13-06-2026, 12:45 PM
जिग्नेश ने आखिरी बार नेहा को देखा और शांत लेकिन घमंड भरे अंदाज़ में बोला,
जिग्नेश: “हम तुमसे सिर्फ सोलह घंटे की दूरी पर हैं।”
वो मुस्कुराया — वो शैतानी और आत्मविश्वास भरी मुस्कान — और बोला,
जिग्नेश: “बाय।”
फिर उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी।
स्क्रीन काली हो गई।
कुछ देर बाद पटेल्स कपल आईडी से एक ईमेल आया।
ईमेल:
ये हमारी अंतिम बात है।
किसी को मनाना, उसके सामने गिड़गिड़ाना या भीख माँगना — ये हमारा स्टाइल नहीं है। और न ही हमारे पावर डायनामिक के लिए सही है।
हमें पता है नेहा हमारी फैंटसी में परफेक्टली फिट होती है।
मगर आज नहीं तो कल हमें ऐसा कोई और मिल जाएगा।
हम एक सीधी-सादी, परफेक्ट वाइफ टाइप सबमिशन चाहते हैं।
अगर भविष्य में तुम लोग तैयार हो, तो संपर्क करो अपनी छुट्टी की योजना के साथ।
हम देख लेंगे क्या हो सकता है।
अगर हमारी बातों में कोई शंका है, तो भी ये हमारी तरफ से अंतिम संदेश है।
— जिग्नेश
ईमेल पढ़ते ही कमरे में भारी सन्नाटा छा गया।
जिग्नेश की भाषा में अहंकार और घमंड साफ़ झलक रहा था। वो बिल्कुल सहज था, जैसे नेहा उसके लिए कोई ज़रूरत नहीं, बल्कि सिर्फ एक विकल्प थी।
नेहा अभी भी स्क्रीन को घूर रही थी। उसका चेहरा लाल था, साँसें भारी थीं। माथे पर पसीना था। वो कुछ बोल नहीं पा रही थी।
मैं चुपचाप बैठा था।
नेहा ने उस कॉल और ईमेल के बाद कुछ नहीं कहा।
हफ्तों तक कुछ नहीं।
जैसे उसकी कुछ टूट गई हो।
वो रोज़ की दिनचर्या करती रही — खाना बनाती, काम पर जाती, मुस्कुराती भी... लेकिन वो मुस्कान पहले जैसी नहीं थी।
उसकी आँखों में हमेशा कुछ चलता रहता।
कुछ सोचती रहती, दूर-दूर लगती।
हमने दो-तीन बार आपस में उस बातचीत पर चर्चा भी की।
मैंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि “कितना एक्साइटिंग होता... जिग्नेश जैसा मैन... गोवा... सब कुछ।”
नेहा बस हल्का सा मुस्कुरा कर कह देती, “हाँ... बहुत एक्साइटिंग होता...”
बस इतना ही।
कोई हिन्ट नहीं दिया कि वो ये करना चाहती है।
न “हाँ” कहा, न “नहीं”।
मैंने उससे कभी सीधे नहीं पूछा कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है।
हिम्मत नहीं हो रही थी।
शायद डर लगता था कि सच सुनकर मेरा दिल टूट जाएगा।
मेरे पास उसके इस कन्फ्यूजन का एक ही समाधान था —
कि वो अच्छे से चुद सके।
जोरों से, बिना रुके, किसी ताकतवर आदमी से।
बस यही सोचता रहता था।
एक रात हम बिस्तर पर थे।
नेहा की टाँगें पूरी तरह खुली हुई थीं।
मैं उसके ऊपर हल्के-हल्के स्ट्रोक लगा रहा था — धीरे-धीरे, गहरे नहीं।
उसका एक हाथ ऊपर था, जिसमें सिगरेट जल रही थी।
उसकी आँखें आधी बंद थीं।
मुँह से धुआँ निकल रहा था — धीरे-धीरे, लंबा।
कमरे में सिर्फ सिगरेट का धुआँ और हमारी हल्की साँसों की आवाज़ थी।
जैसा कि आप जानते हैं, हम सेक्स करते वक्त अक्सर रोलप्ले करते थे।
लेकिन आज हमने कुछ तय नहीं किया था। कोई स्क्रिप्ट नहीं, कोई किरदार नहीं।
नेहा ने सिगरेट का एक लंबा कश लिया।
धुआँ छोड़ते हुए उसने आँखें आधी बंद करके धीरे से कहा,
नेहा: “और जोर से...
बेकार...
और जोर से...”
वो मुस्कुराई।
वो अच्छी तरह जानती थी कि मुझे क्या सबसे ज्यादा उत्तेजित करता है।
फिर उसने अपनी कमर के नीचे वाले हिस्से को ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया।
बिल्कुल मेरे धक्कों से मैच करते हुए — तेज़, गहरा और लय में।
उसकी चूत मेरे लिंग को कसकर चूस रही थी।
मेरे दोनों हाथ नेहा के सिर के दोनों तरफ थे, सीधे तकिए पर।
उन्होंने मुझे उस पर चढ़ाई करने में पूरा सहारा दे रखा था।
मैंने उसे नीचे दबाया।
सारा वजन उसके ऊपर डाल दिया।
हम इतने चिपक गए थे कि मेरा लंड उसकी चूत के अंदर पूरी तरह धँसा हुआ था।
दोनों के सीने एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
गर्दन से गर्दन मिली हुई थी।
नेहा अब भी अपनी गांड़ को रिदम में ऊपर-नीचे उछाल रही थी, मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थी।
मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा,
सम: “तुम बेकार आदमी के बारे में सोच रही हो ना?
मुझे लगा शायद तुम जिग्नेश के बारे में सोच रही हो...”
मैंने ये बात मजाक में कही थी।
मगर जैसे ही ये शब्द मेरे मुँह से निकले, नेहा का पूरा शरीर बिल्कुल शांत हो गया।
जैसे कोई मूर्ति बन गई हो।
उसकी गांड़ उछालना बंद हो गया।
उसकी चूत ने मेरे लंड को एकदम ढीला छोड़ दिया।
वो कुछ पल तक मेरे सारे वजन को अपने शरीर पर सहती रही।
फिर उसने दोनों हथेलियाँ मेरे कंधों पर रखकर मुझे जोर से धक्का दिया।
मैंने भी हट लिया और बिल्कुल उसके बगल में लेट गया।
नेहा के हाथ में अभी भी सिगरेट थी।
उसने एक लंबा कश लिया, धुआँ छोड़ा और ठंडी, थोड़ी नाराज़ आवाज़ में बोली,
नेहा: “क्या प्रॉब्लम है तुम्हें?”
उसकी आँखों में नाराज़गी थी, शर्म थी और कुछ और भी — जो मैं ठीक से समझ नहीं पाया।
वो अब मेरी तरफ देख भी नहीं रही थी। सिर्फ छत को घूर रही थी।
मैं नेहा का सवाल समझ नहीं पा रहा था।
प्रॉब्लम मुझे?
मैंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा था। ये तो बस नॉर्मल बात थी।
कई बार तो वो मेरे पापा का नाम भी ले लेती थी सेक्स के दौरान, और तब हम दोनों एंजॉय ही करते थे।
मगर अचानक जिग्नेश का नाम लेते ही वो इतनी नाराज़ हो गई?
मैंने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा,
सम: “प्रॉब्लम??... मुझे क्या प्रॉब्लम होगी... आई मीन मैं तो बस मजाक में बोल रहा था...”
नेहा ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा और अब थोड़ी तेज़ आवाज़ में बोली,
नेहा: “मैं अभी की बात नहीं कर रही हूँ...
मैं देख रही हूँ... जब से हमने उनसे बात की है, तब से तुम कुछ पूछना चाहते हो... मगर चुप रहते हो।
तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे फैंटसी के गेम में तुम्हारा साथ नहीं दे रही हूँ...
मगर तुमने कभी मुझसे समझना चाहा ही नहीं कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है।”
उसकी आवाज़ में नाराज़गी के साथ दर्द भी था।
वो अब भी छत की तरफ देख रही थी, मेरी तरफ मुड़ी तक नहीं।
उसके स्तन अभी भी तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे, लेकिन अब वो उत्तेजना की वजह से नहीं, बल्कि भावनाओं की वजह से।
सम: “नहीं... ऐसा कुछ नहीं है।
वैसे भी बेबी... तुम्हें पता है... ये तुम्हारा शरीर है और तुम्हारी चॉइस।
मैं ये नहीं कहूँगा कि मुझे नेहा को किसी और से एक्सपीरियंस करवाने में मजा नहीं आएगा...
मगर तुम्हारी मर्जी के बिना नहीं... तुम्हारी चॉइस के बिना बिल्कुल नहीं...”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में गहरी निगाह डाली, जैसे मेरी आत्मा तक देख रही हो।
नेहा: “ये ही तो प्रॉब्लम है सम...
मेरी मर्जी... और वो चाह रहे हैं...
उसमें उन्हें मेरी तुम्हारी मर्जी और इनकार के बीच का कुछ चाहिए...”
मैं कुछ समझ नहीं पाया।
उसकी बात मेरे दिमाग से ऊपर जा रही थी।
सम: “मैं कुछ समझा नहीं...”
नेहा ने एक पल मुझे देखा, फिर चुपचाप नंगी ही बिस्तर से उठ गई।
उसके नंगे शरीर पर कमरे की हल्की रोशनी पड़ रही थी।
नेहा: “मेरे साथ आओ।”
मैं भी उठा और उसके पीछे-पीछे टेबल की तरफ गया, जहाँ लैपटॉप रखा था।
हम दोनों कुर्सियों पर नंगे ही बैठ गए।
नेहा ने लैपटॉप खोला और सीधे एक पोर्न वेबसाइट पर चली गई।
वो कुछ खास सर्च कर रही थी, जैसे उसे पहले से पता हो कि कौन सा वीडियो देखना है।
दो मिनट बाद स्क्रीन पर एक चेक पोर्न वीडियो खुल गया।
वीडियो की लंबाई दो घंटे से भी ज्यादा थी।
रात के एक बज चुके थे और कल ऑफिस भी जाना था, लेकिन नेहा की उत्सुकता देखकर मैं कुछ नहीं बोला।
वीडियो शुरू हुआ।
एक सड़क पर रात का समय। एक जवान लड़की अकेली खड़ी है।
एक कपल उससे अप्रोच करता है।
भाषा चेक थी, लेकिन इंग्लिश सबटाइटल से सब समझ आ रहा था।
ये कोई प्रोफेशनल पोर्न नहीं लग रहा था — मोबाइल से शूट की हुई रियल लगने वाली कहानी थी।
वे बातें कर रहे थे —
“तुमने पहले कभी ऐसा कुछ किया है?”
“क्या तुम बाईसेक्शुअल हो?”
“क्या तुम वर्जिन हो?”
“जब तक तुम चाहो हमारे साथ रह सकती हो... हम तुम्हारी कॉलेज फीस भी दे देंगे।”
फिर लड़की उनकी कार में बैठ जाती है और उनके आलीशान घर चली जाती है।
थोड़ी देर इधर-उधर की बातें... फिर वो आदमी (जो उसके पापा जितना उम्र का था) उसके साथ सेक्स शुरू करता है।
फिर उसकी पत्नी भी शामिल हो जाती है।
धीरे-धीरे सेक्स से ऊपर चीजें बढ़ने लगीं —
वे उसे अलग-अलग काम देते, वो मना करती, लेकिन अंत में करती जाती।
बहुत ही इंटरेस्टिंग और स्लो-बर्न वीडियो था।
मुझे लग रहा था रात में इतना लंबा वीडियो कौन देखता है, लेकिन नेहा पूरी तरह खोई हुई थी।
हमने पूरा वीडियो देखा।
नेहा का दाहिना हाथ पूरे समय मेरे लंड पर था।
जैसे-जैसे वीडियो में लड़की की सबमिशन बढ़ती, नेहा का हाथ तेज़ होता जाता।
मैं दो बार उसके हाथों से झड़ गया।
पहली बार सारा पानी मैंने ज़मीन पर निकाल दिया, लेकिन नेहा ने लंड नहीं छोड़ा।
बल्कि वीडियो देखते-देखते उसे फिर से सख्त कर दिया।
उसका हाथ अभी भी मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रहा था।
उसकी आँखें स्क्रीन पर जमी हुई थीं।
वीडियो खत्म होने के बाद नेहा मेरी तरफ मुड़ी।
उसकी आँखें अभी भी स्क्रीन की रोशनी से चमक रही थीं।
नेहा: “क्या समझे?”
मैं वीडियो में इतना खोया हुआ था कि भूल ही गया था कि मुझे इस वीडियो से कुछ सीखना भी है।
मैंने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा,
सम: “मतलब... सही था... आई लाइक द वीडियो।”
नेहा ने एक पल मुझे देखा, फिर हल्के से मुस्कुराते हुए बोली,
नेहा: “बुद्दू...
इसमें दो चीजें सीखने की हैं।”
नेहा मेरी गोद में बैठी हुई थी। उसका नंगा शरीर मेरे से चिपका हुआ था। उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा,
नेहा: “पहली चीज़ तो शर्म, इनकार, डर और कंट्रोल... सबमिशन।
तुमने देखा ना वीडियो वाली लड़की ने वो सब कैसे किया?
हिचकिचाते हुए... थोड़ी शर्म... थोड़ी डोमिनेशन... सब कुछ था।”
मैं बीच में बोल पड़ा,
सम: “तुम ये नहीं कर पाओगी?”
नेहा हल्के से मुस्कुराई। उसकी मुस्कान में थोड़ी शर्म और थोड़ी चुनौती थी।
नेहा: “जिग्नेश को इंडियन शर्माती हुई लड़की चाहिए...
जैसी हमने रेस्टोरेंट में पहले आधे घंटे में गंध मचा दी थी।
अगर मैं वो शर्म नहीं ला पाई जो उन्हें चाहिए...
मैं बस टाँगें फैला कर तैयार हो गई... जैसे बेकार आदमी के साथ .... ”
उसने एक पल रुककर मेरी आँखों में देखा और आगे बोली,
नेहा: “वीडियो में वो लड़की हिचकिचा रही थी...
पहले थप्पड़ पड़ने पर उसकी आँखों में आँसू भी आ गए थे... नाराज़गी भी थी।
मैं वो भाव ला ही नहीं पाई...
और वहाँ तुम भी होंगे...
मुझे समझ नहीं आ रहा कि हम उन्हें अच्छे से वो दे पाएँगे जो उन्हें चाहिए।”
जब मैंने पूछा, “और दूसरी बात?”, तो नेहा ने बड़ी-बड़ी आँखों से मेरी तरफ देखा।
नेहा: “ये तो तुम्हें समझ में आ ही गई होगी...”
मुझे लगा जैसे कोई एग्ज़ाम चल रहा हो और मेरे दिमाग में बिल्कुल जवाब नहीं था।
मैं चुपचाप उसका चेहरा देखता रहा।
नेहा ने थोड़ी देर तक मेरे चेहरे को देखा, फिर खुद ही जवाब दे दिया,
नेहा: “दूसरी बात... वो लड़की अकेली नहीं थी। वो कपल था — पति और पत्नी। दोनों मिलकर उसे कंट्रोल कर रहे थे। पति उसे चोद रहा था, पत्नी उसे चूम रही थी, थप्पड़ मार रही थी, उसे नीचा दिखा रही थी। दोनों का एक साथ होना... वो लड़की को और ज़्यादा
helpless बना रहा था।”
मैंने उसे फिर से देखा।
मेरे दिमाग में ये समस्या अब तक आई ही नहीं थी।
सब लोगों की तरह मैं मानकर बैठा था कि एक महिला दूसरी महिला को प्यार करती है तो वो lesbian होती है।
नेहा ने मेरा भ्रम तोड़ दिया।
नेहा: “मुझे चिकने लड़के बिल्कुल पसंद नहीं।
तुमने मेरी मर्दों की चॉइस में देखा होगा ना... मुझे वो मर्द चाहिए जो असली लगे।
जिनके सीने पर बाल हों, आवाज़ में दम हो...
ना कि चिकने छुटिये... तुम्हारी तरह।”
ये बोलते हुए वो थोड़ा हँसी।
मैंने थोड़ा हड़बड़ाकर पूछा,
सम: “मतलब... तुम ये सब किसी लड़की के साथ करने में comfortable नहीं हो?”
नेहा इस बार ज़ोर से हँस पड़ी।
हा इस बार ज़ोर से हँस पड़ी। उसकी हँसी में शर्म के साथ मज़ाक भी था। उसकी नंगी देह मेरी गोद में हिल रही थी।
नेहा: “अरे मेरे भोले बलम... पत्नी को चुदवाने की इतनी जल्दी के भूल गए कि पत्नी lesbian नहीं है?”
वो हँसते हुए मेरी छाती पर हल्का सा थप्पड़ मारती हुई बोली,
नेहा: “मेरे सामने वो पोर्न का सीन... देखा था ना?
जब वो mature महिला उस कॉलेज वाली लड़की के मुँह पर अपनी चूत रगड़ रही थी...
उसे humiliate कर रही थी... बाल पकड़कर जबरदस्ती चाटवा रही थी...
वो domination... वो power...”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा। उसकी आवाज़ अब थोड़ी भारी और उत्तेजित हो गई थी।
नेहा: “सोचो... एक कपल ने मुझे नहीं... तुम्हें hire किया as a slave।... क्या तुम?
क्या तुम उनके सामने घुटनों पर बैठकर उनकी पत्नी की चूत चाटोगे?
और बीच में वो आदमी भी अपना लंड तुम्हारे चेहरे के सामने ले आया?
तुम्हें पता है तुम्हें क्या करना है... क्या कर पाओगे?”
मैं समझ गया कि नेहा क्या समझा रही है।
मैं कुछ नहीं बोला।
नेहा ने मेरे लंड को हल्का दबाते हुए मुस्कुराकर कहा,
नेहा: “वैसे भी तुमने तो बहुत लंड का जूस हाथ से निकाला है...
मगर वो तुम्हारे पीछे चला गया...
फिर??
क्या करोगे तब?”
इस बार मेरे मुँह से डायरेक्ट “नहीं” निकला।
नेहा: “जब तुम gay नहीं हो तो मैं lesbian कैसे, बुद्दू?”
वो जोर से हँसी।
उसकी हँसी में शर्म, मज़ाक और गहरी उत्तेजना तीनों थे।
उसने मेरी गर्दन में चुम्मा लिया और कान में फुसफुसाया
नेहा: “ये आइडिया सुनने में बहुत अच्छा लगता है... फील करने में भी।
मगर क्या मैं उनके एक्सपेक्टेशन जितना प्लेज़र दे पाऊँगी?
क्या मैं उस डर और शर्म में सच में feel कर पाऊँगी?
लेस्बियन... मैंने कभी सोचा भी नहीं था।
किसी लड़की को किस करने के बारे में भी नहीं सोचा।
और अगर उस पर किसी ने मुझे थप्पड़ मारा... तो क्या मैं पलटकर उसे थप्पड़ नहीं मार दूँगी?
और तुम... तुम्हारा रिएक्शन कैसा होगा जब तुम्हारी बीवी को कोई थप्पड़ मारेगा?
हम तो अभी बंद कमरे में इस फैंटसी में हैं...
मगर मैंने देखा है तुम्हें लड़ते हुए लड़कों से, जब क्लब में किसी ने मुझे गलत तरीके से टच किया था।
वहाँ न जाने क्या होगा...”
नेहा ने गहरी साँस ली। उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली हुई थीं।
नेहा: “इसीलिए मुझे लगता है कि हमें ये प्रपोज़ल नहीं मानना चाहिए।
तो प्लीज... मुझे उस नज़र से मत देखा करो कि मैं तुम्हारा मजा खराब कर रही हूँ।
हालाँकि तुमने कभी बोला नहीं... मगर तुम्हारी आँखें...
इसीलिए मैं आज ये क्लियर करना चाहती थी।”
नेहा ने ये कहते हुए मेरी छाती पर सिर रख दिया।
उसका नंगा शरीर अब पहले जितना उत्तेजित नहीं, बल्कि थोड़ा काँपता हुआ और भावुक लगा।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
मैं उसके बालों में हाथ फेरता रहा।
उसकी बातों में डर था, लेकिन फैंटसी की भूख भी अभी पूरी तरह मरी नहीं थी।
जिग्नेश: “हम तुमसे सिर्फ सोलह घंटे की दूरी पर हैं।”
वो मुस्कुराया — वो शैतानी और आत्मविश्वास भरी मुस्कान — और बोला,
जिग्नेश: “बाय।”
फिर उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी।
स्क्रीन काली हो गई।
कुछ देर बाद पटेल्स कपल आईडी से एक ईमेल आया।
ईमेल:
ये हमारी अंतिम बात है।
किसी को मनाना, उसके सामने गिड़गिड़ाना या भीख माँगना — ये हमारा स्टाइल नहीं है। और न ही हमारे पावर डायनामिक के लिए सही है।
हमें पता है नेहा हमारी फैंटसी में परफेक्टली फिट होती है।
मगर आज नहीं तो कल हमें ऐसा कोई और मिल जाएगा।
हम एक सीधी-सादी, परफेक्ट वाइफ टाइप सबमिशन चाहते हैं।
अगर भविष्य में तुम लोग तैयार हो, तो संपर्क करो अपनी छुट्टी की योजना के साथ।
हम देख लेंगे क्या हो सकता है।
अगर हमारी बातों में कोई शंका है, तो भी ये हमारी तरफ से अंतिम संदेश है।
— जिग्नेश
ईमेल पढ़ते ही कमरे में भारी सन्नाटा छा गया।
जिग्नेश की भाषा में अहंकार और घमंड साफ़ झलक रहा था। वो बिल्कुल सहज था, जैसे नेहा उसके लिए कोई ज़रूरत नहीं, बल्कि सिर्फ एक विकल्प थी।
नेहा अभी भी स्क्रीन को घूर रही थी। उसका चेहरा लाल था, साँसें भारी थीं। माथे पर पसीना था। वो कुछ बोल नहीं पा रही थी।
मैं चुपचाप बैठा था।
नेहा ने उस कॉल और ईमेल के बाद कुछ नहीं कहा।
हफ्तों तक कुछ नहीं।
जैसे उसकी कुछ टूट गई हो।
वो रोज़ की दिनचर्या करती रही — खाना बनाती, काम पर जाती, मुस्कुराती भी... लेकिन वो मुस्कान पहले जैसी नहीं थी।
उसकी आँखों में हमेशा कुछ चलता रहता।
कुछ सोचती रहती, दूर-दूर लगती।
हमने दो-तीन बार आपस में उस बातचीत पर चर्चा भी की।
मैंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि “कितना एक्साइटिंग होता... जिग्नेश जैसा मैन... गोवा... सब कुछ।”
नेहा बस हल्का सा मुस्कुरा कर कह देती, “हाँ... बहुत एक्साइटिंग होता...”
बस इतना ही।
कोई हिन्ट नहीं दिया कि वो ये करना चाहती है।
न “हाँ” कहा, न “नहीं”।
मैंने उससे कभी सीधे नहीं पूछा कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है।
हिम्मत नहीं हो रही थी।
शायद डर लगता था कि सच सुनकर मेरा दिल टूट जाएगा।
मेरे पास उसके इस कन्फ्यूजन का एक ही समाधान था —
कि वो अच्छे से चुद सके।
जोरों से, बिना रुके, किसी ताकतवर आदमी से।
बस यही सोचता रहता था।
एक रात हम बिस्तर पर थे।
नेहा की टाँगें पूरी तरह खुली हुई थीं।
मैं उसके ऊपर हल्के-हल्के स्ट्रोक लगा रहा था — धीरे-धीरे, गहरे नहीं।
उसका एक हाथ ऊपर था, जिसमें सिगरेट जल रही थी।
उसकी आँखें आधी बंद थीं।
मुँह से धुआँ निकल रहा था — धीरे-धीरे, लंबा।
कमरे में सिर्फ सिगरेट का धुआँ और हमारी हल्की साँसों की आवाज़ थी।
जैसा कि आप जानते हैं, हम सेक्स करते वक्त अक्सर रोलप्ले करते थे।
लेकिन आज हमने कुछ तय नहीं किया था। कोई स्क्रिप्ट नहीं, कोई किरदार नहीं।
नेहा ने सिगरेट का एक लंबा कश लिया।
धुआँ छोड़ते हुए उसने आँखें आधी बंद करके धीरे से कहा,
नेहा: “और जोर से...
बेकार...
और जोर से...”
वो मुस्कुराई।
वो अच्छी तरह जानती थी कि मुझे क्या सबसे ज्यादा उत्तेजित करता है।
फिर उसने अपनी कमर के नीचे वाले हिस्से को ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया।
बिल्कुल मेरे धक्कों से मैच करते हुए — तेज़, गहरा और लय में।
उसकी चूत मेरे लिंग को कसकर चूस रही थी।
मेरे दोनों हाथ नेहा के सिर के दोनों तरफ थे, सीधे तकिए पर।
उन्होंने मुझे उस पर चढ़ाई करने में पूरा सहारा दे रखा था।
मैंने उसे नीचे दबाया।
सारा वजन उसके ऊपर डाल दिया।
हम इतने चिपक गए थे कि मेरा लंड उसकी चूत के अंदर पूरी तरह धँसा हुआ था।
दोनों के सीने एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
गर्दन से गर्दन मिली हुई थी।
नेहा अब भी अपनी गांड़ को रिदम में ऊपर-नीचे उछाल रही थी, मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थी।
मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा,
सम: “तुम बेकार आदमी के बारे में सोच रही हो ना?
मुझे लगा शायद तुम जिग्नेश के बारे में सोच रही हो...”
मैंने ये बात मजाक में कही थी।
मगर जैसे ही ये शब्द मेरे मुँह से निकले, नेहा का पूरा शरीर बिल्कुल शांत हो गया।
जैसे कोई मूर्ति बन गई हो।
उसकी गांड़ उछालना बंद हो गया।
उसकी चूत ने मेरे लंड को एकदम ढीला छोड़ दिया।
वो कुछ पल तक मेरे सारे वजन को अपने शरीर पर सहती रही।
फिर उसने दोनों हथेलियाँ मेरे कंधों पर रखकर मुझे जोर से धक्का दिया।
मैंने भी हट लिया और बिल्कुल उसके बगल में लेट गया।
नेहा के हाथ में अभी भी सिगरेट थी।
उसने एक लंबा कश लिया, धुआँ छोड़ा और ठंडी, थोड़ी नाराज़ आवाज़ में बोली,
नेहा: “क्या प्रॉब्लम है तुम्हें?”
उसकी आँखों में नाराज़गी थी, शर्म थी और कुछ और भी — जो मैं ठीक से समझ नहीं पाया।
वो अब मेरी तरफ देख भी नहीं रही थी। सिर्फ छत को घूर रही थी।
मैं नेहा का सवाल समझ नहीं पा रहा था।
प्रॉब्लम मुझे?
मैंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा था। ये तो बस नॉर्मल बात थी।
कई बार तो वो मेरे पापा का नाम भी ले लेती थी सेक्स के दौरान, और तब हम दोनों एंजॉय ही करते थे।
मगर अचानक जिग्नेश का नाम लेते ही वो इतनी नाराज़ हो गई?
मैंने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा,
सम: “प्रॉब्लम??... मुझे क्या प्रॉब्लम होगी... आई मीन मैं तो बस मजाक में बोल रहा था...”
नेहा ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा और अब थोड़ी तेज़ आवाज़ में बोली,
नेहा: “मैं अभी की बात नहीं कर रही हूँ...
मैं देख रही हूँ... जब से हमने उनसे बात की है, तब से तुम कुछ पूछना चाहते हो... मगर चुप रहते हो।
तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे फैंटसी के गेम में तुम्हारा साथ नहीं दे रही हूँ...
मगर तुमने कभी मुझसे समझना चाहा ही नहीं कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है।”
उसकी आवाज़ में नाराज़गी के साथ दर्द भी था।
वो अब भी छत की तरफ देख रही थी, मेरी तरफ मुड़ी तक नहीं।
उसके स्तन अभी भी तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे, लेकिन अब वो उत्तेजना की वजह से नहीं, बल्कि भावनाओं की वजह से।
सम: “नहीं... ऐसा कुछ नहीं है।
वैसे भी बेबी... तुम्हें पता है... ये तुम्हारा शरीर है और तुम्हारी चॉइस।
मैं ये नहीं कहूँगा कि मुझे नेहा को किसी और से एक्सपीरियंस करवाने में मजा नहीं आएगा...
मगर तुम्हारी मर्जी के बिना नहीं... तुम्हारी चॉइस के बिना बिल्कुल नहीं...”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में गहरी निगाह डाली, जैसे मेरी आत्मा तक देख रही हो।
नेहा: “ये ही तो प्रॉब्लम है सम...
मेरी मर्जी... और वो चाह रहे हैं...
उसमें उन्हें मेरी तुम्हारी मर्जी और इनकार के बीच का कुछ चाहिए...”
मैं कुछ समझ नहीं पाया।
उसकी बात मेरे दिमाग से ऊपर जा रही थी।
सम: “मैं कुछ समझा नहीं...”
नेहा ने एक पल मुझे देखा, फिर चुपचाप नंगी ही बिस्तर से उठ गई।
उसके नंगे शरीर पर कमरे की हल्की रोशनी पड़ रही थी।
नेहा: “मेरे साथ आओ।”
मैं भी उठा और उसके पीछे-पीछे टेबल की तरफ गया, जहाँ लैपटॉप रखा था।
हम दोनों कुर्सियों पर नंगे ही बैठ गए।
नेहा ने लैपटॉप खोला और सीधे एक पोर्न वेबसाइट पर चली गई।
वो कुछ खास सर्च कर रही थी, जैसे उसे पहले से पता हो कि कौन सा वीडियो देखना है।
दो मिनट बाद स्क्रीन पर एक चेक पोर्न वीडियो खुल गया।
वीडियो की लंबाई दो घंटे से भी ज्यादा थी।
रात के एक बज चुके थे और कल ऑफिस भी जाना था, लेकिन नेहा की उत्सुकता देखकर मैं कुछ नहीं बोला।
वीडियो शुरू हुआ।
एक सड़क पर रात का समय। एक जवान लड़की अकेली खड़ी है।
एक कपल उससे अप्रोच करता है।
भाषा चेक थी, लेकिन इंग्लिश सबटाइटल से सब समझ आ रहा था।
ये कोई प्रोफेशनल पोर्न नहीं लग रहा था — मोबाइल से शूट की हुई रियल लगने वाली कहानी थी।
वे बातें कर रहे थे —
“तुमने पहले कभी ऐसा कुछ किया है?”
“क्या तुम बाईसेक्शुअल हो?”
“क्या तुम वर्जिन हो?”
“जब तक तुम चाहो हमारे साथ रह सकती हो... हम तुम्हारी कॉलेज फीस भी दे देंगे।”
फिर लड़की उनकी कार में बैठ जाती है और उनके आलीशान घर चली जाती है।
थोड़ी देर इधर-उधर की बातें... फिर वो आदमी (जो उसके पापा जितना उम्र का था) उसके साथ सेक्स शुरू करता है।
फिर उसकी पत्नी भी शामिल हो जाती है।
धीरे-धीरे सेक्स से ऊपर चीजें बढ़ने लगीं —
वे उसे अलग-अलग काम देते, वो मना करती, लेकिन अंत में करती जाती।
बहुत ही इंटरेस्टिंग और स्लो-बर्न वीडियो था।
मुझे लग रहा था रात में इतना लंबा वीडियो कौन देखता है, लेकिन नेहा पूरी तरह खोई हुई थी।
हमने पूरा वीडियो देखा।
नेहा का दाहिना हाथ पूरे समय मेरे लंड पर था।
जैसे-जैसे वीडियो में लड़की की सबमिशन बढ़ती, नेहा का हाथ तेज़ होता जाता।
मैं दो बार उसके हाथों से झड़ गया।
पहली बार सारा पानी मैंने ज़मीन पर निकाल दिया, लेकिन नेहा ने लंड नहीं छोड़ा।
बल्कि वीडियो देखते-देखते उसे फिर से सख्त कर दिया।
उसका हाथ अभी भी मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रहा था।
उसकी आँखें स्क्रीन पर जमी हुई थीं।
वीडियो खत्म होने के बाद नेहा मेरी तरफ मुड़ी।
उसकी आँखें अभी भी स्क्रीन की रोशनी से चमक रही थीं।
नेहा: “क्या समझे?”
मैं वीडियो में इतना खोया हुआ था कि भूल ही गया था कि मुझे इस वीडियो से कुछ सीखना भी है।
मैंने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा,
सम: “मतलब... सही था... आई लाइक द वीडियो।”
नेहा ने एक पल मुझे देखा, फिर हल्के से मुस्कुराते हुए बोली,
नेहा: “बुद्दू...
इसमें दो चीजें सीखने की हैं।”
नेहा मेरी गोद में बैठी हुई थी। उसका नंगा शरीर मेरे से चिपका हुआ था। उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा,
नेहा: “पहली चीज़ तो शर्म, इनकार, डर और कंट्रोल... सबमिशन।
तुमने देखा ना वीडियो वाली लड़की ने वो सब कैसे किया?
हिचकिचाते हुए... थोड़ी शर्म... थोड़ी डोमिनेशन... सब कुछ था।”
मैं बीच में बोल पड़ा,
सम: “तुम ये नहीं कर पाओगी?”
नेहा हल्के से मुस्कुराई। उसकी मुस्कान में थोड़ी शर्म और थोड़ी चुनौती थी।
नेहा: “जिग्नेश को इंडियन शर्माती हुई लड़की चाहिए...
जैसी हमने रेस्टोरेंट में पहले आधे घंटे में गंध मचा दी थी।
अगर मैं वो शर्म नहीं ला पाई जो उन्हें चाहिए...
मैं बस टाँगें फैला कर तैयार हो गई... जैसे बेकार आदमी के साथ .... ”
उसने एक पल रुककर मेरी आँखों में देखा और आगे बोली,
नेहा: “वीडियो में वो लड़की हिचकिचा रही थी...
पहले थप्पड़ पड़ने पर उसकी आँखों में आँसू भी आ गए थे... नाराज़गी भी थी।
मैं वो भाव ला ही नहीं पाई...
और वहाँ तुम भी होंगे...
मुझे समझ नहीं आ रहा कि हम उन्हें अच्छे से वो दे पाएँगे जो उन्हें चाहिए।”
जब मैंने पूछा, “और दूसरी बात?”, तो नेहा ने बड़ी-बड़ी आँखों से मेरी तरफ देखा।
नेहा: “ये तो तुम्हें समझ में आ ही गई होगी...”
मुझे लगा जैसे कोई एग्ज़ाम चल रहा हो और मेरे दिमाग में बिल्कुल जवाब नहीं था।
मैं चुपचाप उसका चेहरा देखता रहा।
नेहा ने थोड़ी देर तक मेरे चेहरे को देखा, फिर खुद ही जवाब दे दिया,
नेहा: “दूसरी बात... वो लड़की अकेली नहीं थी। वो कपल था — पति और पत्नी। दोनों मिलकर उसे कंट्रोल कर रहे थे। पति उसे चोद रहा था, पत्नी उसे चूम रही थी, थप्पड़ मार रही थी, उसे नीचा दिखा रही थी। दोनों का एक साथ होना... वो लड़की को और ज़्यादा
helpless बना रहा था।”
मैंने उसे फिर से देखा।
मेरे दिमाग में ये समस्या अब तक आई ही नहीं थी।
सब लोगों की तरह मैं मानकर बैठा था कि एक महिला दूसरी महिला को प्यार करती है तो वो lesbian होती है।
नेहा ने मेरा भ्रम तोड़ दिया।
नेहा: “मुझे चिकने लड़के बिल्कुल पसंद नहीं।
तुमने मेरी मर्दों की चॉइस में देखा होगा ना... मुझे वो मर्द चाहिए जो असली लगे।
जिनके सीने पर बाल हों, आवाज़ में दम हो...
ना कि चिकने छुटिये... तुम्हारी तरह।”
ये बोलते हुए वो थोड़ा हँसी।
मैंने थोड़ा हड़बड़ाकर पूछा,
सम: “मतलब... तुम ये सब किसी लड़की के साथ करने में comfortable नहीं हो?”
नेहा इस बार ज़ोर से हँस पड़ी।
हा इस बार ज़ोर से हँस पड़ी। उसकी हँसी में शर्म के साथ मज़ाक भी था। उसकी नंगी देह मेरी गोद में हिल रही थी।
नेहा: “अरे मेरे भोले बलम... पत्नी को चुदवाने की इतनी जल्दी के भूल गए कि पत्नी lesbian नहीं है?”
वो हँसते हुए मेरी छाती पर हल्का सा थप्पड़ मारती हुई बोली,
नेहा: “मेरे सामने वो पोर्न का सीन... देखा था ना?
जब वो mature महिला उस कॉलेज वाली लड़की के मुँह पर अपनी चूत रगड़ रही थी...
उसे humiliate कर रही थी... बाल पकड़कर जबरदस्ती चाटवा रही थी...
वो domination... वो power...”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा। उसकी आवाज़ अब थोड़ी भारी और उत्तेजित हो गई थी।
नेहा: “सोचो... एक कपल ने मुझे नहीं... तुम्हें hire किया as a slave।... क्या तुम?
क्या तुम उनके सामने घुटनों पर बैठकर उनकी पत्नी की चूत चाटोगे?
और बीच में वो आदमी भी अपना लंड तुम्हारे चेहरे के सामने ले आया?
तुम्हें पता है तुम्हें क्या करना है... क्या कर पाओगे?”
मैं समझ गया कि नेहा क्या समझा रही है।
मैं कुछ नहीं बोला।
नेहा ने मेरे लंड को हल्का दबाते हुए मुस्कुराकर कहा,
नेहा: “वैसे भी तुमने तो बहुत लंड का जूस हाथ से निकाला है...
मगर वो तुम्हारे पीछे चला गया...
फिर??
क्या करोगे तब?”
इस बार मेरे मुँह से डायरेक्ट “नहीं” निकला।
नेहा: “जब तुम gay नहीं हो तो मैं lesbian कैसे, बुद्दू?”
वो जोर से हँसी।
उसकी हँसी में शर्म, मज़ाक और गहरी उत्तेजना तीनों थे।
उसने मेरी गर्दन में चुम्मा लिया और कान में फुसफुसाया
नेहा: “ये आइडिया सुनने में बहुत अच्छा लगता है... फील करने में भी।
मगर क्या मैं उनके एक्सपेक्टेशन जितना प्लेज़र दे पाऊँगी?
क्या मैं उस डर और शर्म में सच में feel कर पाऊँगी?
लेस्बियन... मैंने कभी सोचा भी नहीं था।
किसी लड़की को किस करने के बारे में भी नहीं सोचा।
और अगर उस पर किसी ने मुझे थप्पड़ मारा... तो क्या मैं पलटकर उसे थप्पड़ नहीं मार दूँगी?
और तुम... तुम्हारा रिएक्शन कैसा होगा जब तुम्हारी बीवी को कोई थप्पड़ मारेगा?
हम तो अभी बंद कमरे में इस फैंटसी में हैं...
मगर मैंने देखा है तुम्हें लड़ते हुए लड़कों से, जब क्लब में किसी ने मुझे गलत तरीके से टच किया था।
वहाँ न जाने क्या होगा...”
नेहा ने गहरी साँस ली। उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली हुई थीं।
नेहा: “इसीलिए मुझे लगता है कि हमें ये प्रपोज़ल नहीं मानना चाहिए।
तो प्लीज... मुझे उस नज़र से मत देखा करो कि मैं तुम्हारा मजा खराब कर रही हूँ।
हालाँकि तुमने कभी बोला नहीं... मगर तुम्हारी आँखें...
इसीलिए मैं आज ये क्लियर करना चाहती थी।”
नेहा ने ये कहते हुए मेरी छाती पर सिर रख दिया।
उसका नंगा शरीर अब पहले जितना उत्तेजित नहीं, बल्कि थोड़ा काँपता हुआ और भावुक लगा।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
मैं उसके बालों में हाथ फेरता रहा।
उसकी बातों में डर था, लेकिन फैंटसी की भूख भी अभी पूरी तरह मरी नहीं थी।


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