10-06-2026, 06:56 PM
जब काजल अंजली पर पानी डाल रही थी, तो अंजली की साड़ी भीगकर शरीर से चिपक गई और उसके उभरे हुए स्तन साफ दिखने लगे। फिर अंजली ने काजल पर पानी डाला। काजल की पतली साड़ी पूरी तरह भीग गई। उसके बड़े-बड़े गोल स्तन और कसी हुई चूत की लकीर साफ नजर आने लगी।
बाबा ने दोनों को बैठने का इशारा किया और मंत्र पढ़ते हुए उन पर रोली-चावल छिड़कने लगे। मैत्री की प्रस्तुति।
थोड़ी देर बाद बाबा ने भारी आवाज में कहा, “तुम दोनों की समस्या का समाधान केवल भगवान *** के पास है। अगर वे प्रसन्न हो गए तो सब ठीक हो जाएगा। लेकिन उन्हें बिना किसी छिछक के, पूरी तरह नंगे होकर प्रसन्न करना होगा।”
अंजली ने शरमाते हुए, लेकिन उत्सुकता से पूछा, “भगवान *** हमें कहाँ मिलेंगे बाबाजी?”
बाबा ने गहरी, मादक आवाज में जवाब दिया, “तुम दोनों अपने सारे वस्त्र उतारकर ये पीले कपड़े पहन लो। फिर हम *** भगवान का आवाहन करेंगे। वे हमारे शरीर में प्रवेश करेंगे और तुम्हारी हर समस्या का समाधान करेंगे। तैयार हो?”
दोनों औरतें एक साथ बोलीं, “हाँ बाबाजी… हम पूरी तरह तैयार हैं।”
अब बाबा की जुबानी:
मैंने दोनों को पूरी तरह अपने वश में कर लिया था। अब वे मेरी हर बात बिना सवाल किए मान रही थीं।
मैंने गुरु वाली भारी आवाज में कहा, “यहीं कपड़े बदलो। पूजा स्थान छोड़ना अशुभ है।”
दोनों ने हिचकिचाते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए। लहंगा-चोली, ब्रा, पैंटी - सब फर्श पर गिर गए। अब दोनों पूरी तरह नंगी थीं।
जब उन्होंने पीली साड़ी उठाई तो दोनों चौंक गईं - सिर्फ एक ही साड़ी थी।
मैंने उसे बीच से फाड़कर दो टुकड़े कर दिए और बोला, “लो, अब दो हो गईं। सिर्फ इन्हीं छोटे टुकड़ों को पहनना है।”
दोनों ने जल्दी-जल्दी साड़ी के छोटे टुकड़े अपने शरीर पर लपेट लिए। लेकिन टुकड़े इतने छोटे थे कि उनके भरे-भरे स्तन लगभग पूरी तरह खुले हुए थे। सिर्फ निप्पल ही मुश्किल से ढके थे।
मेरे सामने अब दो जोड़ी जवान, भरी हुई, उभरी हुई चूचियाँ थीं - एक अंजली की साँवली और गोल, दूसरी काजल की गोरी और बड़े साइज की। मेरे लंड में तुरंत खलबली मच गई। धोती के अंदर मेरा मोटा लंड फड़क उठा। मैत्री रचित कहानी।
मैंने आँखें बंद कीं, जोर-जोर से मंत्र पढ़े, अग्नि में आहुति दी और जानबूझकर शरीर को हिलाने लगा। 10-15 मिनट बाद मैंने गुरु वाली भारी, गंभीर आवाज में कहा:
“क्यों परेशान किया हमें?”
फिर हल्की, कोमल आवाज में बोला, “प्रभु, ये दोनों बालिकाएँ बहुत कष्ट में हैं। इनका उद्धार कीजिए।”
भारी आवाज में फिर गुर्राया, “ठीक है… इनको परीक्षा देनी होगी। दोनों को एक-एक करके **** पर जल और दूध चढ़ाना होगा, फिर लिंग पान करना होगा और अंत में नारी की तरह हमें भोगना होगा।”
काजल ने संकोच और डर से पूछा, “यहाँ **** कहाँ है बाबाजी?”
तभी मैंने धोती थोड़ी सरकाई। मेरा 9.5 इंच लंबा, मोटा और पूरी तरह खड़ा लंड बाहर निकल आया। उसका सिरा पहले से ही चमक रहा था।
अंजली ने तुरंत उत्तेजित होकर कहा, “भाभी देखो… *** हमारे सामने हैं! वो रहा ****!” उसने मेरे लोडे की तरफ इशारा करते हुए कहा।
दोनों डरते-डरते लेकिन भक्ति दिखाते हुए पूरी तरह नंगी हो गईं। अब उनके स्तन, चूत और गांड बिना किसी कपड़े के मेरे सामने थे।
पहले अंजली आगे आई। उसने मेरे लंड को पानी से धोया, फिर अपनी दोनों चूचियों को जोर से दबाकर “दूध” चढ़ाया। उसके निप्पल से हल्का दूधिया रस मेरे लंड पर टपका। फिर उसने झुककर मेरा लंड मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी।
“म्म्म… लिंग कितना गर्म और मोटा है…” अंजली फुसफुसाई। रचयिता मैत्री पटेल।
फिर काजल ने भी वैसा ही किया। उसने मेरे लंड को पानी से धोया, अपनी बड़ी चूचियों से दूध चढ़ाया और फिर शर्माते हुए मुँह में लेकर चूसने लगी।
अब बारी चुदाई की थी।
अंजली ने अपनी चूत पर ढेर सारा घी लगाया, मेरे दोनों तरफ टाँगें फैलाकर मेरे लंड पर बैठने लगी। काफी कोशिश के बाद भी वह सिर्फ 7 इंच ही अंदर ले पाई। दर्द से उसकी सिसकारियाँ निकल रही थीं - “आह्ह्ह… बाबा… बहुत मोटा है… फट रही है मेरी चूत…”
लेकिन वह हार नहीं मानी। धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। जब वह झड़ गई तो उसकी साँसें फूल रही थीं। उसने काजल को इशारा किया, “भाभी… अब तुम…”
वैसे तो दोनों कुँवारी ही थी पर काजल कुंवारी थी। उसने बहुत कोशिश की, लेकिन मेरा मोटा लंड उसकी टाइट चूत में एक इंच भी नहीं घुस पा रहा था। बार-बार फिसल जाता था।
अंत में मैंने “भगवान” वाली भारी आवाज में कहा, “बालिके, तुम्हारी लगन और भक्ति से हम बहुत प्रसन्न हैं। अब हम तुम्हें भोगेंगे।”
मैंने काजल को प्यार से जमीन पर लिटाया, उसके एक भरे हुए स्तन को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरी तरफ अंगुलियों पर घी लगाकर उसकी टाइट चूत पर धीरे-धीरे फेरने लगा।
काजल के मुँह से मीठी सिसकारी निकली, “आह्ह्ह… बाबा… ये गलत हो रहा है…”
मैंने गुरु वाली आवाज में गुर्राकर कहा, “जो हमने दिया है, उसे हमको अर्पण करने में क्या गलत है बालिके?”
अंजली ने तुरंत साथ दिया, “कुछ गलत नहीं है भाभी… सब तो भगवान का है। आप चुपचाप भोग दीजिए…”
मैंने काजल की चूत में दो अंगुलियाँ धीरे-धीरे अंदर डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा। काजल की सिसकारियाँ बढ़ती गईं…
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जुड़े रहिये दोस्तों.
मैत्री.
बाबा ने दोनों को बैठने का इशारा किया और मंत्र पढ़ते हुए उन पर रोली-चावल छिड़कने लगे। मैत्री की प्रस्तुति।
थोड़ी देर बाद बाबा ने भारी आवाज में कहा, “तुम दोनों की समस्या का समाधान केवल भगवान *** के पास है। अगर वे प्रसन्न हो गए तो सब ठीक हो जाएगा। लेकिन उन्हें बिना किसी छिछक के, पूरी तरह नंगे होकर प्रसन्न करना होगा।”
अंजली ने शरमाते हुए, लेकिन उत्सुकता से पूछा, “भगवान *** हमें कहाँ मिलेंगे बाबाजी?”
बाबा ने गहरी, मादक आवाज में जवाब दिया, “तुम दोनों अपने सारे वस्त्र उतारकर ये पीले कपड़े पहन लो। फिर हम *** भगवान का आवाहन करेंगे। वे हमारे शरीर में प्रवेश करेंगे और तुम्हारी हर समस्या का समाधान करेंगे। तैयार हो?”
दोनों औरतें एक साथ बोलीं, “हाँ बाबाजी… हम पूरी तरह तैयार हैं।”
अब बाबा की जुबानी:
मैंने दोनों को पूरी तरह अपने वश में कर लिया था। अब वे मेरी हर बात बिना सवाल किए मान रही थीं।
मैंने गुरु वाली भारी आवाज में कहा, “यहीं कपड़े बदलो। पूजा स्थान छोड़ना अशुभ है।”
दोनों ने हिचकिचाते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए। लहंगा-चोली, ब्रा, पैंटी - सब फर्श पर गिर गए। अब दोनों पूरी तरह नंगी थीं।
जब उन्होंने पीली साड़ी उठाई तो दोनों चौंक गईं - सिर्फ एक ही साड़ी थी।
मैंने उसे बीच से फाड़कर दो टुकड़े कर दिए और बोला, “लो, अब दो हो गईं। सिर्फ इन्हीं छोटे टुकड़ों को पहनना है।”
दोनों ने जल्दी-जल्दी साड़ी के छोटे टुकड़े अपने शरीर पर लपेट लिए। लेकिन टुकड़े इतने छोटे थे कि उनके भरे-भरे स्तन लगभग पूरी तरह खुले हुए थे। सिर्फ निप्पल ही मुश्किल से ढके थे।
मेरे सामने अब दो जोड़ी जवान, भरी हुई, उभरी हुई चूचियाँ थीं - एक अंजली की साँवली और गोल, दूसरी काजल की गोरी और बड़े साइज की। मेरे लंड में तुरंत खलबली मच गई। धोती के अंदर मेरा मोटा लंड फड़क उठा। मैत्री रचित कहानी।
मैंने आँखें बंद कीं, जोर-जोर से मंत्र पढ़े, अग्नि में आहुति दी और जानबूझकर शरीर को हिलाने लगा। 10-15 मिनट बाद मैंने गुरु वाली भारी, गंभीर आवाज में कहा:
“क्यों परेशान किया हमें?”
फिर हल्की, कोमल आवाज में बोला, “प्रभु, ये दोनों बालिकाएँ बहुत कष्ट में हैं। इनका उद्धार कीजिए।”
भारी आवाज में फिर गुर्राया, “ठीक है… इनको परीक्षा देनी होगी। दोनों को एक-एक करके **** पर जल और दूध चढ़ाना होगा, फिर लिंग पान करना होगा और अंत में नारी की तरह हमें भोगना होगा।”
काजल ने संकोच और डर से पूछा, “यहाँ **** कहाँ है बाबाजी?”
तभी मैंने धोती थोड़ी सरकाई। मेरा 9.5 इंच लंबा, मोटा और पूरी तरह खड़ा लंड बाहर निकल आया। उसका सिरा पहले से ही चमक रहा था।
अंजली ने तुरंत उत्तेजित होकर कहा, “भाभी देखो… *** हमारे सामने हैं! वो रहा ****!” उसने मेरे लोडे की तरफ इशारा करते हुए कहा।
दोनों डरते-डरते लेकिन भक्ति दिखाते हुए पूरी तरह नंगी हो गईं। अब उनके स्तन, चूत और गांड बिना किसी कपड़े के मेरे सामने थे।
पहले अंजली आगे आई। उसने मेरे लंड को पानी से धोया, फिर अपनी दोनों चूचियों को जोर से दबाकर “दूध” चढ़ाया। उसके निप्पल से हल्का दूधिया रस मेरे लंड पर टपका। फिर उसने झुककर मेरा लंड मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी।
“म्म्म… लिंग कितना गर्म और मोटा है…” अंजली फुसफुसाई। रचयिता मैत्री पटेल।
फिर काजल ने भी वैसा ही किया। उसने मेरे लंड को पानी से धोया, अपनी बड़ी चूचियों से दूध चढ़ाया और फिर शर्माते हुए मुँह में लेकर चूसने लगी।
अब बारी चुदाई की थी।
अंजली ने अपनी चूत पर ढेर सारा घी लगाया, मेरे दोनों तरफ टाँगें फैलाकर मेरे लंड पर बैठने लगी। काफी कोशिश के बाद भी वह सिर्फ 7 इंच ही अंदर ले पाई। दर्द से उसकी सिसकारियाँ निकल रही थीं - “आह्ह्ह… बाबा… बहुत मोटा है… फट रही है मेरी चूत…”
लेकिन वह हार नहीं मानी। धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। जब वह झड़ गई तो उसकी साँसें फूल रही थीं। उसने काजल को इशारा किया, “भाभी… अब तुम…”
वैसे तो दोनों कुँवारी ही थी पर काजल कुंवारी थी। उसने बहुत कोशिश की, लेकिन मेरा मोटा लंड उसकी टाइट चूत में एक इंच भी नहीं घुस पा रहा था। बार-बार फिसल जाता था।
अंत में मैंने “भगवान” वाली भारी आवाज में कहा, “बालिके, तुम्हारी लगन और भक्ति से हम बहुत प्रसन्न हैं। अब हम तुम्हें भोगेंगे।”
मैंने काजल को प्यार से जमीन पर लिटाया, उसके एक भरे हुए स्तन को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरी तरफ अंगुलियों पर घी लगाकर उसकी टाइट चूत पर धीरे-धीरे फेरने लगा।
काजल के मुँह से मीठी सिसकारी निकली, “आह्ह्ह… बाबा… ये गलत हो रहा है…”
मैंने गुरु वाली आवाज में गुर्राकर कहा, “जो हमने दिया है, उसे हमको अर्पण करने में क्या गलत है बालिके?”
अंजली ने तुरंत साथ दिया, “कुछ गलत नहीं है भाभी… सब तो भगवान का है। आप चुपचाप भोग दीजिए…”
मैंने काजल की चूत में दो अंगुलियाँ धीरे-धीरे अंदर डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा। काजल की सिसकारियाँ बढ़ती गईं…
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जुड़े रहिये दोस्तों.
मैत्री.



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