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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#18
रात के दो बज चुके थे।

क्लब के बाहर ठंडी हवा। सुमन ने राज का हाथ पकड़ लिया। उसके नाखून उसकी कलाई पर गड़ रहे थे।
दोनों की आँखों में सिर्फ सेक्स था। साफ दिख रहा था। सुमन की पुतलियाँ फैली हुई थीं। राज के होंठ सूख रहे थे।
राज ने टैक्सी बुक की। पाँच मिनट में एक सफेद इनोवा गई।
ड्राइवरमिडिल एज, मोटा-ठिगना, मूंछें, शर्ट के ऊपर स्वेटर। नाम की प्लेट में 'संदीप' लिखा था।
पिछली सीट पर बैठे। राज और सुमनदोनों एक दूसरे की बाहों में। सुमन की जांघ राज की जांघ पर। राज का हाथ सुमन की कमर पर।
टैक्सी चलने लगी।
राज की नज़र ड्राइवर की साइड में लगे शीशे पर पड़ी।
संदीप पीछे देख रहा था। उसकी आँखें सुमन के क्लीवेज पर टिकी हुई थीं। ड्रेस की नेकलाइन से सुमन की चूचियाँ उभर रही थींगोरी, बड़ी, आधी बाहर।
राज को शरारत सूझी।
उसने सुमन को बिना कुछ बताए अपना हाथ बढ़ाया। सुमन की चूची पर रखा। ड्रेस के ऊपर से दबाया।
सुमन ने राज की तरफ देखा। मुस्कुराई।
राज ने उसकी टांगें फैला दीं। ड्रेस का थाई-स्लिट खुल गया। सुमन की पूरी जांघ नंगीगोरी, चिकनी, मोटी। क्लब में सूखी थी, लेकिन अब फिर गीली हो रही थी।
सुमन को नहीं पता था कि ड्राइवर देख रहा है। उसकी नज़रें राज पर थीं।
उसने राज के लंड को पेंट के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी उँगलियाँ ज़िप पर घूम रही थीं।
राज ने सुमन का मुँह अपनी तरफ घुमाया। दोबारा किस करने लगे।
अब ड्राइवर की नज़र सुमन की नंगी जांघ पर थी। फिर उसके हाथ पर जो राज के लंड पर था। फिर दोबारा क्लीवेज पर।
उसके पेंट में तंबू खड़ा हो गया। साफ दिख रहा था।
उसने एक हाथ से स्टीयरिंग पकड़ रखा था। दूसरा हाथउसने अपने लंड पर रख दिया। ऊपर से मसलने लगा।
राज ने यह सब देखा। उसका अपना लंड अब पेंट फाड़ रहा था।
सुमन किस करते हुए बोली — "क्या हुआ? तू और सख्त हो गया?"
राज ने जवाब नहीं दिया। बस सुमन के निप्पल को दबाता रहा।
तभीड्राइवर की आवाज़ आई।
"आपका स्टॉप गया।"
राज और सुमन एक दूसरे से अलग हुए। सुमन ने अपनी जांघें ढक लीं। राज ने अपना हाथ उसकी चूची से हटाया।
राज ने अपनी जेब से पाँच सौ का नोट निकाला। सुमन के हाथ में रखा।
"ड्राइवर को दे दे," राज ने कहा।
सुमन कार से उतरी। राज अंदर ही बैठा रहाउसका लंड अभी भी खड़ा था, इसलिए वह उठ नहीं सकता था।
सुमन ड्राइवर की तरफ गई। विंडो खटखटाई।
संदीप ने विंडो नीचे की।
सुमन उसकी खिड़की पर झुकी। पैसे देने के लिए।
लेकिन वह ड्रेसडीप नेकलाइनजब वह झुकी तो उसकी दोनों चूचियाँ पूरी तरह बाहर गईं। निप्पल तक। संदीप की आँखों के ठीक सामने।
गोरी, भारी, बड़ी चूचियाँ। बिना ब्रा के। निप्पल सख्त।
संदीप की साँसें रुक गईं। उसकी आँखें फट गईं। उसका लंडवह अब अपने आप मसल रहा था। सुमन के सामने ही। पेंट के ऊपर से उसका हाथ तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था।
सुमन को तब पता चला। उसने देखा ड्राइवर का हाथ। देखा उसके पेंट का तंबू।
लेकिन वह मुस्कुराई। पैसे बढ़ा दिए।
"कीप चेंज।"
संदीप ने नोट लिया। उसकी आवाज़ फटी हुई थी — "थैंक यू, मैडम।"
सुमन सीधी हुई। जाने लगी।
"मैडम!" संदीप चिल्लाया।
उसने एक पर्ची सुमन की तरफ बढ़ाई।
"ये लो मेरा नंबर। कभी टैक्सी चाहिए हो तो मुझे कॉल करना। मैं जाऊँगा।"
सुमन ने पर्ची ली। मुस्कुराई। "नाम क्या तुम्हारा?"
"संदीप।"
"संदीप," सुमन ने दोहराया। उसने वह नाम अपने मुँह में चखा जैसे कोई मिठाई हो। "ओके संदीप।"
वह घूमी। चल दी। उसकी गांड ड्रेस के अंदर एक तरफ से दूसरी तरफ खिसक रही थी।
संदीप ने उसकी गांड घूरी। फिर कार भगा ली।
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 13-06-2026, 11:09 AM



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