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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#15
सुमन के मुँह ने कुछ नहीं कहा। उसके शरीर ने कह दिया।

गाना शुरू हुआ। बास भारी थीकंपन की तरह। रोशनी लाल थी। और सुमन ने आँखें बंद कर लीं।

उसने अपनी गर्दन घुमाई। बाल चेहरे से हटाए। हाथ ऊपर उठाए। उँगलियाँ खुली। और वह आगे बढ़ीधीरे सेजैसे कोई लहर उठ रही हो।

 उसके स्तन पहले हिले। वे भारी थेऔर ड्रेस के अंदर बिना किसी रोक के। वह उसकी हरकतों के पीछे एक सेकंड लेट जाते थे। पहले उसका शरीर हिलता, फिर उसके स्तन। उसके निप्पल ड्रेस के कपड़े को रगड़ रहे थेअंदर से।

 संगीत तेज़ हुआ। सुमन की आँखें खुल गईं। वह देखना चाहती थीकौन देख रहा है।

हर कोई देख रहा था।

 उसने अपनी कमर घुमाई। गोल-गोल। ऐसे जैसे कोई साँप रेंग रहा हो। उसकी कमर ड्रेस के अंदर अलग थीपतली, लचीली, तेज़। उसकी गांड उसके पीछे घूम रही थीबड़ी, गोल, उछलती हुई। ड्रेस का स्लिट खुल गया। उसकी पूरी जांघ नंगी दिख गईकूल्हे से लेकर घुटने तक। वहाँ पसीना था। चमक रहा था।

 एक आदमीअजनबीउसके पीछे आकर खड़ा हो गया। उसका नाम था विक्रांत। मोटा। शराबी। उसकी आँखें सुमन के गांड पर थीं। उसने अपने हाथ बढ़ाए। छूने के लिए।

राज ने देखा। पर वह आगे नहीं बढ़ा। वह जानता थासुमन खुद संभाल लेगी।

सुमन ने उसे देखा। एक पल के लिए। फिर वह और नीचे झुकी। उसने अपनी गांड को पीछे धकेल दियासीधे उसके हाथों की तरफ।

**विक्रांत का हाथ उसकी गांड पर गया।**

वह सिहर उठा। उसकी उँगलियाँ ड्रेस के पतले कपड़े के ऊपर से उसकी गांड के गोलाई पर दब गईं। उसने थपथपाया नहींदबाया। मसला।

 सुमन की साँस फट गई। उसके मुँह से एक "आह" निकलीपर संगीत में वह खो गई। उसने अपना सिर पीछे झुका दिया। उसकी गर्दन खुल गई। विक्रांत ने उसकी गर्दन को देखापसीने से तर, धड़कती हुई। उसने अपना दूसरा हाथ उसकी कमर पर रखा।

अब उसके दोनों हाथ सुमन पर थे। एक गांड पर। एक कमर पर।

सुमन ने डांस करना जारी रखा। वह उसकी उँगलियों के साथ हिल रही थी। उसकी गांड उसकी हथेली में घूम रही थी।

सुमन ने करवट बदली। अब वह विक्रांत की तरफ थीउससे एक फुट दूर। उसकी आँखें उसकी आँखों में। उसके हाथ अब उसकी छाती पर गए। उसने अपने हाथ ड्रेस के ऊपर रखेअपने ही स्तनों पर।

वह खुद को सहला रही थी। डांस करते हुए।

विक्रांत के हाथ उसकी कमर पर लौट आए। उसने उसे करीब खींचा। सुमन का शरीर उससे चिपक गया। उसके स्तन उसकी छाती पर दब गए। उसके निप्पल उसकी कमीज के कपड़े को छेदते हुए उसकी त्वचा को छू रहे थे।

विक्रांत की साँसों में शराब थीऔर कुछ और भी। लंड की महक।

उसने अपनी जांघ सुमन की जांघों के बीच डाल दी। उसकी जांघ सुमन की नंगी चूत के ठीक नीचे आकर रुकी। ड्रेस का कपड़ा पतला थाबहुत पतला। वह महसूस कर सकता था। उसकी गर्मी। उसकी नमी। उसका उभार।

सुमन की चूत ने जवाब दिया। वह और गीली हो गई। उसने अपनी कमर को उसकी जांघ पर रगड़ा। एक बार। धीरे से। पर काफी था।

विक्रांत का लंड अब पूरी तरह सख्त था। वह उसे सुमन के शरीर पर दबा रहा थाअपनी जींस के अंदर।
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 13-06-2026, 01:05 AM



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