12-06-2026, 02:29 PM
अंजली गांड उठा-उठाकर मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थी। वह पूरी तरह पागल हो चुकी थी। उसकी आँखें उलट गई थीं और मुँह से लगातार अजीब-सी सिसकारियाँ निकल रही थीं। मैंने अचानक पलटी मारी और अंजली को अपने ऊपर ले लिया। अब वह जोर-जोर से उछल-उछलकर अपनी चूत में मेरा पूरा 9.5 इंच का मोटा लंड ले रही थी, जैसे कई जन्मों से लंड की भूखी हो। रचयिता मैत्री।
उसकी भरी हुई चूचियाँ मेरे चेहरे पर उछल रही थीं। मैंने दोनों चूचियों को जोर से पकड़कर मसलते हुए कहा, “ले… ले अपनी चूत में पूरा लंड… गांड हिला… और तेज!”
एक घंटे की जोरदार, पसीने वाली चुदाई के बाद मैंने अंजली की चूत के सबसे गहरे हिस्से में अपना गाढ़ा, गरम वीर्य उड़ेल दिया। अंजली की चूत पूरी तरह भर गई। वीर्य उसकी चूत से बाहर निकलकर जाँघों पर बहने लगा।
काजल पास बैठी एकटक सब देख रही थी। उसकी आँखों में शर्म के साथ-साथ गहरी ललक भी थी। उसकी साँसें तेज हो रही थीं और उसकी चूत भी हल्की-हल्की गीली हो चुकी थी।
काजल ने मेरे पैर पकड़कर नरम, काँपती आवाज में पूछा, “प्रभु… आप खुश हुए या नहीं?”
मैंने गुरु वाली भारी, गंभीर आवाज में कहा, “तुम दोनों परीक्षा में पास हो गईं… लेकिन…”
अंजली ने अधीर और व्याकुल होकर तुरंत पूछा, “लेकिन क्या भगवान्?”
मैंने ठंडे स्वर में जवाब दिया,
“अब तुम दोनों को पिछले जन्म के पापों से मुक्ति पाने के लिए 7 दिन तक विशेष पूजा करनी होगी। इस पूजा का हर हिस्सा हम बाबा के माध्यम से बताएंगे और हम खुद यहाँ उपस्थित रहेंगे। लेकिन ये सारी पूजा तुम दोनों को पूरी तरह नंगी अवस्था में ही करनी होगी। हर विधि से पहले अपना तन, मन और धन हमें समर्पित करना होगा, ताकि हम उसे पवित्र कर सकें। पूजा के दौरान घर के किसी भी सदस्य को इस कमरे के पास नहीं आने देना है, वरना बहुत बड़ा अनिष्ट हो जाएगा।”
दोनों औरतें एक साथ सिर झुकाकर बोलीं, “जो आज्ञा प्रभु… हम तैयार हैं।”
मैंने कहा, “आज की पूजा समाप्त हुई। कल से नई पूजा शुरू होगी। अब कपड़े पहन लो।”
दोनों ने कपड़े पहन लिए। काजल नीचे चली गई, लेकिन अंजली मेरे पास ही बैठी रही। उसकी नजर बार-बार मेरी धोती की तरफ जा रही थी। मैत्री की रचना।
मैंने जोरदार काँपते हुए अपना शरीर ढीला छोड़ दिया और जमीन पर लेट गया। अंजली घबरा गई और तुरंत मेरे पास आई। उसने मेरे चेहरे पर हाथ रखकर पूछा, “बाबाजी… क्या हुआ? आप ठीक तो हैं ना?”
मैंने धीरे से आँखें खोलीं और कमजोर स्वर में बोला, “कुछ नहीं… भगवान चले गए।”
फिर बनावटी अंदाज में पूछा, “भगवान खुश हुए या नहीं?”
अंजली ने श्रद्धा और भक्ति से मेरे पैर छूते हुए कहा, “बाबा, सब आपकी दया है। हमसे जो बन सका हमने किया। अब सब आपके हाथ में है।”
अब अंजली को पूरा यकीन हो गया था कि भगवान सच में आए थे और उन्होंने हम पर कृपा की है।
मैं पलंग पर बैठ गया और अंजली से पानी माँगा। उसने तुरंत काजल को बुलाकर मेरे लिए खाना-पीना मँगवा लिया। थोड़ी देर बाद अंजली की माँ चंपा भी सभी मंदिरों से भोग लगाकर वापस आ गई।
चंपा ने हाथ जोड़कर पूछा, “बाबाजी, जैसा आपने कहा था वैसा ही किया। अब आगे क्या करना है?”
मैंने चंपा को गंभीर स्वर में निर्देश दिया, “अब तुम सब भोजन कर लो। और अपने पति को कल सुबह ही भगवान के सभी मंदिरों में हार चढ़ाने भेज दो। यह काम 9 दिनों के अंदर पूरा होना चाहिए। हर मंदिर में जाकर विधि-विधान से हार चढ़ाना, भोग लगाना और प्रार्थना करना। इसमें कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।”
चंपा ने सिर झुकाकर आज्ञा मानी, “जी बाबाजी… जैसी आपकी आज्ञा बाबाजी।”
वह मुखिया को बताने चली गई और कुछ देर बाद वापस आ गई।
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जुड़े रहिए दोस्तों.
मैत्री.
उसकी भरी हुई चूचियाँ मेरे चेहरे पर उछल रही थीं। मैंने दोनों चूचियों को जोर से पकड़कर मसलते हुए कहा, “ले… ले अपनी चूत में पूरा लंड… गांड हिला… और तेज!”
एक घंटे की जोरदार, पसीने वाली चुदाई के बाद मैंने अंजली की चूत के सबसे गहरे हिस्से में अपना गाढ़ा, गरम वीर्य उड़ेल दिया। अंजली की चूत पूरी तरह भर गई। वीर्य उसकी चूत से बाहर निकलकर जाँघों पर बहने लगा।
काजल पास बैठी एकटक सब देख रही थी। उसकी आँखों में शर्म के साथ-साथ गहरी ललक भी थी। उसकी साँसें तेज हो रही थीं और उसकी चूत भी हल्की-हल्की गीली हो चुकी थी।
काजल ने मेरे पैर पकड़कर नरम, काँपती आवाज में पूछा, “प्रभु… आप खुश हुए या नहीं?”
मैंने गुरु वाली भारी, गंभीर आवाज में कहा, “तुम दोनों परीक्षा में पास हो गईं… लेकिन…”
अंजली ने अधीर और व्याकुल होकर तुरंत पूछा, “लेकिन क्या भगवान्?”
मैंने ठंडे स्वर में जवाब दिया,
“अब तुम दोनों को पिछले जन्म के पापों से मुक्ति पाने के लिए 7 दिन तक विशेष पूजा करनी होगी। इस पूजा का हर हिस्सा हम बाबा के माध्यम से बताएंगे और हम खुद यहाँ उपस्थित रहेंगे। लेकिन ये सारी पूजा तुम दोनों को पूरी तरह नंगी अवस्था में ही करनी होगी। हर विधि से पहले अपना तन, मन और धन हमें समर्पित करना होगा, ताकि हम उसे पवित्र कर सकें। पूजा के दौरान घर के किसी भी सदस्य को इस कमरे के पास नहीं आने देना है, वरना बहुत बड़ा अनिष्ट हो जाएगा।”
दोनों औरतें एक साथ सिर झुकाकर बोलीं, “जो आज्ञा प्रभु… हम तैयार हैं।”
मैंने कहा, “आज की पूजा समाप्त हुई। कल से नई पूजा शुरू होगी। अब कपड़े पहन लो।”
दोनों ने कपड़े पहन लिए। काजल नीचे चली गई, लेकिन अंजली मेरे पास ही बैठी रही। उसकी नजर बार-बार मेरी धोती की तरफ जा रही थी। मैत्री की रचना।
मैंने जोरदार काँपते हुए अपना शरीर ढीला छोड़ दिया और जमीन पर लेट गया। अंजली घबरा गई और तुरंत मेरे पास आई। उसने मेरे चेहरे पर हाथ रखकर पूछा, “बाबाजी… क्या हुआ? आप ठीक तो हैं ना?”
मैंने धीरे से आँखें खोलीं और कमजोर स्वर में बोला, “कुछ नहीं… भगवान चले गए।”
फिर बनावटी अंदाज में पूछा, “भगवान खुश हुए या नहीं?”
अंजली ने श्रद्धा और भक्ति से मेरे पैर छूते हुए कहा, “बाबा, सब आपकी दया है। हमसे जो बन सका हमने किया। अब सब आपके हाथ में है।”
अब अंजली को पूरा यकीन हो गया था कि भगवान सच में आए थे और उन्होंने हम पर कृपा की है।
मैं पलंग पर बैठ गया और अंजली से पानी माँगा। उसने तुरंत काजल को बुलाकर मेरे लिए खाना-पीना मँगवा लिया। थोड़ी देर बाद अंजली की माँ चंपा भी सभी मंदिरों से भोग लगाकर वापस आ गई।
चंपा ने हाथ जोड़कर पूछा, “बाबाजी, जैसा आपने कहा था वैसा ही किया। अब आगे क्या करना है?”
मैंने चंपा को गंभीर स्वर में निर्देश दिया, “अब तुम सब भोजन कर लो। और अपने पति को कल सुबह ही भगवान के सभी मंदिरों में हार चढ़ाने भेज दो। यह काम 9 दिनों के अंदर पूरा होना चाहिए। हर मंदिर में जाकर विधि-विधान से हार चढ़ाना, भोग लगाना और प्रार्थना करना। इसमें कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।”
चंपा ने सिर झुकाकर आज्ञा मानी, “जी बाबाजी… जैसी आपकी आज्ञा बाबाजी।”
वह मुखिया को बताने चली गई और कुछ देर बाद वापस आ गई।
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जुड़े रहिए दोस्तों.
मैत्री.



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