13-06-2026, 12:42 PM
सम: “तो ये थ्रीसम किस तरह का होगा?”
मैं स्क्रीन के सामने बैठे आदमी — जिग्नेश — से सीधे पूछ बैठा,
जिग्नेश आज बिना किसी मास्क के था।
बहुत आकर्षक चेहरा, गोरी त्वचा, भूरी आँखें, चौड़ा सीना — जिस पर एक भी बाल काला नहीं था। चौड़ी कलाइयाँ और तगड़ा शरीर।
नेहा मेरी तरफ़ देखकर हल्के से मुस्कुराई... जैसे मेरे मासूम सवाल पर हँस रही हो।
मैंने फिर से कहा, शायद उसे लगा कि वो मेरी बात समझ नहीं पाया,
सम: “मेरा मतलब... ये थ्रीसम किस तरह का होगा? जिसमें एक लड़का और दो लड़कियाँ होती हैं?”
जिग्नेश ने मेरी तरफ़ देखा।
उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई।
नेहा अब भी मुस्कुरा रही थी।
वो जानती थी कि मैं हमेशा वो वाली पोर्न पसंद करता हूँ जिसमें दो लड़के और एक लड़की होती है।
जिग्नेश हँसते हुए बोला,
जिग्नेश: “नहीं बॉय... ये बिल्कुल अलग है।
थ्रीसम पोर्न में सब एक-दूसरे को शेयर कर रहे होते हैं...
मगर यहाँ एक कपल एक लड़की को अपना करता है।
वो पूरी तरह उस कपल की होती है।”
मैं कुछ-कुछ समझ रहा था।
वैसे ये हमारी पहली ऑनलाइन चैट थी।
करीब आधा घंटा हो चुका था।
और उसमें से पहले 15 मिनट तो बस जिग्नेश ने नेहा की तारीफ़ ही की।
नेहा को देखते ही उसके चेहरे पर अलग ही चमक आ गई थी।
ये हमारे लिए बहुत हिम्मत की बात थी... मगर नेहा ने मुझे मना लिया था।
जिग्नेश ने नेहा को देखा और अपनी गहरी, आत्मविश्वास भरी आवाज़ में कमांड्स देना शुरू किया।
जिग्नेश: “रिया... अपने दोनों हाथों को अपने चेहरे के पास ले आओ।
हाथों की उँगलियाँ चेहरे के दोनों तरफ़ रखो... जैसे तुम शर्मा रही हो।
अच्छा... अब धीरे से अपने होंठों को छुओ। हाँ... ऐसे ही। अब मुस्कुराओ... थोड़ा शरमाते हुए।”
नेहा ने बिना किसी विरोध के वो सब किया। उसके हाथ उसके चेहरे के दोनों तरफ़ थे, उँगलियाँ होंठों को हल्के से छू रही थीं।
जिग्नेश: “बहुत अच्छा... अब अपना दायाँ हाथ आगे बढ़ाओ... और उस पर अपना नाम का शुरुआती अक्षर लिखो... धीरे-धीरे लिखो... ताकि मैं देख सकूँ।”
नेहा ने अपनी उँगली से हाथ पर “N” लिखा। जिग्नेश ने स्क्रीन के करीब झुककर देखा और मुस्कुराया।
नेहा ने सब कुछ वैसा ही किया। उसका शरीर अब पूरी तरह जिग्नेश की कमांड्स का पालन कर रहा था। मैं चुपचाप बैठा सब देख रहा था। नेहा की साँसें तेज़ हो रही थीं।
जिग्नेश ने मुस्कुराते हुए कहा,
जिग्नेश: “तुमने अपना नाम रिया बताया था... लेकिन ठीक है। जब सब कुछ झूठ था तो ठीक है।
वैसे भी इस सुंदरता के लिए इतना चल जाता है।
लेकिन मैं सही था... ज़्यादातर समय मैं आवाज़ से ही पहचान जाता हूँ। लेकिन तुम मेरी उम्मीदों से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो।”
नेहा एक स्लीवलेस टॉप में थी — बहुत टाइट, जिसमें उसका फिगर अच्छे से दिख रहा था।
जिग्नेश मेरे सवाल सुन रहा था, लेकिन उसका पूरा ध्यान नेहा पर था।
उसकी हर हरकत पर।
मैंने पूछा,
सम: “तो तुम ये करते हो... मेरा मतलब कितनी बार?”
जैसे ही मैं ये पूछ रहा था, मुझे खुद लगा कि ये बकवास सवाल है।
मगर न नेहा कुछ बोल रही थी, न जिग्नेश।
जिग्नेश मुस्कुराया।
उसने एक लिंक भेज दिया — इंस्टाग्राम का प्राइवेट अकाउंट।
हमने रिक्वेस्ट भेजी, उसने तुरंत एक्सेप्ट कर ली।
फिर शुरू हुआ अनगिनत स्क्रॉल होने वाले फोटोज़।
नंगे नहीं थे, लेकिन बहुत उत्तेजक थे। पटेल कपल — जिग्नेश और जिंक्स — अलग-अलग लड़कियों के साथ। गोरी, काली, एशियन...
लेटेस्ट फोटो में एक बहुत युवा लड़की थी — 19-20 साल की, नाम पेनी, इंग्लैंड से।
नेहा अभी तक चुप थी। उसने फोटो को ज़ूम किया और धीरे से बोली,
नेहा: “ये बहुत खूबसूरत है... क्या तुमने इसे ?”
जिग्नेश ने भारी आवाज़ में कहा,
जिग्नेश: “बोलो... क्या बोल रही थी?”
नेहा ने फिर पूछा,
नेहा: “क्या तुमने इस लड़की को पैसे दिए?”
जिग्नेश मुस्कुराया और बोला,
जिग्नेश: “कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी... वो अपनी मर्ज़ी से हमारे साथ है।”
नेहा ने थोड़ा हिचकिचाते हुए पूछा,
नेहा: “फिर वो सब... मतलब... कैसे...?”
मैं नहीं समझा कि नेहा क्या पूछना चाह रही है।
मगर जिग्नेश समझ गया।
जिग्नेश: “सब अपनी मर्ज़ी से... कोई फोर्स नहीं।
इवन हम फेमस हैं... ऐसी लड़कियों को ट्रेन करने के लिए। कई लोग हमें रेकमेंड करते हैं।”
नेहा ने फिर पूछा,
नेहा: “मगर वो सब... मेरा मतलब... हर बात मानना... पेन... वो सब कैसे... इतना सबमिशन?”
मैं अभी तक बिना समझे उनकी बातें सुन रहा था।
जिग्नेश ने नेहा को देखा और धीरे से पूछा,
जिग्नेश: “तुमने ये किया है?”
नेहा: “मैंने पढ़ा है... और मैंने ट्राई भी किया... मगर... इसमें कोई उत्तेजना नहीं लगी।”
जिग्नेश: “किसके साथ?”
नेहा ने मेरी तरफ़ इशारा किया।
जिग्नेश हँसा।
जिग्नेश: “ये खुद बिच है... इससे नहीं होगा। मैं शक्ल देखकर बता सकता हूँ... तुम्हें अच्छी ट्रेनिंग की ज़रूरत है। मुझे पता है तुममें वो है।”
जिग्नेश नेहा को घूर रहा था।
मुझे अब समझ में आ रहा था कि पिछले हफ्तों से नेहा का बिहेवियर क्यों था। क्यों वो मुझे थप्पड़ मारने को कह रही थी। क्यों वो सबमिसिव होने की कोशिश कर रही थी।
नेहा ने फिर पूछा,
नेहा: “फिर कोई क्यों चाहेगा... कि उसे... जिसको वो अच्छे से जानती तक नहीं... उससे बेइज्जती करे... थप्पड़ मारे... और वो खुशी-खुशी सहे... ये मुझे समझ नहीं आ रहा...”
जिग्नेश नेहा की बात सुनकर थोड़ा रुका। कुछ सोचने लगा। शायद वो अपना जवाब तैयार कर रहा था।
जिग्नेश ने थोड़ा रुक कर, नेहा को सीधे आँखों में देखते हुए कहा,
जिग्नेश: “तुम्हें पता है... सबसे हल्की सी भी मिर्च जीभ जला देती है।
तुम्हारी जीभ तुम्हें चीख-चीख कर बता रही होती है कि ‘ये मत खाओ’...
मगर दिमाग?
उसे ये जलन पसंद है।
कुछ लोग हल्की वाली मिर्च खाते हैं।
कुछ लोग थोड़ी तेज़।
लेकिन कुछ लोग... दुनिया की सबसे तेज़, सबसे जलाने वाली मिर्च भी ट्राई करते हैं।
क्यों?
क्योंकि उन्हें वो जलन चाहिए।
वो दर्द चाहिए।
वो नशा चाहिए जो दर्द और स्वाद को मिला दे।
जो उन्हें बताए कि उनकी लिमिट कहाँ है... और वो लिमिट को पार करने का मज़ा।”
हम दोनों उसकी बात समझ रहे थे।
जिग्नेश: “ये कंट्रोल किसी के हाथ में देना होता है। सोचो... तुम्हारे प्लेजर की चाबी किसी और के हाथ में।
अब तुम्हें उसी में प्लेजर मिलता है, जिसमें उसे मिले।
तुम हँसोगी जब वो चाहेगा। रोओगी जब वो चाहेगा। चीखोगी जब वो चाहेगा।
कुछ लड़कियों को कंट्रोल छोड़ने में मज़ा आता है।
जो रोज़ दुनिया में स्ट्रॉन्ग बनकर रहती हैं, उन्हें कभी-कभी पूरी तरह कमज़ोर होने का नशा चाहिए।
जिसमें उन्हें पता हो कि अब वो कुछ नहीं कंट्रोल कर रही... कोई और उन्हें कंट्रोल कर रहा है।
उसकी इज्जत, उसकी बॉडी, उसकी इच्छा — सब। ये सबमिशन का नशा है... जो पेन और प्लेजर को एक कर देता है।”
नेहा की साँसें अब और तेज़ हो गई थीं। उसके गाल लाल हो रहे थे।
जिग्नेश की लंबी बात के बाद हम तीनों थोड़ी देर तक पूरी तरह चुप रहे।
मेरा दिमाग उसकी बातों को बार-बार प्रोसेस कर रहा था।
नेहा के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे — कभी सोचती हुई, कभी शर्माती हुई, कभी कुछ और ही।
वो उसकी इंटेलेक्चुअल वाली बातें सुन रही थी जैसे कोई बहुत गहरी बात हो।
हालाँकि जिग्नेश की कुछ बातें चपटरी भी लग रही थीं, लेकिन नेहा उन्हें भी ध्यान से सुन रही थी।
जिग्नेश ने एक अलग तरह की स्माइल दी। थोड़ा सा हँसा और बोला,
जिग्नेश: “क्या कुछ ज्यादा ग्यान हो गया?”
नेहा ने ना में धीरे से सिर हिलाया।
नेहा: “नहीं... लोग आपको रिकमंड करते हैं... फिर आप यहाँ... ”
जिग्नेश मुस्कुराया। उसकी आँखों में एक चमक थी।
जिग्नेश: “तुम अपनी तारीफ सुनाना चाहती हो क्या?”
नेहा का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने झिझकते हुए कहा,
नेहा: “नहीं... मेरा मतलब... मतलब आपने टाइम दिया जब आपने हमें देखा भी नहीं था.. इसीलिए पूछा।”
जिग्नेश ने कुर्सी पर थोड़ा पीछे टेक लगाई और सहज लेकिन कॉंफिडेंट स्वर में बोला,
जिग्नेश: “क्योंकि तुम इंडियन हो... और मुझे इंडियन औरते बहुत पसंद हैं। खासकर शादीशुदा।
वैसे तो कई जवान इंडियन औरते मेरे पास आई हैं... लेकिन तुम खास हो। तुममें वो भूख़ दिख रहा है जो ज्यादातर लड़कियों में नहीं होता।
नेहा ने कुछ कहने की कोशिश की लेकिन शब्द नहीं निकले। उसने बस अपनी होठों को काट लिया।
नेहा ने जिग्नेश की आँखों में देखते हुए पूछा,
नेहा: “मगर इंडियन क्यों?
हमने आपके प्रोफाइल में देखी लड़कियाँ... जो मुझसे बहुत सुंदर हैं।
आधा इंडियन लड़के तो ऐसी लड़कियों को देखकर रात में हिलाते हैं।
और आप तो ऐसी लड़कियों को ऑलरेडी अपना स्लेव बना चुके हो...
फिर इंडियन... क्यों?”
जिग्नेश फिर से कुछ पल चुप रहा।
वो सोच रहा था।
मैं और नेहा दोनों यही सोच रहे थे कि अब वो क्या कहने वाला है।
उसकी मिर्च वाली गहरी बातों का हमारे पास कोई जवाब नहीं था।
थोड़ी देर बाद जिग्नेश ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा।
जिग्नेश: “राहुल ... या जो भी तुम्हारा नाम है?”
मैं: “सेम ।”
(मैंने अपना असली नाम बता दिया। नेहा ने भी तुरंत कहा — “नेहा ”)
जिग्नेश मुस्कुराया।
जिग्नेश: “सेम ... क्या तुमने अपनी बहन या मदर को कभी बिकिनी में देखा है?
मुझे माफ करना अगर मैं कुछ गलत बोल रहा हूँ... लेकिन ये बस एक सवाल है।”
मुझे अपनी बहन वाली फैंटसी का पता नहीं था, इसलिए मैंने सीधा जवाब दिया।
मैं: “नहीं।”
जिग्नेश: “एक्जैक्टली।”
यहाँ बीच पर जाना, पूल पार्टी, परिवार के सामने बिकिनी पहनना आम बात है।
मेरी बेटी भी 18 साल की है... मेरे सामने बिकिनी में घूमती है, जो बेसिकली ब्रा और पैंटी ही है।
उसमें कोई शर्म नहीं।
म यहाँ की लड़कियों को स्लेव या यूनिकॉर्न बनाते हैं, तो कपड़े उतारने में कोई शर्म नहीं होती।
कोई ह्यूमिलिएशन का असली भाव नहीं होता। कई बार तो लगता है कि वो हमसे ज़्यादा मज़ा ले रही है।
उस फीलिंग — कि ‘कुछ गलत कर रही हूँ’ — वो आती ही नहीं।
कभी-कभी तो लगता है कि हम उसके साथ नहीं, वो हमारे साथ खेल रही है।”
जिग्नेश ने नेहा को गहरी नज़र से देखा और बोला,
जिग्नेश: “लेकिन इंडियन वुमन... खासकर शादीशुदा... उसमें वो शेम, वो गिल्ट, वो टैबू बहुत गहरा होता है।
जब वो पहली बार कपड़े उतारती है, जब वो पहली बार किसी अजनबी के सामने घुटनों पर बैठती है, जब उसे थप्पड़ पड़ता है... उस वक्त उसका चेहरा जो लाल होता है ना, वो डर और उत्तेजना का मिश्रण... वो फीलिंग मुझे सबसे ज़्यादा पसंद है।”
हमने चार साल पहले एक Indian औरत के साथ खेला था... वो शायद 35 के आसपास थी।
उसके साथ जो मजा आया, वो आज तक जवान western लड़कियों के साथ नहीं आया।
जिग्नेश ने नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा,
जिग्नेश: “औरत तुम से भी 10% नहीं है...
जिग्नेश ने अपनी जगह पर थोड़ा आगे झुकते हुए, अब सीधे नेहा को देखते हुए कहा,
जिग्नेश: “ये तो बात रही इंडियन लड़कियों की... अब बात तुम्हारी, नेहा।”
उसकी आवाज़ अब और गहरी और कॉन्फिडेंट हो गई थी।
जिग्नेश: “हम पिछले 20 साल से इस क्लब में हैं। मुझे याद नहीं कितनी लड़कियाँ मैंने चोदा है... ये तो दूर की बात है, मुझे कल रात किस-किस के बूब्स चूसे, ये भी याद नहीं रहता।
लेकिन तुम्हारी आवाज़... तुम्हारा चेहरा... तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज... इतना अनुभव है मेरा कि जैसे एक कुत्ता सूँघ कर बता सकता है कि कुतिया को क्या चाहिए, वैसे मैं बता सकता हूँ कि तुममें कितनी आग है।”
नेहा की साँस अटक गई। उसने नज़रें झुका लीं, लेकिन जिग्नेश रुका नहीं।
जिग्नेश: “तुम हमारा अब तक का बेस्ट एक्सपीरियंस हो सकती हो। और तुम्हें देखने के बाद ये पक्का हो गया।
तुममें वो बात है। तुम्हें एक मास्टर की गाइडेंस चाहिए। सच्ची गाइडेंस।
न कि कोई अमेच्योर जो सिर्फ थप्पड़ मारने और ‘येस मिस्ट्रेस’ बोलने में लगा रहे।”
मैं स्क्रीन पर साफ़ महसूस कर सकता था कि अब दोनों का पूरा ध्यान एक-दूसरे पर था।
जिग्नेश की वो शैतानी मुस्कान — जिसमें कॉन्फिडेंस और हंगर दोनों थे। नेहा की घबराहट — उसका माथा एसी के बावजूद हल्के पसीने से चमक रहा था। उसकी गर्दन लाल, उँगलियाँ आपस में सिकुड़ी हुईं।
मेरी तरफ़ किसी का ध्यान ही नहीं था। जैसे मैं कमरे में था ही नहीं।
कुछ देर तक भारी, गहरी चुप्पी छाई रही। कोई नहीं बोल रहा था।
आखिरकार नेहा ने वो शांति तोड़ने के लिए कुछ कहा। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी,
नेहा: “मगर... कुछ लीगल रीज़न्स से हम इंडिया नहीं छोड़ सकते...”
वो स्पष्ट रूप से घबराहट में बोल रही थी। शायद वो इस पूरे कन्वर्सेशन को यहीं खत्म करना चाहती थी। अभी भी उसके मन में ये था कि हम बस मज़े के लिए बात कर रहे हैं, एक्चुअल मीटिंग के लिए नहीं।
जिग्नेश ने एक पल को नेहा को देखा, फिर धीरे-धीरे मुस्कुराया।
जिग्नेश: “तुम लोग नहीं आ सकते तो क्या? हम बस 16 घंटे दूर हैं... गोवा में हमारा फार्महाउस है। तुम्हें बस ‘हाँ’ कहना है, नेहा।”
मैं स्क्रीन के सामने बैठे आदमी — जिग्नेश — से सीधे पूछ बैठा,
जिग्नेश आज बिना किसी मास्क के था।
बहुत आकर्षक चेहरा, गोरी त्वचा, भूरी आँखें, चौड़ा सीना — जिस पर एक भी बाल काला नहीं था। चौड़ी कलाइयाँ और तगड़ा शरीर।
नेहा मेरी तरफ़ देखकर हल्के से मुस्कुराई... जैसे मेरे मासूम सवाल पर हँस रही हो।
मैंने फिर से कहा, शायद उसे लगा कि वो मेरी बात समझ नहीं पाया,
सम: “मेरा मतलब... ये थ्रीसम किस तरह का होगा? जिसमें एक लड़का और दो लड़कियाँ होती हैं?”
जिग्नेश ने मेरी तरफ़ देखा।
उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई।
नेहा अब भी मुस्कुरा रही थी।
वो जानती थी कि मैं हमेशा वो वाली पोर्न पसंद करता हूँ जिसमें दो लड़के और एक लड़की होती है।
जिग्नेश हँसते हुए बोला,
जिग्नेश: “नहीं बॉय... ये बिल्कुल अलग है।
थ्रीसम पोर्न में सब एक-दूसरे को शेयर कर रहे होते हैं...
मगर यहाँ एक कपल एक लड़की को अपना करता है।
वो पूरी तरह उस कपल की होती है।”
मैं कुछ-कुछ समझ रहा था।
वैसे ये हमारी पहली ऑनलाइन चैट थी।
करीब आधा घंटा हो चुका था।
और उसमें से पहले 15 मिनट तो बस जिग्नेश ने नेहा की तारीफ़ ही की।
नेहा को देखते ही उसके चेहरे पर अलग ही चमक आ गई थी।
ये हमारे लिए बहुत हिम्मत की बात थी... मगर नेहा ने मुझे मना लिया था।
जिग्नेश ने नेहा को देखा और अपनी गहरी, आत्मविश्वास भरी आवाज़ में कमांड्स देना शुरू किया।
जिग्नेश: “रिया... अपने दोनों हाथों को अपने चेहरे के पास ले आओ।
हाथों की उँगलियाँ चेहरे के दोनों तरफ़ रखो... जैसे तुम शर्मा रही हो।
अच्छा... अब धीरे से अपने होंठों को छुओ। हाँ... ऐसे ही। अब मुस्कुराओ... थोड़ा शरमाते हुए।”
नेहा ने बिना किसी विरोध के वो सब किया। उसके हाथ उसके चेहरे के दोनों तरफ़ थे, उँगलियाँ होंठों को हल्के से छू रही थीं।
जिग्नेश: “बहुत अच्छा... अब अपना दायाँ हाथ आगे बढ़ाओ... और उस पर अपना नाम का शुरुआती अक्षर लिखो... धीरे-धीरे लिखो... ताकि मैं देख सकूँ।”
नेहा ने अपनी उँगली से हाथ पर “N” लिखा। जिग्नेश ने स्क्रीन के करीब झुककर देखा और मुस्कुराया।
नेहा ने सब कुछ वैसा ही किया। उसका शरीर अब पूरी तरह जिग्नेश की कमांड्स का पालन कर रहा था। मैं चुपचाप बैठा सब देख रहा था। नेहा की साँसें तेज़ हो रही थीं।
जिग्नेश ने मुस्कुराते हुए कहा,
जिग्नेश: “तुमने अपना नाम रिया बताया था... लेकिन ठीक है। जब सब कुछ झूठ था तो ठीक है।
वैसे भी इस सुंदरता के लिए इतना चल जाता है।
लेकिन मैं सही था... ज़्यादातर समय मैं आवाज़ से ही पहचान जाता हूँ। लेकिन तुम मेरी उम्मीदों से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो।”
नेहा एक स्लीवलेस टॉप में थी — बहुत टाइट, जिसमें उसका फिगर अच्छे से दिख रहा था।
जिग्नेश मेरे सवाल सुन रहा था, लेकिन उसका पूरा ध्यान नेहा पर था।
उसकी हर हरकत पर।
मैंने पूछा,
सम: “तो तुम ये करते हो... मेरा मतलब कितनी बार?”
जैसे ही मैं ये पूछ रहा था, मुझे खुद लगा कि ये बकवास सवाल है।
मगर न नेहा कुछ बोल रही थी, न जिग्नेश।
जिग्नेश मुस्कुराया।
उसने एक लिंक भेज दिया — इंस्टाग्राम का प्राइवेट अकाउंट।
हमने रिक्वेस्ट भेजी, उसने तुरंत एक्सेप्ट कर ली।
फिर शुरू हुआ अनगिनत स्क्रॉल होने वाले फोटोज़।
नंगे नहीं थे, लेकिन बहुत उत्तेजक थे। पटेल कपल — जिग्नेश और जिंक्स — अलग-अलग लड़कियों के साथ। गोरी, काली, एशियन...
लेटेस्ट फोटो में एक बहुत युवा लड़की थी — 19-20 साल की, नाम पेनी, इंग्लैंड से।
नेहा अभी तक चुप थी। उसने फोटो को ज़ूम किया और धीरे से बोली,
नेहा: “ये बहुत खूबसूरत है... क्या तुमने इसे ?”
जिग्नेश ने भारी आवाज़ में कहा,
जिग्नेश: “बोलो... क्या बोल रही थी?”
नेहा ने फिर पूछा,
नेहा: “क्या तुमने इस लड़की को पैसे दिए?”
जिग्नेश मुस्कुराया और बोला,
जिग्नेश: “कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी... वो अपनी मर्ज़ी से हमारे साथ है।”
नेहा ने थोड़ा हिचकिचाते हुए पूछा,
नेहा: “फिर वो सब... मतलब... कैसे...?”
मैं नहीं समझा कि नेहा क्या पूछना चाह रही है।
मगर जिग्नेश समझ गया।
जिग्नेश: “सब अपनी मर्ज़ी से... कोई फोर्स नहीं।
इवन हम फेमस हैं... ऐसी लड़कियों को ट्रेन करने के लिए। कई लोग हमें रेकमेंड करते हैं।”
नेहा ने फिर पूछा,
नेहा: “मगर वो सब... मेरा मतलब... हर बात मानना... पेन... वो सब कैसे... इतना सबमिशन?”
मैं अभी तक बिना समझे उनकी बातें सुन रहा था।
जिग्नेश ने नेहा को देखा और धीरे से पूछा,
जिग्नेश: “तुमने ये किया है?”
नेहा: “मैंने पढ़ा है... और मैंने ट्राई भी किया... मगर... इसमें कोई उत्तेजना नहीं लगी।”
जिग्नेश: “किसके साथ?”
नेहा ने मेरी तरफ़ इशारा किया।
जिग्नेश हँसा।
जिग्नेश: “ये खुद बिच है... इससे नहीं होगा। मैं शक्ल देखकर बता सकता हूँ... तुम्हें अच्छी ट्रेनिंग की ज़रूरत है। मुझे पता है तुममें वो है।”
जिग्नेश नेहा को घूर रहा था।
मुझे अब समझ में आ रहा था कि पिछले हफ्तों से नेहा का बिहेवियर क्यों था। क्यों वो मुझे थप्पड़ मारने को कह रही थी। क्यों वो सबमिसिव होने की कोशिश कर रही थी।
नेहा ने फिर पूछा,
नेहा: “फिर कोई क्यों चाहेगा... कि उसे... जिसको वो अच्छे से जानती तक नहीं... उससे बेइज्जती करे... थप्पड़ मारे... और वो खुशी-खुशी सहे... ये मुझे समझ नहीं आ रहा...”
जिग्नेश नेहा की बात सुनकर थोड़ा रुका। कुछ सोचने लगा। शायद वो अपना जवाब तैयार कर रहा था।
जिग्नेश ने थोड़ा रुक कर, नेहा को सीधे आँखों में देखते हुए कहा,
जिग्नेश: “तुम्हें पता है... सबसे हल्की सी भी मिर्च जीभ जला देती है।
तुम्हारी जीभ तुम्हें चीख-चीख कर बता रही होती है कि ‘ये मत खाओ’...
मगर दिमाग?
उसे ये जलन पसंद है।
कुछ लोग हल्की वाली मिर्च खाते हैं।
कुछ लोग थोड़ी तेज़।
लेकिन कुछ लोग... दुनिया की सबसे तेज़, सबसे जलाने वाली मिर्च भी ट्राई करते हैं।
क्यों?
क्योंकि उन्हें वो जलन चाहिए।
वो दर्द चाहिए।
वो नशा चाहिए जो दर्द और स्वाद को मिला दे।
जो उन्हें बताए कि उनकी लिमिट कहाँ है... और वो लिमिट को पार करने का मज़ा।”
हम दोनों उसकी बात समझ रहे थे।
जिग्नेश: “ये कंट्रोल किसी के हाथ में देना होता है। सोचो... तुम्हारे प्लेजर की चाबी किसी और के हाथ में।
अब तुम्हें उसी में प्लेजर मिलता है, जिसमें उसे मिले।
तुम हँसोगी जब वो चाहेगा। रोओगी जब वो चाहेगा। चीखोगी जब वो चाहेगा।
कुछ लड़कियों को कंट्रोल छोड़ने में मज़ा आता है।
जो रोज़ दुनिया में स्ट्रॉन्ग बनकर रहती हैं, उन्हें कभी-कभी पूरी तरह कमज़ोर होने का नशा चाहिए।
जिसमें उन्हें पता हो कि अब वो कुछ नहीं कंट्रोल कर रही... कोई और उन्हें कंट्रोल कर रहा है।
उसकी इज्जत, उसकी बॉडी, उसकी इच्छा — सब। ये सबमिशन का नशा है... जो पेन और प्लेजर को एक कर देता है।”
नेहा की साँसें अब और तेज़ हो गई थीं। उसके गाल लाल हो रहे थे।
जिग्नेश की लंबी बात के बाद हम तीनों थोड़ी देर तक पूरी तरह चुप रहे।
मेरा दिमाग उसकी बातों को बार-बार प्रोसेस कर रहा था।
नेहा के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे — कभी सोचती हुई, कभी शर्माती हुई, कभी कुछ और ही।
वो उसकी इंटेलेक्चुअल वाली बातें सुन रही थी जैसे कोई बहुत गहरी बात हो।
हालाँकि जिग्नेश की कुछ बातें चपटरी भी लग रही थीं, लेकिन नेहा उन्हें भी ध्यान से सुन रही थी।
जिग्नेश ने एक अलग तरह की स्माइल दी। थोड़ा सा हँसा और बोला,
जिग्नेश: “क्या कुछ ज्यादा ग्यान हो गया?”
नेहा ने ना में धीरे से सिर हिलाया।
नेहा: “नहीं... लोग आपको रिकमंड करते हैं... फिर आप यहाँ... ”
जिग्नेश मुस्कुराया। उसकी आँखों में एक चमक थी।
जिग्नेश: “तुम अपनी तारीफ सुनाना चाहती हो क्या?”
नेहा का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने झिझकते हुए कहा,
नेहा: “नहीं... मेरा मतलब... मतलब आपने टाइम दिया जब आपने हमें देखा भी नहीं था.. इसीलिए पूछा।”
जिग्नेश ने कुर्सी पर थोड़ा पीछे टेक लगाई और सहज लेकिन कॉंफिडेंट स्वर में बोला,
जिग्नेश: “क्योंकि तुम इंडियन हो... और मुझे इंडियन औरते बहुत पसंद हैं। खासकर शादीशुदा।
वैसे तो कई जवान इंडियन औरते मेरे पास आई हैं... लेकिन तुम खास हो। तुममें वो भूख़ दिख रहा है जो ज्यादातर लड़कियों में नहीं होता।
नेहा ने कुछ कहने की कोशिश की लेकिन शब्द नहीं निकले। उसने बस अपनी होठों को काट लिया।
नेहा ने जिग्नेश की आँखों में देखते हुए पूछा,
नेहा: “मगर इंडियन क्यों?
हमने आपके प्रोफाइल में देखी लड़कियाँ... जो मुझसे बहुत सुंदर हैं।
आधा इंडियन लड़के तो ऐसी लड़कियों को देखकर रात में हिलाते हैं।
और आप तो ऐसी लड़कियों को ऑलरेडी अपना स्लेव बना चुके हो...
फिर इंडियन... क्यों?”
जिग्नेश फिर से कुछ पल चुप रहा।
वो सोच रहा था।
मैं और नेहा दोनों यही सोच रहे थे कि अब वो क्या कहने वाला है।
उसकी मिर्च वाली गहरी बातों का हमारे पास कोई जवाब नहीं था।
थोड़ी देर बाद जिग्नेश ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा।
जिग्नेश: “राहुल ... या जो भी तुम्हारा नाम है?”
मैं: “सेम ।”
(मैंने अपना असली नाम बता दिया। नेहा ने भी तुरंत कहा — “नेहा ”)
जिग्नेश मुस्कुराया।
जिग्नेश: “सेम ... क्या तुमने अपनी बहन या मदर को कभी बिकिनी में देखा है?
मुझे माफ करना अगर मैं कुछ गलत बोल रहा हूँ... लेकिन ये बस एक सवाल है।”
मुझे अपनी बहन वाली फैंटसी का पता नहीं था, इसलिए मैंने सीधा जवाब दिया।
मैं: “नहीं।”
जिग्नेश: “एक्जैक्टली।”
यहाँ बीच पर जाना, पूल पार्टी, परिवार के सामने बिकिनी पहनना आम बात है।
मेरी बेटी भी 18 साल की है... मेरे सामने बिकिनी में घूमती है, जो बेसिकली ब्रा और पैंटी ही है।
उसमें कोई शर्म नहीं।
म यहाँ की लड़कियों को स्लेव या यूनिकॉर्न बनाते हैं, तो कपड़े उतारने में कोई शर्म नहीं होती।
कोई ह्यूमिलिएशन का असली भाव नहीं होता। कई बार तो लगता है कि वो हमसे ज़्यादा मज़ा ले रही है।
उस फीलिंग — कि ‘कुछ गलत कर रही हूँ’ — वो आती ही नहीं।
कभी-कभी तो लगता है कि हम उसके साथ नहीं, वो हमारे साथ खेल रही है।”
जिग्नेश ने नेहा को गहरी नज़र से देखा और बोला,
जिग्नेश: “लेकिन इंडियन वुमन... खासकर शादीशुदा... उसमें वो शेम, वो गिल्ट, वो टैबू बहुत गहरा होता है।
जब वो पहली बार कपड़े उतारती है, जब वो पहली बार किसी अजनबी के सामने घुटनों पर बैठती है, जब उसे थप्पड़ पड़ता है... उस वक्त उसका चेहरा जो लाल होता है ना, वो डर और उत्तेजना का मिश्रण... वो फीलिंग मुझे सबसे ज़्यादा पसंद है।”
हमने चार साल पहले एक Indian औरत के साथ खेला था... वो शायद 35 के आसपास थी।
उसके साथ जो मजा आया, वो आज तक जवान western लड़कियों के साथ नहीं आया।
जिग्नेश ने नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा,
जिग्नेश: “औरत तुम से भी 10% नहीं है...
जिग्नेश ने अपनी जगह पर थोड़ा आगे झुकते हुए, अब सीधे नेहा को देखते हुए कहा,
जिग्नेश: “ये तो बात रही इंडियन लड़कियों की... अब बात तुम्हारी, नेहा।”
उसकी आवाज़ अब और गहरी और कॉन्फिडेंट हो गई थी।
जिग्नेश: “हम पिछले 20 साल से इस क्लब में हैं। मुझे याद नहीं कितनी लड़कियाँ मैंने चोदा है... ये तो दूर की बात है, मुझे कल रात किस-किस के बूब्स चूसे, ये भी याद नहीं रहता।
लेकिन तुम्हारी आवाज़... तुम्हारा चेहरा... तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज... इतना अनुभव है मेरा कि जैसे एक कुत्ता सूँघ कर बता सकता है कि कुतिया को क्या चाहिए, वैसे मैं बता सकता हूँ कि तुममें कितनी आग है।”
नेहा की साँस अटक गई। उसने नज़रें झुका लीं, लेकिन जिग्नेश रुका नहीं।
जिग्नेश: “तुम हमारा अब तक का बेस्ट एक्सपीरियंस हो सकती हो। और तुम्हें देखने के बाद ये पक्का हो गया।
तुममें वो बात है। तुम्हें एक मास्टर की गाइडेंस चाहिए। सच्ची गाइडेंस।
न कि कोई अमेच्योर जो सिर्फ थप्पड़ मारने और ‘येस मिस्ट्रेस’ बोलने में लगा रहे।”
मैं स्क्रीन पर साफ़ महसूस कर सकता था कि अब दोनों का पूरा ध्यान एक-दूसरे पर था।
जिग्नेश की वो शैतानी मुस्कान — जिसमें कॉन्फिडेंस और हंगर दोनों थे। नेहा की घबराहट — उसका माथा एसी के बावजूद हल्के पसीने से चमक रहा था। उसकी गर्दन लाल, उँगलियाँ आपस में सिकुड़ी हुईं।
मेरी तरफ़ किसी का ध्यान ही नहीं था। जैसे मैं कमरे में था ही नहीं।
कुछ देर तक भारी, गहरी चुप्पी छाई रही। कोई नहीं बोल रहा था।
आखिरकार नेहा ने वो शांति तोड़ने के लिए कुछ कहा। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी,
नेहा: “मगर... कुछ लीगल रीज़न्स से हम इंडिया नहीं छोड़ सकते...”
वो स्पष्ट रूप से घबराहट में बोल रही थी। शायद वो इस पूरे कन्वर्सेशन को यहीं खत्म करना चाहती थी। अभी भी उसके मन में ये था कि हम बस मज़े के लिए बात कर रहे हैं, एक्चुअल मीटिंग के लिए नहीं।
जिग्नेश ने एक पल को नेहा को देखा, फिर धीरे-धीरे मुस्कुराया।
जिग्नेश: “तुम लोग नहीं आ सकते तो क्या? हम बस 16 घंटे दूर हैं... गोवा में हमारा फार्महाउस है। तुम्हें बस ‘हाँ’ कहना है, नेहा।”


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