा।'
मीरा का बदन खौफ और उस अनचाही उत्तेजना के बीच झूल रहा था। उसके मुँह से बार-बार 'नहीं' निकल रहा था, लेकिन शेर की छाती से सटकर उसके झूलते हुए अंग अब पूरी तरह उस भूखे नौकर की मुट्ठियों में कैद हो चुके थे।
Deepak Kapoor
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