14-06-2026, 07:28 PM
9 बजे पूजा शुरू हुई। अंजली और चंपा दोनों मेरे सामने जमीन पर बैठी थीं। कमरे में अगरबत्ती की मंद सुगंध फैली हुई थी और हल्की-हल्की धूप ऊपरी खिड़की से आ रही थी। मैत्री की प्रस्तुति।
थोड़ी देर तक मंत्रों का जाप करने के बाद मैंने चंपा की तरफ देखा और गंभीर स्वर में कहा, “चंपा, तुम जानती हो कि तुम्हारी बेटी की कोख सूख चुकी है?”
चंपा ने सिर झुकाकर धीरे से “हाँ” में सिर हिलाया। उसकी आँखों में चिंता और शर्म दोनों थे।
मैंने आगे कहा, “उसे हरी करने का एक ही उपाय है… अगर तुम तैयार हो तो?”
चंपा ने काँपते स्वर में पूछा, “वो क्या है बाबाजी?”
मैंने ठंडी नजर से दोनों को देखते हुए कहा, “हम तुम्हारी कोख को मंत्रों से इसकी कोख से जोड़ेंगे। लेकिन इसके लिए तुम दोनों को कपड़े उतारकर बैठना होगा। कोई बीच में नहीं रोकेगा। सोच लो। थोडा कठिन तो है पर इसके अलावा कोई और उपाय भी तो नहीं। और कोई जल्दी नहीं है, लेकिन जो करना है मन और तन से समर्पित होक करना है। अगर कोई समस्या है तो आगे जाके तकलीफ हो सकती है।”
चंपा ने एक पल के लिए अपनी बेटी अंजली की तरफ देखा, फिर सिर झुकाकर बोली, “अपनी बेटी की खुशी के लिए मैं तैयार हूँ बाबाजी। अगर ऐसा करने से मेरी बेटी का गर्भ हरा हो जाये तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ। आप मेरे कोंख से उसकी कोंख जोड़ सकते हो बाबाजी। मुझे कोई आपत्ति नहीं।”
दोनों माँ-बेटी ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर बिना कुछ कहे अपने सारे कपड़े उतार दिए।
अब मेरे सामने 45 साल की चंपा का भारी-भरकम, मोटा और परिपक्व शरीर था - उसके स्तन बेहद बड़े, भारी और थोड़े झुके हुए थे, कमर मोटी थी और गांड बहुत भारी तथा बाहर निकली हुई थी। वहीं 22-23 साल की अंजली का जवानी से भरा, गठीला और साँवला शरीर था - उसके स्तन ऊपर की तरफ उठे हुए, कमर पतली और गांड गोल-मटोल थी।
दोनों पूरी तरह मादरजात नंगी मेरे सामने बैठी थीं। मैत्री रचित कहानी।
मैंने पहले गंगाजल की कटोरी उठाई और दोनों की चूत को धीरे-धीरे धोया। ठंडा जल उनकी गर्म चूतों को छूते ही दोनों हल्के से सिहर गईं।
फिर मैंने रोली और शहद का गाढ़ा लेप बनाया। अपनी उँगलियों पर लेप लेकर पहले चंपा की चूत में अंगुलियाँ डालकर अच्छे से लगाया। चंपा मचल रही थी, उसकी जाँघें काँप रही थीं, लेकिन वह चुपचाप सहन कर रही थी।
“आह्ह…” चंपा के मुँह से हल्की सिसकारी निकली जब मेरी उँगलियाँ उसके अंदर घुसीं।
फिर मैंने अंजली की चूत में भी वही लेप लगाया। अंजली की चूत अभी भी रात की चुदाई से थोड़ी सूजी हुई थी। चम्पा की पाकट आँखों से उसकी सूजी हुई चूत छिपी नहीं रह सकी। लेकिन उसने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
“बाबाजी… धीरे…” अंजली ने शर्म से कहा।
“बेटी,अब सहन भी तो करना पड़ेगा।“ मैंने बिना रुके कहा।
चंपा ने बेटी का हाथ पकड़ लिया और उसे सहारा देने लगी। उसे ऐसा ही था अकी बेटी के साथ यह पहली बार हो रहा है।
लेकिन मैं रुका नहीं। रचयिता मैत्री।
**********************************************************.
जुड़े रहिये दोस्तों.
मैत्री.
थोड़ी देर तक मंत्रों का जाप करने के बाद मैंने चंपा की तरफ देखा और गंभीर स्वर में कहा, “चंपा, तुम जानती हो कि तुम्हारी बेटी की कोख सूख चुकी है?”
चंपा ने सिर झुकाकर धीरे से “हाँ” में सिर हिलाया। उसकी आँखों में चिंता और शर्म दोनों थे।
मैंने आगे कहा, “उसे हरी करने का एक ही उपाय है… अगर तुम तैयार हो तो?”
चंपा ने काँपते स्वर में पूछा, “वो क्या है बाबाजी?”
मैंने ठंडी नजर से दोनों को देखते हुए कहा, “हम तुम्हारी कोख को मंत्रों से इसकी कोख से जोड़ेंगे। लेकिन इसके लिए तुम दोनों को कपड़े उतारकर बैठना होगा। कोई बीच में नहीं रोकेगा। सोच लो। थोडा कठिन तो है पर इसके अलावा कोई और उपाय भी तो नहीं। और कोई जल्दी नहीं है, लेकिन जो करना है मन और तन से समर्पित होक करना है। अगर कोई समस्या है तो आगे जाके तकलीफ हो सकती है।”
चंपा ने एक पल के लिए अपनी बेटी अंजली की तरफ देखा, फिर सिर झुकाकर बोली, “अपनी बेटी की खुशी के लिए मैं तैयार हूँ बाबाजी। अगर ऐसा करने से मेरी बेटी का गर्भ हरा हो जाये तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ। आप मेरे कोंख से उसकी कोंख जोड़ सकते हो बाबाजी। मुझे कोई आपत्ति नहीं।”
दोनों माँ-बेटी ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर बिना कुछ कहे अपने सारे कपड़े उतार दिए।
अब मेरे सामने 45 साल की चंपा का भारी-भरकम, मोटा और परिपक्व शरीर था - उसके स्तन बेहद बड़े, भारी और थोड़े झुके हुए थे, कमर मोटी थी और गांड बहुत भारी तथा बाहर निकली हुई थी। वहीं 22-23 साल की अंजली का जवानी से भरा, गठीला और साँवला शरीर था - उसके स्तन ऊपर की तरफ उठे हुए, कमर पतली और गांड गोल-मटोल थी।
दोनों पूरी तरह मादरजात नंगी मेरे सामने बैठी थीं। मैत्री रचित कहानी।
मैंने पहले गंगाजल की कटोरी उठाई और दोनों की चूत को धीरे-धीरे धोया। ठंडा जल उनकी गर्म चूतों को छूते ही दोनों हल्के से सिहर गईं।
फिर मैंने रोली और शहद का गाढ़ा लेप बनाया। अपनी उँगलियों पर लेप लेकर पहले चंपा की चूत में अंगुलियाँ डालकर अच्छे से लगाया। चंपा मचल रही थी, उसकी जाँघें काँप रही थीं, लेकिन वह चुपचाप सहन कर रही थी।
“आह्ह…” चंपा के मुँह से हल्की सिसकारी निकली जब मेरी उँगलियाँ उसके अंदर घुसीं।
फिर मैंने अंजली की चूत में भी वही लेप लगाया। अंजली की चूत अभी भी रात की चुदाई से थोड़ी सूजी हुई थी। चम्पा की पाकट आँखों से उसकी सूजी हुई चूत छिपी नहीं रह सकी। लेकिन उसने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
“बाबाजी… धीरे…” अंजली ने शर्म से कहा।
“बेटी,अब सहन भी तो करना पड़ेगा।“ मैंने बिना रुके कहा।
चंपा ने बेटी का हाथ पकड़ लिया और उसे सहारा देने लगी। उसे ऐसा ही था अकी बेटी के साथ यह पहली बार हो रहा है।
लेकिन मैं रुका नहीं। रचयिता मैत्री।
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जुड़े रहिये दोस्तों.
मैत्री.



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