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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#23
मिश्रा अंकल अंदर गए। उनकी पत्नी किचन में थी।

वह बाथरूम में घुसे। लुंगी उतारी। उनका लंडलाल, सख्त, उभरी हुई नसों के साथहवा में खड़ा था।
उन्होंने अपना लंड पकड़ा। हाथ तेज़ कर दिया।
उनकी आँखों के सामनेसुमन की खुली चूत। उसकी गीली चमक। उसकी गांड का मटकना। उसके निप्पल। उसकी मुस्कान।
"अह्ह साली... क्या माल है..."
शाम के सात बजे।
राज ने दरवाज़ा खोला। अंदर आया। शर्ट की बटन खोली, टाई ढीली की।
सुमन लिविंग रूम में सोफे पर बैठी थी। वही सेमी-ट्रांसपेरेंट नाइटीपूरे दिन वही। उसके बाल बिखरे हुए। हाथ में चाय का कप।
राज ने उसके पास आकर बैठते हुए कहा, "बता। क्या हुआ आज?"
सुमन मुस्कुराई। वह मुस्कानजो अब राज जानता था। शैतानी। भरी हुई।
"बहुत कुछ हुआ," उसने कहा।
और फिर उसने सब बता दिया। सुबह से। बालकनी से। मिश्रा अंकल से।
कैसे उसने पैर कुर्सी पर रखा। कैसे उसकी चूत खुल गई। कैसे अंकल की लार टपकने लगी। कैसे उसने पीछे मुड़कर देखाअंकल अपना लंड मसल रहे थे।
कैसे वह पेपर लेने के लिए आगे झुकीपूरीऔर उसकी चूचियाँ लगभग बाहर गईं।
राज सुन रहा था। उसकी साँसें भारी हो रही थीं। उसके पेंट के अंदर लंड सख्त हो चुका था।
सुमन ने आखिरी लाइन कही — "फिर अंदर आकर मैंने अपनी उँगली अपनी चूत में डाली। चाट ली।"
दोनों चुप हो गए।
फिर राज हँसा। जोर से। खुलकर।
"पता नहीं," उसने कहा, "मिश्रा जी ज़्यादा थर्की हैं या तुम?"
सुमन भी हँसने लगी। पहले धीरे, फिर खिलखिलाकर। उसकी हँसी में वही मासूमियत थी जो पहले हुआ करती थीऔर अब उसके साथ एक नई शरारत भी मिल गई थी।
"मैं तो बस वैसे ही खड़ी थी," सुमन ने कहा। "अंकल ने खुद देख लिया। मैंने क्या किया?"
"हाँ हाँ," राज ने उसकी ठुड्डी पकड़ी। "तूने कुछ नहीं किया। बस अपनी गांड मटकाई, अपनी चूत खोली, अपनी चूचियाँ बाहर निकाल दीं। बस।"
"बिल्कुल," सुमन ने आँखें सिकोड़ते हुए कहा। "यह तो गलती से हो गया।"
दोनों फिर हँसे।
राज ने उसके बालों में हाथ फेरा। "और तुझे कैसा लगा?"
सुमन ने उसकी तरफ देखा। एक लंबी, गहरी नज़र।
"बहुत अच्छा," उसने कहा। "जब उसकी आँखें फट गईं... जब उसका लुंगी के ऊपर से लंड दिखने लगा... जब उसकी लार टपकने लगी... मुझे लगा कि मेरी चूत से पानी निकल रहा है बिना छुए।"
राज ने अपनी पैंट के ऊपर से अपना लंड दबाया। "बस। अब रुका नहीं जाएगा।"
सुमन ने उसका हाथ पकड़ लिया। "पहले खाना खा। फिर देखते हैं।"
राज कराहा। "तू मुझे मार डालेगी।"
"हाँ," सुमन मुस्कुराई। "बस यही प्लान है।"
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 14-06-2026, 11:14 PM



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