13-06-2026, 01:04 AM
(This post was last modified: 13-06-2026, 11:54 AM by Certified Addict. Edited 3 times in total. Edited 3 times in total.)
Chapter 4 क्लब की वह रात
राज से रहा नहीं गया।
उसने सुमन को पकड़ा। ड्रेस का नेकलाइन नीचे खींचा। एक चूची बाहर आई — गोरी, बड़ी, निप्पल सख्त। उसने अपना मुँह उस पर रख दिया।
जोर से चूसा। पूरा भरके मुँह में लिया।
"अह्ह्ह..." सुमन की पीठ कमान की तरह झुक गई।
राज ने निप्पल को दाँतों से दबाया। फिर चूसा। फिर चूसा। दूध पी रहा हो जैसे। जीभ से घुमाया।
"अह्ह मेरी राँड... मेरी जानेमन..."
"हट बदमाश," सुमन ने उसे धक्का दिया। लेकिन हँस रही थी। उसकी चूची पर लार चमक रही थी। "चल अब। रात आठ बजे हैं।"
![[Image: full-body-shot-an-indian-3Gx-Na2AREY.png]](https://i.postimg.cc/kMSdxfN6/full-body-shot-an-indian-3Gx-Na2AREY.png)
![[Image: magnific-bending-over-big-tits-DB9TG0Dpcl.png]](https://i.postimg.cc/Wbzmh0pf/magnific-bending-over-big-tits-DB9TG0Dpcl.png)
सड़क पर निकले।
रात का तापमान गर्म था। या फिर सुमन के शरीर की गर्मी थी — राज को फर्क नहीं पड़ता था।
सुमन दो कदम आगे चल रही थी। राज उसके पीछे।
हर कदम के साथ — सुमन की चूचियाँ उछलतीं। ऊपर नीचे। जैसे दो रसीले फल हवा में झूल रहे हों।
उसकी गांड — वह ड्रेस के अंदर बायीं तरफ खिसकती, दायीं तरफ खिसकती। थोंग की डोरी बीच में धंसी हुई, दोनों गाल बाहर नंगे।
अगल-बगल से गुजरते लोगों की नज़रें सुमन पर टिक गईं।
एक चाय वाले ने चम्मच गिरा दिया। उठाने का नाटक करते हुए उसने सुमन की जांघों को घूरा।
एक युवक — शायद कॉलेज का छात्र — ने अपना मुँह खोल दिया। उसकी नज़र सुमन के स्तनों और उसकी खुली जांघ के बीच फँस गई। उसने अपने पेंट के ऊपर से अपना लंड खुजाया।
एक बुज़ुर्ग आदमी सुमन को देखकर ठिठक गया। उसकी पत्नी उसे घसीटते हुए ले गई।
राज का लंड पेंट में धक्के मार रहा था। वह मुस्कुरा रहा था। सुमन भी मुस्कुरा रही थी — आगे चलते हुए, जानती थी कि सब उसे देख रहे हैं, और उसे फर्क नहीं पड़ता था।
कुछ दूर चलने के बाद — टैक्सी स्टैंड। टैक्सी पकड़ी।
"नाइट क्लब," राज ने ड्राइवर से कहा।
क्लब का नाम था 'नाइटशेड'। अंदर अंधेरा था। लाल बत्तियाँ। भीड़। शराब की बोतलें। संगीत इतना तेज़ था कि दिल की धड़कनें गीत में खो गई थीं।
सुमन अंदर घुसी तो हर आँख उस पर थी।
वह काली थी — सच में काली। बाकी सब रंगीन कपड़ों में थे, सोने-चाँदी की चमक में। वह सादी काली थी। पर वह काली इतनी गहरी थी कि सारी रोशनी उसी पर आकर रुक गई।
उसकी जांघें — उन पर वह स्लिट। हर कदम पर वह स्लिट खुलता। उसकी जांघ का ऊपरी हिस्सा — मोटा, गोरा, चिकना — झलक जाता। फिर बंद हो जाता। फिर खुलता।
उसके स्तन — बिना ब्रा के — हर थिरकन पर हिलते। ड्रेस का कपड़ा उनके पीछे पीछे जाता। उसके निप्पल कड़े थे — और साफ दिख रहे थे। कपड़े के नीचे से दो काली बूँदों की तरह।
उसके पीछे राज था। उसका हाथ उसकी कमर पर। उसकी उँगलियाँ ड्रेस के पतले कपड़े के ऊपर से उसकी नंगी चूत के ऊपर थी। एक इंच। बस एक इंच नीचे — और वह उसे छू लेता।
पर उसने छुआ नहीं। अभी नहीं।
बार पर बैठे। दो शॉट्स। फिर दो और।
सुमन के गाल गुलाबी हो गए। उसकी आँखें नम। वह अपनी सीट पर संगीत के साथ डोलने लगी — उसकी चूचियाँ डोलीं, उसकी गांड सीट पर रगड़ खाने लगी।
रात के ग्यारह बजे थे। डांस फ्लोर पैक था। डीजे ने एक धीमा, भारी, कामुक गाना बजाया — जो शरीरों को हिलने पर मजबूर कर दे।
राज ने सुमन का हाथ पकड़ा। उसे डांस फ्लोर के बीचोंबीच ले गया।
**"आज सिर्फ तुम। डांस करो। मैं देखूंगा।"**
राज से रहा नहीं गया।
उसने सुमन को पकड़ा। ड्रेस का नेकलाइन नीचे खींचा। एक चूची बाहर आई — गोरी, बड़ी, निप्पल सख्त। उसने अपना मुँह उस पर रख दिया।
जोर से चूसा। पूरा भरके मुँह में लिया।
"अह्ह्ह..." सुमन की पीठ कमान की तरह झुक गई।
राज ने निप्पल को दाँतों से दबाया। फिर चूसा। फिर चूसा। दूध पी रहा हो जैसे। जीभ से घुमाया।
"अह्ह मेरी राँड... मेरी जानेमन..."
"हट बदमाश," सुमन ने उसे धक्का दिया। लेकिन हँस रही थी। उसकी चूची पर लार चमक रही थी। "चल अब। रात आठ बजे हैं।"
![[Image: full-body-shot-an-indian-3Gx-Na2AREY.png]](https://i.postimg.cc/kMSdxfN6/full-body-shot-an-indian-3Gx-Na2AREY.png)
![[Image: magnific-bending-over-big-tits-DB9TG0Dpcl.png]](https://i.postimg.cc/Wbzmh0pf/magnific-bending-over-big-tits-DB9TG0Dpcl.png)
सड़क पर निकले।
रात का तापमान गर्म था। या फिर सुमन के शरीर की गर्मी थी — राज को फर्क नहीं पड़ता था।
सुमन दो कदम आगे चल रही थी। राज उसके पीछे।
हर कदम के साथ — सुमन की चूचियाँ उछलतीं। ऊपर नीचे। जैसे दो रसीले फल हवा में झूल रहे हों।
उसकी गांड — वह ड्रेस के अंदर बायीं तरफ खिसकती, दायीं तरफ खिसकती। थोंग की डोरी बीच में धंसी हुई, दोनों गाल बाहर नंगे।
अगल-बगल से गुजरते लोगों की नज़रें सुमन पर टिक गईं।
एक चाय वाले ने चम्मच गिरा दिया। उठाने का नाटक करते हुए उसने सुमन की जांघों को घूरा।
एक युवक — शायद कॉलेज का छात्र — ने अपना मुँह खोल दिया। उसकी नज़र सुमन के स्तनों और उसकी खुली जांघ के बीच फँस गई। उसने अपने पेंट के ऊपर से अपना लंड खुजाया।
एक बुज़ुर्ग आदमी सुमन को देखकर ठिठक गया। उसकी पत्नी उसे घसीटते हुए ले गई।
राज का लंड पेंट में धक्के मार रहा था। वह मुस्कुरा रहा था। सुमन भी मुस्कुरा रही थी — आगे चलते हुए, जानती थी कि सब उसे देख रहे हैं, और उसे फर्क नहीं पड़ता था।
कुछ दूर चलने के बाद — टैक्सी स्टैंड। टैक्सी पकड़ी।
"नाइट क्लब," राज ने ड्राइवर से कहा।
क्लब का नाम था 'नाइटशेड'। अंदर अंधेरा था। लाल बत्तियाँ। भीड़। शराब की बोतलें। संगीत इतना तेज़ था कि दिल की धड़कनें गीत में खो गई थीं।
सुमन अंदर घुसी तो हर आँख उस पर थी।
वह काली थी — सच में काली। बाकी सब रंगीन कपड़ों में थे, सोने-चाँदी की चमक में। वह सादी काली थी। पर वह काली इतनी गहरी थी कि सारी रोशनी उसी पर आकर रुक गई।
उसकी जांघें — उन पर वह स्लिट। हर कदम पर वह स्लिट खुलता। उसकी जांघ का ऊपरी हिस्सा — मोटा, गोरा, चिकना — झलक जाता। फिर बंद हो जाता। फिर खुलता।
उसके स्तन — बिना ब्रा के — हर थिरकन पर हिलते। ड्रेस का कपड़ा उनके पीछे पीछे जाता। उसके निप्पल कड़े थे — और साफ दिख रहे थे। कपड़े के नीचे से दो काली बूँदों की तरह।
उसके पीछे राज था। उसका हाथ उसकी कमर पर। उसकी उँगलियाँ ड्रेस के पतले कपड़े के ऊपर से उसकी नंगी चूत के ऊपर थी। एक इंच। बस एक इंच नीचे — और वह उसे छू लेता।
पर उसने छुआ नहीं। अभी नहीं।
बार पर बैठे। दो शॉट्स। फिर दो और।
सुमन के गाल गुलाबी हो गए। उसकी आँखें नम। वह अपनी सीट पर संगीत के साथ डोलने लगी — उसकी चूचियाँ डोलीं, उसकी गांड सीट पर रगड़ खाने लगी।
रात के ग्यारह बजे थे। डांस फ्लोर पैक था। डीजे ने एक धीमा, भारी, कामुक गाना बजाया — जो शरीरों को हिलने पर मजबूर कर दे।
राज ने सुमन का हाथ पकड़ा। उसे डांस फ्लोर के बीचोंबीच ले गया।
**"आज सिर्फ तुम। डांस करो। मैं देखूंगा।"**


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)