12-06-2026, 02:34 PM
जब मैं खाना खा रहा था, तब काजल मेरी हवा कर रही थी। उसकी गोरी, नाजुक उँगलियाँ पंखे को धीरे-धीरे हिला रही थीं। उसकी नजर बार-बार मेरी तरफ जा रही थी। खाना खत्म करने के बाद जैसे ही मैं पलंग पर लेटा, चंपा तुरंत मेरे पैरों के पास आकर बैठ गई और मेरे पैर दबाने लगी। मैत्री की प्रस्तुति।
उसकी भारी-भरकम चूचियाँ झूल रही थीं और साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था। मैंने धीरे से कहा, “रहने दो चंपा… तुम थक गई होगी।”
चंपा ने नजरें झुकाए हुए कहा, “बाबाजी, आपकी सेवा करना मेरा सौभाग्य है।”
तब अंजली ने आगे बढ़कर अपनी माँ से कहा, “माँ, आप जाकर आराम कीजिए। हम दोनों यहीं बाबाजी जी के कमरे में लेट जाएँगे। अगर उन्हें कोई जरूरत पड़ी तो हम सामान ला देंगे।”
चंपा ने एक पल दोनों की तरफ देखा। उसके चेहरे पर हल्की शंका थी, लेकिन वह कुछ बोली नहीं। आखिरकार उसने सिर हिलाया और बोली, “ठीक है बेटी… लेकिन सावधानी से रहना। बाबाजी को कोई असुविधा न हो।”
कहकर चंपा कमरे से बाहर चली गई और दरवाजा बंद कर दिया।
अब कमरे में सिर्फ मैं, अंजली और काजल रह गए थे। लेखिका मैत्री है।
काजल मेरे पैर दबाती रही। उसके हाथ धीरे-धीरे मेरी जाँघों की तरफ बढ़ रहे थे। अंजली मेरे सिरहाने बैठी थी और मेरे बालों में उँगलियाँ फिरा रही थी। दोनों की नजरें बार-बार मेरी धोती की तरफ जा रही थीं, जहाँ मेरा लंड पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था।
रात 11 बजे के आसपास काजल थककर बगल के बिस्तर पर सो गई। अंजली अब अकेली मेरे पैर दबा रही थी। उसके हाथ जानबूझकर ऊपर की तरफ सरक रहे थे। मेरी धोती हल्की-हल्की सरक गई और मेरा मोटा लंड आधा नंगा होकर बाहर झाँकने लगा।
अंजली कुछ देर तक उसे देखती रही। फिर उसका हाथ अनजाने में मेरे लंड पर आ गया। जैसे ही उसकी गर्म उँगलियाँ मेरे लंड को छुईं, मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया।
अंजली ने धीरे से फुसफुसाया, “बाबाजी… आपका… बहुत बड़ा और गर्म है…”
मैं चुप रहा। अंजली ने अपनी साड़ी का पल्लू सरकाया और धीरे-धीरे मेरे लंड पर बैठने लगी। उसकी गीली चूत मेरे लंड के सिरे को छू रही थी।
अब कमरा सिर्फ तीनों की साँसों और हल्की-हल्की सिसकारियों से भर गया था…
अंजली कुछ देर तक मेरे खड़े लंड को देखती रही। उसकी साँसें तेज हो गई थीं। फिर उसका हाथ धीरे-धीरे आगे बढ़ा और मेरे मोटे लंड पर पड़ गया। जैसे ही उसकी गर्म उँगलियाँ मेरे लंड को छुईं, मेरा लंड फड़क उठा और पूरी तरह खड़ा हो गया।
अंजली ने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा, फिर शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में अपनी साड़ी का पल्लू और लहंगा ऊपर उठा लिया। उसकी गीली, गर्म चूत मेरे लंड के सिरे को छू रही थी।
धीरे-धीरे उसने अपना वजन डाला और मेरे मोटे लंड को अपनी चूत में अंदर लेना शुरू कर दिया।
“आह्ह्ह…” अंजली के मुँह से हल्की सिसकारी निकली।
मैं चुपचाप लेटा रहा, आँखें बंद किए हुए, लेकिन पूरा ध्यान उसकी चूत पर था। अंजली ने दोनों हाथ मेरी छाती पर रखे और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। कुछ ही देर में वह तेजी से उछल-उछलकर चुदाई करने लगी। उसके भरे हुए स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे।
“बाबा… आपका लंड… बहुत मोटा है…” अंजली हाँफते हुए बोली। मैत्री की लेखनी।
आखिरकार मैंने आँखें खोल दीं और शांत स्वर में पूछा, “ये क्या हो रहा है अंजली?”
अंजली शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसने रुकने की बजाय और तेजी से उछलते हुए कहा, “बाबा… आपकी सेवा कर रही हूँ… आपका लंड खड़ा था… लगा भूखा है… तो मैंने खाना दे दिया…”
मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसके कूल्हों को पकड़कर उसका साथ देना शुरू कर दिया। अब मैं भी नीचे से जोर-जोर से धक्के लगा रहा था।
उस रात अंजली तीन बार मेरे लंड पर चढ़कर चुदाई करवाकर पूरी तरह संतुष्ट हुई। हर बार झड़ते समय वह मेरी छाती पर गिर जाती और काँपती हुई कहती, “बाबा… मैं मर गई… बहुत मजा आया…”
सुबह होने से पहले वह थककर काजल के पास जाकर सो गई।
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आज के लिए बस यही तक दोस्तों.
पढने के लिए शुक्रिया.
आपको लगे की कोई कमेन्ट करनी है तो आपके कमेन्ट की प्रतीक्षा रहेगी.
मैत्री की तरफ से जय भारत.
उसकी भारी-भरकम चूचियाँ झूल रही थीं और साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था। मैंने धीरे से कहा, “रहने दो चंपा… तुम थक गई होगी।”
चंपा ने नजरें झुकाए हुए कहा, “बाबाजी, आपकी सेवा करना मेरा सौभाग्य है।”
तब अंजली ने आगे बढ़कर अपनी माँ से कहा, “माँ, आप जाकर आराम कीजिए। हम दोनों यहीं बाबाजी जी के कमरे में लेट जाएँगे। अगर उन्हें कोई जरूरत पड़ी तो हम सामान ला देंगे।”
चंपा ने एक पल दोनों की तरफ देखा। उसके चेहरे पर हल्की शंका थी, लेकिन वह कुछ बोली नहीं। आखिरकार उसने सिर हिलाया और बोली, “ठीक है बेटी… लेकिन सावधानी से रहना। बाबाजी को कोई असुविधा न हो।”
कहकर चंपा कमरे से बाहर चली गई और दरवाजा बंद कर दिया।
अब कमरे में सिर्फ मैं, अंजली और काजल रह गए थे। लेखिका मैत्री है।
काजल मेरे पैर दबाती रही। उसके हाथ धीरे-धीरे मेरी जाँघों की तरफ बढ़ रहे थे। अंजली मेरे सिरहाने बैठी थी और मेरे बालों में उँगलियाँ फिरा रही थी। दोनों की नजरें बार-बार मेरी धोती की तरफ जा रही थीं, जहाँ मेरा लंड पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था।
रात 11 बजे के आसपास काजल थककर बगल के बिस्तर पर सो गई। अंजली अब अकेली मेरे पैर दबा रही थी। उसके हाथ जानबूझकर ऊपर की तरफ सरक रहे थे। मेरी धोती हल्की-हल्की सरक गई और मेरा मोटा लंड आधा नंगा होकर बाहर झाँकने लगा।
अंजली कुछ देर तक उसे देखती रही। फिर उसका हाथ अनजाने में मेरे लंड पर आ गया। जैसे ही उसकी गर्म उँगलियाँ मेरे लंड को छुईं, मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया।
अंजली ने धीरे से फुसफुसाया, “बाबाजी… आपका… बहुत बड़ा और गर्म है…”
मैं चुप रहा। अंजली ने अपनी साड़ी का पल्लू सरकाया और धीरे-धीरे मेरे लंड पर बैठने लगी। उसकी गीली चूत मेरे लंड के सिरे को छू रही थी।
अब कमरा सिर्फ तीनों की साँसों और हल्की-हल्की सिसकारियों से भर गया था…
अंजली कुछ देर तक मेरे खड़े लंड को देखती रही। उसकी साँसें तेज हो गई थीं। फिर उसका हाथ धीरे-धीरे आगे बढ़ा और मेरे मोटे लंड पर पड़ गया। जैसे ही उसकी गर्म उँगलियाँ मेरे लंड को छुईं, मेरा लंड फड़क उठा और पूरी तरह खड़ा हो गया।
अंजली ने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा, फिर शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में अपनी साड़ी का पल्लू और लहंगा ऊपर उठा लिया। उसकी गीली, गर्म चूत मेरे लंड के सिरे को छू रही थी।
धीरे-धीरे उसने अपना वजन डाला और मेरे मोटे लंड को अपनी चूत में अंदर लेना शुरू कर दिया।
“आह्ह्ह…” अंजली के मुँह से हल्की सिसकारी निकली।
मैं चुपचाप लेटा रहा, आँखें बंद किए हुए, लेकिन पूरा ध्यान उसकी चूत पर था। अंजली ने दोनों हाथ मेरी छाती पर रखे और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। कुछ ही देर में वह तेजी से उछल-उछलकर चुदाई करने लगी। उसके भरे हुए स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे।
“बाबा… आपका लंड… बहुत मोटा है…” अंजली हाँफते हुए बोली। मैत्री की लेखनी।
आखिरकार मैंने आँखें खोल दीं और शांत स्वर में पूछा, “ये क्या हो रहा है अंजली?”
अंजली शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसने रुकने की बजाय और तेजी से उछलते हुए कहा, “बाबा… आपकी सेवा कर रही हूँ… आपका लंड खड़ा था… लगा भूखा है… तो मैंने खाना दे दिया…”
मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसके कूल्हों को पकड़कर उसका साथ देना शुरू कर दिया। अब मैं भी नीचे से जोर-जोर से धक्के लगा रहा था।
उस रात अंजली तीन बार मेरे लंड पर चढ़कर चुदाई करवाकर पूरी तरह संतुष्ट हुई। हर बार झड़ते समय वह मेरी छाती पर गिर जाती और काँपती हुई कहती, “बाबा… मैं मर गई… बहुत मजा आया…”
सुबह होने से पहले वह थककर काजल के पास जाकर सो गई।
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आज के लिए बस यही तक दोस्तों.
पढने के लिए शुक्रिया.
आपको लगे की कोई कमेन्ट करनी है तो आपके कमेन्ट की प्रतीक्षा रहेगी.
मैत्री की तरफ से जय भारत.



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