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Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#10
Chapter 3

राज की पैंट में लंड पत्थर जैसा खड़ा था। उतारो तो छूटे, उतारो तो फटे। हर कदम पर रगड़ खा रहा था। अंडकोष सख्त हो गए थे। गर्मी ऐसे उठ रही थी जैसे आग लगी हो।

और सुमनवह तो और भी बदतर थी।
लिफ्ट में वह उससे दूर खड़ी थी, लेकिन राज ने देखा कि वह अपनी जांघों को एक-दूसरे से कैसे दबा रही थी। उसकी आँखें बेचैन थीं। होंठ सूखे हुए। साँसें भारी।
उसने अपनी थाई-स्लिट ड्रेस के नीचे हाथ डालासोचा कि राज नहीं देख रहाऔर अपनी चूत पर उँगली फेरी।
गीली थी।
बहुत ज्यादा गीली।
राज के लंड में झटका सा लगा। उसने अपनी पैंट की जिपर पर हाथ रखाडर रहा था कि कहीं खुल जाए।
"हम टैक्सी लेंगे," उसने कहा।
"नहीं," सुमन का गला सूखा था। "मेट्रो। मैं... मैं चाहती हूँ।"
राज ने उसकी तरफ देखा। आँखों में वही चमक थी जो आजकल रातों को आती थी।
मेट्रो। स्टेशन पर चढ़ते ही भीड़ थी। राज ने सुमन को कोने में खड़ा कर दिया। उसकी पीठ दीवार से लगी थी। सामने लोगों की दीवार।

उसकी थाई-स्लिट ड्रेसहर कोई देख रहा था। उसकी गोरी, मोटी रान दिख रही थी। लगभग जांघों के बिल्कुल ऊपर तक। अगर वह थोड़ा सा भी आगे झुकी तो उसकी चूत की नमी हवा में महकने लगेगी।

राज उसके बगल में खड़ा था। उसने अपना हाथ उसकी पीठ पर रखानीचे, कमर पर। उँगलियाँ ड्रेस के अंदर घुस गईं।

सुमन काँपी।

एक आदमीतीस-पैंतीस का, आँखें शराब की तरह घूर रहा थासुमन के सीने पर टिका देख रहा था। वह डीप नेक टॉप। सुमन के स्तनों की दरार। बड़े, भरे हुए, सफेद।

उस आदमी ने अपनी पैंट की जेब में हाथ डाला। राज ने देखावह अपने लंड को बाहर से सहला रहा था।

सुमन ने भी देख लिया।

वह और गीली हो गई। राज ने महसूस कियाउसकी ड्रेस पर एक गोल दाग फैल रहा था।

राज ने अपना मुँह उसके कान के पास रखा।

"देखा? उसका लंड खड़ा हो गया। तुझे देखकर।"

सुमन की आँखें बंद हो गईं। उसका मुँह खुला। एक दबी हुई कराह निकली।

"चुप रह," राज फुसफुसाया। "सब सुनेंगे। तेरी आवाज़ सुनकर और खड़े हो जाएँगे।"

सुमन ने राज के लंड पर हाथ रखापैंट के ऊपर से। दबाया। लंड ने जवाब दियानसें फूल गईं।
"जल्दी घर चल," सुमन ने कहा। "अब नहीं रुका जाता।"
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RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 11-06-2026, 10:34 PM



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