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Adultery बदलाव, मजबूरी, सेक्स या जिंदगी.....
#70
सब शांत ही चलता रहा। नाश्ता कैसे-कैसे करके आरोही के गले से उतरा। इसी बीच राहुल का फोन आया तो वह उस पर बिजी हो गया। आरोही भी सब साफ करके अपना काम खत्म करने में गई। और जैसे कुछ हुआ ही नहीं सब वैसा ही रहा।


बस आरोही के मन में तूफान सा रहा, इतना मसले जाने से वह जहाँ शर्म, और अपमान से थोड़ा दुखी थी, वहीं सबसे बड़ी बात उसे उत्तेजना हो रही थी, रोमांच हो रहा था। वह काम करते हुए बार-बार राहुल को देख रही थी। गाल लाल थे। स्तन की घुंडियाँ बार-बार कड़ी हो जा रही थीं।

क्योंकि कहीं ना कहीं आरोही को पता था कि यह सब तो होना ही था इसीलिए दुख या अपमान की भावना तो अब पीछे छूट ही जानी थी। लेकिन रोमांच और राहुल की ओर खिंचाव कुछ नया सा था।

इसी बीच आरोही को बाथरूम जाने का हुआ, तो राहुल से पूछकर चली गई।

और वहाँ अपनी पैंटी उतारते ही उसे चिपचिपापन दिखा। पैंटी भीगी हुई थी। और पैंटी पर एक धब्बा बना था।

कमोड पर बैठते ही आरोही सोचने लगी कि यह क्या हो रहा है, इतना तो वह अपने पति के छूने या छेड़-छाड़ से कभी गीली नहीं हुई। सोचते-सोचते, “कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरी योनि में कोई इंफेक्शन हो गया है, और यह पानी आ रहा है।”

यह सोचकर आरोही ने एक उंगली लगाकर देखना चाहा तो उसे कुछ खास अलग नहीं लगा। पता नहीं क्या सोचकर आरोही अपनी उंगली योनि के अंदर डाल देती है।

“ईहहहहह................” हल्की की सिसकारी फूटने के साथ ही उसे अंदर गर्मी के साथ और अधिक चिपचिपापन महसूस होने लगता है। उसके दिमाग में राहुल का उसके स्तन का मसलना और राहुल का जोश याद आने लगता है।

“उफ आज राहुल कितने वाइल्ड तरीके से मेरी चूचियाँ दबा रहा था.......” चूचियाँ मन में बोलते हुए भी आरोही शर्माती है। “उफ कैसे गंदे शब्द बोलने लगी हूँ......” लेकिन एक हल्की सी मुस्कान भी थी। और पता नहीं आरोही जान रही थी या अनजाने में हो रहा था। उसकी उंगली अभी भी उसकी योनि की गहराई में मानों कुछ खोज ही रही थी।

“उफ....... उसके हाथ कितने कड़क थे....... और मेरी छातियाँ........” कमोड पर पेशाब करने के लिए बैठी आरोही, पेशाब ना करके कहीं और दुनिया में जा रही थी क्योंकि अब उसका एक हाथ अपने बाएँ स्तन को छू रहा था और दूसरा योनि के अंदर था।

आरोही को पता ही नहीं चलता की कब उसका एक हाथ उसका स्तन को दबाने लगा, और दूसरे हाथ ही उंगली अब धीरे-धीरे योनि में अंदर बाहर होने लगी—आहहहहहहहहहहहहहहहह................रा................हु..............ल........नहीं............


आरोही की कल्पनाओं में उसके स्तन राहुल शायद मसल रहा था... या फिर चूस रहा था.. और उसकी उंगली ही उसकी योनि में चल रही थी। पता नहीं क्या था लेकिन आरोही के मुँह से अस्फुट आहें और कराह निकल रहीं थीं, और आनंद भरी ये चीखें ऐसी थीं, जो आरोही ने पहले कभी नहीं महसूस की थी।

आरोही इसमें गुम होती जा रही थी...... आहहहह.............हहहहहह...... और आरोही का उंगली और तेजी से साथ उनकी योनि में चलने लगी। उसकी सलवार जो नीचे घुटने तक थी और पैंटी, वह और नीचे हो गई क्योंकि आरोही अपनी कमर और नितंब को हल्का-हल्का आगे पीछे करके झटकने लगी थी।

आरोही का पूरा मुँह लाल हो रहा था...... उहंहंहंहहंहंहहह......................... करते हुए उसकी उंगली तेज हो रही थी। राआआआाआआ...........................हुललललललललललललललललललललल...........कितना तेज कर..........रह..............ऐ..........हो................ब...........हु....................त.............ग.....र....म.............है........जाने क्या बड़बड़ाती हुई आरोही अपनी कमर को एक झटके में कमर से ऊपर उठाती है और—

आआआआ.......................खककककककककककककक................हहहहहहहहहहहहहहह.............आआआ...................आंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआंआं...............करते हुए उसके योनि से एक तेज धार निकली ऊँची सी...................


आरोही को बहुत तेज आर्गैज्म आ गया था..............और शायद वह स्क्वर्ट कर बैठी थी..............आरोही जिसे अपनी जिंदगी में आर्गैज्म का मजा ढंग से ना मिला हो....................... जो सेक्स को केवल टांग उठाकर धक्के खाने और पति के लिंग से वीर्य निकल जाने को जानती हो.......वह आर्गैज्म और स्क्वर्टिंग के नशे से निढ़ाल हो गई......


धम्ममममममम से वह कमोड पर नितंब रखकर ऐसा बैठी मानो कितनी दूर से दौड़ती आई हो............

सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र............................. उसकी योनि से जब पेशाब की धार गिरने लगी तब उसे होश आया.... पेशाब उसके सलवार और जांघों पर लग गया था...............

“अरे यह मैंने क्या किया..... अपनी उंगली से मैंने यह किया.......... उफ.... यह मैं क्या होती जा रही हूँ..... राहुल तो मुझे पागल कर देगा....... मैंने अपने ऊपर ही पेशाब कर लिया......” आरोही जल्दी से उठती है और पानी से अपनी जांघें साफ करती है।


लेकिन फिर वह नहा ही लेती है। गनीमत थी कि वह अंदर वाले बाथरूम में थी और राहुल दूसरे कमरे में था। नहीं तो आरोही जिस हालत में थी आज राहुल उसके साथ संभोग करके ही मानता।

थकी-थकी सी आरोही कपड़े बदलकर आ गई। आरोही थकी थी, लेकिन राहुल को भी पता नहीं लगा कि आरोही कौन सा धमाका करके आई है। और अब उसकी हरकतें आरोही को कहाँ ले जा रही हैं।


राहुल ने कहा—चलो तैयार हो जाओ। बाजार चलते हैं।

पहले तो वह सकपकाई  लेकिन राहुल की मुस्कान देखकर वह मान गई। और चारी भी क्या था। अभी तो शाम होने में बहुत समय बाकी था।

वह अलमारी से एक साधारण सलवार सूट निकालकर बदल आई। राहुल ने देखा और बोला, "कितनी सुंदर लग रही हो। एकदम पटाखा माल।” और यह करके उसके नितंब पर एक थप्पड़ लगाकर दबा दिया। आरोही आउचचचच करके चिहुंक गई और एक हल्की सी शर्मीली मुस्कान उसके ओंठों पर आई और चली गई।

“चलो, कार में बैठो।"

वे नीचे गए, राहुल की लग्जरी कार में बैठे। राहुल ने ड्राइविंग शुरू की, और रास्ते में आरोही से बातें करने लगा।

"तुम्हें पता है, मैं तुम्हें कितना पसंद करता हूं? तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारी सादगी... सब कुछ। आज तुम्हें खुश करूंगा।" उसके शब्द आरोही को अच्छा लग रहे थे, जैसे कोई प्रेमी बात कर रहा हो। लेकिन अभी आज और पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हो रहा था उसकी याद से वह असहज भी थी।


वे शहर के बड़े बाजार पहुंचे—एक मॉल जहां शॉपिंग, फूड कोर्ट सब कुछ था। राहुल ने आरोही का हाथ पकड़ लिया और बोला, "चलो, शॉपिंग करते हैं। तुम्हें जो चाहिए, ले लो।"

आरोही ने मना किया—"सर, नहीं... मुझे कुछ नहीं चाहिए।"

लेकिन राहुल ने जोर दिया। "नहीं, आज मैं कहता हूं, लेना पड़ेगा। तुम्हारी जरूरत की चीजें। घर के लिए, खुद के लिए। चलो, पहले खाने-पीने के सामान देखते हैं।"

वे किराना सेक्शन में गए। राहुल ने ट्रॉली ली और आरोही से पूछा, "क्या चाहिए घर के लिए? खाने का सामान ले लो। अरे यार तुम या परिधि कहाँ आओगी। ले लो पैसे ही बचेंगे। वैसे भी सारा बोझ तुम पर है। परिधि की गांड़ पर चर्बी अधिक ही है।"

परिधि को इस तरह गाली देने पर आरोही हिचकिचाई, लेकिन बात सही भी थी, सब बोझ उस पर ही था, और राहुल की जोर देने वाली नजर से वह बोली, "जी, ले लेती हूँ... दाल... और कुछ खाने का सामना।"

राहुल ने ट्रॉली में सामान डालना शुरू किया—बेस्ट क्वालिटी का किराने का सामान। आरोही ने रोका—"सर, इतना महंगा... घर के लिए काफी है।"

लेकिन राहुल ने हंसकर कहा, "तुम्हारे घर के लिए है। चिंता मत करो। और हां, परिधि के बच्चे के लिए मिल्क पाउडर ले लो। परिधि की सजा उसका बच्चा क्यों भुगते?" आरोही की आंखें नम हो गईं—राहुल की यह केयर उसे छू रही थी। वे सामान लेते रहे, राहुल बार-बार आरोही की कमर छूता, लेकिन बचाकर। और आरोही को उतना बुरा भी नहीं लग रहा था।

"तुम्हें खुश देखकर अच्छा लगता है," वह बोला।

शॉपिंग के बाद राहुल ने आरोही को आइसक्रीम पार्लर ले जाया। "क्या फ्लेवर? वनीला? चॉकलेट?"

आरोही ने शर्माते हुए लेकिन कहा, "वनीला।"

राहुल ने दो कोन लिए, एक आरोही को दिया। वे बेंच पर बैठे, आइसक्रीम खाते हुए। राहुल ने आरोही की उंगली पकड़ी और बोला, "तुम्हारी जिंदगी में कितनी मुश्किलें हैं, लेकिन तुम मजबूत हो। कोई नहीं अब तुम मेरी प्रॉपर्टी हो।"

आरोही को अच्छा लग रहा था—काफी समय से किसी ने इतना प्यार नहीं जताया था। लेकिन मन में गिल्ट था। आइसक्रीम खाकर वे कार में बैठे, और घर की ओर चल पड़े। रास्ते में राहुल ने गाने लगाए, आरोही को हंसाया।

आरोही सोच रही थी, "आज का दिन कैसा है इस समय कितना अच्छा लग रहा है। शायद राहुल बदल रहा है। लेकिन सुबहर क्या था। और मैंने बाथरूम में क्या किया।” अपना सोचते ही आरोही का मुँह लाल हो गया।

फ्लैट पहुंचते ही राहुल ने सामान रखा और बोला, "अच्छा लगा ना आज?" आरोही ने हां में सिर हिलाया।

लेकिन फिर राहुल ने कैजुअली कहा, "चलो, फिर अब फटाफट अपनी चूत खोलो।"

आरोही एकदम से चौंक गई—जैसे कोई थंडरबोल्ट गिरा हो।

"क्या?" वह हकलाते हुए बोली, चेहरा सफेद पड़ गया।

राहुल ने जैसे कुछ सामान्य कहा हो, बोला, "हां, चल कपड़े खोल टांग उठाकर चूत दिखा, और क्या।"

और वह अपने लैपटॉप पर कुछ करने लगा, जैसे बात खत्म हो गई हो। आरोही जड़ हो गई—शर्म और डर से। "यह क्या कह रहा है? इतनी आसानी से?"

उसके मन में उथल-पुथल थी। ऐसा नहीं की वह उसे लगा था कि यह समय नहीं आएगा। लेकिन अचानक वह भी अभी, यानी अभी इतनी केयर और प्यार। फिर यह। वह खड़ी रही, हिल नहीं पा रही थी।

राहुल ने कुछ मिनट बाद देखा और डांटा, "क्या हुआ? सुनी नहीं? इधर टेबल पर लेटकर टांग फैला और चूत खोल। जब खोल लेना तो मुझे बुला लेना।" उसकी आवाज सख्त थी, जैसे कोई ऑर्डर दे रहा हो।

आरोही घबराई हुई बोलती है। "सर... प्लीज... यह..." लेकिन राहुल ने इग्नोर कर दिया, काम में लग गया।

आरोही परेशान हो गई। "यह क्या है? अभी-अभी इतना प्यार, और अब यह?"

वह मन ही मन रो रही थी। किसी तरह से वह डाइनिंग टेबल के पास गई। टेबल ठंडा था, कठोर। बिल्कुल जैसा राहुल इस समय लग रहा था। वह क्या करे क्या ना करे। लेकिन यह तो करना ही था। वह बैठी, लेकिन शर्म से मर रही थी।

"कैसे करूं? अमित के सामने भी कभी नहीं... और इसे करना ही था तो खुद कर लेता। जैसा सुबह कर रहा था।" लेकिन फिर उसने धीरे से सलवार का नाड़ा खोला, नीचे सरकाया। फिर पैंटी।

अब उसकी योनि नंगी थी और साथ ही नितंब भी वह नितंबों पर टेबल की ठंडक महसूस कर रही थी। अभी उसकी जांघें और योनी कुर्ते के कपड़े से ढंकीं थीं। वह लेट नहीं पा रही थी। कसमसा रही थी टेबल की ठंडक और आगे क्या होगा इसकी सिहरन उसे हो रही थी।

पेशोपेश में थी कि कैसे वह टांगें फैलाए,अजीब लग रहा था—टेबल पर लेटे, पैर हवा में, योनि चौड़ी करके खोले। और आज पहली बार वह अपनी योनि दिखाने वाली थी।

"यह क्या कर रही हूं? जैसे कोई वेश्या..." शर्म से उसका शरीर कांप रहा था। वह बुलाने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही बैठी रही। राहुल ने पूछा भी नहीं। वैसे ही सलवार और पैंटी पैरों में फंसी थी।

मन में लड़ाई चल रही थी। क्या करे क्या ना करे। फिर डर से आवाज दी—"सर..."

राहुल ने पूछा, "क्या हुआ? चूत खोली। टांग वैसे फैलाना जैसा चुदते समय फैलाती थी।" आरोही बोल नहीं पाई बस बैठी रही, केवल—"आ जाइए।" कहा। राहुल ने देखा—“अरे गांड रखकर क्यों बैठी है, लेट और टांग उठा, तब बुलाना।”

अब आरोही फिर बोलती है, “प्लीज....”

राहुल ने डांटा—"प्लीज क्या होता है? जल्दी लेट और साफ बोल, नहीं तो सजा अच्छे से दूँगा।"

आरोही डर गई, और घबराते हुए लेट गई—"सर लेट गई हूँ। चू......त... टांग फैलाकर चूत दिखा रही हूँ।"

राहुल हंसा—"गुड गर्ल यह हुई ना बात। आ अब देखें तेरी चूत कितनी मस्त है।” आरोही की सलवार और पैंटी पैरों में फंसी थी। राहुल ने पहले बेदर्दी से उनको खींचा—यह क्यों नहीं निकाला। और निकालकर फेंकने से पहले पैंटी सूंघा............. उफफफफफफफफ बड़ी प्यारी महक है।

अब सलवार और पैंटी को फेंककर उसने आरोही की टांगें फैलाई, योनि खोली। और देखा।

"वाह, कितनी प्यारी चूत है। गुलाबी, टाइट।" वह आरोही की चूत को देखते हुए बोला, जैसे कोई आर्ट पीस हो। दोनों टांगों को हाथों में पकड़े चूत को निहार रहा था। “तेरी जांघें कितनी चिकनी हैं,” कहते उसने आरोही को टांगों से पकड़कर अपनी ओर खींचा और जाँघों पर चूमा........ सीईईईईईईईईईईईईईईईईईई.... आरोही सिसक पड़ी।

आरोही शर्म से मर रही थी—"सर... प्लीज, बंद करो।"

लेकिन राहुल ने टीज किया—"क्यों? यह तो मेरी प्रॉपर्टी है। एकदम चिकनी क्लीन शेव्ड है। लेकिन थोड़ी सूजी लग रही है। क्या बात है? जोर से दबा दिया था क्या?” राहुल ने आरोही की योनि को अपनी उंगलियों से सहलाया। आरोही सिसकारती है........आहहहहहहह..... मन में—“मैंने आज उंगली डाली थी उसी के कारण सूजी है।”

राहुल की उंगलियों में गीलापन लगता है और वह मुस्कुराता है, “वाह जानेमन गीली हो रही हो। यानी मन है। अब तो अच्छे से मजा लूँगा। जूस मीठा होगा ना" आरोही चौंक गई—"नहीं सर... वहां... गंदा है।"

लेकिन राहुल ने अनसुना कर दिया। वह आरोही की टांगों के बीच बैठ गया, और पहले जांघों को चाटने लगा। कोमल और चिकनी जांघों पर पहली बार किसी बाहरी की जुूबान चल रही थी। आरोही मारे रोमांच के कांप रही थी............आहहहहहहहहहहहहहह........ उसकी जांघें थरथरा रहीं थीं।


राहुल किसी माहिर खिलाड़ी की तरह से पिंडली से लेकर जांघ और उपर जाँघों के जोड़ यानि योनि के आरंभ तक चूमता और फिर दूसरी जांघ की ओर चला जाता है। आरोही की योनि को वह छूता भी नहीं। आरोही एकदम पागल सी हो जाती है............

आहहहहहहहहहहहहहहहहह.......................माआआआआआआआआआआआआआआआआ...............करके सिसकियाँ लेती रहती है। इस बार जैसे ही राहुल जांघों को चूमता हुआ ऊपर आता है। आरोही एकदम से मचल जाती है, और उसके सिर पर हाथ रखकर अपनी योनि की ओर ढकेलने की कोशिश करती।


राहुल मुस्कुराता है, “चूत चटवानी है, मैडम को?” आरोही को होश आता है। वह एकदम शर्मा जाती है। वह क्या कर बैठी।

उधर राहुल आरोही की टांगों को घसीटता है...............सररररररररररर.... की आवाज से आरोही के नितंब सरकर मेज के किनारे आ जाते हैं। और राहुल आरोही की टांगों को अपने कंधे पर रखकर योनि को सामने लाता है।

और योनि को और फैलाया।

"देखो, कितना गुलाबी है अंदर। बड़ी सुगंध आ रही है—मीठी।"

वह नाक लगाकर सूंघा, आरोही सिहर उठी—"उंह... सर, मत..." लेकिन राहुल मस्त सूंघता रहा।

और आरोही सिसकारी भरती रही। उसकी तो मानों अंग-अंग में चिंगारी भर रही थी। स्तनों की घुंडियाँ एकदम कड़क हो उठी थीं। उसे बहुत मजा आ रहा था।

अब राहुल की जीभ योनि पर थी। धीरे से चाटना शुरू किया—नीचे से ऊपर, क्लिट पर घुमाते हुए। आरोही की सिसकारी निकली—"आऽऽह... नहीं..." लेकिन शरीर गर्म हो रहा था।

राहुल ने चाटना तेज किया—जीभ अंदर डाली, चूसने लगा।

"कितनी रसीरी है तेरी चूत। नमकीन-मीठी। अमित ने कभी चाटी?" उसके शब्द भारी थे, आरोही को अजीब लग रहा था।

लेकिन वह बोल पड़ी—"नहीं... सर, प्लीज... " आनंद से बुरा हाल भी था। उसकी योनि बहने लगी, सनसनी फैल रही थी। राहुल ने क्लिट को चूसा, उंगली डाली—"देख, कितनी टाइट। लेकिन गीली हो गई। मजा आ रहा है ना?"

आरोही सिसक रही थी—"आंआंआं... कुछ हो रहा है सर......रररररररररररर... मैं..........तो.......।" आरोही ने अपनी कमर उठानी शुरु कर दी वह राहुल के मुँह पर अपनी योनि दबा रही थी और कमर उछाल रही थी, मानों आरोही पागल हो गई थी।

वह घर की बहू या किसी की पत्नी नहीं बल्कि राहुल के कंट्रोल में भोगा जा रहा बदन थी, उसके आनंद की सीमा नहीं थी। राहुल ने जीभ तेज घुमाई, उंगली अंदर-बाहर की।

आरोही की सिसकारियां और तेज हुईं—"आऽऽह... उंह... राहुल....कमीने... आ रही हूँ.................... हूँ................... हूँहूँहूँहूँ............. हूँहूँहूँहूँहूँ............. हूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँ............ हूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँहूँ......."

और वह जाने क्या-क्या बकते हुए राहुल को गाली देते हुए बहुत तेजी से झड़ गई—शरीर कांप उठा, योनि से फिर वही धारदार पानी निकला। यानी आज आरोही ने दो बार आर्गैज्म और स्क्वर्ट कर लिया। आरोही जैसी सीधी लड़की के लिए बहुत बड़ी बात थी।

राहुल पूरी योनि को मुँह में भरे लगा रहा, अंत में आरोही में पूरी योनि राहुल के मुँह में ठूंस दी, लेकिन राहुल ने पूरी ताकत से चाटा—"देख, कितना रस निकला। बहुत कर्रा माल है रे तू। अमित ने तेरी ऐसी चटाई लगता है नहीं की है। क्यों?"

आरोही हाँफ रही थी बहुत बुरी तरह से—गिल्ट से, थकान से भरपूर थी, लेकिन आनंद से परम संतुष्ट। एक संतुष्ट महिला की जो आंखें होती हैं। वैसी ही आरोही की थी। राहुल ने आरोही को बाहों में उठाया और कुर्सी पर अपनी गोद में बिठाया।

आरोही नीचे से पूरी नंगी थी ही। आरोही के नितंब राहुल के गोद में थे। थोड़ा दुलारने के बाद जैसे कोई अपने प्यारे खिलौने को दुलारता है वैसे ही। राहुल ने आरोही को लाकर बेड पर लिटा दिया। आरोही सब आंख खोले देखती रही। लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।

लगभग दो घंटे बाद, आरोही की आंख खुली और आरोही उठी अपनी कच्छी पहनी और कपड़े बदले और फिर रोज की तरह अपने घर गई।

लेकिन आज का दिन उसके मन में उलझन छोड़ गया। इतना यौन आनंद मिलना और उसका उंगली करना और राहुल के मुँह में अपनी योनि ठूंसना। क्या वह बहक रही है।
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आगे देखते हैं क्या होता है।
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RE: बदलाव, मजबूरी, सेक्स या जिंदगी..... - by ramlal_chalu - 17-06-2026, 09:31 PM



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