10-06-2026, 07:00 PM
मैंने अपने होठ काजल के होठों पर रख दिए और उसकी दर्द भरी सिसकारियों को अपने मुँह में ही दबा लिया। उसकी छोटी-सी कुंवारी चूत मेरी दो उँगलियों से पहले ही थोड़ी खुल चुकी थी, लेकिन अब मैं तीसरी अंगुली भी धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा।
काजल की चूत बेहद संकरी, टाइट और पूरी तरह कुंवारी थी। अंगुलियों के आने-जाने से वह थोड़ी मुलायम और गीली होने लगी, लेकिन फिर भी बहुत तंग थी।
“mmmphhh… बाबा… दर्द हो रहा है…अब आगे नहीं जायेगी....” काजल की चीख मेरे होठों में दब गई।
मैंने अपना मोटा, खड़ा लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया। लंड का गर्म सिरा उसकी छोटी-सी गुलाबी चूत को छूते ही काजल बुरी तरह तड़प उठी। उसकी जाँघें काँप रही थीं।
मैंने धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। लंड का मोटा सिरा उसकी चूत की फाँक को फैलाते हुए अंदर घुसने लगा।
थोड़ी देर बाद मेरा आधा लंड उसके अंदर चला गया। उसी पल काजल की कुंवारी चूत से खून की एक गर्म धारा फूट पड़ी। काजल दर्द से बेहोश हो गई। उसका पूरा शरीर अकड़ गया।
मैंने यही मौका सही समझा। मैंने लंड थोड़ा बाहर निकाला और एक जोरदार, पाशविक झटके में अपना पूरा 9 इंच लंबा और मोटा लंड जड़ तक काजल की टाइट कुंवारी चूत में धकेल दिया।
“mmmphhhhh!!!!” रचयिता मैत्री।
काजल की आँखें फट गईं। उसकी चीख मेरे मुँह में दब गई। उसकी चूत पूरी तरह फट गई थी। खून और चूत का पानी मिलकर बहने लगा।
मैंने तेज़ी से आगे-पीछे धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ “फच… फच… फच…” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
जैसे ही काजल को होश आया, उसकी हालत खराब हो गई। दर्द के मारे उसका पूरा शरीर तड़प रहा था। वह रो भी नहीं पा रही थी क्योंकि उसके होंठ मेरे होंठों में बंद थे। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
धीरे-धीरे दर्द मजे में बदलने लगा। उसकी गांड अपने आप ऊपर उठने लगी। मैंने अपनी गति और तेज़ कर दी और ताबड़तोड़, जानवरों जैसी चुदाई शुरू कर दी।
“आह्ह्ह… बाबा… बहुत दर्द हो रहा है… लेकिन… लेकिन अंदर कुछ और हो रहा है…” काजल ने मेरे मुँह से मुँह अलग करते हुए हाँफते हुए कहा।
मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “सहन कर बालिके… गुरुजी का लंड तेरी कुंवारी चूत को फाड़ रहा है… अब ये चूत हमेशा के लिए गुरुजी की हो गई है।”
30 मिनट की जोरदार चुदाई में काजल दो बार ज़ोर-ज़ोर से झड़ चुकी थी। उसकी चूत से खून, चुतरस और मेरे लंड का रस मिलकर बह रहा था। उसकी जाँघें पूरी तरह गीली हो चुकी थीं। मैत्री की प्रस्तुति।
लेकिन मैं अभी भी नहीं झड़ा था। शिलाजित का असर जो था।
जब मुझे लगा कि काजल अब थक रही है और दर्द ज्यादा हो रहा है, तो मैंने लंड निकाला और खड़ा हो गया। मेरा लंड अभी भी लोहे की तरह खड़ा और चमक रहा था, उस पर खून और रस लगा हुआ था।
जैसे ही मैं खड़ा हुआ, अंजली मेरे पैरों में गिर पड़ी। उसने मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और आँखों में आँसू भरकर बोली, “प्रभु… मुझसे क्या गलती हो गई? आपने मुझे अपना आशीर्वाद क्यों नहीं दिया? मैं भी अपनी भाभी की तरह चुदना चाहती हूँ…”
कहते हुए अंजली ने मेरा खून और रस लगा लंड मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।
मैंने उसके सिर पर हाथ रखा, उसे उठाया और पलंग पर ले जाकर लिटा दिया। फिर उसकी दोनों टाँगें कंधों पर रखकर अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे घुसाने लगा।
6 इंच तक लंड अंदर-बाहर होने लगा तो अंजली को खूब मजा आने लगा। मैं उसके भरे हुए स्तनों को जोर से मसल रहा था और एक निप्पल मुँह में लेकर चूस रहा था।
अचानक मैंने एक जोरदार, तूफानी धक्का मारा।
“ऊईईई माँ!!! मर गई!!! फट गई मेरी चूत!!! भा...भी....माँ चुद गई मेरी।”
अंजली की चीख निकल गई। मेरा पूरा 9.5 इंच का मोटा लंड एक ही झटके में जड़ तक उसकी चूत में समा गया। उसकी चूत फट गई और “फच...फच्च” की तेज आवाज के साथ अंदर तक फैल गई।
अब मैंने तूफानी रफ्तार पकड़ ली। लगातार जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। अंजली भी दर्द और मजा के मिश्रण में गांड उठा-उठाकर नीचे से मेरा लंड लेने लगी। कमरे में चूत की “चप-चप, फच-फच” की आवाज़ और दोनों की सिसकारियाँ गूँज रही थीं।
क्या बताऊँ यारों… माँ-बेटी और भाभी-ननंद के साथ एक साथ चुदाई का मजा अलग ही लेवल का था। निर्मात्री मैत्री पटेल।
अभी तो चुदाई सिर्फ शुरू हुई है…
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आज के लिए यही तक.
मैत्री का जय भारत।।.
काजल की चूत बेहद संकरी, टाइट और पूरी तरह कुंवारी थी। अंगुलियों के आने-जाने से वह थोड़ी मुलायम और गीली होने लगी, लेकिन फिर भी बहुत तंग थी।
“mmmphhh… बाबा… दर्द हो रहा है…अब आगे नहीं जायेगी....” काजल की चीख मेरे होठों में दब गई।
मैंने अपना मोटा, खड़ा लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया। लंड का गर्म सिरा उसकी छोटी-सी गुलाबी चूत को छूते ही काजल बुरी तरह तड़प उठी। उसकी जाँघें काँप रही थीं।
मैंने धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। लंड का मोटा सिरा उसकी चूत की फाँक को फैलाते हुए अंदर घुसने लगा।
थोड़ी देर बाद मेरा आधा लंड उसके अंदर चला गया। उसी पल काजल की कुंवारी चूत से खून की एक गर्म धारा फूट पड़ी। काजल दर्द से बेहोश हो गई। उसका पूरा शरीर अकड़ गया।
मैंने यही मौका सही समझा। मैंने लंड थोड़ा बाहर निकाला और एक जोरदार, पाशविक झटके में अपना पूरा 9 इंच लंबा और मोटा लंड जड़ तक काजल की टाइट कुंवारी चूत में धकेल दिया।
“mmmphhhhh!!!!” रचयिता मैत्री।
काजल की आँखें फट गईं। उसकी चीख मेरे मुँह में दब गई। उसकी चूत पूरी तरह फट गई थी। खून और चूत का पानी मिलकर बहने लगा।
मैंने तेज़ी से आगे-पीछे धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ “फच… फच… फच…” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
जैसे ही काजल को होश आया, उसकी हालत खराब हो गई। दर्द के मारे उसका पूरा शरीर तड़प रहा था। वह रो भी नहीं पा रही थी क्योंकि उसके होंठ मेरे होंठों में बंद थे। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
धीरे-धीरे दर्द मजे में बदलने लगा। उसकी गांड अपने आप ऊपर उठने लगी। मैंने अपनी गति और तेज़ कर दी और ताबड़तोड़, जानवरों जैसी चुदाई शुरू कर दी।
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मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “सहन कर बालिके… गुरुजी का लंड तेरी कुंवारी चूत को फाड़ रहा है… अब ये चूत हमेशा के लिए गुरुजी की हो गई है।”
30 मिनट की जोरदार चुदाई में काजल दो बार ज़ोर-ज़ोर से झड़ चुकी थी। उसकी चूत से खून, चुतरस और मेरे लंड का रस मिलकर बह रहा था। उसकी जाँघें पूरी तरह गीली हो चुकी थीं। मैत्री की प्रस्तुति।
लेकिन मैं अभी भी नहीं झड़ा था। शिलाजित का असर जो था।
जब मुझे लगा कि काजल अब थक रही है और दर्द ज्यादा हो रहा है, तो मैंने लंड निकाला और खड़ा हो गया। मेरा लंड अभी भी लोहे की तरह खड़ा और चमक रहा था, उस पर खून और रस लगा हुआ था।
जैसे ही मैं खड़ा हुआ, अंजली मेरे पैरों में गिर पड़ी। उसने मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और आँखों में आँसू भरकर बोली, “प्रभु… मुझसे क्या गलती हो गई? आपने मुझे अपना आशीर्वाद क्यों नहीं दिया? मैं भी अपनी भाभी की तरह चुदना चाहती हूँ…”
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मैंने उसके सिर पर हाथ रखा, उसे उठाया और पलंग पर ले जाकर लिटा दिया। फिर उसकी दोनों टाँगें कंधों पर रखकर अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे घुसाने लगा।
6 इंच तक लंड अंदर-बाहर होने लगा तो अंजली को खूब मजा आने लगा। मैं उसके भरे हुए स्तनों को जोर से मसल रहा था और एक निप्पल मुँह में लेकर चूस रहा था।
अचानक मैंने एक जोरदार, तूफानी धक्का मारा।
“ऊईईई माँ!!! मर गई!!! फट गई मेरी चूत!!! भा...भी....माँ चुद गई मेरी।”
अंजली की चीख निकल गई। मेरा पूरा 9.5 इंच का मोटा लंड एक ही झटके में जड़ तक उसकी चूत में समा गया। उसकी चूत फट गई और “फच...फच्च” की तेज आवाज के साथ अंदर तक फैल गई।
अब मैंने तूफानी रफ्तार पकड़ ली। लगातार जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। अंजली भी दर्द और मजा के मिश्रण में गांड उठा-उठाकर नीचे से मेरा लंड लेने लगी। कमरे में चूत की “चप-चप, फच-फच” की आवाज़ और दोनों की सिसकारियाँ गूँज रही थीं।
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आज के लिए यही तक.
मैत्री का जय भारत।।.



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