14-06-2026, 11:41 PM
तभी — कदमों की आवाज़।
दूसरा आदमी। युवा। दुबला। वह भी पार्क में घूम रहा था — शायद घर जा रहा था, शॉर्टकट ले रहा था। उसने सुमन को देखा — वह ठिठक गया।
उसकी नज़र पहले सुमन के चेहरे पर, फिर उसकी नंगी चूची पर, फिर उसकी खुली जांघ और चूत पर, फिर उस आदमी पर जो अपना लंड मसल रहा था।
युवा लड़का रुक गया। वह भी देखने लगा।
अब दो आदमी थे। दोनों सुमन को देख रहे थे। दोनों अपने-अपने लंड मसल रहे थे।
राज पेड़ के पीछे खड़ा था — उसका लंड पैंट के अंदर फट रहा था। वह मुस्कुरा रहा था।
सुमन ने और आगे बढ़ाया।
वह दोनों आदमियों के बीच में आकर खड़ी हो गई। उसने अपनी दोनों चूचियाँ बाहर निकाल लीं — ड्रेस कमर पर लटक रही थी। अब उसका ऊपरी धड़ पूरा नंगा था।
उसने अपनी चूचियाँ दोनों हाथों से पकड़ लीं। उन्हें दबाया — एक-दूसरे से लड़ाया, एक साथ मिलाया, फिर अलग किया। निप्पल हवा में इशारा कर रहे थे।
मोटा आदमी खड़ा हो गया। वह सुमन के पास आया। काँपते हाथों से उसने सुमन की एक चूची पकड़ ली।
सुमन ने विरोध नहीं किया।
उस आदमी ने चूची दबाई — जोर से। फिर उसने अपना मुँह उस पर रख दिया। उसने चूसना शुरू कर दिया — जोर-जोर से, गीली आवाज़ के साथ। उसकी जीभ निप्पल पर घूम रही थी, दाँत दबा रहे थे।
सुमन कराह उठी। आधी रात के सन्नाटे में वह आवाज़ साफ सुनाई दी — "अह्ह..."
युवा लड़का भी पास आ गया। वह सुमन के पीछे आकर खड़ा हो गया। उसके हाथ सुमन की कमर पर गए, फिर नीचे — उसकी गांड पर। उसने दोनों हाथों से सुमन की गांड के गाल पकड़ लिए। मुलायम, गर्म, गीला — पसीने से या चूत के पानी से।
उसने सुमन की गांड को दबाया। उसके अंगूठे बीच की दरार पर गए। उसने एक अंगूठा उसकी चूत पर रख दिया — ड्रेस के नीचे से, सीधा। लेबिया के बीच। वह पहले से ही गीली थी।
सुमन चिल्लाई — धीमी, दबी हुई चीख। "अह्ह्ह... नहीं... अंदर नहीं..."
लेकिन उस आदमी ने अंगूठा अंदर नहीं डाला। बस बाहर रखा। रगड़ा। गीले होठों पर उँगली फिराई। इतना ही। सिर्फ टीज़।
सामने वाला आदमी अब भी सुमन की चूची चूस रहा था। उसने दूसरी चूची भी पकड़ ली — एक हाथ से दोनों चूचियाँ दबा रहा था, और मुँह से एक को चूस रहा था। उसकी लार टपक रही थी — सुमन के स्तन पर, ड्रेस पर, फर्श पर।
युवा लड़के ने अपना लंड निकाल लिया। उसने सुमन की गांड की दरार पर अपना लंड रख दिया — ड्रेस के ऊपर से। रगड़ा। आगे-पीछे। उसका लंड गीला हो गया — सुमन के चूत के पानी से जो ड्रेस को भिगो चुका था।
सुमन ने अपना सिर पीछे की तरफ झुका दिया। उसकी आँखें बंद थीं। उसके मुँह से सिर्फ साँसें निकल रही थीं — तेज़, फटी हुई, गीली।
"रुको... बस... इतना ही..." वह फुसफुसाई।
लेकिन उसने उन्हें नहीं रोका।
मोटा आदमी एक चूची छोड़कर दूसरी पर आ गया। वह बारी-बारी से चूस रहा था, काट रहा था, चाट रहा था। उसके हाथ सुमन की कमर पर थे, उसे अपनी तरफ खींच रहे थे।
युवा लड़का पीछे से सुमन की गर्दन चूमने लगा। उसकी जीभ उसके कंधों पर, उसके कानों पर। उसका लंड अभी भी उसकी गांड पर रगड़ खा रहा था।
राज पेड़ के पीछे अपना लंड पकड़े हुए था। वह हाथ लगा रहा था — धीरे-धीरे — ताकि जल्दी खत्म न हो। वह देखना चाहता था। सब देखना चाहता था। सुमन का नंगा शरीर दो अजनबियों के बीच। उसकी चूचियाँ चूसी जा रही थीं। उसकी गांड रगड़ी जा रही थी।
तभी — पार्क के बाहर से सिक्युरिटी की गश्ती गाड़ी की हल्की रोशनी दिखी।
सभी लोग सन्न रह गए।
युवा लड़का तुरंत पीछे हट गया। अपना लंड अंदर किया, ज़िप बंद की। मोटा आदमी भी पीछे हटा — उसने सुमन की चूची छोड़ी, अपना लंड पैंट में किया, और बेंच पर बैठकर सिगरेट जलाने का नाटक करने लगा।
सुमन ने धीरे-धीरे अपनी ड्रेस ऊपर खींची। अपनी चूचियाँ अंदर कीं। ड्रेस को सही किया। उसने अपने बाल संवारे।
राज पेड़ के पीछे से निकला। उसने सुमन का हाथ पकड़ा। चुपचाप।
दोनों पार्क के दूसरे रास्ते से बाहर निकल गए।
दूसरा आदमी। युवा। दुबला। वह भी पार्क में घूम रहा था — शायद घर जा रहा था, शॉर्टकट ले रहा था। उसने सुमन को देखा — वह ठिठक गया।
उसकी नज़र पहले सुमन के चेहरे पर, फिर उसकी नंगी चूची पर, फिर उसकी खुली जांघ और चूत पर, फिर उस आदमी पर जो अपना लंड मसल रहा था।
युवा लड़का रुक गया। वह भी देखने लगा।
अब दो आदमी थे। दोनों सुमन को देख रहे थे। दोनों अपने-अपने लंड मसल रहे थे।
राज पेड़ के पीछे खड़ा था — उसका लंड पैंट के अंदर फट रहा था। वह मुस्कुरा रहा था।
सुमन ने और आगे बढ़ाया।
वह दोनों आदमियों के बीच में आकर खड़ी हो गई। उसने अपनी दोनों चूचियाँ बाहर निकाल लीं — ड्रेस कमर पर लटक रही थी। अब उसका ऊपरी धड़ पूरा नंगा था।
उसने अपनी चूचियाँ दोनों हाथों से पकड़ लीं। उन्हें दबाया — एक-दूसरे से लड़ाया, एक साथ मिलाया, फिर अलग किया। निप्पल हवा में इशारा कर रहे थे।
मोटा आदमी खड़ा हो गया। वह सुमन के पास आया। काँपते हाथों से उसने सुमन की एक चूची पकड़ ली।
सुमन ने विरोध नहीं किया।
उस आदमी ने चूची दबाई — जोर से। फिर उसने अपना मुँह उस पर रख दिया। उसने चूसना शुरू कर दिया — जोर-जोर से, गीली आवाज़ के साथ। उसकी जीभ निप्पल पर घूम रही थी, दाँत दबा रहे थे।
सुमन कराह उठी। आधी रात के सन्नाटे में वह आवाज़ साफ सुनाई दी — "अह्ह..."
युवा लड़का भी पास आ गया। वह सुमन के पीछे आकर खड़ा हो गया। उसके हाथ सुमन की कमर पर गए, फिर नीचे — उसकी गांड पर। उसने दोनों हाथों से सुमन की गांड के गाल पकड़ लिए। मुलायम, गर्म, गीला — पसीने से या चूत के पानी से।
उसने सुमन की गांड को दबाया। उसके अंगूठे बीच की दरार पर गए। उसने एक अंगूठा उसकी चूत पर रख दिया — ड्रेस के नीचे से, सीधा। लेबिया के बीच। वह पहले से ही गीली थी।
सुमन चिल्लाई — धीमी, दबी हुई चीख। "अह्ह्ह... नहीं... अंदर नहीं..."
लेकिन उस आदमी ने अंगूठा अंदर नहीं डाला। बस बाहर रखा। रगड़ा। गीले होठों पर उँगली फिराई। इतना ही। सिर्फ टीज़।
सामने वाला आदमी अब भी सुमन की चूची चूस रहा था। उसने दूसरी चूची भी पकड़ ली — एक हाथ से दोनों चूचियाँ दबा रहा था, और मुँह से एक को चूस रहा था। उसकी लार टपक रही थी — सुमन के स्तन पर, ड्रेस पर, फर्श पर।
युवा लड़के ने अपना लंड निकाल लिया। उसने सुमन की गांड की दरार पर अपना लंड रख दिया — ड्रेस के ऊपर से। रगड़ा। आगे-पीछे। उसका लंड गीला हो गया — सुमन के चूत के पानी से जो ड्रेस को भिगो चुका था।
सुमन ने अपना सिर पीछे की तरफ झुका दिया। उसकी आँखें बंद थीं। उसके मुँह से सिर्फ साँसें निकल रही थीं — तेज़, फटी हुई, गीली।
"रुको... बस... इतना ही..." वह फुसफुसाई।
लेकिन उसने उन्हें नहीं रोका।
मोटा आदमी एक चूची छोड़कर दूसरी पर आ गया। वह बारी-बारी से चूस रहा था, काट रहा था, चाट रहा था। उसके हाथ सुमन की कमर पर थे, उसे अपनी तरफ खींच रहे थे।
युवा लड़का पीछे से सुमन की गर्दन चूमने लगा। उसकी जीभ उसके कंधों पर, उसके कानों पर। उसका लंड अभी भी उसकी गांड पर रगड़ खा रहा था।
राज पेड़ के पीछे अपना लंड पकड़े हुए था। वह हाथ लगा रहा था — धीरे-धीरे — ताकि जल्दी खत्म न हो। वह देखना चाहता था। सब देखना चाहता था। सुमन का नंगा शरीर दो अजनबियों के बीच। उसकी चूचियाँ चूसी जा रही थीं। उसकी गांड रगड़ी जा रही थी।
तभी — पार्क के बाहर से सिक्युरिटी की गश्ती गाड़ी की हल्की रोशनी दिखी।
सभी लोग सन्न रह गए।
युवा लड़का तुरंत पीछे हट गया। अपना लंड अंदर किया, ज़िप बंद की। मोटा आदमी भी पीछे हटा — उसने सुमन की चूची छोड़ी, अपना लंड पैंट में किया, और बेंच पर बैठकर सिगरेट जलाने का नाटक करने लगा।
सुमन ने धीरे-धीरे अपनी ड्रेस ऊपर खींची। अपनी चूचियाँ अंदर कीं। ड्रेस को सही किया। उसने अपने बाल संवारे।
राज पेड़ के पीछे से निकला। उसने सुमन का हाथ पकड़ा। चुपचाप।
दोनों पार्क के दूसरे रास्ते से बाहर निकल गए।


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