Thread Rating:
  • 4 Vote(s) - 3 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Incest Shaitani aaina
#10
update -8- 

दूसरी तरफ बृजमोहन की सबसे छोटी बेटी पिंकी अब 16 साल की हो चुकी थी। सिंगारदान घर में आने के बाद अंदर भी बदलाव आने लगे थे । उसका चोला फड़कने लगा था । 
पिंकी ने अब सूट-सलवार पूरी तरह छोड़ दी थी। ऑनलाइन साइट्स से छोटी-छोटी स्कर्ट्स, क्रॉप टॉप्स और बॉडी फिट कपड़े मँगवाने लगी थी। स्कर्ट्स इतनी छोटी कि घर में घूमते वक्त उसकी जाँघों का बड़ा हिस्सा खुला रह जाता। टॉप्स इतने क्रॉप कि उसकी नाभि, कमर और स्तनों का ऊपरी हिस्सा हमेशा दिखता।
बृजमोहन भी ये सब देख रहा था । 
पिंकी को इन कपड़ों में देख कर उसकी नजर भी उसके कमनिय अंगो पे जाने लगी  ।  । लेकिन अब 
धीरे-धीरे बृजमोहन को डर लगने लगा जब उसने देखा कि मोहल्ले के लड़के, , पिंकी को बड़ी गंदी नजरों से देखते थे। जब पिंकी छोटी स्कर्ट पहनकर छत पर जाती या बाहर निकलती, तो लड़कों की नजरें उसकी जाँघों, नितंबों और छाती पर अटक जातीं। बृजमोहन सब देखता, तो उससे गुस्सा आता,, लेकिन वो कुछ बोल नहीं पाता। उसे खुद पर शर्म आती और डर भी लगता।

एक दिन सड़क पर पिंकी और ब्रिज जा रहे थे ।  दो लड़के सड़क के किनारे खड़े थे और पिंकी के बदन का अक्षु चोदन कर रहे थे । ब्रिज को गुस्सा आता है । पिंकी ने टाइट कैपरी पहनी थी । जिसमें उसकी गांड का साइज बहुत बड़ा दिख रहा था । ऊपर से एक टिनी टॉप उसने पहना था । ब्रिज और पिंकी दोनों आगे बढ़ जाते हैं तो ब्रिज और पिंकी के कानों में उन दोनों की बातें सुनाई पड़ती है ।
" साला बहनचोद, इसका भी कोठा गरम हो गया, इसकी बहनों की तरह"
बृजमोहन पीछे मुड़कर देखता है तो वो उसे देख के हंसते हैं । ब्रिज उनकी तरफ जाता है तो पिंकी ब्रिज का हाथ पकड़ लेती है ।
" छोड़िए न पापा, ये बदतमीज लड़के हैं, इनसे उलझना ही बेकार है ”
ब्रिज – मैंने तुझे कहा था ना ऐसे बदन को उभारने वाले कपड़े पहन के घर से न निकला कर
पिंकी – पापा अब क्या हम दूसरों के हिसाब से अपने कपड़े पहने । और वैसे भी आज मैने स्कर्ट भी नहीं पहनी है ।
... ये टॉप तो है 
... इसमें कहां कुछ दिख रहा है, मेरा क्लीवेज ढका हुआ है 
    ... लेकिन , पिछे से तेरी पूरी पीठ नंगी है
 ... तो , मैने अपने बाल पीछे खोल तो रखे हैं, आधी से ज्यादा पीठ ढकी है 
... ये तो तुमने अभी पीछे किए, मैने देखा था तूने इनसे पहले तीन लड़कों के पास से गुजरने के बाद इनको आगे किया था, उन्हें अपना पीछे का डिज़ाइन दिखा रही थी क्या ।
 ... पापा आप बेकार में शक कर रहे हैं ।
.... स्कर्ट नहीं पहनी लेकिन ये कैप्री भी तो तेरा बदन उभार रही है 
पिंकी बृजमोहन की बात को समझ जाती है । वह इस बार थोड़ा गुस्सा होकर कहती है ।
... पापा, मेरी गांड अब इतनी उभर चुकी है कि मैं चाहे सलवार पहनूं, या साड़ी, शॉर्ट पहनूं या जींस, लड़कों की नजर से वो बच नहीं सकती । 
अपनी बेटी के इस तरह बेबाकी से कहने और मुंह से ’ गांड ’ शब्द सुनने के बाद वह अवाक रह जाता है । थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे को देखते हैं । इसके बाद ब्रिज के मुंह से एक शब्द नहीं निकलता ।

कुछ दिनों बाद पिंकी ने अब ऑनलाइन साइट्स से और भी छोटी-छोटी स्कर्ट्स, क्रॉप टॉप्स और बॉडी फिट कपड़े मँगवाने लगी थी। स्कर्ट्स इतनी छोटी कि घर में घूमते वक्त उसकी जाँघों का बड़ा हिस्सा खुला रह जाता। टॉप्स इतने क्रॉप कि उसकी नाभि, कमर और स्तनों का ऊपरी हिस्सा हमेशा दिखता।
एक दिन शाम को जब पिंकी ऐसी ही बहुत छोटी जींस स्कर्ट और टाइट क्रॉप टॉप पहनकर नीचे आई, तो बृजमोहन से न रहा गया और वो बोल पड़ा ।
“ये क्या पहन रखा है तूने ?!” बृजमोहन गरजा, “इतनी छोटी स्कर्ट? सड़क पर निकलेगी तो लड़के क्या बुरी नजर नहीं डालेंगे तेरे बदन पे ? घर में भी शर्म नहीं आती?”
पिंकी कुछ नहीं बोली, सिर्फ मुस्कुराई 
पिंकी – ओह कम ऑन पापा, ये तो आज कल का फैशन है, लड़के तो लड़के होते हैं, उन्हें कौन रोक सकता है, हम लड़कियां कुछ भी पहन के जाएं , बदन का नाप उनकी आँखें हमारा हर वक्त लेती रहती हैं ।
ब्रिज – ये किस तरह की बातें कह रही है तू, तुझे कुछ शरम भी है, या बेच खाई है, तेरा बाप हूं मैं । पिंकी –पापा , इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो आप आज और दिन तो आपने कुछ नहीं बोला , फिर आज क्या हुआ ।
ब्रिज – ये कुछ ज्यादा छोटा नहीं लग रहा तुझे, 
पिंकी – पापा, प्लीज, मुझे कपड़ों के ऊपर कोई उपदेश न दें आप , मै बड़ी हो गई हूं , ये मेरी चॉइस है कि मैं क्या पहनूं और क्या नहीं , बाय 
और ये कह के वो सिंगारदान वाले कमरे की तरफ चली गई।

बृजमोहन अपनी पत्नी सरला के पास गया और शिकायत करने लगा,
“देखो अपनी बेटी को ! दिनों दिन इसके कपड़े और छोटे होते जा रहे हैं, ऐसे कपड़े तो इसे घर में भी नहीं पहनने चाहिए, वो घर में अध नंगी घूम रही है। और कहती है कि मेरी मर्जी कुछ भी पहनूं ।  तुम कुछ बोलती क्यों नहीं?”
सरला ने एक ठंडी नजर बृजमोहन पर डाली। अब सरला भी बदल चुकी थी। उसके होंठों पर वो नई चमक थी ।
“चुप रहो। लड़की जवान हो गई है। उसे जो अच्छा लगता है, पहनने दो। तुम्हें क्या तकलीफ है? उसकी उम्र है , इस उमर में लड़कियां अपना शौक पूरा करती हैं, उसकी सहेलियां भी ऐसे कपड़े पहनती हैं, उनके घरवाले उन्हें कुछ नहीं कहते , तुम अपनी सोच थोड़ा मॉडर्न रखो । कब तक अपनी जवानी छुपाएगी । आजकल ढकी छुपी, शर्मीली लड़कियों का जमाना नहीं है। हमने तो जैसे तैसे अपनी जिंदगी काट ली । लेकिन मैं अपनी बेटी पे कोई कंट्रोल नहीं करना चाहती । 
ब्रिज – देखो , इन कपड़ों से उसका दिमाग भी खराब हो रहा है, उसे मैंने पड़ोस के सलीम के साथ देखा । 
सरला – अरे देखा तो क्या बुरा कर दिया उसने, इस उम्र में लड़के लड़कियां ये सब करते हैं, वो अब बॉयफ़्रेंड भी न बनाए। 
ब्रिज – तब तो तुम ये भी कहोगी कि वो सेक्स भी करले उसके उसके साथ 
सरला – ऐसा वैसा कुछ नहीं होगा, उसकी चिंता न करो। वो तेज है बहुत, उसे सिर्फ घुमा रही है 
ब्रिज– बॉयफ़्रेंड एक होता है, की एक से ज्यादा, वो कई लड़को के साथ घूमती है 
सरला – हां तो ठीक तो है, वो लड़की ही क्या जिसके पीछे 4–5 न पड़े हों । वो खूबसूरत है, लड़के तो पीछे पड़ेंगे ही ।
ब्रिज – पता नहीं क्या गुल खिलाएगी ये , ऐसे कपड़े पहनती है, कहीं किसी का दिमाग खराब हो गया 
न तो मांस नोच लेगा उसका ।
सरला – फालतू की बकवास मत करो अब, तुम बस अपना दिमाग सही रखो अब ।
ब्रिज – क .... क्या मतलब , 
सरला – अब ज़्यादा बनो मत, छोटे कपड़ों में तो तुम भी देखते हो उसे आजकल, 
ब्रिज - क्या बकवास कर रही हो 
सरला - जैसे मै कुछ जानती नहीं हां, औरों को छोड़ो, तुम कहीं बेकाबू मत हो जाना , उसकी जवानी देखकर ।
बृजमोहन उसके शब्दो पर हैरान हो जाता है 
ब्रिज – मै क्यों उसकी जवानी देखूंगा 
सरला – क्योंकि तुम भी मर्द हो, यहां कॉलोनी में कई बापों ने कांड किया है अपनी ही बेटियों का , और अब जेल में हैं, पता है न, मै सोचती थी तुम वैसे नहीं होगे, लेकिन, तुम्हारी नजरें उसे कैसे देखती हैं, पता है मुझे 
ब्रिज – ऐसा कुछ नहीं है , ऐसा होता तो मैं क्यों कहता कि , ज्यादा छोटे कपड़े न पहनने को
सरला – और थोड़े छोटे चलेंगे तुम्हे है न, जब वो कुछ दिनों से शॉर्ट्स और लो कट टॉप्स पहन रही थी तब तो टोका नहीं तुमने। जब लड़के घर के आस पास मंडराने लगे , तब चिंता हुई तुम्हें उसकी
ब्रिज – देखो सरला, तुम गलत कह रही हो
सरला – ठीक है ठीक है, अब ज्यादा उसके कपड़ों के पीछे मत पड़ो और जाओ यहां से, अपना काम करो ।
बृजमोहन ज्यादा कुछ नहीं और वहां से जाने लगता है । वो सोचने लगता है क्या वाकई सरला सही कह रही है ।
तभी उसे पिंकी आती हुई दिखती है । वो सरला को देखता है जो उसे घूर रही थी और उसे देख मंद मंद मुस्कुरा रही थी । वो वहां से चला जाता है ।

पिंकी ने अपना एक इंस्टाग्राम और स्नैपचैट अकाउंट भी बना लिया था। नाम रखा था — “Pinky_TheFlame”। पहले तो वह शर्माती थी, लेकिन सिंगारदान के सामने खड़े होकर जब वह खुद को देखती, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता।
वह छोटी स्कर्ट पहनकर, कमर झुकाकर, नितंब पीछे करके रील्स बनाने लगी। एक रील में वह स्कर्ट को थोड़ा और ऊपर खींचकर घूमती, दूसरी में टॉप के बटन खोलकर अपनी छाती का उभार दिखाती। कमेंट्स में लड़के तरह-तरह की अश्लील बातें लिखते। “Hot ?”, “Sexy legs”, “Want you baby” — ये कमेंट्स पढ़कर पिंकी को अजीब-सी गर्माहट होती।
एक रात, रील बनाते-बनाते उसने स्कर्ट को और ऊपर चढ़ा दिया। उसकी काली पैंटी साफ दिख रही थी। उसने कैमरे को पास लाकर अपनी जाँघों को सहलाया और seductive अंदाज में होंठ काटे। वीडियो अपलोड करते ही सैकड़ों लाइक्स और DM आने लगे।

उसने ऑनलाइन शॉपिंग तेज कर दी। बहुत छोटी जींस स्कर्ट्स, प्लेड मिनी स्कर्ट्स, क्रॉप टॉप्स, टाइट शॉर्ट्स और लो-कट टॉप्स मँगवाने लगी। जब भी नया पैकेट आता, वह सबसे पहले सिंगारदान के सामने ट्राय करती।
धीरे-धीरे उसकी रील्स वायरल होने लगीं।
एक रील में वह बहुत छोटी काली स्कर्ट पहने, कमर झुकाकर पीछे देखती हुई नाच रही थी — उसकी जाँघें और नितंब साफ दिख रहे थे। दूसरी रील में सफेद क्रॉप टॉप में वह धीरे-धीरे टॉप के नीचे हाथ डालकर अपनी छाती सहला रही थी। कमेंट्स आने लगे — “??”, “Sexy princess”, “I want you”, “More please”।
ग्रोथ तेज हुई।
तीन हफ्ते में फॉलोअर्स 5,000 से 45,000 हो गए। एक महीने बाद 1.8 लाख। पिंकी रोज नई स्कर्ट और नया आउटफिट पहनकर रील्स डालने लगी। कुछ रील्स में वह स्कर्ट को जानबूझकर ऊपर खींचकर अपनी पैंटी दिखाती, कुछ में झुककर गहरी नेकलाइन दिखाती।
उसके फॉलोअर्स ज्यादातर 18-30 साल के लड़के थे। DMs में तरह-तरह के ऑफर आने लगे — “Paid collaboration”, “Send private pics”, “Meet once”। पिंकी कुछ मैसेज पढ़कर मुस्कुराती और कुछ को रिप्लाई भी करती।

पिंकी के सोशल मीडिया अकाउंट @Pinky_TheFlame की ग्रोथ अब बेकाबू हो चुकी थी। फॉलोअर्स 2.5 लाख पार कर चुके थे। रोज नई छोटी स्कर्ट, क्रॉप टॉप और provocative रील्स आ रही थीं।
एक शाम बृजमोहन के पुराने दोस्त रामू ने चाय पीते हुए कहा,
“अरे बृजमोहन, तू जानता है कि तेरी पिंकी क्या कर रही है? उसका इंस्टाग्राम अकाउंट देखा है? @Pinky_TheFlame। पूरा मोहल्ला देख रहा है। तेरी बेटी तो आग उगल रही है।”

घर आते ही बृजमोहन ने काँपते हाथों से फोन उठाया और सर्च किया — Pinky_TheFlame।
पहली रील खुली।
पिंकी बहुत छोटी स्कर्ट में कमर झुकाकर नाच रही थी। स्कर्ट ऊपर चढ़ गई थी, उसकी मोटी, गोरी जाँघें और पैंटी का किनारा साफ दिख रहा था। बृजमोहन की आँखें फट गईं। उसका मुंह सूख गया।
“ये... ये मेरी पिंकी है? मेरी छोटी सी पिंकी?”
उसके हाथ काँप रहे थे। वह रील बंद करना चाहता था, लेकिन अंगूठा रुक गया। एक के बाद एक रील खुलती गई। पिंकी अपनी छाती हिलाती हुई, होंठ काटती हुई, जाँघें फैलाती हुई... हर रील में वह और ज्यादा नंगी, और ज्यादा बोल्ड होती जा रही थी।
बृजमोहन के मन में तूफान उठ रहा था।
“नहीं! ये गलत है। ये मेरी बेटी है। मैंने इसे गोद में खिलाया है।”
उसे गुस्सा आ रहा था, शर्म आ रही थी, लेकिन आँखें स्क्रीन से हट नहीं रही थीं। उसके शरीर में एक अजीब गर्माहट फैलने लगी। वह खुद को कोस रहा था, लेकिन फिर भी अगली रील प्ले कर रहा था।
रामू का फोन आया — “भाई, संभाल अपनी बेटी को। वरना घर की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी।”
बृजमोहन ने फोन काट दिया। वह बिस्तर पर लेट गया, लेकिन नींद नहीं आई। आधे घंटे बाद फिर फोन उठाया। इस बार वह अकेला था, कमरे का दरवाजा बंद था।
उसने पिंकी की सभी रील्स एक-एक करके देखीं।
जैसे-जैसे देखता गया, उसके मन में बदलाव आता गया।
“कितनी खूबसूरत हो गई है... ये शरीर... ये कमर... ये जाँघें...”
पहले वह खुद को समझा रहा था — “ये गलत विचार हैं, वह मेरी बेटी है।”
लेकिन सिंगारदान का प्रभाव अब उसके अंदर भी घुस चुका था। धीरे-धीरे वह भूलने लगा कि पिंकी उसका खून है। अब वह उसे एक आकर्षक, कामुक युवती के रूप में देखने लगा था।
उसके दिमाग में कल्पनाएँ आने लगीं — पिंकी उसी के सामने छोटी स्कर्ट पहनकर नाच रही है, उसके स्तन उछल रहे हैं, वह उसके पास आकर...
बृजमोहन ने फोन को कसकर पकड़ लिया। उसका शरीर उत्तेजित हो चुका था। उसे खुद पर घृणा हो रही थी, लेकिन वह रुक नहीं पा रहा था।
अगले दिन जब पिंकी नीचे आई — बहुत छोटी सफेद स्कर्ट और टाइट क्रॉप टॉप में — बृजमोहन चुपचाप उसे देखता रहा। उसकी नजर पिंकी की जाँघों पर, नितंबों की लहर पर और उभरी हुई छाती पर अटक गई।
सरला ने पूछा, “क्या देख रहे हो?”
बृजमोहन कुछ नहीं बोला। उसका मन अब पूरी तरह उलझ चुका था।
“ये मेरी बेटी है... या कोई और?”
बृजमोहन के हाथ से चाय का कप लगभग गिरते-गिरते बचा। वह घर आया तो सीधा अपने फोन पर गया। सर्च किया — Pinky_TheFlame।
जब पहली रील खुली, तो बृजमोहन की आँखें बाहर निकलने लगीं।
पिंकी बहुत छोटी काली प्लेड स्कर्ट पहने हुए थी, जो उसके नितंबों को मुश्किल से ढक पा रही थी। वह कमर झुकाकर नाच रही थी, स्कर्ट ऊपर चढ़ गई थी और उसकी गोल, चिकनी जाँघें और पैंटी का किनारा साफ दिख रहा था। अगली रील में वह क्रॉप टॉप में थी, जिसमें उसके भरे-भरे स्तन उछल रहे थे। वह कैमरे को चूमती हुई, अपनी छाती सहलाती हुई नजर आ रही थी।
बृजमोहन स्तब्ध था। वह बार-बार स्क्रीन को ज़ूम करके देख रहा था।
“ये... ये पिंकी है? मेरी पिंकी?”
उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वो लड़की उसकी अपनी बेटी है। वह एक-एक रील बड़े ध्यान से देखता गया। हर रील में पिंकी और भी大胆 होती जा रही थी।
रामू ने फोन पर ही कहा था, “भाई, इसे संभाल। वरना तेरी इज्जत का कुछ नहीं बचेगा।”
बृजमोहन ने फोन बंद किया, लेकिन रात को नींद नहीं आई। वह फिर से फोन उठाया और चुपके से बिस्तर पर लेटकर पिंकी की रील्स देखने लगा।
पहले तो उसे गुस्सा और शर्मिंदगी हुई। लेकिन जैसे-जैसे वह रील्स देखता गया, उसके दिमाग में अजीब विचार आने लगे। पिंकी की छोटी स्कर्ट, उसकी जाँघों की नरमाई, उछलते स्तन, कमर की लचक... वह खुद को रोक नहीं पा रहा था।
“ये मेरी बेटी है... यकीन नहीं होता..”  

अगले दिन उसने पिंकी को अपने कमरे में एक शॉर्ट ड्रेस में खड़ी देखा  । वह अपना फोन सेट कर रही थी ड्रेसिंग टेबल के आगे ।पिंकी ने अपने आप को ड्रेसिंग टेबल के आईने से देखा कि वो उसे देख रहा है तो वह झटके से मुड़ी और दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई ।
... क्या हुआ पापा, क्या देख रहे हो 
... तू रील बना रही है 
... हां, आप जाइये, 
... मैं भी देख सकता हूं 
... नहीं, आपके सामने मुझे डांस करते हुए शर्म आएगी, आप मेरे अकाउंट पर देख लेना । आप मुझे फॉलो कर तो रहे हो 
बृजमोहन चौंका
... तुझे कैसे पता 
.... जो मुझे सर्च करता है उसका अकाउंट मुझे दिख जाता है, आपके अकाउंट पे आपका फोन नंबर है 
... ओह, हां मैंने हाल ही में सर्च किया था तेरा अकाउंट 
... तो उसपे जाके देखना आप , बाएं
यह कहकर पिंकी दरवाजा बंद कर देती है ।



थोड़ी देर बाद ब्रिज ने उसका अकाउंट देखा, पिंकी स्कर्ट में कमर झुकाकर नाच रही थी। स्कर्ट ऊपर चढ़ गई थी, उसकी मोटी, गोरी जाँघें और पैंटी का किनारा साफ दिख रहा था। बृजमोहन की आँखें फट गईं। उसका मुंह सूख गया।
“ये... ये मेरी पिंकी है? मेरी छोटी सी पिंकी?”
उसके हाथ काँप रहे थे। वह रील बंद करना चाहता था, लेकिन अंगूठा रुक गया। एक के बाद एक रील खुलती गई। पिंकी अपनी छाती हिलाती हुई, होंठ काटती हुई, जाँघें फैलाती हुई... हर रील में वह और ज्यादा नंगी, और ज्यादा छीनाल होती जा रही थी।
बृजमोहन के मन में तूफान उठ रहा था।
“नहीं! ये गलत है। ये मेरी बेटी है। मैंने इसे गोद में खिलाया है।”
उसे गुस्सा आ रहा था, शर्म आ रही थी, लेकिन आँखें स्क्रीन से हट नहीं रही थीं। उसके शरीर में एक अजीब गर्माहट फैलने लगी। वह खुद को कोस रहा था, लेकिन फिर भी अगली रील प्ले कर रहा था।
रामू का फोन आया — “भाई, संभाल अपनी बेटी को। वरना घर की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी।”
बृजमोहन ने फोन काट दिया। वह बिस्तर पर लेट गया, लेकिन नींद नहीं आई। आधे घंटे बाद फिर फोन उठाया। इस बार वह अकेला था, कमरे का दरवाजा बंद था।
उसने पिंकी की सभी रील्स एक-एक करके देखीं।
जैसे-जैसे देखता गया, उसके मन में बदलाव आता गया।
“कितनी खूबसूरत हो गई है... ये शरीर... ये कमर... ये जाँघें...”
पहले वह खुद को समझा रहा था — “ये गलत विचार हैं, वह मेरी बेटी है।”
लेकिन सिंगारदान का प्रभाव अब उसके अंदर भी घुस चुका था। धीरे-धीरे वह भूलने लगा कि पिंकी उसका खून है। अब वह उसे एक आकर्षक, कामुक युवती के रूप में देखने लगा था।
उसके दिमाग में कल्पनाएँ आने लगीं — पिंकी उसी के सामने छोटी स्कर्ट पहनकर नाच रही है, उसके स्तन उछल रहे हैं, वह उसके पास आकर...
बृजमोहन ने फोन को कसकर पकड़ लिया। उसका शरीर उत्तेजित हो चुका था। उसे खुद पर घृणा हो रही थी, लेकिन वह रुक नहीं पा रहा था।
अगले दिन जब पिंकी नीचे आई — बहुत छोटी सफेद स्कर्ट और टाइट क्रॉप टॉप में — बृजमोहन चुपचाप उसे देखता रहा। उसकी नजर पिंकी की जाँघों पर, नितंबों की लहर पर और उभरी हुई छाती पर अटक गई।
सरला ने पूछा, “क्या देख रहे हो?”
बृजमोहन कुछ नहीं बोला। उसका मन अब पूरी तरह उलझ चुका था।
“ये मेरी बेटी है... या कोई और?”

एक शाम बृजमोहन के दोस्त रामू ने फिर चाय की दुकान पर कहा,
“बृजमोहन, अब तो बस देख लो। तेरी बेटी को कंट्रोल नहीं कर पाए ना? नतीजा देख — वो सलीम नाम के ,., लड़के के साथ घूम रही है। पूरा मोहल्ला जानता है। तेरी बेटी उसके साथ बाइक पर बैठकर घूमती है।”
बृजमोहन का चेहरा सफेद पड़ गया। वह चुपचाप घर लौट आया। लेकिन उसने न सरला से कुछ कहा, न पिंकी से। वह चुप रहा।
दूसरे दिन शाम को बाजार जाते वक्त उसकी नजर एक बाइक पर पड़ी।
पिंकी सलीम की बाइक पर पीछे बैठी हुई थी। उसने बहुत छोटी ब्लैक जींस स्कर्ट पहनी हुई थी, जो जाँघों के बीच तक चढ़ी हुई थी। सलीम के दो-तीन दोस्त भी बाइक के पास खड़े थे। वे पिंकी से बात कम कर रहे थे और उसकी नंगी रानों को ज्यादा घूर रहे थे। पिंकी हँस-हँसकर उनसे बातें कर रही थी, अपना पल्लू-सा आँचल ठीक कर रही थी, जिससे उसकी जाँघें और भी ज्यादा दिख रही थीं।
बृजमोहन दूर से सब देखता रहा। उसके मन में गुस्सा, शर्म, जलन और एक अजीब उत्तेजना एक साथ उबल रही थी। लेकिन वह कुछ नहीं बोला। चुपचाप वापस मुड़ गया।
कुछ दिन बाद दूसरी घटना हुई।
रात के करीब 10 बजे बृजमोहन घर के नीचे गली में सिगरेट पीने गया। वहाँ पिंकी और सलीम खड़े थे। पिंकी दीवार से सटी हुई थी। सलीम उसके बहुत करीब खड़ा था। पिंकी की छोटी स्कर्ट हवा में हिल रही थी। सलीम का एक हाथ उसकी कमर पर था। दोनों हँस रहे थे और बहुत ही घनिष्ठ बातें कर रहे थे।
बृजमोहन छिपकर देखता रहा। काफी देर तक। फिर चुपचाप ऊपर चला गया।
उसने न सरला को बताया, न पिंकी को डाँटा।
बृजमोहन के मन की स्थिति:
बृजमोहन खुद समझ नहीं पा रहा था कि वह क्यों चुप है।
पहले वह सोचता — “मैं अभी कुछ कहूँगा तो घर में तूफान आ जाएगा।”
फिर सोचता — “पिंकी अब 16 साल की हो गई है... और सिंगारदान ने सबको बदल दिया है।”
लेकिन असली वजह गहरी थी।
सिंगारदान के प्रभाव में अब बृजमोहन का अपना मन भी भ्रष्ट हो चुका था। पिंकी की रील्स देखते हुए, उसकी छोटी स्कर्ट देखते हुए, उसके शरीर को देखते हुए उसके मन में पिता वाला रिश्ता धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा था। अब वह पिंकी को एक आकर्षक, कामुक लड़की के रूप में देखने लगा था।
वह जानता था कि सलीम उसके साथ क्या कर रहा है, लेकिन यह जानकर उसे गुस्से के साथ-साथ एक विकृत उत्तेजना भी हो रही थी। वह इंतजार कर रहा था — शायद किसी और घटना का, शायद और गहरा गिरने का, या शायद खुद को पूरी तरह सिंगारदान के तिलिस्म में समर्पित करने का।
अब उसे फर्क कम पड़ता जा रहा था कि पिंकी उसकी बेटी है। वह रात को अकेले में पिंकी की रील्स देखता, और मन ही मन कल्पना करता कि सलीम की जगह वह खुद...
सरला भी पिंकी के सलीम के साथ चक्कर के बारे में पता था , लेकिन वो भी न जाने क्यों मन ही मन खुश हो रही थी । मोहल्ले में अब पिंकी भी अब चर्चे का विषय बन चुकी थी ।
जल्द ही इसका एक एक बुरा परिणाम आने वाला था ।
[+] 1 user Likes Hot_randi_rishita's post
Like Reply


Messages In This Thread
Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 30-04-2026, 04:18 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 30-04-2026, 06:54 PM
RE: Shaitani aaina - by rajeev13 - 30-04-2026, 08:08 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 30-04-2026, 08:10 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 30-04-2026, 08:39 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 02-05-2026, 03:34 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 02-05-2026, 03:43 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 02-05-2026, 09:50 PM
RE: Shaitani aaina - by Praveen84 - 26-05-2026, 08:25 AM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 13-06-2026, 11:55 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 15-06-2026, 02:31 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 16-06-2026, 01:47 AM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 16-06-2026, 08:38 AM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 16-06-2026, 02:06 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 16-06-2026, 10:29 PM
RE: Shaitani aaina - by Raj14592 - 16-06-2026, 11:11 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 17-06-2026, 04:51 PM
RE: Shaitani aaina - by 123@abc - 17-06-2026, 07:48 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 20-06-2026, 12:22 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 6 hours ago



Users browsing this thread: 2 Guest(s)