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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#11
घर का दरवाज़ा बंद होते ही दोनों एक-दूसरे पर टूट पड़े।

सुमन ने राज के लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ा। कसकर। जैसे कोई चीज़ पकड़ता है जो छिन रही हो।
"अब तेरी बारी नहीं," सुमन ने कहाआवाज़ काँप रही थी, लेकिन आँखें जंगली थीं। "अब मेरी बारी है।"
उसने बेल्ट खोली। एक हाथ से। बटन खोला। ज़िपर नीचे किया।
राज का लंड बाहर निकला। सख्त। नीली नसें फूली हुईं। सिरा लाल, चमकदार, पानी से तर।
सुमन ने बिना समय गँवाए उसे अपने मुँह में भर लिया।

[Image: z-image-turbo-00029.png]

पूरा।
एक बार में।
राज के घुटने काँप गए। उसने दीवार पकड़ी। सुमन का मुँह गीला था, गर्म था, उसकी जीभ लंड के नीचे की नस पर घूम रही थी।
"चूस, रंडी," राज ने कहा। पहली बार। उसके मुँह से अपने आप निकला। "चीनाल। साली। बहन की लौड़ी। पूरा चूस मेरा लोड़ा।"
सुमन ने ऊपर देखा। राज के बाल पकड़े। उसके मुँह में लंड था, फिर भी वह मुस्कुरा रही थी।
फिर उसने और तेज़ चूसना शुरू कर दिया। उसका सिर ऊपर-नीचे हो रहा था। लार टपक रही थी। उसके मुँह की आवाज़चट-चट-चटपूरे हॉल में गूँज रही थी।
राज ने उसके बाल पकड़े। उसका मुँह चोदना शुरू कर दिया। लंड उसके गले के अंदर तक जा रहा था। सुमन की आँखों से पानी गयालेकिन उसने रोका नहीं। वह और जोर से चूस रही थी।
राज ने उसे उठाया। उसके कपड़े फाड़ने लगेड्रेस ऊपर खिसकाई, नीचे थोंग थी। उसने थोंग को एक झटके में साइड कर दिया। सुमन की चूत खुलीगीली, गर्म, लाल।
उसने अपनी दोनों हथेलियों से सुमन की चूचियाँ दबाईं। मसलनी शुरू कर दीं। निप्पल सख्त हो गएउसके अंगूठों के नीचे।
"रंडी," राज ने फिर कहा। "आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊँगा।"
"बना दे," सुमन ने कराहते हुए कहा। "बना दे, साले। पहले ही बन चुका है तेरी वजह से।"
उसने राज का लंड फिर पकड़ा। अपनी चूत पर रखा। बिना रुके, बिना पूछेबैठ गई।
एक ही झटके में पूरा अंदर।
दोनों चीखे।
राज ने सुमन को गोद में उठा लिया। उसकी जांघें राज की कमर पर। उसकी गांड राज के हाथों में। लंड उसके अंदर गहराबहुत गहराधँसा हुआ।
राज बेडरूम की तरफ चलने लगा। हर कदम पर लंड उसकी चूत के अंदर हिल रहा था। सुमन राज की गर्दन पर दाँत गड़ा रही थी। चूस रही थी। खून नहीं, निशान छोड़ रही थी।
बेड पर पहुँचते ही राज ने उसे फेंक दिया।
सुमन पीठ के बल गिरी। उसकी टांगें खुल गईं। उसकी चूतपूरी तरह खिली हुई, लबालब, पानी से चमकती हुई।
राज उसके बीच में घुटनों के बल बैठ गया। उसने अपना मुँह सुमन की चूत पर रख दिया।
जीभ अंदर। गर्मी। नमकीन। खट्टा-मीठा।
सुमन की पीठ झटके से उठी। उसने राज के बाल पकड़ेउसका मुँह और जोर से अपनी चूत पर दबाया।
राज ने उसकी चूत को चाटाअंदर से बाहर, ऊपर से नीचे। उसकी जीभ उसके अंदर घूम रही थी, उसकी चूत के होंठ चूस रही थी, उसकी लेबिया को दाँतों से दबा रहा था।
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 11-06-2026, 10:35 PM



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